NEET JEE स्टूडेंट्स सुसाइड, सरकारी गाइडलाइन की पालना की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी कलेक्टर की, शासन की लापरवाही भुगत रहे पेरेंट्स

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 19 दिसंबर, 2022 | जयपुर-कोटा-दिल्ली : सरकारी गाइडलाइन की पालना की मॉनिटरिंग के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय कमेटी बनाई जानी थी। इस कमेटी में कलेक्टर, SP, CEO/EO/, नगर विकास प्राधिकरण न्यास का सेक्रेटरी, CMHO, ASP, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर द्वारा नामित कोचिंग संस्थानों के दो प्रतिनिधि, किन्हीं 2 स्टूडेंट्स के पेरेंट्स, CDPO, कलेक्टर द्वारा नामित 2 NGO, 2 मनोवैज्ञानिक या मोटिवेशनल स्पीकर और ADM को मेंबर बनाया गया था। ये एक महीने पहले ही राजस्थान सरकार की ओर से जारी की गई कोचिंग गाइडलाइन- 2022 के कुछ पॉइंट्स हैं।

  • कोचिंगों को संडे को छुट्‌टी रखनी होगी, इस दिन टेस्ट भी नहीं ले सकेंगे।
  • IIT और मेडिकल एंट्रेस में सफल न होने की स्थिति में दूसरे कॅरिअर ऑप्शन के बारे में बताया जायेगा।
  • स्टूडेंट्स के कोचिंग छोड़ने की स्थिति में फीस रिफंड का प्रावधान होगा।
  • कोचिंग के खिलाफ समस्या बताने के लिए एक कम्पलेन्ट पोर्टल बनाएंगे।
  • फर्जी प्रचार से छात्रों को बेवकूफ बनाने पर कोचिंगों पर सख्त करवाई की जायेगी।

क्या सच में इस गाइडलाइन का पालन हो रहा है? पहले पढ़िए स्टूडेंट्स के मन की बात…768 512 17196078 thumbnail 3x2 ppppp 300x208 NEET JEE स्टूडेंट्स सुसाइड, सरकारी गाइडलाइन की पालना की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी कलेक्टर की, शासन की लापरवाही भुगत रहे पेरेंट्स

इन सवालों का जवाब जानने के लिए मूकनायक मीडिया टीम ने कोटा के 5 कोचिंग इंस्टीट्यूट में जाकर रियलिटी चैक किया और वहां पढ़ रहे कई स्टूडेंट्स से बात की।

पहला स्टूडेंट : सर, मैं बहुत परेशान हूं। फिजिक्स मेरी समझ में आ नहीं रहा है। कोचिंग में टीचर केवल स्टार बैच वाले टैलेंटेड बच्चों पर ही फोकस करते हैं। घरवालों का डेढ़ लाख रुपया बर्बाद हो गया है। कुछ समझ ही नहीं आता है।

दूसरी स्टूडेंट : रात 12 बजे सोकर सुबह 5 बजे उठ जाती हूं। रोज 16 घंटे पढ़ती हूं, इसके बावजूद हर टेस्ट में कम नंबर आते हैं। पापा फोन पर सबसे पहले यहीं पूछते हैं- कितने नंबर आए टेस्ट में?

तीसरा स्टूडेंट : हॉस्टल से बाहर निकलना होता है तो वार्डन को रुपए देने पड़ते हैं। ऐसा लगता है हॉस्टल में नहीं, किसी जेल में हैं। रुपए देंगे तो ही सर्दियों में गर्म पानी और बढ़िया खाना मिलेगा।

ये सिर्फ बानगी है… कोटा में पढ़ रहे हर तीसरे स्टूडेंट का यही दर्द है। 5 दिन पहले कोटा में कोचिंग कर रहे ऐसे ही 3 स्टूडेंट ये दर्द नहीं झेल पाए और सुसाइड कर लिया। तीन सुसाइड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया।

कोचिंग इंस्टीट्यूट जाकर मूकनायक मीडिया ने की पूरी पड़ताल…

कोचिंग वालों को पता नहीं, गाइडलाइन क्या है?

कोचिंग 1 : मूकनायक मीडिया टीम एक कोचिंग इंस्टीटयूट में पहुंची। टीम स्टूडेंट्स से बात कर रही थी, तभी कोचिंग का स्टाफ आया और स्टूडेंट्स से बात करने से मना किया। हमने स्टाफ से गाइडलाइन के बारे में पूछा तो बोले-बड़े अधिकारियों से बात करो। सायकाइट्रिस्ट के बारे में पूछा तो बोले- काउंसर भी हैं और सायकाइट्रिस्ट भी हैं। उनके नाम पूछे तो बोले-पता नहीं हैं। कोचिंग के स्टूडेंट्स वेलफेयर के अध्यक्ष से बात की तो बोले कि मुझे कुछ पता नहीं है। आप PRO से बात करें।

कोचिंग 2 : यहां स्टूडेंट्स ने बताया- पहले संडे को टेस्ट के लिए बुलाया जाता था। यहां भी स्टूडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन बनाया गया, जिसमें 20 का स्टाफ है। ऑफिस पहुंचे तो 5 युवक बैठे थे। उनसे गाइडलाइन को लेकर पूछा तो बोले- गाइडलाइन का पता नहीं है, लेकिन स्टूडेंट्स जो प्रॉब्लम लेकर आते है, उसे सॉल्व कर देते हैं। वहां पर कुछ फाइलें रखी थीं, उन्हें देखा तो स्टूडेंट़स के माफीनामे लिखे हुए थे।

मॉनिटरिंग कमेटी को पता नहीं- क्या गाइडलाइन है?

गाइडलाइन के पालन के लिए शासन ने मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाई है। कमेटी के कई सदस्यों को पता नहीं है कि गाइडलाइन क्या है तो किसी को मैसेज मिला तब पता चला कि वह कमेटी का सदस्य है…

  • कमेटी में गुलाबचंद पोटर अभिभावक प्रतिनिधि के तौर पर सदस्य हैं। उनसे बात की तो बोले- अभी 7 दिन पहले ही कमेटी में जोड़ने का मैसेज मिला है। गाइडलाइन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
  • कमेटी के सदस्य पंकज सक्सेना ने बताया- 7 दिन पहले कमेटी का गठन हुआ है। तभी पता लगा कि मुझे मेंबर बनाया है। मुझे गाइडलाइन का प्रिंटेड ब्रीफ अभी तक नहीं मिला है। ADM साहब ही गाइडलाइन बता सकते हैं।
  • कमेटी के मेंबर ADM ब्रजमोहन बैरवा ने बताया- कमेटी का काम तो मैं देख रहा हूं, लेकिन ऑन रिकॉर्ड ADM प्रशासन इसके मेंबर है। दो बार कमेटी की मीटिंग हो चुकी है। 24 नवंबर को कमेटी का गठन हुआ था। कमेटी मेंबर्स ने अब तक कोटा के सभी कोचिंग संस्थानों व हॉस्टलों का निरीक्षण कर लिया है। गाइडलाइन तो सरकार ने जारी की है, देख कर बताता हूं। आप कलेक्टर साहब से बात करो।

स्टूडेंट्स के लिए नहीं बन पाए कॉमन वेलनेस फेसिलटेशन सेंटर्सkota suicide7 1671284205 217x300 NEET JEE स्टूडेंट्स सुसाइड, सरकारी गाइडलाइन की पालना की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी कलेक्टर की, शासन की लापरवाही भुगत रहे पेरेंट्स

गाइडलाइन: जिला प्रशासन को कोचिंग इंस्टीट्यूट के सहयोग से स्टूडेंट्स के लिए उनके कोचिंग व रेजीडेंशियल बिल्डिंग के नजदीक एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स व कल्चरल इवेंट्स के लिए कॉमन वेलनेस फेसिलिटेशन सेंटर्स बनाने थे। इस सेंटर्स पर सायकाइट्रिस्ट की नियुक्ति कर उनके जरिए स्टूडेंट्स के स्टडी प्रेशर व स्ट्रेस को हल्का किया जाना था। यहीं पुलिस हेल्प डेस्क कियोस्क भी बनना था।

हकीकत : पूरे कोटा शहर में ये फेसिलिटेशन सेंटर्स नहीं बन पाए। …और सफाई देते हुए ADM ब्रजमोहन बैरवा ने कहा- कोचिंग में ही स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बनाई गई है। वहीं एडिशनल SP प्रवीण जैन ने बताया कि शहर में पुलिस हेल्पडेस्क की पांच चौकियां बनाई गई हैे। यहां एक ASI और दो कॉन्स्टेबल हैं।

कोचिंग में मिलनी थी कॅरियर काउंसलिंग की सुविधा, यहां मिल रहा तनाव

गाइडलाइन : कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को अपने संस्थान में स्टूडेंट्स के कॅरियर गाइडेंस के लिए कॅरियर काउंसलर का अपॉइंटमेंट करना होगा। ये काउंसलर्स कमजोर स्टूडेंट्स को नए कॅरियर ऑप्शन की जानकारी देंगे।

हकीकत : एक भी कोचिंग इंस्टीट्यूट में ऐसे काउंसलर्स नहीं है। हां, स्टूडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी के नाम पर कोचिंग ने कुछ कर्मचारी हायर किए हैं, जिनका काम काउंसलिंग के बजाय स्टूडेंट्स से किसी गलती पर संस्थान के पक्ष में माफीनामे लिखवाने का रह गया है। इतना ही नहीं इन वेलफेयर सोसाइटीज को चला रहे लोग इंस्टीट्यूट की परमिशन के बिना मीडिया से बात तक करने को तैयार नहीं हैं।

हॉस्टल्स के अनट्रेंड कर्मचारी स्टूडेंट्स को लूट रहे, धमकाते भी हैं

  • हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं : भास्कर पड़ताल में सामने आया कि कोटा में पढ़ रहे ज्यादातर स्टूडेंट्स पीजी हॉस्टल्स में रह रहे हैं। इन हॉस्टल्स का कहीं कोई पक्का रजिस्ट्रेशन नहीं है। हर रोज नए हॉस्टल्स शुरू हो रहे हैं। खुद पुलिस और प्रशासन को पता ही नहीं कि शहर में कितने हॉस्टल और पीजी संचालित हो रहे है। ये हॉस्टल्स किसके है। वहीं कब इनकी लीज ओनरशिप चेंज हो जाती है, ये स्टूडेंट्स को ही पता नहीं चल पता है।
  • अनट्रेंड स्टाफ : इन हॉस्टल्स में ट्रेंड वार्डन की जगह अनट्रेंड लोग काम कर रहे है। जिन्होंने स्टूडेंट्स को डरा-धमका लूटने का काम कर रखा है। कई स्टूडेंट्स ने हमें बताया कि जब हॉस्टल्स में एडमिशन लेते है तो वार्डन या मैनेजर बहुत मीठी-मीठी बाते बोलता है, लेकिन जैसे ही सिक्योरिटी मनी जमा हो जाती है, उसके बाद तो हम बस उसके बंधक बन कर रह जाते है। कभी कभार थोड़ा बाहर निकलना होता है तो इन वार्डन्स को रुपए देने पड़ते हैं। हक की सुविधा जैसे गर्म पानी, बढ़िया खाना लेने के लिए भी इन्हें रिश्वत देनी पड़ती है।
  • धमकाना और मारपीट : अगर कोई स्टूडेंट्स इनके खिलाफ जाता है तो उसके साथ मारपीट तक कर देते हैं। गर्ल स्टूडेंट्स के साथ तो एक अलग दिक्कत ये भी है कि उन्हें बदनाम करने के नाम पर वार्डन्स उनसे पैसे वसूलती है। एक गर्ल स्टूडेंट्स ने ऑफ़ कैमरा हमें बताया कि एक बार उसने वार्डन की शिकायत की तो अगले दिन वार्डन ने उस पर आरोप लगा दिए कि में रात को चुपके से लड़कों को बुलाती हूं और कमरे में अंदर ड्रिंक भी करती हूं। किसी ने मेरी बात नहीं सुनी और आखिरकार मुझे वार्डन को 2 हजार रुपए इस शिकायत को घर तक नहीं पहुंचाने के लिए देने पड़े, तब जाकर शांति हुई।
  • रोज 10 शिकायतें : SP केशर सिंह बताया कि बच्चों को परेशान करने की हॉस्टल की काफी बार शिकायतें मिलती हैं। अभी एक हॉस्टल को भी सीज किया गया है जिसमें 140 बच्चे थे। बच्चों को दूसरी जगह पर शिफ्ट कर रहे हैं। पुलिस ने बच्चों की सुविधा के लिए हेल्पडेस्क बनाई है। जहां एक महीने में ही 300 से ज्यादा शिकायतें अभी तक मिल चुकी हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स वेलफेयर के पास भी महीने की 300 से ज्यादा शिकायत पहुंचती हैं। कॉल सेंटर पर भी रोजाना 8-10 शिकायत पहुंचती हैं।
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