ओह! अब रेल भी अपनी नहीं रहेगी! मोदीजी बेच डालो ! सबको बेच डालो !!

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‘दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क जो लगभग 13,000 ट्रेनों में चलता है, रेलवे लगभग 16 लाख लोगों को नौकरी और करीब 9लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है’ भारतीय रेलवे निजीकरण की ओर, देश में 109 जोड़ी रूटों पर दौड़ेंगी 151 निजी यात्री ट्रेनें मूकनायक मीडिया ब्यूरो / दिल्ली-जयपुर : जब मैं प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था तो हमारे एक गुरूजी ने कहा था कि जापान चाहता है कि भारत सरकार उसे बिहार बेच दें अर्थात बिहार के संसाधन उसे दे दें वह कुछ भी कीमत देने को तैयार है। फिर हमने सुना कि उद्योगपति टाटा अपनी सारी संपत्ति देकर रेल खरीदना चाहता था। पर तब देश के हुक्मरानों ने ना बिहार के संसाधन बेचे और ना ही टाटा को रेल बेची। अब खुद को चाय बेचने वाले बताने वाले मोदीजी रेल का सौदा कर रहे हैं और अगले एक महीन में इसको अंतिम रूप दिया जा सकता है। वस्तुतः यह रेलवे का सौदा नहीं बल्कि संविधान का सौदा है जो आरक्षित वर्ग के लोगों को रेलवे की नौकरियों से बाहर निकालने की कवायद है, जैसे कुछ दिन पूर्व बीएसएनएल के कर्मियों को आगामी पांच साल की तनखा का भुगतान करके निकला था। पहली बार केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेन चलाने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। रेल मंत्रालय ने 109 जोड़ी रूटों पर 151 आधुनिक ट्रेनों के जरिये यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से आवेदन मांगा है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र का निवेश 30 हजार करोड़ रुपये का होगा। पिछले साल आइआरसीटीसी ने पहली निजी ट्रेन लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस शुरू की थी। रेलवे के मुताबिक, इस कदम के पीछे मकसद भारतीय रेल में रखरखाव की कम लागत, कम ट्रांजिट टाइम के साथ नई तकनीक का विकास करना है और नौकरियों के अवसर बढ़ाना, बेहतर सुरक्षा और विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव कराना है। हर ट्रेन में कम से कम 16 कोच होंगे, अधिकतम रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा होगी भारतीय रेल नेटवर्क पर 109 जोड़ी रूट 12 क्लस्टर्स में होंगे। हर ट्रेन में कम से कम 16 कोच होंगे। इन रूटों पर चलने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। रेलवे ने यह भी कहा है कि इन आधुनिक ट्रेनों में से अधिकांश को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही बनाया जाएगा। ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की ही होगी वित्तीय व्यवस्था, अधिग्रहण, संचालन और ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की ही होगी। रेलवे ने कहा है कि वह 35 साल के लिए ये परियोजनाएँ निजी कंपनियों को देगा। फ़िलहाल लोगों की आँखों में धूल झोंकने के लिए सभी ट्रेनों में ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के होंगे निजी कंपनी को भारतीय रेलवे को फिक्स्ड हौलेज चार्ज, खपत के हिसाब से एनर्जी चार्ज और पारदर्शी बिडिंग प्रक्रिया से तय किया गया राजस्व का एक हिस्सा देना होगा। इन सभी ट्रेनों में ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के होंगे। पर बीएसएनएल के कर्मचारियों और अधिकारियों की तरह उन्हें कब चुपके से निकल दिया जायेगा किसी को पता भी नहीं लगेगा। रेलवे में निजीकरण को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर वार, ‘जनता इसका करारा जवाब देगी’ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज रेलवे के निजीकरण के अपने पहले कदम पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सुझाव दिया कि जनता इस कदम के लिए उसे माफ नहीं करेगी। सरकार ने आज रेल गाड़ियों के निजीकरण का पहला कदम उठाया है, जिसमें निजी कंपनियों से यात्री ट्रेन चलाने के प्रस्ताव आमंत्रित किये गये हैं। ‘दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क जो लगभग 13,000 ट्रेनों में चलता है, रेलवे लगभग 16 लाख लोगों को नौकरी और करीब 9लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है’ मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, निजी फर्म रेलगाड़ियों को 35 वर्षों तक चला सकती हैं। रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस प्रस्ताव में 109 मार्गों पर 151 ट्रेनें चलाने की योजना है, जो 30,000 करोड़ रुपये के निजी निवेश की मांग करेगी। यात्री सेवाओं का एक हिस्सा सब्सिडी पर चलता है जो कि इन वर्षों में बड़े नुकसान की वजह बना और जिसे मंत्रालय को पुन: प्राप्त करने में असमर्थ रहा है। राहुल गाँधी ने केंद्र सरकार के इस कदम पर ट्वीट कर लिखा, ‘रेल गरीबों की एकमात्र जीवनरेखा है और सरकार उनसे ये भी छीन रही है। जो छीनना है, छीनिए, लेकिन याद रहे, देश की जनता इसका करारा जवाब देगी।’ रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों को चलाने के लिए निजी निवेश की यह पहली पहल है “इसका उद्देश्य, “कम रखरखाव के साथ आधुनिक प्रौद्योगिकी रोलिंग स्टॉक शुरू करें, कम पारगमन समय, नौकरी सृजन को बढ़ावा देना, बेहतर सुरक्षा प्रदान करना, यात्रियों को विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करना, और यात्री परिवहन क्षेत्र में माँग की आपूर्ति की कमी को भी कम करना है।” वैसे हम सब कोरोना संकट में प्राइवेट संस्थानों और अस्पतालों की क्वालिटी का हाल देख चुकें हैं!

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