कागजी आरयूएचएस : अव्यवस्थाओं की झेल रहा मार, सुविधाएँ बढ़ें तो पाँच लाख की आबादी को मिले राहत

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो I 4 सितंबर 2022 I जयपुर: कोरोना में लोगों के लिए जीवन रक्षक बना राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) इन दिनों अव्यवस्थाओं की मार झेल रहा है। यह राजधानी में एसएमएस के बाद दूसरा बड़ा अस्पताल है, जो 5 लाख की आबादी को राहत पहुँचा सकता है। अस्पताल को सुचारू चलाने के लिए 200 से ज्यादा डॉक्टरों की आवश्यकता है।

अभी यहां गायनी, जनरल मेडिसन, आर्थोपेडिक्स और सर्जरी का कोई डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में कैथ लैब, एमआरआई, 2-डी ईको, ईईजी, टीएमटी, हॉल्टर और मॉ

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किसके कितने डॉक्टर्स की जरूरत

ड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार हैं, लेकिन उपकरण नहीं होने से लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही। अभी अस्पताल की इमरजेंसी में नाममात्र की सुविधा है और आउटडोर सीनियर रेजिडेंट के भरोसे है। इस समय सिर्फ सर्दी-जुकाम-बुखार का इलाज मिल रहा है। रेडियोलॉजी विभाग नहीं होने से जाँचें भी बाहर करानी पड़ती है।

सुविधाएं बढ़ें तो पाँच लाख की आबादी को मिले राहत, एसएमएस में ऑपरेशन के लिए 10 दिन की वेटिंग

  • एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 होने से फैकल्टी की कमी के कारण मान्यता पर खतरा।
  • नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के अनुसार, 20 प्रोफेसर, 20 एसोसिएट प्रोफेसर और 40 असिस्टेंट प्रोफेसर की आवश्यकता। इसके अलावा 40 सीनियर रेजिडेंट और 40 जूनियर रेजिडेंट चाहिए।
  • मेडिकल कॉलेज व इससे जुड़े अस्पताल के लिए चिकित्सक शिक्षक, नर्सेज, मेडिकल लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन के रिक्त पदों पर भर्ती का लंबे समय से इंतजार है। स्टूडेंट की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
  • ऑपरेशन थिएटर…वार्ड-आईसीयू और इमरजेंसी बनाई, उपकरण नहीं

कोरोना काल में यहां 1200 तक मरीज भर्ती किये थे

आरयूएचएस की बेड क्षमता 500 बेड की है, लेकिन यहां पर्याप्त जगह होने के कारण कोरोनाकाल में 1200 लोगों को भर्ती कर इलाज किया था। इसके अलावा यहां एसएमएस के बराबर 8000 तक मरीजों की ओपीडी चलाई जा सकती है।

इन बड़े क्षेत्रों को मिल सकती है राहत  सांगानेर, प्रतापनगर, दुर्गापुरा, जगतपुरा, मालवीयनगर, टोंक रोड, चाकसू, शिवदासपुरा, इंदिरा गांधी नगर, आगरा रोड, टोंक, सवाईमाधोपुर और दौसा सहित कई क्षेत्रों के मरीजों को यह अस्पताल राहत पहुँचा सकता है। इससे एसएमएस अस्पताल पर न केवल मरीजों का भार कम होगा, बल्कि ऑपरेशन की वेटिंग भी खत्म होगी।

तीन साल से सुविधाओं के लिए इंतजार – मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 7 मार्च 2019 को आरयूएचएस अस्पताल के भवन का शुभारंभ किया था। 2020 में 16 सितंबर को आरयूएचएस को एसएमएस के अधीन करने पर कोविड मरीजों को इलाज मिला। एक सितंबर 2022 से आरयूएचएस कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के अधीन कर दिया गया है।

आरयूएचएस कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के अधीन संचालित अस्पताल में फैकल्टी, स्टाफ की भर्ती करने और नए आवश्यक उपकरणों को खरीदने का प्रोसेस जारी है। हमारा मकसद है कि यहां पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को एसएमएस नहीं जाना पड़े।
डॉ. सुधीर भंडारी, कुलपति, आरयूएचएस

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