‘वर्जिनिटी टेस्ट’ की अनिवार्यता और फेल होने पर सर्जरी कराने के दबाव से लड़कियों में डिप्रेशन, क्या है कुकड़ी प्रथा

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(Depression among girls due to inevitability of 'virginity test' and pressure to undergo surgery on failure)

मूकनायक मीडिया ब्यूरो I 4 सितंबर 2022 I जयपुर-भीलवाड़ा : राजस्थान में बाल विवाह, आटा-साटा जैसी कई कुप्रथाएं हैं, जिसकी आग में अबतक लड़कियां जल रही हैं। इन्हीं कुप्रथाओं में से एक कुकड़ी प्रथा भी है, जिसमें महिलाओं को अपनी पवित्रता साबित करनी पड़ती है। फेल होने पर पंच लड़की और उसके मां-बाप पर लाखों रुपये का अर्थदंड लगाते हैं। हैरत अंगेज दुनिया में ऐसे अनेक देश हैं जहाँ शादी से पहले यहाँ की हर लड़की को ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ कराना अनिवार्य हैI पहली तो यही बात कम बेतुकी या फिर कम चौंकाने वाली नहीं हैI

रही सही कसर इस देश में उन लड़कियों के साथ तब पूरी कर डाली जाती है जब वे इस वर्जिनिटी टेस्ट में ‘फेल’ हो जाने का रिजल्ट देखती हैंI दुनिया में झांकने चलिए तो यह वाकई बहुत विस्मयकारी हैI अपने देश अपने घर के बाहर नजर डालते ही इस इंसानी दुनिया में बहुत कुछ नया, नायाब और अजूबा सा मौजूद दिखायी देने लगता हैI ऐसी ही हैरतअंगेज दुनिया में अनेक देश ऐसा भी है जहाँ शादी से पहले यहाँ की हर लड़की को ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ कराना अनिवार्य हैI

भारत में भी राजस्थान, महाराष्ट्र जैसे अनेक राज्यों में कई समुदायों में वर्जिनिटी टेस्ट पास करने की अनिवार्यता हैI पहली तो यही बात कम बेतुकी या फिर कम चौंकाने वाली नहीं हैI रही सही कसर इस देश में उन लड़कियों के साथ तब पूरी कर डाली जाती है जब वे इस वर्जिनिटी टेस्ट में ‘फेल’ हो जाने का रिजल्ट देखती हैंI फेल होने पर इन लड़कियों को आगे करने की जो हिदायत दी जाती हैI वह इस कहानी के बीच में आपको कहीं जरूर पढ़वाता हूँI

यह कथित वर्जिनिटी टेस्ट दरअसल उन लड़कियों के लिए अनिवार्य किया गया है, जिनके जीवन में उनकी पहली बार शादी हो रही हैI तलाकशुदा या फिर दूसरी व तीसरी या चौथी शादी अथवा किसी तलाकशुदा या विधवा स्त्री पर यह बेतुका रिवाज समझिए या फिर कानून, इस देश में लागू नहीं होता हैI लड़की कुंआरी है या नहीं? इस सवाल के जवाब की पुष्टि होती है इस देश के डॉक्टरों द्वारा जारी सर्टिफिकेट सेI जिसमें वे लिखकर गारंटी लेते हैं कि फलां लड़की ‘वर्जिन’ है और फलां लड़की वर्जिनिटी टेस्ट में (मेडिकल के दौरान) फेल हो गई हैI इसी रिपोर्ट के आधार पर लड़की का आगे का भविष्य तय होता हैI एक तरीके से कह सकते हैं कि इस देश का यह अजीब-ओ-गरीब रिवाज या कानून, अमूमन हर लड़की के लिए नागवार गुजरता हैI

मजबूरी यह है कि अगर उसने इस टेस्ट का विरोध किया, तो उसके ऊपर न केवल तमाम तरह के उट-पटांग लांक्षन लगेंगे, अपितु उसे समाज गलत नजरों से भी देखना शुरू कर देगाI ऐसे में वैसे ही दूसरी तरफ से लड़की की जिंदगी नरक बन जाना तय होता हैI लिहाजा हर लड़की लाख न चाहते हुए इस टेस्ट में खुद को ‘पास’ कराने के लिए ही जूझना बेहतर समझती है, ताकि ‘फेल’ होने पर उसे समाज और अपनों की ही नजरों में गिरना तो न पड़ेI यह सब देखने-सुनने लिखने-पढ़ने में आसान दिखायी दे रहा हैI जो लड़की इस सब पीड़ा से या कहिए स्टेज से गुजरती हैI उसके लिए तो जब तक टेस्ट रिपोर्ट ‘पास’ की न आ जाये तब तक समझिए संकट ही संकट है और अगर रिपोर्ट कहीं ‘फेल’ की आ गई तब तो फिर कष्टों की हदें को नाप पाना मुश्किल हो जाता हैI और तो और इस देश में ऐसे भी तमाम डरावने मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें लड़की का वर्जिनिटी टेस्ट नेगेटिव आते ही उन्हें जान से ही मार डाला गया हैI

दिलचस्प यह है कि जिस कथित ‘मेडिकल टेस्ट’ की बात या जिक्र मैं पाठकों को यहाँ समझाने के लिए कर रहा हूँ, वह हमारी आपकी आसानी से समझ के लिए ही बेहतर हैI वरना इस देश में वर्जिनिटी टेस्ट के मामले में वैसे हमारे आपके यहाँ के मेडिकल से भी, इस बेहूदी किस्म की टेस्टिंग से दूर-दूर तक का कोई लेना-देना नहीं हैI मतलब जैसे हमारे देश में किसी की कोई मेडिकल रिपोर्ट मुख्य आधार होती हैI इस देश में वैसे ही लड़कियों की वर्जिनिटी का टेस्ट किसी मेडिकल आधार पर ही हो यह जरूरी नहीं हैI मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अजीब-ओ-गरीब रिवाज को लेकर महिला अधिकार कार्यकर्ता समानेह सवादी ने एक रिपोर्ट भी तैयार की थीI जिसमें उन्होंने कहा था कि इस तरह का वर्जिनिटी टेस्ट महिलाओं के प्रति हिंसा को बढ़ावा देता हैI यह वो टेस्ट है जिसकी कोई मेडिकल वेलिडिटी तो होती ही नहीं हैI यह टेस्ट महिलाओं-लड़कियों की गरिमा को ठेस पहुँचाने से ज्यादा और कुछ नहीं हैI

रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के टेस्ट मेडिकल सेंटर्स में ही कराए जाते हैंI यह टेस्ट ईरान के कुछ इलाकों में तो हदों से पार जाकर भी कराया जाता हैI समानेह सवादी की रिपोर्ट कहती है कि ईरान में लड़कियों के कुंआरेपन की जाँच के लिए क्या कुछ बेहूदा नहीं किया या कराया जाता है? यह पूछा जाये तो ज्यादा बेहतर या माकूल सवाल होगा? इन्हीं महिला अधिकार कार्यकर्ता की रिपोट्स आगे कहती हैं कि जो महिलाएँ-लड़कियाँ इस टेस्ट में फेल हो जाती हैं, उन्हें अपना वर्जिनिटी दुरुस्त (virginity test) दिखाने के लिए, खुद की ‘हाइमन रिपेयर सर्जरी’ (hymen repair surgery) तक करानी पड़ती है, जोकि बेहद तकलीफदेह होती हैI और तो और इस तरह की सर्जरी के बाद जब लड़कियाँ और महिलाएँ शौहर से दैहिक रूप से मिलती हैं तो वे तो बीवी को कुंआरा समझकर संतुष्ट हो जाते हैंI

हकीकत यह है कि शौहर को पेश की गई यह खुशी महिलाओं-लड़कियों के लिए बेहद पीड़ादायी साबित होती हैI उस पर मजबूरी यह है कि इतना दर्द बर्दाश्त करने के बाद भी वे अपनी तकलीफ शौहर से लेकर ससुराल में, मायके में किसी से शेयर भी नहीं कर सकती हैंI क्योंकि इससे उनकी वर्जिनिटी सवालों के दायरे में आ जायेगीI उनके अपने ही उनकी जिंदगी नरक बना डालेंगेI इस तरह हाइमन रिपेयर सर्जरी के जरिए खुद को वर्जिनिटी टेस्ट में पास कराने वाले मामलों में गली-गली मौजूद मेडिकल सेंटर्स और उनके डॉक्टर्स भी मोटी रकम ऐंठते हैंI हालांकि ईरान की मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ फरिमाह फाराहानी बेबाकी से बयान करती हैं कि, “दुर्भाग्य से यह हाइमन रिपेयर सर्जरी ईरान में पैसे कमाने का सबसे बड़ा जरिया भी बन चुका हैI”

जेंडर रिसर्चर जायरा बघेर के मुताबिक, “वर्जिनिटी टेस्ट में फेल लड़कियों महिलाओं को कई और भी तरह के बुरे नतीजे भोगने पड़ते हैंI ऐसे टेस्ट में फेल लड़कियों की जान तक के लाले पड़ जाते हैंI लाले क्या पड़ जाते हैं कई लड़कियाँ तो कत्ल तक कर डाली गई हैंI” उधर इस तरह के वाहियाती वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर रेडियो फ्री यूरोप से बात करते हुए एक डॉक्टर ने बयान किया कि ‘ऐसा नहीं है कि इस तरह के टेस्ट के लिए लड़की-महिलाओं पर ससुराल पक्ष से ही दवाब बनाया जाता होI इस तरह के टेस्ट के लिए सबसे पहले तो लड़की के परिवार वाले उस पर दवाब बनाते हैंI मेरे अनुभव के मुताबिक तो ऐसे मामलों का अनुपात 90 फीसदी तक होगा, जिनमें लड़कियों के वर्जिनिटी टेस्ट के लिए उनके मायके वालों ने ही जोर डाला होता हैI

हालांकि कुछ ऐसे भी मामले सामने आये है जिनमें दूल्हा या कहिए लड़की का ससुराल पक्ष ही इस तरह के फिजूल के टेस्ट कराने के लिए रजामंद नहीं होता हैI लेकिन इसके बाद भी लड़की पक्ष के लोग लड़की पर वर्जिनिटी टेस्ट कराने का दवाब जरूर बनाते हैंI’ वहीं दूसरी ओर इस बेतुके टेस्ट के विरोध में दबी जुबान ईरान के साक्षर तबके से जुड़ी महिलाएँ अक्सर सवाल भी करती रही हैं कि ‘इस तरह के बेतुके वर्जिनिटी टेस्ट को लडकियों के ऊपर ही क्यों थोपा जाता है? लड़कों के ऊपर भी तो यह लागू होना चाहिएI

क्या है कुकड़ी प्रथा

राजस्थान में सांसी समाज में कुकड़ी प्रथा का चलन लंबे समय से चला आ रहा है। यह ऐसी कुप्रथा है, जिसमें महिलाओं को अपनी पवित्रता यानी वर्जिनिटी का प्रमाण देना पड़ता है। सुहागरात के दिन पति अपनी पत्नी के पास एक सफेद चादर लेकर आता है। जब वह शारीरिक संबंध बनाता है तो उस चादर पर खून के निशान को अगले दिन समाज के लोगों को दिखाया जाता है। यदि खून के निशान आ गए तो उसकी पत्नी पवित्र मानी जाती है। यदि उस चादर पर खून के निशान नहीं आए तो जातीय पंचायत के पंच पटेल लड़की के परिवार से अधिक दहेज मांगते हैं। कई बार लड़की के घरवाले को समाज से बहिष्कृत किया जाता है और समाज मे शामिल करने के लिए परिवार पर आर्थिक दंड लगाया जाता है।

परिजनों की बिक जाती है पुरखों की जमीन

कोई भी लड़की कुकड़ी प्रथा में दोषी पाई जाती है तो जातीय पंचायत उस लड़की के परिवार पर आर्थिक जुर्माना लगाती है। कई बार यह रकम 5 से 10 लाख रुपए होती है। ऐसे में पीड़ित परिवार को जमीन और घर तक बेचना पड़ जाता है। अगर जुर्माने की राशि परिवार नहीं देता है तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है।

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