चौथा विकल्प : भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा की दहशत से कांपी कांग्रेस-बीजेपी, उदयपुर संभाग के 30 में से 20 कॉलेजों में जीत, BPVM का विधानसभा चुनाव में उतरने का दावा

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 28 अगस्त 2022 | जयपुर-बांसवाड़ा-उदयपुर : राजस्थान में BJP- कांग्रेस के लिए एक ओर पार्टी मुसीबत बन सकती है। छात्रसंघ चुनावों में आदिवासी क्षेत्र के कॉलेजों में आये रिजल्ट से ये ही सामने आ रहा है। यहाँ स्टूडेंट्स ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) को नकार दिया। यहाँ चुनावों में पहली बार भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा (BPVM)की सक्रियता देखी गई। BPVM ने उदयपुर संभाग के 30 में से 20 कॉलेजों में जीत दर्ज की।

BPVM की सक्रियता से आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ ABVP-NSUI का विकल्प मिल गया। वहीं आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए ये नए संकेत है। BPVM को बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ के साथ उदयपुर में मिली जीत से आदिवासी समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है। हालांकि ABVP-NSUI के लिए ये नतीजे चौंकाने वाले हैं।

चार जिलों के कॉलेजों में BPVM ने मारी बाजी

गनोड़ा आचार्य संस्कृत कॉलेज, बांसवाड़ा, गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, प्रतापगढ़, गवर्नमेंट कॉलेज, धरियावद, रामसागड़ा कॉलेज, सज्जनगढ़ कॉलेज बांसवाड़ा, पीपलखूंट कॉलेज, प्रतापगढ़, गवर्नमेंट संस्कृत शास्त्री कॉलेज, पीठ, चीखली (डूंगरपुर) कॉलेज, सीमलवाड़ा साइंस कॉलेज, देवल पाल कॉलेज डूंगरपुर, बिछीवाड़ा कॉलेज, डूंगरपुर, वीकेबी गर्ल्स कॉलेज डूंगरपुर, भीखाभाई भील कॉलेज सागवाड़ा, सराड़ा कॉलेज प्रतापगढ़ पीजी कॉलेज, कुशलगढ़ पीजी कॉलेज, एसबीपी पीजी कॉलेज, डूंगरपुर, छोटी सरवन कॉलेज, कुशलगढ़ कॉलेज, श्रीगोविंद गुरु कॉलेज, बांसवाड़ा में BPVM ने बाजी मारी।

मंत्रियों को दी चुनौती

BPVM ने बांसवाड़ा कांग्रेस के नेता और जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीया के बनाए हुए ST/SC छात्र संगठन को चुनाव में मात दी है। मंत्री के बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र के गांगड़तलाई में भले ही मंत्री का संगठन जीता हो, लेकिन मुकाबले में अध्यक्ष पद में BPVM केवल 8 वोट से पीछे रह गया। इसी प्रकार राज्यमंत्री अर्जुन बामनिया के विधानसभा क्षेत्र वाले छोटी सरवन कॉलेज में कांग्रेस समर्थक संगठन को BPVM ने हराया।

विधानसभा चुनाव में उतरने का दावा

BPVM के मुख्य संगठन भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा (BPMM)ने छात्रसंघ चुनावों में मिली जीत के बाद विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ के साथ उदयपुर और राजसमंद के खास हिस्सों में वोटर्स के लिए ये कांग्रेस, भाजपा और भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के बाद चौथा विकल्प होगा। उदयपुर संभाग की संभाग की 23 में से 11 सीटों में इस संगठन ने चुनाव लड़ने का दावा किया है।

2013 में हुई शुरुआत

साल 2013 में मानगढ़ धाम से आदिवासी विचारधारा को आगे बढ़ाया गया। यहाँ गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान से आदिवासी प्रतिनिधियों ने बैठक की, जहाँ अलग भील प्रदेश के साथ विचारधारा की शुरुआत हुई। इसके बाद सबसे पहले डूंगरपुर में संगठन को मजबूत किया गया। इसके बाद कांकरी डूंगरी प्रकरण और धरियावद उपचुनाव में संगठनात्मक विचाराधारा को और मजबूती मिली।

राजनीतिक दल के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं होने के कारण साल 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां की जनता ने तीसरे विकल्प के तौर पर BTP दी थी, जिसका नतीजा सागवाड़ा और चोरासी विधायक के तौर पर सामने आया था। अभी आदिवासी विचारधारा वाले कुनबे के पास डूंगरपुर से 2 विधायक, 4 प्रधान, 14 जिला परिषद सदस्य और बांसवाड़ा के अरथूना से एक प्रधान, एक जिला परिषद सदस्य और दोनों जिलों में 147 पंचायत समिति सदस्य हैं।

छात्रसंघ चुनाव के बाद मंदारेश्वर क्षेत्र स्थित कबीर आश्रम में आदिवासी परिवार के बीच हुई मंत्रणा बैठक। यहां पर विधानसभा चुनाव के लिए सक्रियता पर चर्चा हुई। मीटिंग में राष्ट्रीय संरक्षक से लेकर छोटा कार्यकर्ता सब एक जाजम पर हैं। छात्रसंघ चुनाव के बाद मंदारेश्वर क्षेत्र स्थित कबीर आश्रम में आदिवासी परिवार के बीच हुई मंत्रणा बैठक। यहां पर विधानसभा चुनाव के लिए सक्रियता पर चर्चा हुई। मीटिंग में राष्ट्रीय संरक्षक से लेकर छोटा कार्यकर्ता सब एक जाजम पर हैं।

आदिवासियों का केवल शोषण किया

भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय संरक्षक मणिलाल गरासिया ने विधानसभा चुनाव में उदयपुर की 8, बांसवाड़ा की 5, डूंगरपुर की 4, प्रतापगढ़ की 2 व राजसमंद की 4, कुल 23 में 11 सीटें जीतने का दावा किया है। गरासिया का आरोप है कि भाजपा-कांग्रेस ने आदिवासियों का केवल शोषण किया है। आदिवासी प्रदेश के तौर पर मिलने वाले अधिकारों से वंचित है।

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