वरिष्ठ जज एमआर शाह रिटायर, विदाई पर CJI ने कहा “आंख से दूर, दिल से कहां जाएगा”

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 18 मई, 2023 | जयपुर-दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के चौथे सबसे वरिष्ठ जज एमआर शाह 15 मई को रिटायर हो गए। रिटायरमेंट पर दिए गए विदाई समारोह में CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने उनकी तारीफ की और शेर भी पढ़ा। रिटायर्ड जस्टिस शाह ने एक न्यूज वेबसाइट से CJI से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया।

जस्टिस शाह ने बताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में टाइगर शाह नाम मिला था। यह नाम उन्हें CJI ने दिया था। यह CJI का उनके लिए प्यार और सम्मान करने का एक तरीका था। जस्टिस शाह बताया कि कुछ वर्ष पहले CJI और वो रूस में एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने गए थे। वहां CJI ने कहा था- कोई भी काम होगा, वो टाइगर को दूंगा और वो उस काम को कर देगा।

मेरा किसी से विवाद नहीं रहा, क्योंकि मेरा यही नेचर है- जस्टिस शाह
जस्टिस शाह ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की किसी भी बेंच पर बैठने में कोई परेशानी नहीं हुई। उनका कभी भी किसी से विवाद नहीं रहा। उन्होंने कहा, “मैं गुजरात से आता हूं। हमारा नेचर जमीन से जुड़े रहने और दूसरों का सहयोग करने का है। जब मैंने सुप्रीम कोर्ट में करियर शुरू किया तो किसी ने कहा था कि मुकेश भाई! कहीं भी पहुंचो पर जमीन से हमेशा जुड़े रहना। मैंने हमेशा जमीन से जुड़े रहने की कोशिश की। पूरे करियर के दौरान ताकत का पर्दा मेरी आंखों पर नहीं पड़ा।”

विदाई पर CJI ने कहा- आंख से दूर, दिल से कहां जाएगा
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस शाह के विदाई समारोह में CJI ने कहा कि वह हर रोज सुबह जस्टिस शाह को टाइगर शाह कहते थे। उन्होंने शेर भी पढ़ा- आंख से दूर, दिल से कहां जाएगा। जाने वाले तू हमें बहुत याद आएगा। जस्टिस एमआर शाह बहुत परिश्रमी हैं। कोविड के समय भी उन्होंने ऐसा ही किया। जब हम लोग घर पर बैठे, गंभीर मुद्दों पर सुनवाई कर रहे होते थे, उस वक्त भी वह चैलेंज के लिए तैयार रहते थे।

किसी का नौकरी का आखिरी दिन बड़ा ही भावुक करने वाला होता है। उसके जेहन में वो तमाम यादें उमड़ती-घुमड़ती रहती हैं जो वो अपनी नौकरी के दौरान गुजरा। कुछ ऐसा ही सुप्रीम कोर्ट में देखने को मिला। दरअसल, जस्टिस एम आर शाह (Justic MR Shah) अपने विदाई समारोह के दौरान कई पुरानी बातों का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने अपनी पारी से लेकर उन तमाम चीजों का जिक्र किया जो उन्होंने अपने करियर में हासिल किया। इस दौरान शाह ने अभिनेता राजकपूर के गाने और अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं को भी गाया।

रोते हुए बोले शाह, गर्दिश में तारे रहेंगे सदा

चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली एक रस्मी पीठ में शामिल जस्टिस शाह अपने संबोधन के अंत में रो पड़े। उन्होंने राज कपूर के मशहूर गीत की पंक्तियां ‘जीना यहां, मरना यहां’ को उद्धृत किया। जस्टिस शाह ने कहा, ‘मैं सेवानिवृत्त होने वाला व्यक्ति नहीं हूं और मैं अपने जीवन की एक नयी पारी की शुरुआत करने जा रहा हूं। मैं ईश्वर से प्रार्थना कर रहा हूं कि वह मुझे नई पारी खेलने के लिए शक्ति और साहस तथा अच्छा स्वास्थ्य दें।’ उन्होंने रुंधे गले से कहा, ‘विदाई से पहले मैं राज कपूर के एक गीत को याद करना चाहता हूं- ‘कल खेल में हम हो न हो, गर्दिश में तारे रहेंगे सदा।’

वकीलों को सीख

अपने कार्यकाल के आखिरी दिन जस्टिस शाह ने विदाई समारोह के लिए बार को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी भय, पक्षपात या दुर्भावना के अपने कर्तव्यों का पालन किया है। उन्होंने कहा, ‘यह हम सभी का कर्तव्य है कि समय पर न्याय मिले। सभी से अनुरोध है कि (मामलों को) स्थगित करने की संस्कृति से बाहर निकलें और कोई अनावश्यक स्थगन न लें। युवा वकीलों को मेरी एक और सलाह है कि वे मामले के विशेष उल्लेख या स्थगन का सहारा लेकर वकालत पेशा न करें, बल्कि अपने आप को (मामले के लिए) तैयार करें।’

अटल की कविता और वो भावुक भाषण

जस्टिस शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत किया और कहा, ‘जो कल थे, वो आज नहीं हैं। जो आज हैं वो कल नहीं होंगे। होने, न होने का क्रम इसी तरह चलता रहेगा। हम हैं, हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा चलता रहेगा।’ न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि बिदाई हमेशा दर्दनाक होती है। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी पारी बहुत अच्छी खेली है। मैंने हमेशा अपने विवेक का पालन किया है। मैं हमेशा ईश्वर और कर्म में विश्वास करता हूं। मैंने कभी किसी चीज की उम्मीद नहीं की है.. मैंने हमेशा गीता का पालन किया है।’

जस्टिस मुकेश कुमार रसिकभाई शाह का जन्म 16 मई 1958 को हुआ था। वह 19 जुलाई 1982 को वकील के रूप में पंजीकृत हुए। उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस की और भूमि, संविधान तथा शिक्षा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। उन्हें सात मार्च 2004 को गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 22 जून 2005 को स्थायी जज बनाया गया। जस्टिस शाह को 12 अगस्त 2018 को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। उन्हें दो नवंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और वह 15 मई 2023 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
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