जमानत का हक़ : तीस्ता को सुप्रीम राहत, गुजरात दंगों की साजिश में हुई गिरफ्तार

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो I 2 सितंबर 2022 I जयपुर : एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस यूयू ललित की बेंच में 1 घंटे 10 मिनट से ज्यादा देर तक सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने कहा- तीस्ता गिरफ्तारी के बाद से या तो रिमांड या कस्टडी में रहीं। उन्हें अब जेल में नहीं रखा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि तीस्ता का मामला जब तक हाईकोर्ट के पास है, तब तक उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा। तीस्ता कल यानी शनिवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर जेल से बाहर आ सकेंगी। 25 जून को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तीस्ता को मुंबई से गिरफ्तार किया था। 30 जुलाई को निचली अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी। तीस्ता की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार 2 दिन तक सुनवाई चली। फैसला देने से पहले तीनों जज इन-कैमरा डिस्कस करने गये।

आइए जानते हैं सुनवाई के दौरान कोर्ट-रूम में किसने क्या कहा कि

CJI ललित- मेरे 2 सवाल हैं। पहला, पूछताछ में क्या मिला। दूसरा, कितने दिनों तक आपने उनसे पूछताछ की है?

SG मेहता- हमने अब तक 7 दिनों की पूछताछ की है, लेकिन महिला चालाक हैं और पूछताछ में सहयोग नहीं कर रही हैं।

SG मेहता- याचिकाकर्ता 2002 से राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश में शामिल है। जजों पर भी टिप्पणी करने से नहीं चूकती हैं।

सिब्बल- हमें स्टेट के खिलाफ बताया जा रहा है। क्या 60 साल की कोई महिला स्टेट से ज्यादा पावरफुल हो सकती है?

गुजरात सरकार ने हलफनामा दाखिल कर जमानत का विरोध किया
30 अगस्त को गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर तीस्ता की जमानत का विरोध किया था। सरकार ने कहा- तीस्ता के खिलाफ FIR न केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है, बल्कि सबूतों द्वारा समर्थित है। अब तक की गई जांच में FIR को सही ठहराने के लिए उस सामग्री को रिकॉर्ड में लाया गया है, जो स्पष्ट करती है कि तीस्ता ने राजनीतिक, वित्तीय और अन्य भौतिक लाभ प्राप्त करने के लिए अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची।

SC की टिप्पणी के बाद गुजरात पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ याचिका को 24 जून को खारिज कर दिया था। याचिका जकिया जाफरी ने दाखिल की थी। जकिया जाफरी के पति एहसान जाफरी की इन दंगों में मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जकिया की याचिका में मेरिट नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले में को-पेटिशनर तीस्ता ने जकिया जाफरी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। कोर्ट ने तीस्ता की भूमिका की जांच की बात कही थी। जिसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 25 जून को तीस्ता को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया था।

गुजरात में 2002 में हुई थी सांप्रदायिक हिंसा
27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के S-6 डिब्बे में आग लगा दी गई थी। आग लगने से 59 लोग मारे गए थे। ये सभी कारसेवक थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे। गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे। इन दंगों में 1,044 लोग मारे गए थे। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। गोधरा कांड के अगले दिन, यानी 28 फरवरी को अहमदाबाद की गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी में बेकाबू भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी थे, जो इसी सोसायटी में रहते थे। इन दंगों से राज्य में हालात इतने बिगड़ गए थे कि तीसरे दिन सेना उतारनी पड़ी थी।

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