ब्रेकिंग : राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द, सीएम गहलोत केस में समन पर फैसला आ सकता है आज

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 24 मार्च, 2023 | जयपुर- दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता शुक्रवार दोपहर करीब 2.30 बजे रद्द कर दी गई। वहीं सीएम अशोक गहलोत को समन जारी करने और मानहानि याचिका पर दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।  सीएम गहलोत को समन जारी करने के आदेश पर आज फैसला आ सकता है।

लोकसभा सचिवालय ने जारी की अधिसूचना
लोकसभा सचिवालय की तरफ से इस बारे में सात पंक्तियों की एक अधिसूचना जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत की तरफ से दोषी करार दिए जाने के बाद केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य किया जाता है। यह अयोग्यता उन पर दोष साबित होने के दिन यानी 23 मार्च 2023 से लागू रहेगी। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (e) के प्रावधानों और जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा आठ के तहत लिया गया है।

क्या है कानून?
बता दें कि जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक किसी भी सांसद या विधायक को अगर किसी मामले में दो या दो साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। साथ ही वह छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य हो जाते हैं। ऐसे में अगर राहुल गांधी को ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिली तो राहुल गांधी 2024 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे, जो कि उनके लिए बड़ा झटका होगा।

क्या है मामला, जिसमें राहुल को सुनाई गई सजा?
2019 लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक के कोलार में एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है? इसी को लेकर भाजपा विधायक व गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय का मान घटाया है। वायनाड से लोकसभा सदस्य राहुल ने 2019 के आम चुनाव से पहले कर्नाटक के कोलार में आयोजित जनसभा में इस मामले से जुड़ी टिप्पणी की थी।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत ने पिछले शुक्रवार को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाने के लिए 23 मार्च की तारीख तय की थी। राहुल इस मामले की सुनवाई के दौरान तीन बार अदालत में पेश हुए। अक्तूबर 2021 में बयान दर्ज कराने के लिए अदालत पहुंचे राहुल ने खुद को निर्दोष बताया था। अब इसी मामले में राहुल को सजा सुनाई गई है।

राहुल गांधी की सदस्यता क्यों गई? 
लोक-प्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के मुताबिक, अगर किसी नेता को दो साल या इससे ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उसे सजा होने के दिन से उसकी अवधि पूरी होने के बाद आगे छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान है। अगर कोई विधायक या सांसद है तो सजा होने पर वह अयोग्य ठहरा दिया जाता है। उसे अपनी विधायकी या सांसदी छोड़नी पड़ती है।

इसी नियम के तहत राहुल की सदस्यता चली गई। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि सूरत की जिस अदालत ने राहुल को सजा सुनाई है, उस अदालत ने राहुल को फैसले के खिलाफ सेशंस कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए एक महीने का समय दिया है। तब तक राहुल की सजा पर रोक है, मतलब वह इस दौरान जेल जाने से बचे रहेंगे।

उपाध्याय आगे कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार, ऐसे मामलों में सजा निलंबित होने का मतलब दोषी को केवल जेल जाने से राहत मिलती है लेकिन सजा के अन्य असर प्रभावी रहेंगे। जैसे कि अगर कोई संसद या विधानसभा का सदस्य है तो उसकी सदस्यता चली जाएगी, वोट देने का अधिकार भी खत्म हो जाएगा। चूंकि कोर्ट ने राहुल को दोषी करार कर दिया है। इसलिए नियम के अनुसार राहुल की सदस्यता चली गई है।

सीएम को समन जारी करने को लेकर आ सकता है फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा दिल्ली की कोर्ट में पेश हुए। पाहवा ने तर्क दिया कि 2019 में दर्ज हुई FIR के मामले में सीएम गहलोत ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उनके परिवार पर बेबुनियाद आरोप लगाए हैं।  पूरे परिवार को ही अभियुक्त बता दिया। इस वजह से उनकी मानहानि हुई है और प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है।

इसलिए सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलना चाहिए। दिल्ली के एडीशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरप्रीत सिंह ने मामले में प्री- समन जमा करने और सबूतों को रिकॉर्ड पर लेकर 24 मार्च को समन जारी के मामले पर आदेश देने के लिए केस को लिस्टेड किया है। इसलिए आज समन को लेकर आदेश आ सकता है।

सजा भुगतने से लाखों लोगों का भला होता है, तो कोई फर्क नहीं पड़ता- गहलोत
सीएम गहलोत ने हाल ही में जोधपुर दौरे के वक्त भी संजीवनी क्रेडिट सोसाइटी घोटाले के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि इस सोसाइटी में गजेंद्र सिंह शेखावत की ही सब चलती है, वहीं सोसायटी में सब कुछ हैं। संजीवनी सोसाइटी में उनके और उनके परिवार के लेनदेन हुए हैं। गहलोत ने कहा था कि- ‘मेरे खिलाफ उन्होंने मानहानि का केस कर दिया। मैं तो तैयार हूं भुगतने के लिए। क्योंकि लाखों लोगों को अगर पैसा वापस मिलता है, तो मुझे क्या फर्क पड़ेगा। सजा भुगतने से लाखों लोगों का भला होता है, तो कोई फर्क नहीं पड़ता।’

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