रिसर्च : महाकाल मंदिर परिसर में मिले 1000 साल पुराने बौद्ध धर्म के अवशेष, 20 फीट नीचे पत्थरों की प्राचीन दीवार

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 7 सितंबर 2022 | जयपुर-भोपाल-गाँधीनगर : उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर परिसर में 1000 साल पुराने परमार कालीन पुरातन अवशेष मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ये परमार काल के किसी मंदिर का आधार (अधिष्ठान) है। यहां विस्तारीकरण के लिए चल रही खुदाई के दौरान शुक्रवार को जमीन से करीब 20 फीट नीचे पत्थरों की प्राचीन दीवार मिली। इन पत्थरों पर नक्काशी मिली है। इसके बाद खुदाई कार्य रोक दिया गया है। इसकी सूचना मंदिर प्रशासन को भी दे दी गयी है। यहाँ पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुँचे हैं।

मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान एक हजार साल पुराने अवशेष मिले

सुबह मंदिर के विस्तार के लिए सती माता मंदिर के पीछे सवारी मार्ग पर जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान आधार मिला है। इसके बाद काम रोक दिया गया। विक्रम विश्वविद्धालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार अहिरवार का कहना है कि अवशेष पर दर्ज नक्काशी परमार कालीन लग रही है। ये करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है।

वहीं, मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि मुगलकाल में मंदिर को नष्ट किया गया था। मराठा शासकों के काल में मंदिर का फिर से निर्माण कराया गया था। जब मंदिर को तोड़ा गया, तो मंदिर का प्राचीनतम हिस्सा दबा रहा होगा। पुरातत्व विभाग को मंदिर के आसपास खुदाई करानी चाहिए।

अब पुरातत्वविदों की निगरानी में होगी खुदाई

मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि खुदाई में पाषाण के स्ट्रक्चर मिलने के बाद काम रोक दिया गया है। अब आगे की खुदाई पुरातत्वविदों की निगरानी में कराई जायेगी। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि खुदाई में मिले अवशेष राजा भोज के समय के हो सकते हैं। जो एक हजार साल पुराने हैं। राजा भोज ने नागर शैली और भूमि शैली में मंदिरों के निर्माण कराए थे। महाकाल मंदिर भी नागर शैली का है।

महाकाल मंदिर परिसर में मिले एक और 1000 साल पुराने मंदिर का अवलोकन करने बुधवार को पुरातत्व विभाग की केंद्रीय टीम पहुँची। दल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल (एएसआई) भोपाल के अधीक्षण पुरात्तवविद डॉ. पीयूष भट्ट व खजुराहो पुरातत्व संग्रहालय के प्रभारी केके वर्मा शामिल हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल के निर्देश पर यह टीम पहुँची है।

प्रारंभिक निरीक्षण के बाद डॉ. भट्‌ट ने मूकनायक मीडिया  को बताया, प्राचीन अवशेष की बनावट और उसकी नक्काशी देखकर यह दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी का मंदिर लग रहा है। अगली खुदाई देखकर करनी होगी, ताकि अवशेष ना रहे। यह भी बताया गया कि इससे उज्जैन और महाकाल से जुड़ा नया इतिहास पता चलेगा।

अंदर दबे मंदिर की सीमा कहां तक, अभी तय नहीं

मूकनायक मीडिया के सूत्र बताते हैं कि उज्जैन में मिले मंदिर से कई ऐसी बातें सामने आ सकती हैं, जिनसे महाकाल मंदिर और इस पूरे क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व का पता चलेगा। अभी विशेषज्ञों की टीम मंदिर परिसर में हर चीज का बारीकी से जायजा ले रही है। कोशिश की जा रही है कि किसी भी पुरातात्विक महत्व की धरोहर को नुकसान न पहुँचे। डॉ. भट्‌ट ने बताया, फिलहाल नहीं कह सकते कि यह प्राचीन दीवार और मंदिर कहां तक है। अभी प्रारंभिक निरीक्षण किया है।

अब आगे क्या

विशेषज्ञों ने बताया, आगे मंदिर समिति और प्रशासन को ही निर्णय लेना है, पुरातात्विक धरोहर को संरक्षित किया जायेगा। सर्वे कर लिया है, उस आधार पर जानकारी प्रदान की जायेगी। खुदाई में मिले पत्थरों के अवशेषों पर लताओं के निशान हैं। खुदाई में मिट्टी की अनेक परतें भी मिली हैं। बाहरी आक्रांताओं द्वारा महाकाल मंदिर को कई बार नष्ट किये जाने का इतिहास में उल्लेख मिलता है। इतिहास में अल्तमश के हमले का भी उल्लेख है। महाकालेश्वर मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1732 में सिंधिया राजवंश के रामचंद्र शेंडवी द्वारा बनवाया गया था। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आगे की खुदाई में विक्रमादित्य कालीन अवशेष भी प्राप्त हों।

सावधानी से शुरू कर सकते हैं निर्माण कार्य ताकि धरोहर को नुकसान न हो

एएसआई ने प्रशासन को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिस स्थल पर मंदिर के अवशेष मिले हैं उसके आसपास निर्माण कर सावधानीपूर्वक कर सकते हैं। ताकि जो धरोहर जमीन में मिली है उसे किसी तरह का नुकसान नहीं हो। डॉ पीयूष भट्‌ट ने बताया कि कलेक्टर आशीष सिंह ने जो निगरानी समिति बनायी है, वह अवशेषों को संरक्षित करने के लिए निर्णय लेने में सक्षम है। समिति में प्रशासक एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी हैं। उनके अतिरिक्त पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण यंत्री जीपी पटेल, इंदौर के पुरातत्व विभाग के रिटायर्ड केमिस्ट प्रवीण श्रीवास्तव, विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभागाध्यक्ष डॉ रामकुमार अहिरवार और डॉ रमण सोलंकी शामिल हैं।

20 फीट नीचे मिले हैं परमार कालीन अवशेष

गौरतलब है, महाकालेश्वर मंदिर परिसर में परमार कालीन पुरातन अवशेष मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ये परमार काल के किसी मंदिर का आधार (अधिष्ठान) है। यहां विस्तारीकरण के लिए चल रही खुदाई के दौरान जमीन से करीब 20 फीट नीचे पत्थरों की प्राचीन दीवार मिली। इन पत्थरों पर नक्काशी मिली है। इसके बाद खुदाई कार्य रोक दिया गया था।

मंदिर विस्तार के लिए सती माता मंदिर के पीछे शहनाई होल्डिंग एरिया में जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान आधार मिला है। इसके बाद काम रोक दिया गया था। विक्रम विश्वविद्धालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार अहिरवार का कहना है कि अवशेष पर दर्ज नक्काशी परमार कालीन लग रही है। ये करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है।

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