चीन में कोरोना की भयानक लहर, भारतीयों से प्रोपेगैंडा वीडियो बनाकर चीन की इमेज सुधारने की कोशिश का भंडाफोड़, स्कूलों में स्टूडेंट मुखबिर तैनात

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 02 जनवरी, 2023 | जयपुर-गुआंगडोंग-दिल्ली : बीते महीने चीन से ऐसी खबरें आईं कि दिसंबर के शुरुआती 20 दिन में करीब 25 करोड़ लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके थे। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लोग फल खा रहे हैं, और देश में संतरे की कमी हो गई है। कोरोना से डरे लोग ब्लड डोनेट नहीं कर रहे, इससे ब्लड बैंक्स में खून की भारी कमी हो गई। इसके बावजूद जिनपिंग सरकार ने जीरो कोविड पॉलिसी हटा ली। नए मरीजों का डेटा और मौतों की संख्या पहले काफी कम बताई, फिर 25 दिसंबर से बताना ही बंद कर दिया।

इन खबरों से दो बातें पता चलीं। पहली कि चीन में कोरोना की भयानक लहर चल रही है। और दूसरी कि सरकार इससे बेपरवाह है। चीन के शहरों में लाखों केस रोज मिल रहे हैं, पर अचानक कुछ वीडियो आने लगे, जिनमें चीन में रह रहे भारतीय कहते हैं कि यहां कोरोना नहीं है। इंडियन मीडिया में चल रही खबरें गलत हैं। हमने चीन में मौजूद अपने सोर्सेज से पूछा कि ये क्या मामला है। इनमें यूनिवर्सिटीज के प्रोफेसर और रिसर्च स्कॉलर शामिल हैं। उन्होंने वहां के हालात को लेकर बहुत सी बातें बताईं, लेकिन नाम न देने की ताकीद भी की।

maxresdefault 26 300x169 चीन में कोरोना की भयानक लहर, भारतीयों से प्रोपेगैंडा वीडियो बनाकर चीन की इमेज सुधारने की कोशिश का भंडाफोड़, स्कूलों में स्टूडेंट मुखबिर तैनातचीन सरकार वीडियो के जरिए प्रोपेगैंडा चला रही
भारतीयों के वीडियो लगातार सामने आना चीन सरकार का प्रोपेगैंडा है। कम्युनिस्ट पार्टी की लोकल यूनिट से जुड़े लोग ऐसे वीडियो बनवा रहे हैं, ताकि कोरोना की वजह से चीन की इमेज खराब न हो। आमतौर पर ऐसे आदेश बीजिंग से लीडरशिप की तरफ से आते हैं।

जो विदेशी चीन में रहते हैं, उनसे ‘चाइना इन माई आइज’ यानी ‘मेरी नजर में चीन’ कैम्पेन के तहत वीडियो बनवाए जाते हैं। ये वीडियो सरकारी मीडिया साइट पीपुल्स डेली पर अपलोड होते हैं। अच्छे वीडियोज को अवॉर्ड दिया जाता है, यानी ये एक तरह का पेड मूवमेंट हैं। यिवू, शेनजेन और गुआंगडोंग में भारत के कारोबारी ज्यादा रहते हैं। यहां काफी स्टूडेंट भी हैं। ज्यादातर वीडियो इन्हीं शहरों में बनाए गए हैं।

सरकार की इमेज सुधारने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी का अभियान
कम्युनिस्ट पार्टी का एक सिस्टम है। अगर सरकार को अपने सपोर्ट में कोई कैम्पेन चलाना होता है तो इसके लिए मौखिक आदेश आता है। निगम पार्षद जैसे पदाधिकारी के जरिए ये बात लोगों तक पहुंचाई जाती है। कोरोना के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। भारतीयों से कहा गया कि वे बताएं कि इंडियन मीडिया में चल रही बातें गलत हैं, चीन में सब ठीक है।

हमने दो शहरों ग्वांगझू और शेनजेन में बनाए दो वीडियो देखे। दोनों में लगभग एक ही बात कही गई। पहली- इंडियन मीडिया गलत बता रहा है कि चीन में कोरोना से रोज 5 हजार मौतें हो रही हैं। और दूसरी- लोग बीमार हैं या कोविड है, लेकिन उतना नहीं, जितना भारत में बताया जा रहा है। हालांकि भास्कर ये वीडियो बनाने के मोटिव पर कोई दावा नहीं करता।

चीन में हर इन्फॉर्मेशन पर निगरानी, नियम तोड़ने पर जेलcoronavirus BF.7 Variant 300x169 चीन में कोरोना की भयानक लहर, भारतीयों से प्रोपेगैंडा वीडियो बनाकर चीन की इमेज सुधारने की कोशिश का भंडाफोड़, स्कूलों में स्टूडेंट मुखबिर तैनात
चीन के पास प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए पूरा सिस्टम है। हालांकि, चीन से कोई भी इन्फॉर्मेशन दूसरे देश भेजना काफी मुश्किल है। सरकार इसकी निगरानी करती है। इससे बचने के लिए कई लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी VPN जैसे तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इसमें भी खतरा बढ़ता जा रहा है। कुछ लोगों को VPN बेचने के लिए जेल जाना पड़ा है और कुछ पर जुर्माना लगाया गया है।

VPN खरीदने के लिए 100 से 200 डॉलर चुकाने होते हैं। अगर ये ब्लॉक हो जाए, तो फिर नया खरीदना पड़ता है। कार्रवाई से बचने के लिए लोग चीनी सोशल मीडिया ऐप के जरिए इन्फॉर्मेशन शेयर नहीं करते। वे आमतौर पर थाईलैंड के लाइन ऐप या वियतनाम के सोशल मीडिया ऐप का इस्तेमाल करते हैं।

इन्फॉर्मेशन थाईलैंड या वियतनाम भेजी जाती है और वहां से उसे फॉरवर्ड किया जाता है। अगर कोई ऐसा करते पकड़ा जाता है कि तो उसे अरेस्ट तक कर लिया जाता है। इसीलिए चीन आने वाले विदेशियों को एंट्री से पहले ही पुलिस एक हफ्ते की ट्रेनिंग देती है, जिसमें बताया जाता है कि क्या करना है और क्या नहीं।

चीन का इंटरनेट सेंसरशिप सिस्टम ‘ग्रेट फायरवॉल’
चीन में इंटरनेट सेंसरशिप सिस्टम ‘ग्रेट फायरवॉल’ 22 साल से काम कर रहा है। तब मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक सिक्योरिटी ने इंटरनेट कंटेंट कंट्रोल करने, लोगों की पहचान करने, उनका पता लगाने और तुरंत निजी रिकॉर्ड खोजने के लिए सेंसरशिप और निगरानी सिस्टम बनाया था। इसके लिए ‘गोल्डन शील्ड प्रोजेक्ट’ लॉन्च किया गया।

इस फायरवॉल ने सबसे पहले सिर्फ कुछ कम्युनिस्ट विरोधी चीनी वेबसाइटों को ब्लॉक किया। धीरे-धीरे ज्यादातर वेबसाइट ब्लॉक कर दी गईं। जनवरी 2010 में गूगल को चीन छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि उसने सर्च रिजल्ट फिल्टर करने की चीनी सरकार की गुजारिश को नहीं माना था।

जिनपिंग के राज में सेंसरशिप ज्यादा बढ़ी
2012 के आखिर में शी जिनपिंग कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बने। और फिर चीन के सबसे बड़े नेता बन गए। सिविल सोसाइटी और विचारों पर रोक जिनपिंग के राज की पहचान रही है। नवंबर 2013 में कम्युनिस्ट पार्टी ने डॉक्यूमेंट नंबर 9 जारी किया। इसमें पार्टी के सदस्यों को शासन के खिलाफ ‘सात खतरों’ की तलाश में रहने के लिए कहा गया। इनमें सिविल सोसाइटी और प्रेस की आजादी भी शामिल थी।

धीरे-धीरे चीन में इंटरनेट सर्फिंग का एक्सपीरियंस बदलता गया। संवेदनशील शब्दों और फोटो की लिस्ट बढ़ती गई। आर्टिकल और कमेंट तुरंत हटा दिए गए। सरकार ने ऐसा सिस्टम बनाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से संवेदनशील शब्दों या वाक्यों की इमेज को स्कैन किया जा सकता है। ग्रेट फायरवॉल ने ज्यादा से ज्यादा विदेशी वेबसाइट्स को बंद कर दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की तरह ट्विटर भी अब चीन में अवेलेबल नहीं है।

स्कूलों में स्टूडेंट मुखबिर, शिकायत पर टीचर्स को ‘सजा’ मिलीCovid 19 New Variant 300x225 चीन में कोरोना की भयानक लहर, भारतीयों से प्रोपेगैंडा वीडियो बनाकर चीन की इमेज सुधारने की कोशिश का भंडाफोड़, स्कूलों में स्टूडेंट मुखबिर तैनात
सरकार ने हर लेवल पर स्कूलों पर आइडियोलॉजिकल कंट्रोल भी कड़ा किया है। 2019 में जिनपिंग ने देश भर में आइडियोलॉजी और पॉलिटिकल थ्योरी पढ़ाने वाले शिक्षकों से क्लास में ‘गलत विचारों और उनके ट्रेंड्स’ का विरोध करने के लिए कहा था। अब यूनिवर्सिटी के लेक्चरर अगर किताब के कंटेंट से अलग कुछ पढ़ाते हैं, तो स्टूडेंट मुखबिर इसकी खबर दे देते हैं। ये छात्र लगातार प्रोफेसरों के राजनीतिक विचारों की निगरानी और रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। क्लास में सरकार की आलोचना करने के लिए विदेशी टीचर्स सहित कुछ प्रोफेसरों को सजा दी गई है।

ट्विटर यूज करने पर गिरफ्तारी
सजा का डर दिखाकर अफसरों ने कई मशहूर लेखकों और ह्यूमन राइट्स के लिए काम करने वाले वकीलों को चुप करा दिया। जुलाई 2015 में देशभर में लगभग 300 वकीलों, लीगल एडवाइजर और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट अरेस्ट किए गए थे। उन्हें प्रताड़ित किया गया और कई आज भी जेल में हैं। कुछ ट्विटर यूजर्स को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अकाउंट डिलीट करा दिए गए। चीन में दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर हैं। 2021 में इनकी संख्या करीब 94 करोड़ थी।

नई पीढ़ी गूगल और ट्विटर के बिना बड़ी हुई
पुरानी पीढ़ी के लोग ग्रेट फायरवॉल को पसंद नहीं करते थे, लेकिन जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद कॉलेज जाने वाली पीढ़ी इसका सपोर्ट करने लगी। यह पीढ़ी ट्विटर और गूगल इस्तेमाल किए बिना बड़ी हुई है। इसलिए उसका मानना ​​है कि ग्रेट फायरवॉल उन्हें गलत सूचनाओं और देश को अशांति से बचाने के लिए है। वे इसे चीन के देसी टेक दिग्गजों के उभार के लिहाज से भी सही मानते हैं। चीन सरकार की आलोचना को आसानी से अमेरिकी सरकार की साजिश मान लिया जाता है।

यह नया राष्ट्रवाद कभी-कभी बेतुका लगता है, जैसे एक मशहूर डॉक्टर ने सुझाव दिया कि चीनी बच्चों को दलिया के बजाय नाश्ते में दूध के साथ अंडे खाने चाहिए। सरकारी मीडिया ने भी उनका बचाव किया, कहा कि प्रोटीन वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद कर सकता है।

चीन में इन पॉपुलर साइट्स पर बैन
2012 के आखिर में शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन के इंटरनेट इस्तेमाल करने से जुड़े नियम ज्यादा सख्त हो गए। वॉशिंगटन के मानवाधिकार संगठन फ्रीडम हाउस ने 2021 की ‘फ्रीडम ऑन द नेट’ रिपोर्ट में चीन को ‘नॉट फ्री’ कैटेगरी में रखा है। उसे 100 में सिर्फ 10 नंबर मिले। 2020 में उसे इतने ही नंबर मिले थे।

चीन में Google, Gmail, Facebook, Twitter, The Wall Street Journal, The New York Times से लेकर PowerPoint शेयर करने वाली साइट SlideShare तक पर बैन है। न सिर्फ अंग्रेजी वेबसाइट ब्लॉक हैं, बल्कि गूगल और विकिपीडिया की चीनी वेबसाइटों को भी ब्लॉक कर दिया गया। चीन में इंटरनेट सेंसरशिप पर नजर रखने वाले Greatfire.org के मुताबिक टॉप 1,000 एलेक्सा डोमेन में से 138 चीन में ब्लॉक हैं। फ्रीडम हाउस इंटरनेट की आजादी के पैमानों के हिसाब से देशों की रैंक तय करता है। इसमें चीन को 100 में से सिर्फ 10 नंबर मिले हैं।

चीन में कोरोना से जुड़े अपडेट

  1. पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट हुआंग यानझोंग ने कहा है कि चीन सरकार सभी लोगों को कोरोना पॉजिटिव करने की कोशिश कर रही है। इसके पीछे सोच है कि कोरोना का पीक जितनी जल्दी आए, उतना अच्छा है।
  2. चीनी वसंत उत्सव के आसपास 80%-90% लोगों को संक्रमित करने की कोशिश की जा रही है। ये पूरे देश को वैक्सीन लगाने के बराबर होगा। हालांकि इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
  3. चीन के हॉस्पिटल मरीजों का प्रेशर झेल रहे हैं। फीवर क्लिनिकों में आम दिनों के मुकाबले 50 गुना तक ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इससे स्टाफ पर भी वर्क लोड बढ़ा है। ICU और आइसोलेशन वार्ड भरे हुए हैं।
  4. करीब 30 साल से बीजिंग में रह रहे डॉक्टर हॉवर्ड बर्नस्टीन ने कहा- मैंने ऐसा कभी नहीं देखा। हमारे हॉस्पिटल में लगातार मरीज आ रहे हैं। लगभग सभी बुजुर्ग हैं और उनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं।
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