सोच : दलित-आदिवासियों पर भारत में हो रहे भेदभाव को ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ सा समर्थन क्यों नहीं मिलता

3 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | सितंबर 06, 2020 | जयपुर-दिल्ली : कहते हैं ‘न्याय नहीं तो शांति नहीं’ और इंडिया अन्याय-अत्याचार की बुनियादों पर विश्व गुरू होने के सपने पल रहा है। दलित और आदिवासियों तथा मुस्लिमों, कश्मीरियों, ईसाईयों तथा छोटी जाति के साथ भारत में हो रहे भेदभाव, मॉब लिंचिंग, बंगला देश में गैर-बंगालियों तथा अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों के साथ हो रहा बर्ताव किसी से छुपा नहीं है। ठीक वैसे ही, पाकिस्तान में अहमदियों, बलूच लोगों, हिंदुओं तथा सिखों और ईसाईयों के साथ हो रहे भेदभाव, श्रीलंका में तमिलों के साथ किये जा रहे जुल्म, म्यांमार में रोहिंग्याओं के साथ, चायना में तिब्बतियों और उईगर मुस्लिमों के साथ किये जा रहे हैं। ब्लैक लाइव्स मैटर पर अमरीका के तीन महान कार्यकर्ताओं की बेटियों के वीडियोज को सुनिए (साभार : बीबीसी हिंदी) ऐसे ही बर्ताव, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन तथा यूरोप और अमेरिका में एशियाई मूल के लोगों के साथ किये जा रहे हैं। भेदभाव तथा सामाजिक तौर पर उनके प्रति घृणा का वातावरण सब कुछ सतह पर आना चाहिए। इनके खिलाफ दुनिया के पैमाने पर प्रगतिशील, लोकतांत्रिक, सामाजिक तथा राजनीतिक ताकतों को एक एकजुट संघर्ष चलाना चाहिए। ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन ने दुनिया के कोने-कोने में विभिन्न समाजों के अंदर जो नाना प्रकार के भेदभाव-घृणा समाज तथा प्रशासनिक स्तर पर पल रहे हैं, उनकी तरफ जबर्दस्त ढंग से ऊँगली उठायी है, पर वैसा समर्थन देश और देश के बाहर दलित और आदिवासियों पर होने वाले अन्याय, अत्याचार और अमानवीय शोषण को नहीं मिल पाता है। बल्कि ये अन्याय-अत्याचार दिनों-दिन बढ़ रहे हैं और इसकी अगुआयी आरएसएस जैसे संगठन खुले आम कर रहे हैं। इंडिया में अमानवीय जातिगत अत्याचारों की तरह अमेरिका में नस्लवाद संस्थागत और परंपरागत रूप से मौजूद है, इसका पहला प्रमाण नहीं है। इसके पहले अगस्त 2014 में फर्गुसन में एक पुलिस अधिकारी ने माईकल ब्राउन नाम के अफ्रीकी अमेरिकन की हत्या की थी। उसके पहले न्यूयार्क में जुलाई 2014 में एरिक गार्नर की हत्या भी एक पुलिस अधिकारी ने की थी। उस समय भी फर्गुसन और न्यूयार्क में लगभग चार माह तक आंदोलन चला था जिसे पुलिस ने बहुत ही बर्बर ढंग से दबाया था। इंडिया में ऐसे हत्याएँ हर रोज कई होती हैं, और उनका रुदन किसी को भी सुनायी नहीं पड़ता है! वहीं, अमेरिका की पूरी व्यवस्था में गोरे अमेरिकियों का अमेरिका के मूल निवासियों, आफ्रिकी अमेरिकी, मेक्सिकन या एशियाई अमेरिकी के प्रति नस्लवादी नफरत के इतिहास में जाने का कोई इरादा नहीं है। इंडिया में नफ़रत फ़ैलाने का खेल खुलेआम होता है। उसे आज जो आंदोलन अमेरिका में चल रहा है उस आंदोलन के आकार-प्रकार, सर्व-व्यापकता, जातीय विविधता, नौजवानों की सक्रियता तथा समानता तथा सम्मान के लिए किए जा रहे एकताबद्ध प्रयासों ने पूरी तरह नेपथ्य में डाल दिया है। इंडिया में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हस्तियाँ भी मौन साध लेती है जबकि पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 टाइगर वुड्स गोल्फर (Tiger Woods) ने ब्लैक लाइव्स मैटर (Black Lives Matter) नाम के आंदोलन का समर्थन करते हैं। अमेरिका में अश्वेत शख्स जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे विश्व में इस आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। वुड्स ने कहा है कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब लोग बदलाव की माँग करते हैं और इस समय पूरे विश्व में यही हो रहा है। डेली मेल ने वुड्स के हवाले से लिखा है, ‘मुझे लगता है कि बदलाव शानदार है, तब तक जब तक हम किसी निर्दोष को सताएं नहीं, दुभार्ग्यवश ऐसा हुआ।’ उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि आगे ऐसा नहीं होगा। आंदोलन और बदलाव से ही समाज आगे बढ़ता है। इसी तरह हम विकास करते है और आगे बढ़ते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि हम अब और निर्दोष लोगों की जिंदगी न खोएँ क्योंकि हम अब सामाजिक तौर पर अच्छी स्थिति के लिए आगे बढ़ रहे हैं।’ वुड्स ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हर कुछ अलग होगा, लेकिन हाँ, ऊर्जा अलग होगी। आप पट करेंगे, पार स्कोर करेंगे, बड़ा शॉट खेलेंगे, लेकिन आपकी हौसलअफजाई के लिए कोई नहीं होगा।’ कोरोना काल को यदि मोदी-आरएसएस की जुगल जोड़ी निजीकरण के अवसर के रूप में ले रही हैं और दुनिया की पूंजीवादी ताक़तें दबे-कुचले वर्ग के ऊपर, श्रमजीवियों के ऊपर हमले का एक बेहतरीन अवसर मानकर चूकना नहीं चाहतीं तो दुनिया के दबे-कुचले वर्ग तथा श्रमजीवियों को इसी कोरोना काल में उन्हें प्रतिउत्तर भी देना होगा।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This