फर्जीवाड़ा : यूनिवर्सिटी ने खेत को बताया कॉलेज, यूनिवर्सिटी ने बिना काउंसलिंग स्टूडेंट्स पढ़ने भेजे, यूनिवर्सिटी की एक नहीं नौ कॉलेजों पर मेहरबानी

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 10 मई, 2023 | जयपुर-दिल्ली : तस्वीर में जो खेत नजर आ रहा है, उसे यूनिवर्सिटी कॉलेज बता रही है। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी ने बिना काउंसलिंग स्टूडेंट्स को ये ‘अदृश्य कॉलेज’ अलॉट भी कर दिया। ऐसे मेहरबानी यूनिवर्सिटी ने 1 नहीं 9 कॉलेजों पर की है।

दरअसल, 4 साल से राजस्थान के 84 संस्थानों ने पशुपालन में डिप्लोमा कोर्स कराने के लिए आवेदन कर रखा था। इनमें से 9 संस्थानों पर सरकार और बीकानेर वेटरनरी यूनिवर्सिटी इतने मेहरबान हुए कि बिना विज्ञप्ति जारी किए कॉलेज खोलने और सीटें बढ़ाने की अनुमति दे दी। %name फर्जीवाड़ा : यूनिवर्सिटी ने खेत को बताया कॉलेज, यूनिवर्सिटी ने बिना काउंसलिंग स्टूडेंट्स पढ़ने भेजे, यूनिवर्सिटी की एक नहीं नौ कॉलेजों पर मेहरबानी

अनुमति देने की इतनी जल्दी थी कि सालों धूल फांकने वाले विभाग में इन संस्थानों की फाइल जेट स्पीड से दौड़ी। महज 6 दिन में तीन प्रोफेसर की कमेटी ने 1 हजार किलोमीटर का सफर कर निरीक्षण कर इन कॉलेजों को एनओसी दिलवा दी।

जब भास्कर ने इन 9 में से 2 कॉलेजों की ग्राउंड पर जाकर पड़ताल की तो हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ। जिस जगह को कॉलेज की बिल्डिंग बताकर कमेटी ने एनओसी दे दी, वहां सिर्फ खाली खेत था और एक साइन बोर्ड लगा था।

जांच करने पर पता लगा कि कॉलेज मालिक ने खाली जमीन दिखाकर एनिमल हसबेंडरी डिप्लोमा कोर्स (लाइव स्टोक एसिस्टेंट ) के लिए 50 से बढ़ाकर 100 सीटें भी करवा लीं। विश्वविद्यालय ने इस कॉलेज में एडमिशन के लिए बिना काउंसलिंग के स्टूडेंट्स भी अलॉट कर दिए।

मामले में सबसे हैरान कर देने वाला पहलू ये है कि शिकायत के बाद 6 कॉलेजों के सीटें बढ़ाने के आवेदन तो खारिज कर दिए गए, लेकिन अभी तक किसी भी संस्थान या अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। सबसे बड़ा सवाल उन स्टूडेंट्स के भविष्य से जुड़ा है, जिन्होंने इन कॉलेजों में एडमिशन लिया। जब बिल्डिंग ही नहीं है तो स्टूडेंट्स पढ़ेंगे कहां? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं है।

पढ़िए- स्टूडेंट्स के भविष्य और नियमों से खिलवाड़ की कहानी…

इस जगह कमेटी ने कथित निरीक्षण किया और रिपोर्ट में लिखा- यहां स्टूडेंट्स के लिए सभी जरूरी सुविधाएं हैं।

84 आवेदनों में से सिर्फ 9 कॉलेजों को प्राथमिकता दी

वर्ष 2019 में नए वेटरनरी कॉलेज खेलने के लिए राज्य सरकार ने एक पॉलिसी बनाकर कोर्ट में पेश की। ये सूचना सार्वजनिक होते ही 84 संस्थानों ने नए कॉलेज खोलने के लिए आवेदन कर दिए। इस पर सरकार ने इस फाइलों को रिजेक्ट कर दिया और तर्क दिया कि जब हम पुन: नए कॉलेज की विज्ञप्ति जारी करेंगे, तब फिर से आवेदन लेंगे।

इस पर संस्थानों ने सरकार के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने सरकार को संस्थानों के आवेदन पर विचार करने के लिए कहा। इस पर सरकार ने बिना विज्ञप्ति जारी किए ही कोर्ट के आदेश का हवाला देकर सिर्फ 9 संस्थानों को नए कॉलेज खोलने के लिए एनओसी जारी कर दी, जबकि कोर्ट ने सभी 84 आवेदनों पर विचार करने के निर्देश दिए थे।

सरकार ने सीटें बढ़ाने का आवेदन खारिज किया तो राजभवन से आदेश निकलवाया

इन 9 संस्थानों ने नए कॉलेज खोलने की एनओसी मिलते ही 50 से 100 सीटें करने के लिए आवेदन कर दिया। अन्य संस्थानों ने इसकी शिकायत की तो सरकार ने सीटें बढ़ाने का आवेदन खारिज कर दिया। इस पर इन 9 संस्थानों ने राज्यपाल को आवेदन किया। राज्यपाल ने 15 फरवरी 2023 एक आदेश जारी कर वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर को एक कमेटी बनाकर कॉलेजों का निरीक्षण करवाने का आदेश जारी किया। विश्वविद्यालय ने 3 सदस्यों की कमेटी बनाकर 3 में रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे।

पांच संस्थानों की सीटें बढ़ाने के लिए आदेश जारी हुआ

14 फरवरी और 17 फरवरी को वेटरनरी विश्वविद्यालय ने सीटें बढ़ाने के संबंध में 2 आदेश जारी किए। 14 फरवरी के आदेश में कहा गया कि राज्यपाल के प्रमुख सचिव का पत्र आया है। इसमें 5 पशुपालन डिप्लोमा संस्थानों की सीट 50 से बढ़ाकर 100 करनी हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एक कमेटी बनाकर 3 दिन में रिपोर्ट दें। वहीं, पांच दिनों के अंदर आदेश पर क्या कार्यवाही की गई, इसके बारे में राजभवन को अवगत कराने के आदेश दिए गए। इसके बाद 17 फरवरी को एक और कॉलेज की सीटें बढ़ाने को लेकर आदेश जारी हुआ। उसमें भी कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने की बात कही गई।

  1. गोविंदम लाइवस्टोक असिस्टेंट डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फागी, जयपुर
  2. अमृतम लाइवस्टोक एसीस्टेंट डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीट्यू बतावाड़ी, बारां
  3. गौरव विवेकानंद लाइवस्टोक डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, गुडास रोड, सवाई माधोपुर
  4. गुरुकुल कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस लाखेरी, बूंदी
  5. सौरभ कॉलेज ऑफ वेटेनरी साइंस, खेड़ा, हिंडोनसिटी, करोली
  6. मुरली सिंह यादव मेमोरियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, उदयरामसर बीकानेर

तीन संस्थानों को एनओसी दिलाने के लिए आदेश जारी हुआ

वेटरनरी विश्वविद्यालय ने तीन संस्थानों की एनओसी को लेकर आदेश भी 14 फरवरी को ही जारी किया। इसमें तीन संस्थानों को मान्यता दिलाने के लिए कॉलेजों का निरीक्षण कराने के लिए कमेटी बनाने के आदेश दिए गए। इसके लिए अलग कमेटी बनानी थी। इस आदेश में भी तीन दिन में कमेटी बनाकर पांच दिनों में राजभवन को बताना था कि आदेश पर क्या कार्यवाही की गई।

  1. शिवविज्ञान लाइवस्टोक डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, रूंडल, तहसील-आमेर, जयपुर
  2. महात्मा गांधी लाइस्टोक एसीस्टेंट डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीयूट, मेघराजसिंहपुरा, जम्मारामगढ़, जयपुर
  3. स्वामी विवेकानंद लाइवस्टोक डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिंडौन सिटी, करोली
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मामले में निरीक्षण के लिए इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि 9 संस्थानों के लिए 1 ही कमेटी बना दी गई।

जल्दबाजी इतनी कि 9 संस्थानों के लिए सिर्फ एक कमेटी बनाई

बीकानेर वेटरनरी विद्यालय ने राजभवन से आदेश मिलते ही जेट स्पीड से काम किया। 14 फरवरी को राज्यपाल का आदेश मिला और 15 फरवरी को 9 संस्थानों के लिए एक ही कमेटी बना दी गई। सामान्यतः ऐसी कमेटी में प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर को लगाया जाता है।

लेकिन इस कमेटी में पहली बार डीईन और काउंसलिंग बोर्ड के कोऑर्डिनेटर को भी लगाया गया। विवि ने कमेटी में प्रो एपीसिंह (संकाय अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, सीवीएएस, बीकानेर), प्रो. हेमंत दाधीच (निदेशक अनुसंधान, राजुवास), डॉ. एलएन सांखला ( समन्वयक, एएचडीपी, राजुवास) को शामिल किया।

6 दिन में 2 हजार किमी का सफर कर 9 संस्थानों का निरीक्षण

कमेटी ने महज 6 दिन में 2 हजार किमी का सफर कर 9 संस्थानों का निरीक्षण कर लिया। कमेटी की यह स्पीड ही संस्थानों के निरीक्षण पर सवाल खड़े करती है। यह 9 संस्थान जयपुर के पास फागी, जमवारामगढ, हिंडोनसिटी, सवाईमाधोपुर, बारां, बूंदी में स्थित थी।

बीकानेर से इन सभी संस्थानों की कुल दूरी 1 हजार किमी है और वापस आने पर यह दूरी 2 हजार किमी का सफर हो जाता है, लेकिन कमेटी ने महज 6 दिन में 9 संस्थानों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

  • बीकानेर से जयपुर 335 किमी
  • जयपुर से हिंडौन सिटी 157 किमी
  • हिंडौन सिटी से सवाई माधोपुर 119 किमी
  • सवाई माधोपुर से बूंदी 136 किमी
  • बूंदी से बारां 113 किमी
  • जयपुर से जमवारामगढ़ और फागी 80 किमी।

निरीक्षण के बाद कॉलेजों को स्टूडेंट्स भी अलॉट कर दिए

कमेटी ने महज 6 दिन में 6 संस्थानों की सीटें बढ़ाने और 3 संस्थानों को मान्यता देने के लिए कॉलेजों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट पेश कर दी। विवि ने 6 संस्थानों की सीटें 50 से बढ़ाकर 100 कर दी। कॉलेज को एनओसी देने का काम राज्य सरकार का होता है, लेकिन विवि ने निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अपने स्तर पर ही तीनों संस्थानों को बिना एनओसी के स्टूडेंट्स अलॉट कर दिए। जबकि इन संस्थानों को अभी राज्य सरकार की तरफ से एनओसी जारी नहीं हुई थी।

स्टूडेंट्स अलॉट करने के लिए काउंसलिंग के नियम भी तोड़ दिए गए। कमेटी में शामिल काउंसलिंग बोर्ड के कोऑर्डिनेटर ने इन संस्थानों को बिना काउंसलिंग के सीधे ही स्टूडेंट अलॉट कर दिए। जबकि छात्रों से काउंसलिंग में कॉलेज लेने के लिए चॉइस भरवाई जाती है। इन छात्रों को बिना चॉइस भरे सीधे ही यह कॉलेज अलॉट कर दिए थे।

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मूकनायक मीडिया टीम कॉलेज के एड्रेस पर पहुंची तो सिर्फ एक खुला खेत था। आस-पास लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि यह जमीन तो सालों से खाली पड़ी है।

खेत को बना दिया कॉलेज, विवि ने वहां 100 स्टूडेंट्स अलॉट कर दिए

जयपुर से करीब 33 किलोमीटर दूर गोविंदम लाइस्टोक एसीस्टेंट डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टीयूट रेनवाल के पास स्थित है। हमारी टीम कॉलेज की तलाश करते हुए दिए गए एड्रेस पर पहुंची। मौके पर हमें सिर्फ एक खेत मिला। पास में एक प्राइवेट स्कूल था।

आस-पास लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि यह जमीन तो सालों से खाली पड़ी है। जमीन के आगे की तरफ एक चारदीवारी और खाली बोर्ड भी लगा रखा था। इस पर भास्कर टीम ने बीकानेर विश्वविद्यालय से बात की तो पता चला कि श्रीगोविंददेव जी एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से खसरा संख्या 246, 247/1, 247/2, 248, 250/5 की कुल 15 बीघा जमीन है। इसके बाद हमने एक पटवारी से जमीन की पुष्टि कराई तो पता चला कि इस जमीन पर ही कॉलेज होने का दावा किया जा रहा है।

अब सवाल उठता है कि कमेटी ने वास्तव में मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो उन्हें खाली खेत में कॉलेज की बिल्डिंग कैसे दिख गई। क्योंकि कमेटी ने तो अपनी रिपोर्ट में लिखा है-हमने कॉलेज का निरीक्षण किया। यहां स्टूडेंट के लिए क्लास, प्रैक्टिकल के लिए आवश्यक सभी चीजें और स्टाफ मौजूद है।

पत्नी की जमीन पर कॉलेज बनाकर स्टाम्प ड्यूटी बचाई

इसी तरह भास्कर इंवेस्टिगेशन में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया। नियमों के अनुसार, किसी भी एजुकेशन संस्थान को अगर कॉलेज की बिल्डिंग बनानी होती है तो संस्थान या सोसाइटी के नाम पर जमीन होनी चाहिए। खुद की खातेदारी वाली जमीन पर कॉलेज नहीं बना सकते है। लेकिन जयपुर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जमवारामगढ़ में स्थित महात्मा गांधी लाइवस्टोक असिस्टेंट डिप्लोमा ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट ककी सोसाइटी के मेंबर कृपाल सिंह ने ऐसा नहीं किया।

उन्होंने अपनी पत्नी कमलेश के नाम जमवारामगढ़ में खसरा नंबर 309 की जमीन ले रखी थी। कृपाल सिंह ने यह जमीन संस्थान के नाम नहीं करवाई। जमीन को संस्थान के नाम करवाने पर उसे डीएलसी रेट से दो गुणा स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ती। ऐसे में उसने पत्नी कमलेश के नाम वाली जमीन पर बिल्डिंग बनाकर वहां कॉलेज बना दी। इससे सरकार को 12.15 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।

दिलचस्प ये है कि कमेटी ने यहां भी निरीक्षण का दावा किया, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट में पत्नी के नाम पर जमीन होने के बावजूद कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया गया। रिपोर्ट में जमीन के दस्तावेज और बिल्डिंग को नियमानुसार बताया गया।

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