छत्तीसगढ़ में आदिवासी परंपरा के मुताबिक महिलाओं को ब्लाउज पहनने की अनुमति क्यों नहीं है

महिलाएँ साड़ी के साथ ब्लाउज नहीं पहनती
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Why are women not allowed to wear blouses in Chhattisgarh as per tribal tradition?

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || 21 अगस्त 2022 || जयपुर-बस्तर : आज कल सोशल मीडिया पर ब्लाउज फ्री साड़ी का कैम्पेन चल रहा है। फैशन नहीं परंपरा के चलते साड़ी के साथ ब्लाउज़ नहीं पहनती महिलाएँ.! महिलाओं की खूबसूरती को निखारने में ब्लाउज काफी अहम होती है। साड़ी भले ही सिंपल हो पर यदि ब्लाउज का डिजाइन स्टाइलिश हो तो सुंदरता अपने आप ही बढ़ जाती है। आज हम आपको भारत के ऐसी जगह के बारें में बताने जा रहे है। जहाँ की महिलाएँ ब्लाउज ही नहीं पहनती।

साड़ी के  साथ ब्लाउज पहनने लगी

इस क्षेत्र में रहने वाले लोग लगभग 1000 साल से इस परंपरा को लोग निभाते चले आ रहे हैं। इस तरह की आदिवासी महिलाओं का मानना है कि यह काम करने के लिए काफी सुविधाजनक होता है। अब आधुनिक फैशन ने इन इलाकों में भी दस्तक दे दी है।

आज के युग में यहाँ की लड़कियाँ साड़ी के साथ ब्लाउज पहनने लगी हैं। अब इस परंपरा को बचाने में पुराने लोग लगे हुए हैं। लेकिन अब ये बात सिर्फ यहाँ कि ही नहीं रही बल्कि शहरों में अब बिना ब्लाउज साड़ी पहनने का फैशन चल पड़ा है।

महिलाएँ साड़ी के  साथ ब्लाउज नहीं पहनती

छत्तीसगढ़ में आदिवासी परंपरा के मुताबिक महिलाओं को ब्लाउज पहनने की अनुमति नहीं है। भारत के छत्तीसगढ़ में आदिवासी आंचलों में काम करती महिलाएँ साड़ी के साथ ब्लाउज बिलकुल भी नहीं पहनती है। इतना ही नहीं इस परंपरा के अंतर्गत महिलाएँ ना तो खुद ब्लाउज पहनती है। ना ही गांव की किसी और महिलाओं को इसे पहनने देती हैं। जिन इलाकों में ये लोग रहते है। वहाँ के रहने वाले लोग शुरू से अपनी परंपरा को निभाते चले आ रहे हैं।

Picture2 छत्तीसगढ़ में आदिवासी परंपरा के मुताबिक महिलाओं को ब्लाउज पहनने की अनुमति क्यों नहीं है
साड़ी के साथ ब्लाउज पहने की इज़्ज़ाजत किसी महिला को नहीं

इंडिया के छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र की महिलाएँ साड़ी के साथ ब्लाउज़ नहीं पहनती हैं। यहाँ की महिलाओ को ब्लाउज पहनने की इज़्ज़ाजत नहीं है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र की महिलाओ के मुताबिक़ उनको साड़ी के साथ ब्लाउज पहने की इज़्ज़ाजत किसी महिला को नहीं है।

 

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