रेलवे का निजीकरण, संवैधानिक आरक्षण पर, आरएसएस-मोदी स्ट्राइक

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‘नई भर्तियों पर रोक, 50% पद ख़त्म, एससीएसटीओबीसी के युवाओं के हितों पर कुठाराघात और अब सरकारी पटरियों पर दौड़ेगी प्राइवेट ट्रेन’ मूकनायक मीडिया / प्रोफ़ेसर राम लखन : बुजुर्गों का तजुर्बा है निकम्मी औलादें पूर्वजों की विरासतों, जमीन-जायदाद को बेचकर अपने शोक पूरे करती है। यह फार्मूला मोदीसरकार पर हु-ब-हु फिट बैठता है। आरएसएस लगभग दशकों से एससी, एसटी और ओबीसी के संवैधानिक आरक्षण पर आँखें तरेर रहा था और जैसे ही बहुजनों ने आरएसएस के बहकावे में आकर 2019में बंपर वोटिंग की और उसने अपने करतब दिखाने में तनिक भी देर नहीं की। रेलवे का निजीकरण करना दर्शाता है कि देश की सरकार में सरकारी तंत्रों को चलाने की ताकत और इच्छाशक्ति नहीं रही है। बहुजनों के वोट ने आरएसएस और मोदीजी दोनों को ही भस्मासुर बना दिया है। कोरोना वारियर्स के सम्मान में रेलवे का हुआ निजीकरण, नई भर्तियों पर रोक, 50% पद ख़त्म और सरकारी पटरियों पर दौड़ेगी प्राइवेट ट्रेन निजीकरण का खतरनाक खैल शुरू हो चुका है। कोरोना संकट से आर्थिक मंदी की आड़ में सबकुछ कॉरपोरेट की चौखट पर स्वाहा करने के मोदीसरकार खतरनाक इरादे सामने आ रहे है। अब भी नहीं चेते तो इस देश के पढ़े-लिखे बहुजन नौजवान जो सरकारी जॉब के सपने पाल रहे हैं, वे कॉरपोरेट की चौखट पर झाड़ू-पोछा लगाने के लायक भी नहीं बचेंगे। ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय मेंआईएएस से लेकर अर्दली तक के पदों पर भर्ती प्राइवेट सेक्टर ही करेगा और इसको बेहतर ढंग से समझने-समझाने के लिए पूर्व यूजीसी चेयरमैन प्रोफ़ेसर सुखदेव थोरात द्वारा की गयी रिसर्च का सार ‘व्हाई रिजर्वेशन इज नेसेसरी’ महरबानी करके जरुर पढ़ लीजिएगा। वैसे बहुजनों में रीडिंग हैबिट की वैसी भी कंजूसी है। यह भी पढ़ें : ओह! अब रेल भी अपनी नहीं रहेगी! मोदीजी बेच डालो ! सबको बेच डालो भारत सरकार के बहुत लाभप्रद रैलवे सेक्टर की इस प्रकार दुर्गति की जा सकती है, उसे बेचा जा सकता है तो फिर अन्य उपक्रम तो बचेंगे ही नहीं। कहने को कोरोना संकट का बहाना है लेकिन रैलवे पर तो इस संकट से पहले ही संकट के बादल मंडराने लगे थे। जब सारे प्राइवेट सेक्टर का भट्ठा बैठा हुआ है तो फिर सरकारी उपकर्मों का उद्धार ये कैसे कर पायँगे? समझना है तो ये समझें कि सरकार को निजी क्षेत्र से बेइंतहा मोहबत क्यों है? राजस्थानके मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत ने 109 रेल मार्गों पर ट्रेन चलाने के लिए निजी कंपनियों को अनुमति दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को जनविरोधी करार दिया है। गहलोत ने बृहस्पतिवार को ट्वीट किया, ‘‘रेलवे के निजीकरण का फैसला देश की आम जनता के खिलाफ है।’’ मुख्यमंत्री ने इस बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ट्वीट को साझा करते हुए लिखा, ‘‘जैसा राहुल गांधी ने कहा कि रेल जीवनरेखा है और इस सेवा का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि रेलवे का भी निजीकरण होने जा रहा है दुर्भाग्यपूर्ण है। कितनी मुश्किलों का सामना करके देश की सम्पत्ति बनती है और किसी निजी लोगो के हाथों में देना कितना दुख होता है जिस तरह से अपने घर में बनाए समान को कोई और दूसरा ले जाए।मगर इतनी बात सरकार क्यों नहीं समझती है हमारी समझ के परे है। क्रोनोलॉजी समझिए पहले आरएसएस के दबाव में मोदी सरकार ने रेलवे का बजट कम किया। फिर रेलवे पर घाटे का इल्ज़ाम लगाएगी और इस प्रकार निजीकरण करके अपने “मितरों” को फायदा पहुँचाने का बहाना ढूंढा। रेलवे की सभी भर्तियों पर रोक के लिए 50%पदों को खत्म करने का काला कानून लाये। निजीकरण के मोह में फँसे लोगों द्वारा बहुजन-पीढ़ियों के साथ घोर अन्याय किया जा रहा है जो रोजगार की तलाश में जुटे युवा बेरोजगारों के साथ क्रूर मजाक है । बहुजन लोगों के दिलो-दिमाग में प्राइवेट प्रॉफिट और नेशनलाइज लॉस का वायरस घुसाने के सिद्धांत पर चलने वाली मोदी सरकार “आपदा को एक और अवसर” बनाते हुए 151 ट्रेनें पूंजीपतियों के हाथ सौंपने जा रही है! एलआईसी, बीएसएनएल, सेल, भेल, पेट्रोलियम कंपनियों जैसी कई सरकारी कंपनियाँ जो फायदे में थी और देश को ढेर सारा लाभांश देती थी, उसको विधिवत ढंग से नुकसान में धकेलने का बहाना किया गया। फिर बेचा जा रहा है। यह भी पढ़ें : अप्रैल 2023 से शुरू हो सकता है निजी रेल परिचालन, प्रतिस्पर्धी होगा किराया: रेलवे बोर्ड चेयरमैन सरकारी कंपनी मतलब आपकी और हमारी कंपनी, देश की संपत्ति, किसी एक सरकार की नहीं। लेकिन देश के इन संसाधनों को बेचकर अंततः उन्हें फायदा पहुँचाया जाता है अपना राजपाट कायम रखने के लिए जिनके पैसों से ये लोग प्रोपैगेंडा चलाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं । वैसे इस फैसले का अंदेशा हमें पहले से ही था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार बनारस की सभा में सफाई दी थी कि रेलवे में निजीकरण की खबरें सिर्फ अफ़वाह हैं। किंतु, मोदीजी के बारे में अक्षय कुमार की फिल्म फिल्म ‘राउडी राठौर’ में अक्षय कुमार द्वारा बोला गया डायलॉग ‘मैं जो बोलता हूँ, वो करता हूँ और जो नहीं बोलता वो डेफिनेटली करता हूँ’ का डायलॉग पूरी तरह फिट बैठता है। बनारस में काशीविश्व नाथ की धरती से झूठ बोला और उसके बाद तेजस और वंदे भारत जैसी ट्रेनें चलायी गयी, वो भी उन मार्गों पर जिनमें प्रॉफिट की संभावना ज्यादा थी। और अब आयी है ये बड़ी घोषणा.. बिल्कुल कोरोना काल में, आत्मनिर्भरता के बड़े-बड़े जुमलों के बीच। दिक्कत तो ये है कि अगर इन 151 निजी ट्रेनों का नाम “आत्मनिर्भर एक्सप्रेस” रखवा दिया जाए तो दरबारी पत्रकार इसमें भी “वाह! मोदी जी, वाह” करने लगेंगे। और आपको समझा भी देंगे कि कैसे इस कदम से हमारा देश आत्मनिर्भर बन रहा है। असल में गोएबल्स के चेलों की तो कोई सीमा ही नहीं है, झूठ प्रपंच और फ़र्ज़ीफिकेशन की । रेलवे का निजीकरण, आरक्षण खत्म करने जैसा ही है क्योंकि निजीकरण में आरक्षण नहीं चलेगा और एसएसटीओबीसी के शिक्षित युवा आरक्षण का लाभ रेलवे में ना ले सकेंगे । संवैधानिक आरक्षण सरकारी सेवाओं के पदों को समाप्त करके ही निस्तेज किया जायेगा। रेलवे का निजीकरण इसी दिशा में आरएसएस, बीजेपी और मोदी-शाह की सोची-समझी साजिशों में से एक है ।

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