ईरान (Iran) में हिजाब सही से नहीं पहनने की मिली सजा, महिला को पुलिस ने लिया हिरासत में

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 16 सितंबर 2022 | जयपुर-ईरान: ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान में मासा अमीनी अपने परिवार के साथ घूम रही थी। जब उन्हें ईरान के कुछ पुलिस ऑफिसर ने डिटेन कर लिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने हिजाब सही तरीके से नहीं पहना था जिसके लिए  उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया।

अधिकारियों ने उन्हें टॉर्चर किया। जिसकी वजह से उनकी हालत खराब हो गई और स्थिति अब यह है कि मासा कोमा में है। ईरान में पहले भी इस तरह के कई मामले आ चुके हैं। जहां महिलाओं पर हिजाब अनिवार्यता का मामला सामने आया है। जिसका जमकर विरोध किया जा रहा है सोशल मीडिया पर # No To Hijab के कैंपेन चलाए जा रहे हैं।

ईरान वायर की रिपोर्ट

ईरान की एक वेबसाइट ईरान वायर की रिपोर्ट के अनुसार गश्त-ए- इरशाद  ने मासा को हिरासत में लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक मासा का हिजाब कायदे से ना पहनना उसकी गिरफ्तारी का कारण बताया गया। गश्त-ए- इरशाद ईरान की एक स्पेशल यूनिट है, जो महिलाओं के लिए पूर्व निर्धारित ड्रेस कोड की निगरानी और सही रूप से  ड्रेस कोड का पालन करवाने के लिए बनाई गई हैं। 

तेहरान की पुलिस ने एक बयान जारी किया। जिसमें बताया की उन्होंने मासा को बाकी महिलाओं के साथ ड्रेस कोड के नियमों के बारे में समझाने के लिए डिटेन किया था। वही कियारेश जो  मासा के भाई हैं, ने ईरान वायर से बात करते हुए बताया की जब वह पुलिस स्टेशन के बाहर अपनी बहन मासा के बाहर आने का इंतजार कर रहे थे।  तभी उनकी बहन तो नहीं आई पर  पुलिस स्टेशन से एक एंबुलेंस बाहर निकली जो सीधे अस्पताल पहुंची। पूछने पर पता चला कि उस एंबुलेंस में मासा है और उन्हें हार्ट अटैक आया है।

स्थिति ज्यादा गंभीर है, और वह कोमा में है। कियारेश का कहना है कि वह पुलिस के खिलाफ कंप्लेन दायर करेंगे। “मेरे पास अब खोने के लिए कुछ नहीं है। मैं इस मामले को ऐसे नहीं जाने दूंगा। गिरफ्तारी होने और अस्पताल भेजे जाने में केवल 2 घंटे का अंतर था और ऐसा कैसे हो सकता है?”

हिजाब विरोध प्रदर्शन, #No To Hijab कैंपेन

ईरान में हिजाब के विरुद्ध पिछले कुछ वर्षों से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना हैं, की हिजाब पहनना या ना पहनना किसी की अपनी इच्छा हो सकती है यह अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। दरअसल  ईरानी क्रांति(1979) के बाद ईरान में शरिया कानून आ गया था। और इसी के तहत महिलाओं को हिजाब रखना, ढीले कपड़े पहनना जैसे आदेश दिये गए और ऐसा ना करने वालों पर फाइन लगाया जाता या कई मामलों में सजा दी जाती थीं। जिसका विरोध पिछले कुछ सालों से किया जा रहा हैं। इसी साल के 12 जुलाई को ईरान में वुमन एक्टिविस्ट ने हिजाब के विरुद्ध मार्च किया। सोशल मीडिया पर भी  #No To Hijab कैंपेन चलाया गया।

यूएस न्यूज़ (U.S. News)

यूएस न्यूज़ (U.S. News) की वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में विशेष रूप से अनिवार्य हिजाब के खिलाफ पुशबैक का एक विस्फोट देखा गया है, जो 2014 में माई स्टेल्थी फ्रीडम  नामक एक ऑनलाइन अभियान के निर्माण में भारी रूप से निहित है, जिसमें पहली बार ईरानियन महिलाओं कि वह तस्वीरें एकत्र की गई जहां उन्होंने हिजाब नहीं पहना है और यह 2018 की गर्ल्स ऑफ रिवोल्यूशन स्ट्रीट प्रोटेस्ट में भी जारी रहा। इस न्यूज़  (U.S. News)  वेबसाइट में बताया गया है, कि ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति हसन रूहानी के कार्यालय की एक शोध शाखा, ईरानी सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, आठ साल पहले, ईरान में 49% पोल रेस्पोंडेंट ने कहा था कि हिजाब पहनने का विकल्प एक “निजी मामला” होना चाहिए।

इसके बाद 2020 में प्रकाशित एक पोल सर्वेक्षण में 72% ईरानियों ने हिजाब को अनिवार्य करने का विरोध किया। इस विरोध प्रदर्शन (# no hijab) में  ना केवल महिलाएं बल्कि पुरुष भी हिस्सा ले रहे हैं। खास तौर पर मासीह के अभियान के बाद पुरुषों की भूमिका हिजाब के विरुद्ध प्रदर्शन (#No To Hijab)  में देखी गई। उनका कहना है कि हिजाब पहनना या ना पहनना यह किसी का भी निजी मामला हैं। मसीह के अभियान के दौरान कई तस्वीरें और वीडियो आए, जिसमें पुरुष अपनी पत्नी या बहनों के साथ दुपट्टा या स्कार्फ पहने हुए दिखें। जहां वे यह कहते हैं कि हम औरतों के अपनी मर्जी से हिजाब पहनने या ना पहनने के विकल्प का समर्थन करते हैं।

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