महिला अधिकार : आदिवासी महिलाओं को आजभी स्तन ढ़कने का अधिकार नहीं, ब्लाउज पहनेपर पाबंदी, कैसा लोकतंत्र

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो || सितंबर 20, 2020 || जयपुर : ब्राह्मण राज्य त्रावणकोर में आज़ादी से पहले महिलाओं को अपने स्तन ढ़कने का अधिकार नहीं था। बल्कि उन्हें अपने ही स्तन ढ़कने की एवज में ब्राहमण शासकों को टैक्स देना पड़ता था। जो महिलाएँ आर्थिक रूप से संपन्न थी वे टैक्स देकर अपने स्तन ढ़क लेती थी। और जो सक्षम नहीं थी उन्हें कमर से ऊपर अपने बदन को नग्न रखने को मजबूर थी। 1719 से 1949 तक वजूद में रही इस रियासत का विस्तार केरल से तमिलनाडु के कई हिस्सों तक था। श्री पद्मनाभनस्वामी मंदिर भी इसी विरासत का हिस्सा है। सोचो .! यही व्यवस्था स्वतंत्र भारत में भी बदस्तूर जारी हो तो क्या उसे लोकतंत्र कह सकते हैं ? छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र की महिलाएँ साड़ी के साथ ब्लाउज़ अब भी नहीं पहन सकती हैं, इससे बड़ी बिडंबना क्या हो सकती है! छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के मुताबिक़ उनको साड़ी के साथ ब्लाउज पहने की इज़्ज़ाजत किसी महिला को नहीं है। किसी दकियानूसी परंपरा के चलते साड़ी के साथ ब्लाउज़ नहीं पहनती महिलाएँ। यह परंपरा हो या पाबंदी, पर लोकतंत्र पर कलंक जरूर है, जिस पर सरकार को तत्काल रोक लगानी चाहिए। महिलाएँ साड़ी के साथ ब्लाउज नहीं पहन सकती यहाँ के परंपरा के मुताबिक महिलाओं को ब्लाउज पहनने की अनुमति नहीं है। भारत के छत्तीसगढ़ में आदिवासी आंचलों में काम करती महिलाएँ साड़ी के साथ ब्लाउज बिलकुल भी नहीं पहनती है। आपको बता दे इतना ही नहीं इस परंपरा के अंतर्गत महिलाएँ ना तो खुद ब्लाउज पहनती है। ना ही गाँव की किसी और महिलाओं को इसे पहनने देती हैं। जिन इलाकों में ये लोग रहते है। वहाँ के रहने वाले लोग शुरू से अपनी परंपरा को निभाते चले आ रहे हैं। पर अब यह वाहियात सोच ख़त्म होनी चाहिए। साड़ी के साथ ब्लाउज पहनने लगी इस क्षेत्र में रहने वाले लोग लगभग 1000 साल से इस परंपरा को लोग निभाते चले आ रहे हैं। इस तरह की आदिवासी महिलाओं का मानना है कि यह काम करने के लिए काफी सुविधाजनक होता है। अब आधुनिक फैशन ने इन इलाकों में भी दस्तक दे दी है। आज के युग में यहाँ की लड़कियाँ साड़ी के साथ ब्लाउज पहनने लगी हैं। अब इस परंपरा को बचाने में पुराने लोग लगे हुए हैं। लेकिन अब ये बात सिर्फ यहाँ कि ही नहीं रही बल्कि शहरों में अब बिना ब्लाउज साड़ी पहनने का फैशन चल पड़ा है। यहाँ पहनती है ब्लाउज फ्री साड़ी छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में ब्लाउज फ्री साड़ी पहनने का चलन सदियों से चला आ रहा है और आज भी यहाँ ट्राइबल महिलाएँ ब्लाउज फ्री साड़ी ही पहनती है। यहाँ के आदिवासी महिलाएँ आज भी खेतों में ब्लाउज फ्री साड़ी पहनकर काम करती दिखती है।

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