टाइगर की प्रेम कहानी : मजनूं से जा मिली लैला, मुकंदरा वन प्रशासन चिरनिंद्रा में सोया, MT-2शावक लापता

4 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 06 अगस्त 2020 | जयपुर-मुकंदरा हिल : मुकुंदरा में बाघिन का शव मिलने के बाद प्यार खो चुके दो बाघों (लैला-मजनूं) की दुखद प्रेम कहानी का अंत हो गया, जिसका खुलासा 4 अगस्त 2020 को हुआ । एमटी 2 वही बाघिन है जिसके लिए टाइगर एमटी 3 ने रणथंभौर से मुकुंदरा तक यात्रा की थी। बाघ को 10 दिन पहले 23 जुलाई को मृत पाया गया था। बाघ अपने साथी MT2 की तलाश में रणथंभौर से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व तक तीन जिलों की भौगोलिक सीमाओं को पर करके अपनी प्रेमिका से मिलने चला गया था। गुरुवार को रहस्यमय परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। टाइगर मजनूं के प्यार में दीवानी थी लैला ! लैला-मजनूं टाइगर्स की ऐसे शुरू हुई थी इन दोनों की लवस्टोरी जो हर किसी के दिल पर छा गयी। सब ने अभी तक हीर-राँझा, नल-दमयंती, रतनसेन-पद्मावती, लैला-मजनूं, टाइगर जिन्दा है फिल्म में सलमान-खान और कटरीना कैफ जैसी अनेकों प्रेम कहानियाँ पढ़ी-सुनी होंगी। पर क्या आपने कभी पढ़ा-सुना है कि टाइगर्स की प्रेम-कहानी लैला-मजनूं से कम नहीं है। रणथंभौर (Ranthambhore) की फेमस T39 नूर (Noor) की बेटी और T107 सुल्ताना की बहिन टाईगर T-106 बाघिन को 18 दिसंबर 2018 को रणथंभौर से मुकुंदरा (MHTR) शिफ्ट किया गया था। जहाँ इसका नाम एमटी2 (MT2) रखा गया था, जिसने अभी हाल ही में कोरोना संकट के दौरान 2 जून 2020 में दो शावकों को भी जन्म दिया था। पहले एमटी3 की मौत और अब एमटी2 की मौत मुकुंदरा टाइगर्स रिजर्व के लिए बुरी खबर है और इससे टाइगर संरक्षण व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े होना लाजिमी है। राष्ट्रीय टाइगर प्रोजेक्ट रणथम्भौर में टाइगर्स की गिनती वन्यजीवों की गिनती पर कई यक्ष प्रश्न उठाती है। गिनती के मापदंड वैज्ञानिक कतई नहीं है और केंद्र सरकार और वन मंत्रालय चिरनिंद्रा में सोये हुए हैं। इनकी तंद्रा कब टूटेगी, कोई नहीं जानता है। सूत्रों से मिली ख़बरों के अनुसार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परियोजना हर साल 2400 करोड़ का राजस्व देती है, जो सभी बघा परियोजनाओं से मिलनेवाली सर्वाधिक धनराशि है। वहीं वन्यजीवों का संरक्षण राम भरोसे ही कहा जा सकता है। मजनूं से जा मिली लैला उल्लेखनीय है गत 23 जुलाई को मौत का शिकार हुआ बाघ एमटी-3 और एमटी-2 की कमेस्ट्री बेहद अच्छी थी। बताया जा रहा है कि एमटी-3 बाघ अपनी प्रेमिका एमटी-2 की तलाश में सभी बंधन पार करके सैंकड़ों किलोमीटर दूर रणथंभौर से मुकुंदरा तक पहुँच गया था। बाद में वह यहीं का होकर रह गया था। इस अद्भुत प्रेम कहानी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बन चुकी है जिसको कई अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड्स मिल चुके हैं। लेकिन वन विभाग ने उनको मिलने नहीं दिया। एमटी-3 ने 10 दिन पहले एमटी-2 के पिंजरे के बाहर दम तोड़ दिया था और अब एमटी-2 भी इस दुनिया को अलविदा कह गयी। राजस्थान प्रदेश के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (Mukundara Hills Tiger Reserve) से फिर बुरी खबर है। हाल ही में दो शावकों के जन्म की खुशखबरी देने वाली बाघिन एमटी-2 की आज सोमवार को अचानक मौत (Death) हो गयी। इससे बाघ प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गयी है। बाघिन की मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। करीब 10 दिन पहले ही इस टाइगर रिजर्व में बाघ एमटी-3 की मौत हो गयी थी। बाघिनचार दिन से लापता थी और वन विभाग चिरनिंद्रा में बाघिन एमटी-2 की मौत की खबर सन्न करने वाली है। इस मामले में बड़ा सवालिया निशान मुकुंदरा हिल्स के स्थानीय स्टाफ पर भी लग रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिन से बाघिन नज़र नहीं आ रही थी और उसकी लोकेशन भी एक ही जगह आ रही थी। ऐसे में बाघिन को खोजने के लिए कोई प्रयास नहीं किये गये। हो सकता है बाघिन की मौत हुए 2 से 3 दिन हो गये हो, क्योंकि मुकुंदरा प्रशासन अभी भी पूरे मामले की सही जानकारी नहीं दे रहा है मुकुंदरा वन प्रशासन बाघिन की मौत की जानकारी को क्यों छिपा रहा है मुकुंदरा प्रशासन जानकारियां छिपाने में पहले भी बदनाम रहा है। एमटी-3 की मौत के वक्त भी मुकुंदरा प्रशासन ने पूरे मामले में अपनी गलतियों को छुपाने के लिए पर्दा डाल दिया था। अभी भी पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। इससे मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर काफी नाराज हैं। वे खुद आज सुबह ही जयपुर से मुकुंदरा के लिए रवाना हो चुके हैं। जबकि एक टीम दिल्ली से नेशनल टाइगर अथॉरिटी की भी आ रही है। वह मौके पर पूरे मामले की तफ्तीश करेगी। बाघिन का एक शावक अभी लापता है पिछले दिनों बाघिन के दोनों शावक लापता हो गये थे। उनमें से एक तो मिल गया है, लेकिन दूसरे का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। उसकी तलाश जारी है। वन विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही दूसरे शावक का भी मूवमेंट मिल जायेगा। करीब 10 दिन पहले गत 23 जुलाई को ही यहाँ बाघ एमटी-3 की मौत हुई थी। उसकी मौत का कारण फेफड़ों में संक्रमण बताया गया था। किंतु मुकंदरा टाइगर प्रोजेक्ट (MHTR) के सूत्रों ने मूकनायक मीडिया को बताया कि तथ्यों को छुपाया जा रहा है और इसमें वन विभाग के स्तर पर सच्चाई कुछ और है। अगर मामले की व्यापक जाँच होगी तो चौंकाने वाले अनेक तथ्य बाहर आयेंगे।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This