राजस्थान सियासत इनसाइड स्टोरी : अशोक गहलोत की चली तो सचिन पायलट नहीं, राजस्थान में ये होंगे सीएम

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो I 3 सितंबर 2022 I जयपुर : राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग फिर जोर पकड़ती जा रही है। पायलट समर्थक विधायक वेदप्रकाश सोलंकी, रामखिलाड़ी बैरवा और गिर्राज सिंह मलिंगा के बयानों के बाद सियासी अटकलों का बाजर गर्म है। सीएम गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों के बीच नए राजनीतिक समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान सीएम गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष के लिए मनाने में लगा हुआ है। आलाकमान चाहता है कि गहलोत कांग्रेस का अध्यक्ष बने। लेकिन सीएम गहलोत तैयार नहीं बताए जा रहे हैं।

सीएम गहलोत कह चुके हैं कि वह राजस्थान छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। बताया जा रहा है सीएम गहलोत पर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने का दबाव है। ऐसे में अगर जरुरत पड़ने पर सीएम गहलोत सचिन पायलट की बजाय अपने खाम समर्थकों का नाम सीएम के लिए आगे कर सकते हैं। राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग फिर जोर पकड़ती जा रही है। सचिन पायलट समर्थक विधायकों की हो रही बयानबाजी से प्रदेश में नए राजानीतिक समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि गहलोत राजस्थान छोड़ते है तो सचिन पायलट की सीएम नहीं बनने देंगे। सीएम गहलोत पीएचइडी मंत्री  महेश जोशी, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और विधान सभा अध्यक्ष सी पि जोशी का नाम आगे करेंगे। तीनों नेता सीएम गहलोत के खास माने जाते हैं। शांति धारीवाल गहलोत सरकार में नंबर 2  मंत्री माने जाते हैं। जबकि महेश जोशी के प्रति सीए गहलोत का तब से ही लगाव रहा है जब गहलोत पहली बार प्रदेश के मुखयमंत्री बने थे। सीएम ब्राह्मण चेहरे पर भी दांव खेल सकते हैं। सीपी जोशी फिलहाल सीएम गहलोत की पसंद के तौर पर उभर रहे हैं।

हाल ही में सीएम गहलोत कैंप के माने जाने वाले विधायक एससी आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा ने यह कहकर सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है कि सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। सीएम अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। बैरवा ने कहा कि पार्टी को अब लौटाने का समय आ गया है। खिलाड़ी लाल बैरवा के बाद बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा और सचिन पायलट ने भी इशारों ही इशारों में बैरवा की बातों का समर्थन किया। बैरवा ने कहा कि अशोक गहलोत पुराने नेता हैं जो 40 साल से राजनीति में सक्रिय है और अब गहलोत को खुद बदलाव की बात करनी चाहिए और सेकेंड लाइन को तैयार कर आगे भेजने के बारे में सोचना चाहिएष बैरवा ने कहा कि आज जो हालात हैं। उसमें कोई एक नेता सत्ता वापसी नहीं कर सकता है। ऐसे में विभिन्न जातियों के लोग जिनमें गुर्जर, मीणा, एससी, ब्राह्मण, जाट, राजपूत से एक-एक नेता को तैयार कर फ्रंट लाइन में भेजना होगा।

वर्ष 2020 में सचिन पायलट की बगावत करने के बाद ही राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की मांग समय- समय पर उठती रही है। हालांकि, सीएम गहलोत स्पष्ट कर चुके हैं कि वह राजस्थान छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। सीएम ने हाल ही में अपने जोधपुर दौरे के दौरान कहा कि वह राजस्थान से बाहर नहीं जाने वाले हैं। जवाब में सचिन पायलट ने कहा कि राजनीति में जो होता है वह दिखाई नहीं देता है। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले प्रदेश में चली रही सियासी बयानबाजी से नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं।

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