4 साल में गहलोत सरकार के 501वादों में से 80 फीसदी वादे अधूरे, ओपीएस, शहरी मनरेगा, फ्री बिजली की घोषणाओं के भरोसे वापसी की धुँधली उम्मीद

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 17 दिसंबर, 2022 | जयपुर-अजमेर-किशनगढ़ : गहलोत सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं। विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है। जिन घोषणाओं के भरोसे कांग्रेस 2018 में सत्ता में आयी थी, उन वादों को लेकर मूकनायक मीडिया ने सरकार की एक मार्कशीट तैयार की है। कुछ समय पहले खुद सीएम अशोक गहलोत ने सभी विधायकों को चेतावनी दी थी कि वे समय रहते जनता के बीच विकास कार्यों का प्रचार करना शुरू कर दें, ऐसा नहीं होने पर सरकार का रिपीट करना मुश्किल हो जायेगा।

वैसे तो कांग्रेस ने सरकार में आने के लिए 501 वादे किए थे, लेकिन आम जनता से जुड़ी 15 बड़ी घोषणाओं के अमल के आधार पर हमने मार्कशीट तैयार की तो मोटे तौर पर ये तीन पॉइंट सामने आए…

  • इन 15 में से 12 घोषणाएं अधूरी हैं, यानी इन पर काम तो शुरू हो गया, लेकिन लोगों को पूरा फायदा अब तक नहीं मिला
  • इन घोषणाओं के आधार पर सरकार की मार्कशीट बनाएं तो सरकार जैसे-तैसे फर्स्ट डिवीजन से पास तो हो रही है
  • सिर्फ तीन घोषणाओं में गहलोत सरकार को डिस्टिंक्शन मिली है

इन 2 कारणों से ये वादे अब पूरे नहीं हो सकते

  1. अब कहने को भले ही सरकार के सामने 11 महीने बचे हैं, लेकिन असल में देखा जाए तो काम करने के बमुश्किल 6 महीने ही हैं। कार्यकाल के अंतिम 6 माह में बड़े फैसले लेने में नौकरशाही भी आनाकानी करने लगती है। ऐसे में रूटीन काम ही होते हैं।
  2. अंतिम 6 माह में बड़े फैसले नहीं होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि नई सरकार आते ही सबसे पहले पिछली सरकार के 6 महीनों के कामों की जांच कराती है। कामों की जांच कराने की परंपरा पिछली कुछ सरकारों के समय से ही बनी है।

मूकनायक मीडिया ने राजस्थान सरकार के कामकाज को लेकर 33 जिलों में सर्वे किया। इसमें छ: सवाल पूछे 

  1. क्या आप सरकार के काम से खुश हैं?                                                           जवाब : 36 फीसदी खुश, 64 फीसदी नाखुश, और 08 फीसदी तटस्थ
  2. क्या सरकार ने युवाओं का भरोसा खोया?                                                       जवाब : 24 फीसदी खुश, 72 फीसदी नाखुश, और 04 फीसदी तटस्थ
  3. पिछले एक साल में सरकार के काम ज्यादा नजर आए या आपसी विवाद?            जवाब : 26 फीसदी काम, 74 फीसदी विवाद
  4. सरकार की सबसे प्रभावी योजना कौनसी लगी?                                                जवाब : ओपीएस
  5. किस चीज में सरकार ज्यादा विफल रही?                                                        जवाब : लॉ एंड आर्डर और जनप्रतिनिधियों का भ्रष्टाचार
  6. दलित-आदिवासियों पर हुए अत्याचारों को रोकने में विफल रही गहलोत सरकार?   जवाब : 14 फीसदी नहीं, 86 फीसदी हाँ

घोषणा पत्र से अलग तीन घोषणाएं, जिस पर गहलोत की उम्मीदें टिकींc1 20221103 20244303 1024x1024 1 287x300 4 साल में गहलोत सरकार के 501वादों में से 80 फीसदी वादे अधूरे, ओपीएस, शहरी मनरेगा, फ्री बिजली की घोषणाओं के भरोसे वापसी की धुँधली उम्मीद
ओपीएस : मार्च, 2022 में प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू किया। पूरे देश में इस घोषणा से हलचल मच गई और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना। केंद्रीय एजेंसियां इसका विरोध कर रही हैं। प्रदेश में 7.5 लाख कर्मचारियों में से केवल 1.5 लाख को ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) का लाभ मिल रहा था।

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए ने 2004 में  संसद में एक बिल पेश कर देश में ओपीएस को खत्म कर दिया था और एनपीएस (न्यू पेंशन स्कीम) लागू किया, जो शेयर मार्केट बेस थी। अब राजस्थान सरकार ने ओपीएस लागू कर सभी कर्मचारियों को पेंशन के दायरे में ले आई।

मुख्यमंत्री ने इस घोषणा का अगले चुनाव में पूरा माइलेज लेने के लिए इसे लागू कर दिया। राज्य में घाटे की अर्थव्यवस्था है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस योजना के लिए 41 हजार करोड़ रुपए कहां से आएगा।

शहरी मनरेगा : कांग्रेस के नेतृत्व में बनी यूपीए सरकार की सबसे बड़ी नरेगा योजना को शहर में लागू करने की घोषणा मुख्यमंत्री गहलोत ने 2022 के बजट में की थी। इसे लागू भी कर दिया गया है, लेकिन ग्रामीण मनरेगा जैसा क्रेज देखने को नहीं मिल रहा। योजना को शुरू कुछ महीने ही हुए हैं, अब तक 3 लाख 50 हजार लोगों के जॉब कार्ड बने हैं, इसमें उन्हें 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी जा रही है।

इसके लिए उन्हें प्रतिदिन मजदूरी 259-333 रुपए मिलती है। शहरों में मजदूरों को इससे दोगुना पैसा मिल जाता है, इसलिए इसे सफलता नहीं मिल पाई है। राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि इस योजना में कुछ कमियां हैं।

फ्री बिजली : पूरे राजस्थान में सरकार 24 घंटे बिजली नहीं दे पाई, लेकिन अपनी इस कमी को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत ने फ्री बिजली की स्कीम शुरू की। 2022 में शुरू हुई इस स्कीम के तहत हर उपभोक्ता को महीने में 50 यूनिट बिजली फ्री मिल रही है।

इस योजना से घरेलू उपभोक्ताओं को 280 से 780 रुपए तक हर महीने का फायदा हो रहा है। राजस्थान में जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम के करीब 1.18 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को इसका फायदा दिया जा रहा है। इसमें BPL,लघु घरेलू और सामान्य घरेलू तीनों तरह के उपभोक्ता शामिल हैं।

स्वास्थ्य से जुड़ी स्कीम पर टिकी इमेज
इस मार्कशीट पर गौर करें तो समझ आता है कि राजस्थान सरकार की पूरी इमेज सिर्फ तीन योजनाओं पर टिकी है। निजी और सरकारी अस्पतालों में 10 लाख रुपए तक के कैशलेस इलाज वाली चिरंजीवी योजना, इस योजना से जुड़े परिवार का 5 लाख रुपए तक का नि:शुल्क दुर्घटना बीमा और सरकारी अस्पतालों में 709 तरह की नि:शुल्क दवाइयां की योजना राजस्थान में चल रही हैं।

इन योजनाओं का राजस्थान में अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिल रहा है। चिरंजीवी योजना लागू होने के बाद 27 लाख 60 हजार लोगों को इसका फायदा मिला है। इसमें 3 हजार 195 करोड़ रुपए सरकार खर्च कर चुकी है।

इसी वजह से कार्यकाल के आखिरी साल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी तक चिरंजीवी योजना, दुर्घटना बीमा योजना और नि:शुल्क दवा योजना को लेकर अपनी सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं और अगले चुनाव के मद्देनजर पूरी ब्रांडिंग की जा रही है।

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