राजस्थान में आरक्षण के दोहरे मापदंड क्यों? ऑपन केटेगरी और ओबीसी की कट ऑफ बराबर कैसे हो सकती है ?

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 10 जुलाई 2020 | जयपुर-अजमेर : राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवायें संयुक्त प्रतियोगी (मुख्य) परीक्षा-2018 के परिणाम में सामान्य और ओबीसी के कट ऑफ मार्क्स बराबर रहे हैं। आयोग ने टीएसपी में 57 और नॉन टीएसपी में 1053 अभ्यर्थियों को अस्थाई रूप से उत्तीर्ण किया है। सामान्य और ओबीसी के कट ऑफ मार्क्स 344 बराबर हैं। प्रश्न यह है कि ओबीसी और ऑपन कैटेगरी को एक समान 344 अंक पर रखकर परिणाम कैसे जारी किये गये है? इसका सीधा सा अर्थ यह है कि आरक्षण की सीमा 50फीसद है, शेष 50 फीसद में ऑपन मेरिट को रखा गया था। कालांतर में इस ऑपन स्पेस को सामान्य मान लिया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। किंतु, उससे भी बड़ा सवाल यह है कि जनसँख्या में 52 ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिया गया था तो विशेषज्ञों और कानून-विदों ने कहा कि 50प्रतिशत स्पेस सबकी मेरिट का है। फिर, ऑपन केटेगरी और ओबीसी की कट ऑफ़ 344 अंक कैसे रह सकती है? ऑपन केटेगरी और ओबीसी की कट ऑफ बराबर कैसे हो सकती है ? आरएएस मुख्य परीक्षा-2018 के तहत सामान्य और ओबीसी वर्ग की कट ऑफ बराबर यानि 344 रही है। कट ऑफ के आधार पर दोनों वर्गों में कड़ी टक्कर रही है। साक्षात्कार में भी दोनों वर्गों के अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला रह सकता है। मालूम हो कि आरएएस 2016 में भी सामान्य एवं ओबीसी वर्ग में कट ऑफ बराबर यानि 327 रही थी। आरएएस जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में एक अंक का कितना महत्त्व है? यह भी किसी से छुपा नहीं है फिर ओबीसी की कट ऑफ़ न्यूनतम 343 होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो शासन में बैठे आरक्षित वर्गों के नुमाइंदे क्या घास खोद रहे हैं ? और आरक्षित वर्गों से आने वाले तिन चौथाई विधायक और सांसद मौन हैं। दूसरी दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा परिणामों में क्षेत्रीय आधार पर दोहरे मापदंड अपनाये जाते हैं। टीएसपी क्षेत्र के आदिवासियों को उनकी जनसँख्या के आधार पर आरक्षण मिले इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए और ना है। किंतु, टीएसपी की आड़ में ऑपन केटेगरी को आरक्षण किस कानून के तहत दिया जा रहा है ? और उसका खामियाजा ओबीसी वर्ग को प्रत्यक्षतः हो रहा है। एक बानगी देखिए, टीएसपी ऑपन केटेगरी की कटऑफ़ 332.75 अंक है जबकि ओबीसी सामान्य की कटऑफ़ 344 अंक मतलब सीधे-सीधे 12 अंकों का अंतर। यह कैसा न्याय है और कैसा अंधा कानून ? इसका जवाब कौन देगा? और ऐसा ही आरएएस परीक्षा के अंतिम परिणामों में भी देखने को मिलेगा, इसमें तनिक भी अतिश्योक्ति नहीं है ! इन अभ्यर्थियों के परीक्षा परिणाम जारी नहीं हुए आयोग द्वारा जारी मुख्य परीक्षा के परिणामों में नकल प्रकरण के चलते 9 अभ्यर्थियों के परिणाम जारी नहीं किये। जबकि 11 अभ्यर्थियों के परिणाम हाईकोर्ट के आदेशानुसार सीलबंद रखे गये हैं। दो अभ्यर्थियों के परिणाम हाईकोर्ट में याचिका के चलते लंबित रखे गये हैं। आयोग ने टीएसपी में 57 और नॉन टीएसपी में 1053 अभ्यर्थियों को अस्थाई रूप से उत्तीर्ण किया है। सचिव नीतू यादव ने बताया कि आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती-2018 के तहत 1051 पदों पर भर्ती होनी है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार पिछले साल 25 और 26 जून को सभी संभाग मुख्यालय पर मुख्य परीक्षा कराई गई। इसमें 18 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए थे। सुरज्ञान सिंह और अन्य ने प्रारंभिक परीक्षा परिणाम के कट ऑफ को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसके चलते 1 साल से अटका हुआ था। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने याचिकाओं का निस्तारण करते हुए आयोग को नतीजा जारी करने के आदेश गये। साक्षात्कार कार्यक्रम जल्द उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों के साक्षात्कार शीघ्र लिए जायेंगे। आयोग विस्तृत साक्षात्कार कार्यक्रम जल्द जारी किया जाएगा। संभवत: अगस्त या सितंबर में साक्षात्कार शुरू होंगे। यह रही अन्य वर्गवार कट ऑफ सामान्य वर्ग सामान्य एवं महिला-344.0, विधवा-226.75, परित्यक्ता-344 टीएसपी (सामान्य) सामान्य-332.75, महिला-320.75 अनुसूचित जाति सामान्य एवं महिला 310.25, विधवा-189.50, टीएसपी (सामान्य): 316 अनुसूचित जनजाति सामान्य एवं महिला 327.25 विधवा-182.00, टीएसपी (सामान्य एवं महिला): 274.75, टीएसपी (एसटी) : सामान्य एवं महिला 274.25 ओबीसी सामान्य एवं महिला-344.0, विधवा-226.75 एमबीसी सामान्य एवं महिला-343.75, विधवा-187.25 (नोट : कट ऑफ माक्र्स आयोग की सूचना के अनुसार-सं) यह रहा हॉरिजेन्टल रिजर्वेशन पूर्व सैनिक-142.0 नेत्रहीन/लोकोमोटिव डिसऑर्डर-178.75 हियरिंग इम्पायर्ड-243.25 एलडी/सीपी-297.75 खेल कोटा- 344.0गैर राजपत्रित कर्मचारी: संबंधित श्रेणी में पर्याप्त अभ्यर्थी

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