प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को समर्पित किया नया स्वदेशी विमान वाहक युद्धपोत INS विक्रांत, 20,000 करोड़ की लागत से बना।

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2 सितंबर को भारतीय नौसेना में शामिल हुआ पहला स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत INSविक्रांत

मूकनायक मीडिया ब्यूरो I 2 सितंबर 2022 I जयपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आई एन एस विक्रांत (INS Vikrant) का जलावतरण केरल की कोचिंग में किया। आई एन एस विक्रांत एक स्वदेशी विमान वाहक युद्धपोत है। पीएम मोदी (Narendra Modi)ने आई एन एस विक्रांत को देश को समर्पित करते हुए कहा विक्रांत (INS Vikrant) विशाल है, विराट है, विहंगम है, विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष है, विक्रांत केवल युद्धपोत नहीं अपितु 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह भारत के बुलंद हौसलों की हुंकार है। आज 25 वर्षों बाद आई एन एस विक्रांत  नए रूप में नौसेना का हिस्सा बना।

आई एन एस विक्रांत (INS Vikrant) लगभग 1600 चालक दल के सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया है इसमें करीब 2200 कमरे हैं। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा और पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत है। इस विमान को बनाने में लगभग 20,000 करोड़ रुपए की लागत आई है। यह विमान वाहक युद्धपोत अत्याधुनिक स्वचालित यंत्रों से युक्त है।

INS विक्रांत  शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा

भारतीय नौसेना वाइस चीफ एडमिरल एस एन घोरमडे ने कहा आई एन एस विक्रांत पर नवंबर में विमान उतारने का परीक्षण शुरू होगा जो कि 2023 के मध्य तक चलेगा। पहले कुछ वर्षों के लिए  MiG-29K जेट विमान युद्धपोत से संचालित होंगे। घोरमडे कहते हैं आई एन एस विक्रांत हिंद महासागर और  हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।

आई एन एस विक्रांत के आने के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया और एक विमान वाहक बनने की क्षमता हैं। यह भारत के मेक इन इंडिया इनीशिएटिव का सफल वास्तविक प्रमाण होगा।

यह भारतीय नौसेना के संगठन WDB युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और बंदरगाह जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया हैं। इसका नाम भारत के पहले विमान वाहक ‘विक्रांत’ के नाम पर रखा गया है। विक्रांत का शाब्दिक अर्थ विजयी होता है।  विक्रांत ने 1971 के युद्ध में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इस युद्धपोत के निर्माण में न केवल भारत के प्रमुख औद्योगिक घराने अपितु 100 से भी अधिक लघु कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (MSME) एमएसएमई द्वारा बनाए गए स्वदेशी उपकरणों एवं मशीनरियों का भी उपयोग किया गया हैं।

इस विमान वाहक को बनाने के लिए खास तरह की वॉरशिप ग्रेड स्टील (WGS) की जरूरत होती हैं। वॉरशिप ग्रेड स्टील को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) और भारतीय नौसेना के सहयोग से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के माध्यम से सफलतापूर्वक देश में बनाया गया था

अप्रैल 2005 में IAC की नींव रखी गई

स्वदेशी विमानवाहक IAC की नींव अप्रैल के 2005 में औपचारिक स्टील कटिंग के द्वारा रखी गई थी। जहाज के ढांचे के निर्माण का काम आगे बढ़ा और 2009 में पाठण का निर्माण शुरू हुआ। जहाज का समस्त ढांचा पाठण के सहारे खड़ा किया जाता है। 2013 में जहाज निर्माण के पहले चरण का प्रक्षेपण सफलतापूर्वक पूरा हुआ। 

यह पोत स्वदेशी निर्मित उन्नत हेलीकॉप्टर (ALH) और हल्के लड़ाकू विमान के अलावा MiG-29  के लड़ाकू जेट, कामोव 31 और MH-60R बहु भूमिका वाले हेलीकॉप्टर के साथ 30 विमानों से युक्त एयर विंग को संचालित करने में सक्षम है।

नए नौसैनिक ध्वज का अनावरण

पोत के जलावतरण के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi)  द्वारा नए नौसैनिक ध्वज का अनावरण हुआ, जिसे औपनिवेशिक अतीत को पीछे छोड़ते हुए समृद्ध भारतीय समुद्री विरासत के अनुरूप देखा जा रहा है। 

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