RAS Mains Result 2021 : RPSC की मनमानी, आरक्षण-नीति और सुप्रीमकोर्ट के निर्णय ‘आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी की रिक्तियों के लिए पात्र’ का उल्लंघन

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 31 अगस्त 2022 | जयपुर-अजमेर : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य/ खुली श्रेणी के रिक्त पदों को भी भरने के लिए पात्र हैं। जस्टिस उदय उमेश ललित, एस रवींद्र भट और हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि खुली श्रेणी में क्षैतिज आरक्षण की रिक्तियों को भरने में भी इस सिद्धांत का पालन किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कुछ उच्च न्यायालयों के दृष्टिकोण को अस्वीकार कर दिया कि, क्षैतिज आरक्षण को प्रभावित करने के लिए उम्मीदवारों को समायोजित करने के चरण में, आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को संबंधित ऊर्ध्वाधर आरक्षण के तहत केवल अपनी श्रेणियों में ही समायोजित किया जा सकता है, न कि “खुली या समान्य” श्रेण‌ियों में।

पीठ ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के विभिन्न पूर्व निर्णयों का उल्लेख किया है जो ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज आरक्षण के मुद्दे से संबंधित है। पीठ ने कहा, यह सिद्धांत कि किसी भी ऊर्ध्वाधर श्रेणी से संबंध‌ित उम्मीदवार “खुली या समान्‍य श्रेणी” में चयनित होने का हकदार हैं, अच्छी तरह से तय है। यह अच्छी तरह से स्वीकार किया जाता है कि यदि आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थी अपनी योग्यता के आधार पर चयनित होने के हकदार हैं, तो उनका चयन आरक्षित वर्गों की श्रेणियों में नहीं किया जा सकता है, जिससे वे संबंधित हैं।

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने आरएएस मैन 2021 का रिजल्ट मंगलवार शाम वेबसाइट पर जारी कर दिया। आयोग की ओर से रोल नम्बर की सूची जारी की गई। यदि कोई उम्मीदवार विज्ञापन/नियमों के अनुसार निर्धारित पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो उसकी उम्मीदवारी को आयोग द्वारा घोषणा के बाद भी अस्वीकार कर दिया जाएगा। पर्सनैलिटी और वाइवा टेस्ट की डेट अलग से घोषित कर दी जाएगी।

आयोग सचिव एच.एल. अटल ने बताया कि मुख्य परीक्षा-2021 के रिजल्ट में 2174 केडिडेट्स साक्षात्कार के लिए पूर्णतः अस्थायी रूप से सफल घोषित किए गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय में याचिकाएं विचाराधीन होने के कारण 259 केडिडेट्स का परिणाम सीलबंद लिफाफों में रखा गया है। प्रशासनिक कारणों से 2 केडिडेट्स का परिणाम रोका गया है। परीक्षा का परिणाम माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन स्पेशल अपील रिट संख्या 429/2022 एवं अन्य संबद्ध याचिकाओं के निर्णय के अध्यधीन रहेगा।

अदालत ने कहा कि राजस्थान, बॉम्बे, उत्तराखंड और गुजरात के उच्च न्यायालयों ने क्षैतिज आरक्षण से निपटने के दौरान एक ही सिद्धांत (ऊर्ध्वाधर आरक्षण का) को अपनाया है, जबकि इलाहाबाद और मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने इसके विपरीत विचार किया है। दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार, क्षैतिज आरक्षण को प्रभावित करने के लिए उम्मीदवारों को समायोजित करने के चरण में, आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को संबंधित ऊर्ध्वाधर आरक्षण के तहत केवल अपनी ही श्रेणियों में समायोजित किया जा सकता है और “खुली या सामान्य श्रेणी” में नहीं।

किंतु RPSC की मनमानी अब चरम पर पहुँच चुकी है और आरक्षित वर्गों की चिर निंद्रा टूट ही नहीं रही है। जबकि सौरभ यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य[ M.A. NO.2641 OF 2019 of SLP (CIVIL)NO.23223 OF 2018 मामले में जस्टिस रवींद्र भट ने क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर आरक्षण की अवधारणा को इस प्रकार समझाया- “महिलाओं के लिए प्रदान किया गया कोटा, साथ ही साथ स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों, (डीएफएफ) और पूर्व सैनिकों के आश्रितों को प्रदान किया गया कोटा, वर्तमान मामले में ‘क्षैतिज’ के रूप में जाना जाता है, जबकि सामाजिक समूहों (एससी, एसटी, ओबीसी) के लिए तय किया गया कोटा ‘ऊर्ध्वाधर’ के रूप में जाना जाता है।

जस्टिस रवींद्र भट का यह भी कहना है ‘इस अंतर शब्दावली के प्रयोग को इस तथ्य से रेखांकित किया जाता है कि बाद का अनुच्छेद 16 (4) में स्पष्ट रूप से स्वीकृत है, जबकि पहले को अनुमेय वर्गीकरण (अनुच्छेद 14, 16 (1)) की एक प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया है, हालांकि इस तरह के क्षैतिज आरक्षण अनुच्छेद 15 (3) 14 में अतिरिक्त रूप से स्थित हैं।” राज्य की इस धारणा को खारिज करते हुए कि महिला उम्मीदवार जो सामाजिक श्रेणी के आरक्षण के लाभ की हकदार हैं, खुली श्रेणी की रिक्तियों को नहीं भर सकतीं, जज ने कहा: “मैं यह कह कर समाप्त करूंगा कि आरक्षण, दोनों ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज, सार्वजनिक सेवाओं में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की विधि है। इन्हें कठोर “स्लॉट्स” के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, जहां एक उम्मीदवार की योग्यता, जो अन्यथा उसे खुले सामान्य वर्ग में दिखाए जाने का अधिकार देती है। ऐसा करने से, सांप्रदायिक आरक्षण हो जाएगा, जहां प्रत्येक सामाजिक श्रेणी उनके आरक्षण की सीमा के भीतर सीमित है, इस प्रकार योग्यता की उपेक्षा की जाती है। खुली श्रेणी सभी के लिए खुली है, और इसमें दिखाए जाने वाले उम्मीदवार के लिए एकमात्र शर्त योग्यता है, चाहे वह किसी भी प्रकार का आरक्षण लाभ उसके लिए उपलब्ध हो।”

फेक्ट फाइल

  • राज्य सेवा के 363 तथा अधीनस्थ सेवाओं के 625 पदों के लिए भर्ती निकाली।
  • 28 जुलाई से 27 अगस्त 2021 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे।
  • प्रारंभिक परीक्षा समस्त जिला मुख्यालय एवं उपखंड स्तर पर 27 अक्टूबर 2021 हुई थी।
  • प्रारंभिक परीक्षा के लिए 6 लाख से अधिक अभ्यर्थी पंजीकृत किए गए थे।
  • मुख्य परीक्षा का आयोजन 113 केंद्रों पर किया। करीब 20 हजार केंडिडेट्स रजिस्टर्ड थे।
  • मुख्य परीक्षा 20 व 21 मार्च 2022 को प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालय पर हुई थी।
  • करीब 20 हजार में से 18 हजार शामिल हुए। औसत 88 प्रतिशत उपस्थिति रही।
  • श्रेणीवार कट ऑफ मार्क्स भी परिणाम के साथ ही जारी कर वेबसाइट पर अपलोड।
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