रिसर्च : मानव शरीर में कोरोना वायरस की यात्रा कैसे होती है और कोरोना चरणबद्ध रूपमें कैसे करता है असर

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | सितंबर 06, 2020 | जयपुर-दिल्ली : कोविड 19 बीमारी लोगों में अलग-अलग तरह से असर कर रही है। लोग ठीक भी हो जाते हैं लेकिन ये बीमारी शरीर में कुछ बदलाव भी लाती है। कोविड 19 बीमारी लोगों पर अलग-अलग तरह से असर कर रही है। लोग इससे ठीक भी हो जाते हैं लेकिन ये बीमारी शरीर में कुछ बदलाव भी लाती है। कोरोना वायरस किस तरह व्यक्ति के फेफड़ों को नुक़सान पहुँचा सकता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को तबाह कर सकता है। चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण 159 से अधिक देशों तक पहुँच चुका है। दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2करोड़ 71 लाख से ऊपर पहुँच चुकी है, जबकि अब तक इससे 8.84 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। राहत की बात यह भी है कि दुनिया भर में करीब 01 करोड़ 92 लाख लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ जीवन बिता रहे हैं। अगर बात दुनिया की आर्थिक महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका की करें तो यहाँ 64.31 लाख, ब्राजील में 41.23 लाख और इंडिया में 41.14 लाख लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हैं जबकि मरने वाले लोगों की संख्या क्रमशः 19.28 लाख, 12.62 लाख और 0.71लाख से अधिक हो गयी है। कोरोना वायरस की दहशत इन दिनों पूरी दुनिया में देखने को मिल रही है। चीन से निकला यह वायरस अब यूरोप सहित कई देशों में हज़ारों लोगों की जान ले चुका है। इस वायरस के संक्रमण में आने वाले शख्स को बुखार-खाँसी जैसे लक्षण देखे जाते हैं। लेकिन क्या हर कोई बुखार से पीड़ित शख्स या खाँसता हुआ व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है? ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस बात की पहचान कर ली है कि मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस का मुक़ाबला कैसे करती है। यह शोध नेचर मेडिसीन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इस शोध में कहा गया है कि चीन समेत कई देशों में लोगों के कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने की ख़बरें आने लगी हैं। ऐसे में शोधकर्ताओं ने यह पता करने का प्रयास किया कि आख़िर मानव शरीर का सुरक्षा तंत्र इस वायरस से कैसे लड़ता है और कैसे उसे हरा पाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध का मकसद उन कोशिकाओं के काम के बारे में पता लगाना था जो इस वायरस को टक्कर दे रही हैं। उनका मानना है कि इससे वायरस के लिए वैक्सीन तैयार करने में मदद मिलेगी। इस शोध में शामिल प्रोफ़ेसर कैथरीन केडज़िएर्स्का के मुताबिक़, यह एक बेहद महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि हमें पहली बार शोध से यह पता चल पा रहा है कि हमारा शरीर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कोरोना वायरस से कैसे लड़ता है। वीडियो देंखे (बीबीसी हिंदी से साभार) कोरोना वायरस संक्रमण के बाद किसी व्यक्ति के शरीर में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं। ये खतरनाक वायरस इंसानी शरीर के अंदर दाखिल हो जाता है तो फिर क्या-क्या करता है? कोविड19 का पहला हमला कोरोना वायरस का नाम सार्स सीओवी-2 है। वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड संक्रमण और लक्षण दिखने के बीच का वक़्त होता है। यह वो वक़्त होता है जब वायरस इंसान के शरीर में जम जाता है। शरीर के भीतर जाने के बाद कोरोना वायरस इंसान के साँस लेने में तकलीफ़ पैदा कर सकता है। कोरोना वायरस का पहला हमला आपके गले के आसपास की कोशिकाओं पर होता है। कोरोना का दूसरा और अगला चरण इसके बाद कोरोना वायरस मरीज के साँस की नली और फेफड़ों पर हमला करता है। यहाँ यह एक तरह से कोरोना वायरस की संख्या बढ़ाता है। नए कोरोना वायरस बाक़ी कोशिकाओं पर हमला करने में लग जाते हैं। शुरुआती दौर में कोरोना से संक्रमित मरीज बीमार महसूस नहीं करता। कुछ लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण शुरू से ही दिखाई देने लगते हैं। कोविड19 वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड भी लोगों में अलग-अलग हो सकता है। तीसरे चरण में कोरोना वायरस का फेफड़े पर असर कोरोना से पीड़ित मरीजों में खाँसी और बुखार के लक्षण दिखने की वजह यह है कि वायरस का इंफेक्शन श्वसन तंत्र तक पहुँच जाता है। श्वसन तंत्र बाहर की हवा को फेफड़ों तक लाने और अंदर की गंदी हवा को बाहर फेंकने में मदद करता है। वायरस के इंफेक्शन से श्वसन तंत्र में सूजन दिखने लगती है, जिससे तंत्रिकाओं पर असर पड़ता है। कोरोना संक्रमित मरीजों को धूल के छोटे कण से भी खाँसी हो सकती है। अगर कोरोना मरीज के श्वसन तंत्र में ज्यादा परेशानी हो तो इंफेक्शन गैस परिवर्तन तंत्र तक पहुँच जाता है। गैस परिवर्तन तंत्र में इंफेक्शन पहुँचने पर वायुकोष पर असर पड़ता है, जो फेफड़े के नीचे होता है। चौथे चरण में हो सकती है कोरोना से मौत वायुकोष में इंफेक्शन पहुँच जाने पर एक तरल पदार्थ या सूजी हुई तंत्रिकाएं फेफड़े तक पहुँच जाती है जिससे मरीज को निमोनिया हो जाता है। फेफड़े में सूजन की वजह से उसे पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और फेफड़े उन्हें रक्त तक नहीं पहुँचा पाते। इसके बाद हमारा शरीर ऑक्सीजन नहीं ले पाता और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर नहीं छोड़ पाता। इस स्थिति में निमोनिया से मरीज की मौत हो जाती है। शरीर कैसे लड़ता है कोरोना से लड़ाई कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र का संतुलन बिगड़ता है और सूजन दिखनी शुरू हो जाती है। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को ख़त्म करने के लिए ज़रूरत से अधिक काम करती है। इस वजह से शरीर में सुजन बढ़ जाती है और फेफड़े के काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है। कोरोना से पीड़ित मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है और उन्हें ज्यादा ऑक्सीजन दी जाती है ताकि मरीज के फेफड़े सामान्य तरीके से काम करने लगें। कोरोना से किस अंग पर कितना असर कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से सिर्फ फेफड़े पड़ ही असर पड़ता हो ऐसा नहीं है। डॉक्टर्स का कहना है कि कोरोना वायरस दिल, किडनी, इंटेस्टाइन और लीवर पर भी हमला करता है और उन्हें भी नुकसान पहुँचाता है। कोरोना वायरस की वजह से होने वाले वायरल निमोनिया से मरीज में दूसरे इंफेक्शन के आने का खतरा रहता है, इसलिए मरीजों को एंटी बायोटिक दी जाती है।

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