RU में शोध छात्रसंघ कार्यालय उद्घाटन में हंगामा, शोध छात्रसंघ चुनाव जितवाने में धांधली और मिलीभगत का आरोप, रजिस्ट्रार-छात्र नेताओं की हुई तीखी बहस

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 30 अप्रैल, 2023 | जयपुर-दिल्ली : राजस्थान यूनिवर्सिटी में रविवार को मंच पर पोस्टर लगाने को लेकर शोध छात्रसंघ और पंचवर्षीय लॉ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष के बीच विवाद हो गया। दोनों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की से एक छात्र पंकज चौधरी गिर गया। गिरने से उसका पैर टूट गया। उसे अस्पताल ले जाया गया। रविवार को शोध छात्रसंघ कार्यालय और पंचवर्षीय लॉ कॉलेज छात्रसंघ कार्यालय का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हाथों उद्घाटन होना था।

हालांकि बाद में बारिश के चलते सीएम का कार्यक्रम रद्द हो गया था। दरअसल इस कार्यक्रम में मंच पर शोध छात्रसंघ अध्यक्ष रामस्वरूप ओला और पंचवर्षीय लॉ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष अभय चौधरी अपने-अपने पोस्टर लगाना चाहते थे। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। इस बीच आरयू रजिस्ट्रार नीलिमा तक्षक भी यहां पहुंच गई। उन्होंने शांत किया।

अभय ने पिता से तो ओला ने विधायक से कटवाया फीता

शोध छात्रसंघ अध्यक्ष रामस्वरूप ओला ने कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी से कार्यालय का उद्घाटन कराया। इस मौके पर सुमित भगासरा, एनएसयूआई अध्यक्ष अभिषेक चौधरी सहित कई नेता मौजूद थे। पंचवर्षीय लॉ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष अभय चौधरी ने पिता से कार्यालय का उद्घाटन कराया। कुलपति राजीव जैन, अभिषेक चौधरी, विजेंद्र सिहाग सहित अन्य मौजूद थे।

छात्रसंघ अध्यक्षों के पावर खत्म, अब नाम के अध्यक्ष

आरयू में रविवार को एकेडमिक सेशन 2022-23 खत्म हो गया। सोमवार से छात्रसंघ पदाधिकारियों के अधिकार सीज हो जाएंगे। अब वे नाम के अध्यक्ष रहेंगे। डीएसडब्ल्यू नरेश मलिक ने बताया कि आरयू में एकेडमिक सेशन खत्म हो गया है।

बारिश से व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हुईं, कुर्सियां भीगी

दोपहर में शुरू हुआ बारिश का दौर शाम तक जारी रहा। इस कारण व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गई। कुर्सियां भीग गई और कार्यक्रम के लिए छात्र भी नहीं पहुंचे। बारिश को देखते हुए सीएम के आने का कार्यक्रम निरस्त हो गया।

“मंच पर पोस्टर में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मेरा फोटो छोटा कर दिया था और अभय का बड़ा कर दिया था, जबकि मेरे नाम से सीएम का कार्यक्रम फाइनल हुआ था। मैंने तो केवल इतना कहा था कि फोटो में सीनियर जूनियर का तो ध्यान रखना चाहिए।”
-रामस्वरूप ओला, अध्यक्ष, शोध छात्रसंघ

“वो लोग प्रोटोकाल तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। मेरी फोटो हटा रहे थे। मेरे गेस्ट को मंच पर आने से मना कर रहे थे। मैंने इसका विरोध किया था।”
अभय चौधरी, अध्यक्ष, पंचवर्षीय लॉ कॉलेज छात्रसंघ

शोध छात्रसंघ चुनाव जितवाने में धांधली और मिलीभगत का आरोप 

राजस्थान विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने शोध छात्र (Research Representative) संघ चुनाव 2022 में विसंगतियाँ कुलपति और कुलसचिव से की थी। किंतु कुलपति के इशारे पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता की मिलीभगत और विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान पहुँचाने की नियत से प्रोफ़ेसर सरीना कालिया और उनके मातहतों ने इस कार्य को अंजाम दिया। प्रोफ़ेसर कालिया मनमानी पूर्ण तरीके से अपने पद का दुरुपयोग करते हुए  साजिशन विश्वविद्यालय को लाखों रुपए की आर्थिक हानि पहुँचायी गयी। प्रोफ़ेसर कालिया और उनके अधीनस्थों ने जानबूझकर माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने दिनांक 21/09/2022, S.B. Civil Writ Petition No. 12476/2022 के आदेश का भी उल्लंघन किया।

  1. अवैधानिक रूप से आचार संहिता के लागू होने के बाद भी दिनांक 17 अगस्त 2022 को देर रात्रि बिना किसी संविधान संशोधन किए। इंटरप्रिटेशन कमिटी (Interpretation Committee) द्वारा Rajasthan University student’s Union (RUSU) constitution के section 15(f)(ii) और section 15(f)(iii) हटाया गया जो कि इंटरप्रिटेशन कमिटी के क्षेत्राधिकार में नहीं हैं एवं नियमों के विरुद्ध है, क्योंकि संविधान में संशोधन सिंडिकेट द्वारा ही किया जा सकता है।
  2. अयोग्य उम्मीदवारों को नामांकन भरने की अनुमति दी गई जो कोर्स वर्क में अध्ययनरत एवं अपंजीकृत विद्यार्थी थे। जो कि RUSU-2017 संविधान के Section 15(f)(ii) & section (f)(iii) एवं Lyngdoh committee की रिपोर्ट के विरुद्ध है, एवं शोध छात्र संघ चुनाव में चयनित नवीन शोध छात्र प्रतिनिधि जिनका नाम रामस्वरूप ओला है, वो नामांकन 22 अगस्त 2022 के समय उम्मीदवारी करने के लिए अयोग्य थे, वे अपंजीकृत (PhD में non-registered research scholar)  और उनका एडमिशन भी प्रोविज़नल था, एवं मासिक शुल्क भी  बकाया (overdue) थी, उनका पंजीकरण दिनांक 08 सितंबर (चुनाव मैं नामांकन भरवाने की तिथि के 17 दिन पश्चात्) जारी किया गया था।
  3. RUSU Election, Guidelines & Rules 2017 के section 5 और 6 के अनुसार Membership of RUSU shall be sealed as existing on the day of Notification & no enrollment to membership will be made from the date of notification up to the date of declaration of result of election, अर्थात् चुनाव अधिसूचना आने और आचार संहिता लगने के बाद Rajasthan university student union में कोई भी व्यक्ति को नया सदस्य नहीं बनाया जा सकता है, चुनाव अधिसूचना दिनांक सुबह 17 अगस्त 2022 आ गई थी और आचार संहिता भी लागू हो चुकी थी। परन्तु उसके पश्चात भी Dean of student welfare प्रोफ़ेसर सरीना कालिया ने अवैधानिक रूप से आचार संहिता के लागू होने के बाद भी दिनांक 17 अगस्त 2022 को देर रात्रि बिना किसी संविधान संशोधन किए अपने हस्ताक्षर से जारी किए आदेश से, नियमों के विरूद्ध जाकर अयोग्य व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी।
  4. रुसू संविद (RUSU Constitution) के नियम 31 (Section 31) में सिंडिकेट द्वारा ही संविधान में संशोधन किया जा सकता है। रुसू संविद (RUSU Constitution) के नियम 32 (Section 32)  एवं नियम 59 (section 59 of RUSU guidelines and rules) के अनुसार इन दिशानिर्देशों और नियमों में कोई भी संशोधन केवल राजस्थान विश्वविद्यालय के सिंडिकेट द्वारा ही किया जा सकता है, इंटरप्रिटेशन कमेटी का कार्य मात्र संविधान का स्पष्टिकरण करना है, नए नियम जोड़ना और हटाना इंटरप्रिटेशन कमिटी के क्षेत्राधिकारों में नहीं आता है एवं नियम बनाने का कार्य केवल सिंडिकेट द्वारा किया जा सकता हैं।
  5. चुनाव के संबंध में सिंडिकेट की मीटिंग 13 अगस्त को की गई थी जिसमें शोध छात्र संघ चुनाव से संबंधित कोई भी नवीन निर्णय नहीं लिए गए थे, और ना उसके पश्चात् सिंडिकेट की चुनावों से संबंधित कोई बैठक हुई। परन्तु दिनांक 17 अगस्त को आचार संहिता लागू हो गई थी एवं आचार संहिता में नए नियम बनाना अवैधानिक है, जो Interpretation committee के क्षेत्राधिकार में भी नहीं है । लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के आधार पर माननीय सुप्रीमकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि खेल के बीच में खेल के नियम को नहीं बदला (because rule of the game cannot be changed during the middle of game) जा सकता है।
  6. चुनाव सम्पन्न होने के बाद जब मैंने RUSU संविधान के section 29 में वर्णित grievance redressal cell को दिनांक 12 सितंबर 2022 को उपरोक्त विषय में शिकायत दर्ज की तो छात्र कल्याण अधिष्ठाता (Dean of Student Welfare) प्रोफ़ेसर सरीना कालिया और शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (Grievance Redressal Cell) के अध्यक्ष ने भी बिना किसी संविधान संशोधन किए अपने हस्ताक्षर से जारी किए आदेश से, नियमों के विरूद्ध जाकर अयोग्य व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी। जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत (Principle of Natural Justice) के विरुद्ध है। पीड़ितपक्ष का आरोप है कि शिकायत की सुनवाई हुई तब ना तो उनका पक्ष सुना गया और यादृच्छिक निर्णय लिया गया और उस निर्णय की प्रतिलिपि पीड़ितपक्ष को 15 नवंबर 2022 (64 दिन बाद में) को दिया गया।
  7. इंटरप्रिटेशन कमिटी (Interpretation Committee) ने आदेश संख्या DSW/election/2022/1260 दिनांक 15 अगस्त 2022 के निर्णय में स्पष्ट कर दिया गया था कि विद्यार्थी को शोध छात्र प्रतिनिधि की उम्मीदवारी के लिए पूर्णकालिक पंजीकृत शोधार्थी (Full Time Registered Research Scholar) होना अनिवार्य है, फिर भी आदेश संख्या DSW/election/2022/1260 का उल्लंघन कर अपंजीकृत शोधार्थी का नामांकन स्वीकार किया गया।

पीड़ित पक्ष की मांग है कि प्रोफ़ेसर कालिया और उनके अधीनस्थों ने शोधछात्र संघ के अध्यक्ष के कार्यालय उद्घाटन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय को लाखों रूपए का नुकसान पहुँचाया। इसकी तटस्थ जाँच नियम (    section 29(xiii),(xiv),(xv) & section 34 of RUSU constitution) के तहत पुनः जाँच की जाए और RUSU constitution, RUSU rules and guidelines एवं Lyngdoh Committee के प्रावधानों की का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई हो।

रजिस्ट्रार-छात्र नेताओं की हुई तीखी बहस

राजस्थान यूनिवर्सिटी में रविवार को छात्रसंघ उद्घाटन कार्यक्रम बारिश की भेंट चढ़ गया। शोध छात्र संघ और पंचवर्षीय विधि महाविद्यालय के उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का RU में आने का प्रस्तावित कार्यक्रम टल गया। वहीं घूमर मैदान में सांस्कृतिक समारोह से पहले ही छात्र नेताओं और रजिस्ट्रार में तीखी बहस हो गई। इस दौरान मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। जिसमें एक छात्र पैर टूट गया।

दरअसल, यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही छात्र नेता स्टेज पर चढ़ एक दूसरे से बहस करने लगे। इसके बाद जैसे ही रजिस्ट्रार नीलिमा तक्षक मंच पर पहुंची। तो उन्होंने छात्रों से बातचीत कर समझाइश की कोशिश की। लेकिन विवाद और ज्यादा बढ़ गया। इस दौरान शोध छात्र संघ अध्यक्ष रामस्वरूप ओला और नीलिमा तक्षक में तीखी बहस हो गई। जिससे नाराज होकर तक्षक ने रामस्वरूप से यह तक कह डाला कि तेरी 10 रुपए की माला खरीदने की औकात नहीं है। जिसके बाद नाराज छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया। जिसमें छात्र पंकज के पांव में फैक्चर भी हो गया। जिसके बाद उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाया गया।

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