2000 का नोट सर्कुलेशन से वापस लेगा रिजर्व बैंक, इससे आम लोगों पर क्या असर होगा?

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 19 मई, 2023 | जयपुर-दिल्ली-मुंबई : रिजर्व बैंक 2000 का नोट सर्कुलेशन से वापस लेगा, लेकिन मौजूदा नोट अमान्य नहीं होंगे। 2 हजार का नोट नवंबर 2016 में मार्केट में आया था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए थे। इसकी जगह नए पैटर्न में 500 का नया नोट और 2000 का नोट जारी किया गया था। RBI साल 2018-19 से 2000 के नोटों की छपाई बंद कर चुका है।

31 2000 181 1 1684510357 2000 का नोट सर्कुलेशन से वापस लेगा रिजर्व बैंक, इससे आम लोगों पर क्या असर होगा?RBI ने बैंकों को 23 मई से 30 सितंबर तक 2000 के नोट लेकर बदलने के निर्देश दिए हैं। एक बार में अधिकतम बीस हजार रुपए कीमत के नोट ही बदले जाएंगे। लेकिन, अकाउंट में इन नोटों को जमा करने पर लिमिट नहीं होगी। अब से ही बैंक 2000 के नोट इश्यू नहीं करेंगे।

10 सवालों में समझिए RBI के इस आदेश के मायने…

1. आरबीआई ने कहा क्या है?
रिजर्व बैंक 2000 का नोट सर्कुलेशन से वापस लेगा, लेकिन मौजूदा नोट अमान्य नहीं होंगे। RBI ने कहा कि इसका ऑब्जेक्टिव पूरा होने के बाद 2018-19 में इसकी प्रिटिंग बंद कर दी गई थी।

2. फैसला कब से लागू हो रहा है?
RBI ने अपने सर्कुलर में लिखा है कि वो 2000 के नोट को सर्कुलेशन से बाहर कर रहा है। इसकी कोई तारीख या समय नहीं दिया है। यानी ये फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

3. नोट बदलने के लिए क्या-क्या करना होगा?
बैंक में जाकर इन नोटों को बदला जा सकता है। इसके लिए 30 सिंतबर 2023 तक का समय है। नोट बदलने में कोई परेशानी न हो इसलिए बैंकों को भी इसके बारे में जानकारी दी गई है।

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RBI का आदेश

4. 30 सितंबर तक नोट जमा नहीं किए तो क्या होगा?
लेन-देन के लिए ₹2000 के नोटों का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं और उन्हें पेमेंट के रूप में रिसीव भी कर सकते हैं। हालांकि, RBI ने 30 सितंबर 2023 को या उससे पहले इन बैंक नोटों को जमा करने या बदलने की सलाह दी है।

5. क्या किसी भी बैंक में बिना अकाउंट के नोट बदले जा सकते हैं?
हां। नॉन-अकाउंट होल्डर भी किसी भी बैंक शाखा में एक बार में ₹20,000/- की सीमा तक ₹2000 के नोट बदलवा यानी दूसरे डिनॉमिनेशन में एक्सचेंज करवा सकते हैं। वहीं अगर आपका अकाउंट है तो आप कितने भी 2000 के नोट डिपॉजिट कर सकते हैं।

6. बाजार में 2000 के नोट से खरीदारी में क्या असर दिख सकता है?
सरकार ने इसे अभी चलन में भले ही बनाकर रखा है, लेकिन व्यापारी इससे लेनदेन करने में कतरा सकते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि इन्हें बैंक से ही बदल लें।

7. यह फैसला किसने किया है और क्यों किया है?
‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत रिजर्व बैंक ने यह फैसला किया है। ‘क्लीन नोट पॉलिसी में लोगों से गुजारिश कि गई है कि वह करेंसी नोट्स पर कुछ भी न लिखें, क्योंकि ऐसा करने से उनका रंग-रूप बिगड़ जाता है और लाइफ भी कम हो जाती है। लोगों को लेन-देन में अच्छी क्वालिटी के बैंक नोट (पेपर करेंसी) मिलें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्लीन नोट पॉलिसी लागू की गई है।

8. इससे आम लोगों पर क्या असर होगा?
जिसके भी पास 2 हजार का नोट है उसे बैंक में जाकर बदलना होगा। 2016 में नोटबंदी में 500 और 1000 को नोट को बंद कर दिया गया था। इसे बदलने के लिए टाइम भी दिया गया था, लेकिन लंबी लाइनों के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। इस बार भी ऐसा देखने को मिल सकता है।

9. क्या यह फैसला सरकार की ओर से भूल सुधार है?
RBI ने अपने सर्कुलर में बताया है कि 2016 में बंद किए गए 500 और 1000 के नोट की कमी को पूरा करने के लिए 2000 के नोट छापे गए थे। जब पर्याप्त मात्रा में दूसरे डिनॉमिनेशन के नोट उपलब्ध हो गए तो 2018-19 में 2000 के नोटों की छपाई बंद कर दी गई। यानी ये सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता है 2000 के नोटों को सर्कुलेशन से बाहर करना सरकार की भूल सुधार है।

सरकार को 48 हजार करोड़ रु डिविडेंड मिलने की थी उम्मीद

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के बोर्ड की आज, यानी शुक्रवार (19 मई) को मुंबई में मीटिंग हुई। इस मीटिंग में बोर्ड ने केंद्र सरकार को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए 87,416 करोड़ रुपए का डिविडेंड देने का ऐलान किया गया है।

पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में यह तीन गुना ज्यादा है। गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई RBI के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 602वीं मीटिंग में सरकार को यह डिविडेंड ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई।

पिछले साल RBI ने सरकार को दिया था 30,310 करोड़ रु डिविडेंड
RBI सरकार को हर साल डिविडेंड देता है। पिछले साल की बात करें तो RBI ने केंद्र सरकार को फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के लिए 30,310 करोड़ रुपए डिविडेंड के रूप में दिए थे। बोर्ड मीटिंग में RBI की फाइनेंशियल कंडीशन, ग्लोबल और डोमेस्टिक इकोनॉमिक चैलेंज के बारे में भी चर्चा हुई। रिजर्व बैंक ने पूरे फाइनेंशियल ईयर में क्या काम किया और सेंट्रल बैंक के एनुअल अकाउंट रिपोर्ट को भी मंजूरी दी गई। कंटिजेंसी फंड को 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया गया है।

आमतौर पर मई में ही इस प्रकार की मीटिंग होती हैं, जिसमें RBI अपनी फाइनेंशियल हेल्थ और डिविडेंड अमाउंट पर फैसले करती है। केंद्र सरकार को इस साल उम्मीद से ज्यादा डिविडेंड मिला है। क्योंकि, सरकार ने इस साल RBI और बाकी फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस से 48 हजार करोड़ रुपए का डिविडेंड मिलने का अनुमान लगाया था। सरकार को उन फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस से डिविडेंड मिलता है, जिसमें उसकी हिस्सेदारी होती है। एनालिस्ट्स की बात करें तो स्टैंडर्ड चार्टर्ड के एक्सपर्ट्स ने कहा था कि RBI इस फाइनेंशियल ईयर में 1-2 लाख करोड़ रुपए तक का डिविडेंड दे सकती है।

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