बिलकिस बानो की याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी, ‘मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन’ सीजेआई

4 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 28 मार्च, 2023 | जयपुर-दिल्ली-अहमदाबाद : सुप्रीम कोर्ट ने गैंगरेप मामले में 11 दोषियों की सजा में छूट को चुनौती देने वाली बिलकिस बानो (Bilkis Bano Rape Case) की याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को 18 अप्रैल को दोषियों को छूट देने वाली फाइलों के साथ अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की रिहाई किस मानक के आधार पर की गई है? जस्टिस केएम जोसेफ ने सवाल किया, “हमारे सामने हत्या के कई ऐसे मामले हैं जिसमें दोषी वर्षों से जेलों में बंद हैं। क्या यह ऐसा मामला है जहां मानकों को समान रूप से अन्य मामलों में भी लागू किया गया है?”

maxresdefault 40 300x169 बिलकिस बानो की याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी, मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन सीजेआईगुजरात सरकार ने पिछले साल 11 दोषियों को रिहा किया था

दरअसल, पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो केस के 11 दोषियों को रिहा कर दिया था। राज्य सरकार के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद याचिका की सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की विशेष पीठ का गठन किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा राज्य सरकार को एक ही दोषी की याचिका पर निर्णय लेने के लिए कहा गया था। लेकिन सरकार ने एक पुरानी नीति के आधार पर 11 लोगों को रिहा कर दिया था। सरकार ने जिस पैनल से परामर्श करने के बाद कदम उठाया था उसमे सत्तारूढ़ बीजेपी से जुड़े लोग शामिल थे।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्षेत्राधिकार को लेकर सवाल उठा, जिसमें बिलकिस बानो का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि जिस राज्य में मामले की सुनवाई हुई थी, उसे फैसला लेने के लिए कहा जाना चाहिए था। केस की निष्पक्ष सुनवाई के लिए मामले को गुजरात से महाराष्ट्र ट्रांसफर कर दिया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि CBI और ट्रायल कोर्ट के पीठासीन न्यायाधीश दोनों ही छूट के खिलाफ थे।

ग्रोवर ने कहा, “हत्या के 14 मामलों और सामूहिक बलात्कार के तीन मामलों में पर्याप्त सजा है। कुल 34,000 रुपये का जुर्माना और डिफॉल्ट में 34 साल सजा है। यह निर्विवाद है कि जुर्माना नहीं दिया गया है। इसलिए तया सजा आएगी, जिसे परोसा नहीं गया है।”

केंद्र की दलील थी कि दोषी पहले ही 15 साल से ज्यादा की सजा काट चुके हैं, जब उम्रकैद के दोषियों को 14 साल बाद रिहा किया जाता है। दोषियों के वकील ऋषि मल्होत्रा ने तर्क दिया कि “भावनात्मक याचिका कानूनी दलील नहीं है।” इस पर न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, “हम भावनाओं से अभिभूत नहीं होने जा रहे हैं, संतुलन बनाना होगा, यह एक भयानक अपराध है।”

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ 

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार, 22 मार्च को गुजरात सरकार (Gujarat) के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ गठित करने पर सहमति जताई है। गुजरात सरकार के आदेश में बिलकिस बानो मामले (Bilkis Bano case) में दोषी ठहराए गए 11 लोगों को समय से पहले ही रिहा करने की अनुमति दी गई थी।

क्या है बिल्किस बानो मामला?

गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के बाद 2002 के दंगों के दौरान हिंदू लोगों को गर्भवती बिल्किस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार करने और उसकी तीन साल की बेटी सहित उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था।

पिछले महीने भी चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि वह मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन करेंगे। मूकनायक मीडिया के मुताबिक, बानो की वकील शोभा गुप्ता ने कहा है कि इस मामले को शीर्ष अदालत के सामने चार बार पहले ही रखा (मेंशन) जा चुका है, लेकिन इसे अभी सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाना बाकी है:

  • सबसे पहले पिछले साल 30 नवंबर को सामने रखा (मेंशन) गया
  • फिर 14 दिसंबर को रखा (मेंशन) गया था और इस साल 2 जनवरी को अस्थायी रूप से सूचीबद्ध किया गया था
  • 20 जनवरी को गुप्ता ने फिर मामले को रखा (मेंशन)
  • 7 फरवरी को चीफ जस्टिस ने याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच गठित करने पर सहमति व्यक्त की
  • बानो की वकील शोभा गुप्ता ने बताया कि 41 दिन पहले ही इस मामले को कोर्ट के सामने रखा (मेंशन) गया लेकिन इसे सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं किया गया।

बता दें कि, मई 2022 में जस्टिस अजय रस्तोगी की अगुआई वाली एक पीठ ने कहा था कि गुजरात सरकार के पास 11 दोषियों की माफी याचिकाओं पर विचार करने का अधिकार है क्योंकि अपराध गुजरात में हुआ था। दोषियों को फिर 15 अगस्त को रिहा कर दिया गया। बानो ने शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने पिछले साल दिसंबर में इसे खारिज कर दिया था।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This