दलित इश्यू : बच्ची ने ऊँचीजाति के बगीचे से फूल तोड़ा,दबंगों का गाँवके सभी 40दलित परिवारों का बहिष्कार

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 20 अगस्त 2020 | जयपुर-ढेनकनाल : ओडिशा के ढेनकनाल जिले के कांटियो केटनी गाँव के सभी 40 दलित परिवारों का दो हफ्ते से बहिष्कार कर रखा है। तथाकथित ऊँची जाति के लोगों के बगीचे से एक दलित बच्ची ने दो महीने पहले फूल तोड़ लिये थे। इससे नाराज दबंगों ने गाँव के सभी 40 दलित परिवारों का दो हफ्ते से बहिष्कार कर रखा है। 15 साल की बच्ची की हरकत पर ऊँची जाति के लोगों के व्यवहार पर जब दलित समुदाय के एक परिवार ने जब आपत्ति जताई तो दोनों समुदायों के बीच तनाव और टकराव बढ़ गया। अंतत: 40 दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। आरोपी लड़की के पिता निरंजन नायक ने कहा, “हमने तुरंत माफी माँग ली थी ताकि मामले को सुलझाया जा सके, लेकिन उसके बाद कई बैठकें बुलायी गयीं और उन्होंने हमारा बहिष्कार करने का फैसला किया। किसी को हमसे बात करने की अनुमति नहीं है; हमें गाँव के किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति नहीं है।” इस गाँव में करीब 800 परिवार रहते हैं। इनमें से 40 दलित परिवार भी हैं जो नायक बिरादरी के हैं। इस मामले में दलितों ने जिला प्रशासन और स्थानीय थाने को 17 अगस्त को ही ज्ञापन सौंपा है। अक्सर कह दिया जाता है कि दलितों द्वारा झूठे मुकदमों में एससी-एसटी एक्ट में फंसा दिया जाता है। पर, वास्तविकता कुछ और है कि दलित-आदिवासियों के सही मुकदमें भी दर्ज नहीं किये जाते हैं। ज्योति नायक एक ग्रामीण ने बताया कि सार्वजनिक प्रणाली की दुकानों से उन्हें राशन तक नहीं दिया जा रहा है। किराने वाले भी उन्हें सामान नहीं दे रहे हैं। इस वजह से गाँव के लोग पाँच किलोमीटर दूर जाकर दूसरे गाँव से राशन खरीद कर ला रहे हैं। बतौर ज्योति गाँव वाले उनलोगों से बात भी नहीं कर रहे। प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है, “गाँव में हमें काम देने से वंचित किया गया है, इसलिए हमें काम की तलाश में दूसरे गाँव की तरफ बढ़ना होगा।” ज्ञापन में कहा गया है, “हमारे अधिकांश लोग अर्ध-साक्षर और अनपढ़ हैं और ग्रामीणों के खेतों में काम करते हैं।” समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें चेतावनी दी गयी है कि गाँव की सड़क पर शादियों या अंतिम संस्कार के लिए भी लोग जमा न हों। इसके अलावा एक फरमान जारी किया गया है कि दलित समुदाय के बच्चे सरकारी स्कूल में भी नहीं पढ़ सकते। ज्ञापन में कहा गया है कि ऊँची जाति के लोगों ने दलित समुदाय के शिक्षकों को भी कहा है कि वो अपना तबादला कहीं और करवा लें। ग्राम विकास समिति के सचिव हरमोहन मल्लिक ने कहा, “यह सच है कि लोगों को उनसे बात नहीं करने के लिए कहा गया था, और यह उनके गलत कामों के कारण है। लेकिन अन्य आरोप बेबुनियाद हैं। ” सरपंच प्राणबंधु दास ने कहा, यह दो समुदायों के बीच का मसला है और हम इसे जल्द सुलझा लेंगे।

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