स्कूल टॉयलेट की CCTV से निगरानी, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी माना, स्कूल पर FIR

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो I 2 सितंबर 2022 I जयपुर-रतलाम : रतलाम में स्कूल टॉयलेट की CCTV से निगरानी के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग आमने-सामने आ गये हैं। नामली स्थित सेंट जोसेफ स्कूल को राज्य बाल आयोग यह कहते हुए क्लीनचिट दे चुका है कि ये कोई बड़ा मामला नहीं है। अब इसी के उलट मामले को राष्ट्रीय बाल आयोग ने गंभीर बताया है। राष्ट्रीय बाल आयोग का तो यहाँ तक कहना है कि ये तो चाइल्ड पोर्नोग्राफी है।

मामला क्या है

10 दिन पहले चाइल्ड लाइन को शिकायत मिली। शिकायत करने वाले सेंट जोसेफ स्कूल (नामली) के ही स्टूडेंट हैं। बताया- मैनेजमेंट ने स्कूल टॉयलेट में CCTV कैमरे लगवा रखे हैं। शिकायत के अगले ही दिन चाइल्ड लाइन की टीम स्कूल पहुँचकर जाँच करती है। टीम को 2 बॉयज टॉयलेट में कैमरे लगे मिले। स्कूल मैनेजमेंट को नोटिस देकर पूछा था- आखिर ऐसा क्यों किया गया, ऐसा करने की क्या जरूरत पड़ी?

स्कूल मैनेजमेंट ने दलील दी, बच्चे गंदी ड्रॉइंग बनाते हैं

चाइल्ड लाइन प्रभारी प्रेम चौधरी को स्कूल प्रिंसिपल सिस्टर निधि ने बताया था कि बच्चे टॉयलेट में गंदी ड्रॉइंग बनाते हैं। किसी का भी नंबर वहाँ लिख देते हैं, इस वजह से कैमरे लगाये। तब चाइल्ड लाइन ने मैनेजमेंट को साफ कहा था- वजह जो भी हो, टॉयलेट में कैमरे लगाना गलत है। ये बच्चों की प्राइवेसी का उल्लंघन है। मैनेजमेंट से लिखित में जवाब मांगा गया था।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्कूल को क्लीनचिट

दो दिन पहले यानी 30 अगस्त को राज्य बाल आयोग की टीम स्कूल पहुँचती है। टीम स्कूल को फटकार तो लगाती है, लेकिन क्लीनचिट भी दे देती है। राज्य बाल आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान का कहना था कि ये कोई बहुत बड़ा विषय नहीं है। शरारती बच्चे टॉयलेट में गंदी ड्रॉइंग बनाते थे, इसलिए स्कूल मैनेजमेंट को ऐसा करना पड़ा। टीम ने भी जब जांच की तो टेबल पर इस तरह के गंदे कमेंट लिखे मिले। हालांकि, स्कूल मैनेजमेंट को कहा गया है कि कोई बच्चा गलत कर रहा है तो उसके पेरेंट्स को बुलाकर बच्चों को समझायें।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की एंट्री, स्कूल पर FIR

31 अगस्त को मामले में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने संज्ञान ले लिया। राष्ट्रीय बाल आयोग ने रतलाम SP को लेटर जारी कर FIR करने के लिए कहा। क्या कार्यवाही की? इसकी जानकारी 7 दिन में मांगी है। राष्ट्रीय बाल आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो का एक बयान भी सामने आया है। इसमें उन्होंने इस गंभीर मामले में पॉक्सो (Protection of Children Against Sexual Offence) और जेजे (Juvenile Justice) एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही। इसे चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा मामला बताया।

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