आईपीएस अजय लांबा ने आशाराम पर लिखी ‘गनिंग फॉर गॉडमैन’ बुक की लॉन्चिंग से दिल्लीहाईकोर्ट ने रोक हटायी

2 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || सितंबर 24, 2020 || जयपुर : आसाराम बापू पर लिखी गयी किताब से रोक हटी, दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला सुना दिया है। अब यह किताब आमजन को पढ़ने के लिए उपलब्ध होगी। लोग बाबाओं के कारनामे जान सकेंगे और अंधभक्ति से बाहर निकलेंगे। किताब में आसाराम (Asaram) की मुक़दमे से बचने की हरकतों का जिक्र है कि आशाराम कभी रोता था, कभी दीवार ​पर सिर मारता था, कभी गिड़गिड़ाता था। आसाराम ने खुद को नपुंसक साबित करके बचने की कोशिश की, उसका पोटेंसी टेस्ट कराने की बात आई तो कुछ अधिकारी विरोध करने लगे, आखिरकार टेस्ट हुआ और आसाराम उसमें नपुंसक साबित नहीं हुए। राजस्थान (Rajasthan) की राजधानी जयपुर (Jaipur) में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात आईपीएस (IPS) अजय पाल लांबा (Ajay Pal Lamba) की किताब (Book) ‘गनिंग फॉर द गॉडमैन’ को आखिरकार दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) से लॉन्चिंग की मंजूरी मिल गयी है। बीते 5 अगस्त को दिल्ली की एक नीचली अदालत ने लॉन्चिंग से पहले रोक लगा दी थी। इस पर किताब प्रकाशन हार्पर कॉलिंस की ओर से अपील दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी। यहाँ जस्टिस नजीम वाजीरी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कुछ शर्तों के साथ किताब प्रकाशन की इजाजत दे दी। दरअसल, जोधपुर के एक आश्रम में नाबलिग से दुष्कर्म के मामले और कथिक संत आसराम जेल में सजा काट रहे हैं। अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को एक नाबलिग से बलात्कार का दोषी पाया था। आसाराम को आईपीसी की धराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी। कोर्ट ने दिया प्रकाशक को निर्देश कोर्ट ने कहा कि प्रकाशन के दौरान प्रकाशक हार्पर कॉलिंस को पाठकों को ये बताना होगा ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता की अपील अभी राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है। ताकि, किताब पढ़ने वाले पाठकों को किसी भी तरह का कोई भ्रम न रहे और उन्हें इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी किताब के माध्यम से मिल सके। किताब की खास बातें आसाराम कभी रोता था, कभी दीवार ​पर सिर मारता था, कभी गिड़गिड़ाता था। आसाराम ने खुद को नपुंसक साबित करके बचने की कोशिश की, उसका पोटेंसी टेस्ट कराने की बात आयी तो कुछ अधिकारी विरोध करने लगे, आखिरकार टेस्ट हुआ और आसाराम उसमें नपुंसक साबित नहीं हुए। कुछ बड़े लोगों का भी दबाव था लेकिन राजनैतिक दबाव नहीं था।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This