महिला अपराध में राजस्थान अव्वल, रेप के मामलों में राजस्थान ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम को भी पीछे छोड़ा

5 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 30 अगस्त 2022 | जयपुर : महिलाओं-युवतियों के प्रति अपराध में राजस्थान ने देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। मेहमान नवाजी और स्वागत-सत्कार के लिए दुनिया के नक्शे पर अलग पहचान रखने वाले प्रदेश के लिए ये आंकड़े शर्मिंदगी वाले हैं। हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB ) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अत्याचार में देश में पहले नंबर पर है।

बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, जिन्हें क्राइम स्टेट के तौर पर जाना जाता हैं, वहां भी महिला अत्याचारों के मामले राजस्थान से कम हैं। वहीं, रेप के मामलों में राजस्थान ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम को भी पीछे छोड़ दिया है। राजस्थान में साल 2021 में रेप के इतने केस दर्ज हुए हैं, जितने तीन बड़े राज्यों में मिलाकर भी दर्ज नहीं हुए।

राजस्थान में साल 2021 में कुल 6,337 रेप के मामले सामने आए, जो साल 2020 के 5,310 के मुकाबले एक हजार ज्यादा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2020 और 2021 में राजस्थान में सबसे अधिक रेप के मामले सामने आए हैं। राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश में रेप के मामले दर्ज हुए। वहां पर 2020 में 2,339 मामले थे, जबकि 2021 में ये नंबर बढ़कर 2,947 हो गए। इस खबर पर आगे बढ़ने से पहले नीचे दिये गये पोल में हिस्सा लेकर आप अपनी राय जाहिर कर सकते हैं।

पांच राज्य जहां सबसे अधिक रेप केस हुए दर्ज
साल 2021 में राजस्थान, एमपी के बाद महाराष्ट्र, यूपी और असम में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए। NCRB के अनुसार यूपी में 2,845 रेप केस रजिस्टर हुए। वहीं, महाराष्ट्र में 2,496 रेप केस रिपोर्ट हुए हैं। असम में 1733 जबकि दिल्ली में 1250 केस दर्ज किये गये। रेप केस के मामलों में राजस्थान 2020 से टॉप पर है। इसके बाद से दुष्कर्म और महिला हिंसा को लेकर अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि राजस्थान पिछले 3 साल से महिला हिंसा के मामलों में पहले पायदान पर रहा है।

दो साल में 13 हजार से ज्यादा केस

प्रदेश में पिछले 28 महीनों (2020 से अप्रैल 2022) तक दुष्कर्म के 13,890 केस दर्ज हुए हैं। इनमें से 11,307 दुष्कर्म नाबालिग लड़कियों से हुए। वहीं दो साल में 12 साल से छोटी उम्र की 170 बच्चियों से दरिंदगी के मामले सामने आये। सरकार ने ऐसे मामलों में 2013 में फांसी की सजा का प्रावधान किया। इसके बावजूद इन अतिसंवेदनशील मामलों में पॉक्सो कोर्ट का दबाव बढ़ाया जा रहा है। जयपुर की 7 पॉक्सो कोर्ट में ही 700 से अधिक केस पेंडिंग होने के बावजूद यहां बालिगों के केस ट्रांसफर किए जा रहे हैं। जयपुर मेट्रो की 2 कोर्ट में ऐसे 62 केस हैं। प्रदेश में इसकी संख्या 100 से ज्यादा है।

फांसी के 8 मामलों की मौजूदा स्थिति

  • बूंदी की पॉक्सो मामलों की कोर्ट ने 29 अप्रैल 2022 को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त सुल्तान और छोटू लाल को फांसी की सजा सुनाई। सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट के पास है।
  • जयपुर जिले की पॉक्सो कोर्ट ने साढ़े 4 साल की मासूम से रेप और मर्डर के मामले में सुरेश कुमार बलाई को 10 फरवरी 2022 को फांसी की सजा सुनाई। अभियुक्त की अपील हाईकोर्ट में लंबित है।
  • झालावाड़ की पॉक्सो मामले की कोर्ट ने 7 साल की मासूम के अपहरण, दुष्कर्म और रेप मामले में अभियुक्त कोमल लोढ़ा को सितंबर 2018 में फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने 2019 में इस फांसी को उम्रकैद में बदल दिया। यह भी कहा कि कोमल के खिलाफ गलत जांच की गई।
  • अलवर की पॉक्सो कोर्ट ने मासूम से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में आरोपी राजकुमार को फांसी की सजा दी थी, हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।
  • झुंझुनूं की पॉक्सो कोर्ट ने 17 मार्च 2021 को 5 साल की मासूम से अपहरण और दुष्कर्म केस में अभियुक्त सुनील कुमार को फांसी की सजाई सुनाई। मामला हाईकोर्ट में लंबित।
  • जोधपुर की पॉक्सो कोर्ट ने 8 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अभियुक्त निकाराम को 27 सितंबर 2021 को फांसी की सजा सुनाई थी। इसी तरह नागौर की पॉक्सो कोर्ट में 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के केस मामले में हुई फांसी की सजा सुनाई। अन्य की तरह ये मामले भी पैंडिंग।

लड़कियों की तस्करी में भी पीछे नहीं

राजस्थान महिला अत्याचारों के साथ तस्करी के मामले में भी ज्यादा पीछे नहीं रहा है। यहां के कुछ जिलों से लगातार नाबालिगों की तस्करी कर पड़ोसी राज्यों में बेचा जा रहा है। गुजरात से सटे 4 जिलों सिरोही, उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर की बच्चियां इन गैंग्स का सॉफ्ट टारगेट हैं। यहां के कई गांवों की लड़कियों को किडनैप कर या नौकरी का लालच देकर दलाल अपने जाल में फंसा लेते हैं। कई महीनों तक बंधक बनाकर रखते हैं। जब तक खरीदार नहीं मिलता, दलाल इनके साथ रेप करते हैं।

ये कारण हैं केस अधिक दर्ज होने के
दरअसल, राज्य सरकार ने पॉलिसी बना रखी हैं कि अगर थाने में केस दर्ज नहीं होता है तो पीड़ित एसपी कार्यालय में संपर्क कर अधिकारियों से मिले। इसके बाद एसपी कार्यालय से जीरो एफआईआर होकर थाने पहुंच जाती हैं। राजस्थान पुलिस ने कुछ दिनों पहले एक रिकॉर्ड जारी किया है। इसमें बताया गया है कि रेप और छेड़छाड़ के दर्ज केस में जनवरी से जुलाई तक जितने केस दर्ज हुए उनमें से 48 प्रतिशत केस जांच के बाद या दौरान झूठे पाए गए थे।

रेप के केस पर सीएम गहलोत बोले थे- रेपिस्ट को लगता है लड़की गवाह बन जायेगी, इसलिए मार डालते हैं
गहलोत ने कहा- निर्भया कांड के बाद जब से यह किया गया कि रेपिस्ट को फांसी की सजा मिलेगी, उसके बाद बच्चियों की रेप के बाद हत्याएं बहुत बढ़ रही हैं। रेप करने वाला देखता है कि कल यह मेरे खिलाफ गवाह बन जाएगी तो हत्या कर देता है।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This