नेवी के लिए एक और मील का पत्थर है, INS विक्रांत पर पहली बार उतरा MH-60 रोमियो हेलीकॉप्टर

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 30 जून 2023 | जयपुर-मुंबई : अमेरिका से खरीदे गए MH-60 रोमियो हेलीकॉप्टर की पहली बार INS विक्रांत पर लैंडिंग की गई। यह जानकारी इंडियन नेवी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से दी गई है। नेवी ने कहा कि हम हेलीकॉप्टर हमारे लिए मील का पत्थर बन गया है।

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MH-60 रोमियो हेलीकॉप्टर की INS विक्रांत पर लैंडिंग का ये वीडियो नेवी ने ट्वीट किया है।  MH-60 रोमियो को दुनिया का सबसे एडवांस एंटी-सबमरीन हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है। भारत में ये ब्रिटेन में बने सी किंग हेलीकॉप्टरों की जगह लेंगे। नेवी का कहना है कि रोमिया हेलीकॉप्टर हमारे लिए मील का पत्थर बन गया है।
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ट्रंप के कार्यकाल के दौरान MH-60 रोमियो को खरीदा गया
MH-60 रोमियो हेलीकॉप्टर को अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है। भारत ने 24 हेलीकॉप्टर 90.5 करोड़ डॉलर में खरीदे थे। अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय मोदी सरकार ने इन्हें खरीदने के लिए सौदे पर हस्‍ताक्षर किए थे।

जुलाई 2022 में अमेरिका ने दो MH-60 भारत को सौंपे थे। लॉकहीड मार्टिन ने दावा किया है कि सभी 24 हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी 2025 तक पूरी हो जाएगी। MH-60R हेलिकॉप्टर को उड़ाने के लिए 3 से 4 क्रू मेंबर्स की जरूरत होती है।

12 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है MH-60
MH-60 पर कई ऐसे सेंसर और रडार लगे हैं, जो दुश्मन के हर हमले की जानकारी देते हैं। इसे उड़ाने के लिए 3 से 4 क्रू मेंबर्स की जरूरत होती है। इसमें दो जनरल इलेक्ट्रिक के टर्बोशैफ्ट इंजन लगे हैं, जो टेकऑफ के समय 1410×2 किलोवॉट की ताकत पैदा करते हैं। यह एक बार 830 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। यह 12 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान सकता है।

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दुनियाभर में रोमियो के नाम से मशहूर MH-60R
रोमियो के नाम से मशहूर MH-60R सीहॉक हेलिकॉप्टर एंटी-सबमरीन के अलावा निगरानी, सूचना, टारगेट सर्च और बचाव, गनफायर और लॉजिस्टिक सपोर्ट में कारगर है। यह हेलिकॉप्टर दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने के अलावा जहाजों को खदेड़ने और समुद्र में सर्च अभियान में कारगर साबित होंगे। इन हेलिकॉप्टर्स की मदद से घरेलू स्तर पर भारत की सुरक्षा मजबूत होगी और उसे क्षेत्रीय दुश्मनों से निपटने में मदद मिलेगी। अमेरिका के मुताबिक, भारत को इन हेलिकॉप्टरों को नौसेना में शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। फिलहाल यह अमेरिकी नेवी में एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वेपन के रूप में तैनात हैं।

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