महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग

12 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 05 जून 2023 | जयपुर-दिल्ली : ग्राम झालाना डूंगरी सांगानेर की नवीन खसरा नंबर 177-178 व अन्य खसरों की 15 एकड़ भूमि कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड को जिस प्रयोजन से दी गयी थी उसका भू-उपयोग निर्धारित समयवधि में नहीं किया गया और राज्य सरकार द्वारा कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रदान की गयी छूट के अनुरूप उपर्युक्त किसी भी शर्त का पालन भी नहीं किया गया है।

%name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग

बल्कि नियम-विरुद्ध अब उक्त भूमि के भू-रूपांतरण के लिए आवेदन पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन द्वारा किया गया है, जो कि विधिक दृष्टि से संदेहास्पद प्रतीत होती है। यह पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन कौन है? इसका स्वामित्व/ ट्रस्टी कौन-कौन है? कहाँ से आया है? वस्तुतः इस प्रकरण में पूर्व वसुंधरा सरकार और वर्तमान अशोक गहलोत सरकार की शह और मिलीभगत से भ्रष्टाचार हुआ प्रतीत होता है। यह प्रकरण इंडस्ट्रियल यूज के लिए भोले-भाले किसानों की जमीं औने-पौने दामों पर खरीदकर औद्योगिकीकरण के नाम पर किये जा रहे घोटाले से भी जुड़ा हुआ लगता है, जिसकी गहनता से तटस्थ जाँच होनी चाहिए।

क्या है मामला 

ग्राम झालाना डूंगरी सांगानेर में राज्य सरकार के आदेश क्रमांक एफ़.6/III/ नविअ/69 दिनांक : 02 दिसंबर 1987 को कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड को 15 एकड़ भूमि विभिन्न प्रयोजनार्थ शर्तों  के साथ दी गयी थी। इसमें से नवीन खसरा नंबर 177-178 की 7.50 एकड़ भूमि का भू-रूपांतरण विशिष्ट क्षेत्र से मिश्रित क्षेत्र में करने बाबत पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन द्वारा आवेदन किया गया। जेडीए की 322वीं बैठक के कार्यवृत्त दिनांकः 18 अगस्त 2022 (जेडीए वेबसाइट पर उपलब्ध) की कार्यवाही के विरुद्ध उक्त प्रकरण भीम आर्मी – आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संज्ञान में आने पर जनहित में इसके विरुद्ध जयपुर विकास प्राधिकरण में प्रार्थी द्वारा दिनांक 8 नवंबर 2022 एवम् 9 नवंबर 2022 को जेडीए सचिव/ आयुक्त एवं उपायुक्त को आपत्ति प्रस्तुत की गयी थी। इसके उपरांत प्रकरण डायरेक्टर (लॉ) को भेजा गया और उन्होंने पार्टी की आपत्तियों को तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से सही माना और प्रकरण की सीबीआई/ ईडी से जाँच करवाने की संस्तुति की है। क्योंकि उक्त 15 एकड़ भूमि विभिन्न उपरोक्त  प्रयोजनार्थ निम्नलिखित शर्तों  के साथ दी गयी थी;  %name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग

  1. शर्त संख्या 01 : यह कि भूमि के मालिक द्वारा उक्त भूमि चैरिटेबल ट्रस्ट को दान दी जायेगी।
  2. शर्त संख्या 02 : यह है कि उक्त चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा उक्त भूमि में से आधी भूमि बेची जायेगी एवं इस भूमि के बेचने से जो राशि प्राप्त होगी वह अरफोनेज/ डेस्टिट्यूट्स/चिल्ड्रंस/होम कम वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के बनाने के काम में ली जायेगी। भूमि का बेचान उक्त चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा गठित समिति द्वारा किया जायेगा तथा इस समिति में राज्य सरकार एवं प्राधिकरण के एक-एक प्रतिनिधि होंगे।
  3. शर्त संख्या 03 : यह कि शेष बची भूमि पर अरफोनेज/ डेस्टिट्यूट्स/चिल्ड्रंस/होम कम वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण किया जायेगा।
  4. शर्त संख्या 04 : यह कि भूमि की छूट जिस प्रयोजनार्थ दी जा रही है उसी प्रयोजन के लिए ही काम में ली जायेगी।
  5. शर्त संख्या 05 : यह है कि भूमि पर निर्माण कार्य 03 वर्ष की समयावधि में करना होगा।
  6. शर्त संख्या 06 : यह है कि यदि किसी भी समय राज्य सरकार को यह विदित हो जाये कि उपरोक्त शर्तों में से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार अधिनियम की धारा 20 (2) के तहत के आदेश वापस ले सकेगी।

यदि पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन ने उक्त भूमि किसी भी तरीके से क्रय की है अथवा एक ट्रस्ट से दूसरे ट्रस्ट को गिफ्ट की है या विधिक रूप से ट्रांसफर हुई है या फिर किसी अन्य तरीके से पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन ने कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड से ले ली हो तो विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या इसके लिए उक्त भूमि जेडीए / राज्य सरकार द्वारा जिस पक्ष (कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड) को लीज पर दी गयी थी उसे किसी दूसरे पक्ष (पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन) को देने का विधिक अधिकार था या इस हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार /जेडीए या अन्य संबंधित विभाग से अनुमति ले ली गयी थी अथवा नहीं।%name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग

जेडीए के लॉ डायरेक्टर ने की सीबीआई जाँच की माँग

इस सवाल का राज सरकार की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।

  • साथ ही जेडीए स्वयं मानता है कि नवीन खसरा संख्या 177-178 की शेष भूमि 316675 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के मानचित्र जेडीए द्वारा दिनांक 11 जनवरी 2013 को स्वीकृत किये गए तथा शेष भूमि जिसका बेचान किया जाना है, वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया था तथा खसरा संख्या 178 की 11782.78 वर्ग मीटर भूमि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार राजकीय भूमि के रूप में दर्ज है। अत: इस  राजकीय भूमि का भू-उपयोग आवेदक के पक्ष में क्यों किया है। समझ से परे है।
  • उल्लेखित कार्यवाही विवरण  संख्या 02के बिंदु संख्या 04 में उल्लेख है कि 9 जून 1999 (पृष्ठ संख्या 152 से 157) में औद्योगिक प्रयोजनार्थ लीज पर आवंटित भूमि को औद्योगिक परियोजनार्थ प्रयोग में नहीं लेने पर लीज निरस्ती की कार्यवाही करने हेतु लिखा गया था तथा जो राजकीय सिवाय चक भूमि लीज पर दी गयी थी, उसकी लीज निरस्त करते हुए बिना किसी मुआवजे के भूमि राज्य सरकार को अधिकृत करने हेतु लिखा गया। उक्त का प्रत्युत्तर पत्रावली में उपलब्ध नहीं है। अतः इस संबंध में पुन: राज्य सरकार के मार्गदर्शन लेने के बजाय आवेदक को फायदा पहुँचाने का कार्य किस मंशा से किया गया है?
  • इसी बैठक के कार्यवाही विवरण  संख्या 03के बिंदु संख्या 13 में स्पष्ट उल्लेख है कि “महालेखाकार राजस्थान जयपुर द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन 2015-2017 के आक्षेप संख्या 02 में लीज की शर्तों की पालना नहीं करने से 472.39 करोड़ एवं आक्षेप  संख्या 03 में 8.70 करोड़ राजस्व हानि हुई है।” जिम्मेदार अधिकारियों के रहते हुए उल्लेखित राशि की आपूर्ति किये बगैर अथवा जेडीए वित्त शाखा से राय लिए बगैर यह प्रकरण अंतिम अंजाम तक क्यों पहुँचा। यह भी समझ से परे है, इसकी सीबीआई से जाँच होना लाजमी है। उच्च स्तरीय जाँच से ही खुलासा हो सकता है कि आवेदक के के पक्ष में निर्णय कार्नर वाले  कौन-कौन से अधिकारी थे? क्या उन्हें सरकार और शासन में बैठे रसूखदार लोगों का संरक्षण था? इसकी जनहित में  जाँच होना आवश्यक होगा।
  • %name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग
  • उक्त बैठक के कार्यवाही विवरण  संख्या 02की वस्तुस्थिति के बारे में अनेकों कमियों के कमियां होने के बावजूद भी प्रकरण जेडीए की विधि शाखा में गहन परीक्षण हेतु  नहीं भिजवाया जाना भी दर्शाता है कि इस प्रकरण में दाल में काला नहीं बल्कि दाल ही काली है।
  • उक्त बैठक के कार्यवाही विवरण  अनुसार जेडीए स्वयं मान रहा है कि उक्त भूमि गोपालपुरा आरोपी फ्लाईओवर से प्रभावित है तथा जेडीए की 60वीं बैठक दिनांक 5 सितंबर 2011 की कार्यवाही विवरण के अनुसार “यातायात के सफल संचालन हेतु प्रस्ताव है कि ऐसी सभी सड़कों पर व्यावसायिक भू-उपयोग प्रस्तावित किया गया है, ऐसी सड़कों के जंक्शन एवं आरओबी फ्लाईओवर के दोनों स्थित सड़कों पर व्यावसायिक भू-उपयोग प्रतिबंधित रहेगा वह नियमन भी नहीं किया जा सकेगा” उल्लेखित निर्णय लेने के बाद भी जेडीए एवम् यूडीएच के जिम्मेदार अधिकारियों ने शह पर कानून से खिलवाड़ किया है, इसकी व्यापक जाँच होना भी लाजमी है। क्योंकि यह सर्वविदित है कि उक्त भूमि सार्वजनिक हित में टोंक रोड गोपालपुरा फ्लाईओवर से प्रभावित है।
  • जेडीए स्वयं यह भी मान रहा है कि मास्टर प्लान की तकनीकी बिंदु संख्या 03 के अनुसार मास्टर विकास योजना 2025 के वॉल्यूम 02 के बिंदु संख्या 2.4.2 के अनुसार मिश्रित भू-उपयोग हेतु पॉलिसी निर्धारित की गयी है जिसके अनुसार 80 फीट और उससे अधिक चौड़ाई की सड़कों (आरओडब्ल्यू ) पर ही मिश्रित भू-उपयोग अनुज्ञेय है। उक्त प्रकरण में आवेदित भूमि 18 मीटर सड़क पर स्थित है। अतः आवेदित भूमि का उपयोग किये जाने हेतु न्यूनतम 24 मीटर चौड़ी सड़क का पहुँच मार्ग अति आवश्यक है जबकि आवेदित फ्लाईओवर के नीचे है तथा यहाँ मात्र 10.5 मीटर की रोड उपलब्ध है। अत: न्यूनतम 24 मीटर सड़क का पहुँच-मार्ग नहीं मिलने पर भी आवेदक पर सरकारी अधिकारियों की मेहरबानी समझ से परे है।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) – भीम आर्मी ने जनहित में आपत्ति दर्ज की 

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संज्ञान में आने पर जनहित में इसके विरुद्ध जयपुर विकास प्राधिकरण में प्रार्थी द्वारा दिनांक 8 नवंबर 2022 एवम् 9 नवंबर 2022 को जेडीए सचिव/ आयुक्त एवं उपायुक्त को आपत्ति प्रस्तुत की गयी थी। इसके उपरांत प्रकरण डायरेक्टर (लॉ) को भेजा गया और उन्होंने पार्टी की आपत्तियों को तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से सही माना और प्रकरण की सीबीआई/ ईडी से जाँच करवाने की संस्तुति की है।%name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग

  • जयपुर विकास प्राधिकरण की बैठक दिनांक 09मई 2011 की कार्यवाही विवरण में स्पष्ट है कि विशिष्ट क्षेत्र में नीतिगत निर्णय के बाद कार्रवाई की जायेगी जबकि उक्त प्रकरण में विशिष्ट क्षेत्र से मिश्रित एवं व्सायावयिक भू-उपयोग परिवर्तन चाहा गया है। अतः विशिष्ट क्षेत्र में नीतिगत निर्णय किये जाने से पूर्व ही आवेदक को किस नियम के तहत फायदा पहुँचाने की कार्रवाई की गयी है। व्यापक जनहित में सर्वश्रेष्ठ होता कि पहले कृषि क्षेत्र का जोनल प्लान बनता जिसके लिए आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किये जाते और जवाहर लाल नेहरु मार्ग तथा टोंक रोड के बीच पड़ने वाली इस भूमि में से ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए कम से कम 80 फीट चौड़ाई का नवीन मार्ग निकाला जाता तथा टोंक रोड फ्लाईओवर और उक्त भूमि के बीच जो रोड वर्तमान में जेडीए के अनुसार 10.5 मीटर का ही उपलब्ध है उसे भी कम से कम 80 फीट किया जाना जनहित में अत्यंत जरूरी था, जो भ्रष्टाचार, मनमानी और सरकार-शासन में काबिज रसूखदार लोगों के स्वार्थों की भेंट चढ़ गया।
  • उक्त प्रकरण में स्वामित्व के संबंध में भी दो रजिस्टरी भीम आर्मी – आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संज्ञान में आयी है जिसमें स्वर्गीय मदनलाल भार्गव के स्वामित्व के संबंध में रजिस्टर्ड दस्तावेज है जिन्हें किन्हीं भी न्यायालय द्वारा आज तक निरस्त नहीं किया गया है। जयपुर विकास प्राधिकरण का कथन है कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में महावीर जयपुरिया का नाम दर्ज है जबकि रेवेन्यू रिकॉर्ड केवल मात्र लगान से संबंधित दस्तावेज होता है, स्वामित्व के संबंध में उसका कोई महत्व नहीं है। इस संदर्भ में माननीय उच्चतम न्यायालय ने कई बार अपनी व्याख्यात्मक निर्णय दिए  हैं जो गूगल पर उपलब्ध हैं।
  • जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा उक्त बैठक में प्रकरण की मूल फाइल गायब होना बताया गया है। अतः डुप्लीकेट फाइल किस अधिकारी ने तैयार की दस्तावेज की प्रमाणिकता किस अधिकारी ने की तथा किन नियमों की के तहत की जैसा कि पूर्व में बताया जा चुका है कि उल्लेखित को एक बार फिर जयपुर विकास प्राधिकरण की विधि शाखा में नहीं भेजा गया जबकि जेडीए में डायरेक्टर (डीजे रैंक का अधिकारी जोकि डायरेक्टर होगा) जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम धारा 8 के तहत दे सकता है। यदि दी गयी थी तो कार्यवाही विवरण  में विधिक राय का उल्लेख किया गया है अथवा आवेदक को नियम विरुद्ध फायदा पहुँचाने के लिए ऐसा किया गया है।
  • उक्त भूमि के मालिकाना हक को लेकर विवाद है।आसपा (कांशीराम) की  जानकारी में आया है कि इस बाबत FIR No.  313/ 2022 थाना बजाज नगर में दर्ज है एवं मालिकाना हक का दावा करने वाले स्वर्गीय श्री मदन लाल भार्गव के वंशजों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में गुहार लगाई गयी थी। उस पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने क्या निर्णय लिया है इसके लिए पार्टी ने आरटीआई लगाई है, जो अभी पेंडिंग है। पार्टी के पास इस प्रकरण की एक एफएसएल की रिपोर्ट भी मौजूद है जिसका विधिक परीक्षण जारी है। इन सबके बारे में अगली प्रेस कांफ्रेंस में तथ्यात्मक जानकारी दी जायेगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उपरोक्त तथ्यों के बावजूद जिस तरह राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन कर आवेदक को लाभ  पहुँचाया गया है यह दर्शाता है कि जेडीए अधिकारी और सरकार सीधे-सीधे एक पक्ष को फायदा पहुँचाने में लगे हुए हैं।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की  महात्मा ज्योतिबा फुले हॉस्पिटल और भगत सिंह पार्क बनाने की माँग%name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग

माननीय मुख्यमंत्री जी से जनहित में माँग है कि  उल्लेखित तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एवं पूर्व में राज्य सरकार के आदेश दिनांक 2 दिसंबर 1987 जिसका हवाला पूर्व में दिया गया है के अनुसार जिन शर्तों के साथ उक्त भूमि को व्याप्ति से मुक्त लीज पर दिया गया था उनमें से एक भी शर्त का पालन नहीं होने से एवं शर्त संख्या 6 के तहत “यह है कि किसी भी समय राज्य सरकार को यह विदित हो जाये कि उपरोक्त शर्तों में से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो सरकार अधिनियम की धारा 20(2) के तहत छूट से आदेश वापस ले सकेगी” का उल्लेख है।

किंतु अद्य-दिनांक तक उसके संबंध में हुई प्रगति के बारे में सूचित नहीं किया गया है। चूँकि उक्त प्रकरण से संबंधित पत्रावली मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तलब कर ली है इसलिए भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी कांशीराम निम्नलिखित बिंदुओं पर माननीय मुख्यमंत्री से जवाब चाहती है;

  • पार्टी के संज्ञान में आया है जो बेहद दिलचस्प और गौरतलब है कि जेडीए बनाममैसर्स जयपुरिया एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के मध्य डीबी सिविल मिसलेनियस एप्लीकेशन नंबर 55/2011 के निर्णय दिनांक 5 अक्टूबर 2016 के अनुसार जेडीए को डिफाल्ट होना बताया गया।
  • जयपुर विकास प्राधिकरण मेंसंबंधित भूमि के संबंध में पूर्व में कौन-कौन से न्यायिक विवाद रहे हैं? उन पर क्या निर्णय हुए हैं? और यदि फैसलों पर अपील की गयी है तो उन पर क्या निर्णय हुए ? और यदि अपील नहीं की गयी है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गयी और यदि कार्रवाई नहीं की गयी तो क्यों नहीं की गयी? इसकी जानकारी भी पत्रावली में कहीं भी उपलब्ध नहीं है।  %name महारानी और जादूगर के भ्रष्टाचार की कहानी, किसानों की जमीन कमर्शियल यूज से मिश्रित यूज में बदली, 25 हजार करोड़ का घोटाला, प्रोफ़ेसर मीणा ने सीबीआई जाँच की माँग
  • जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रार्थी द्वारा दिनांक 8नवंबर 2022 एवम् 9 नवंबर 2022 को जेडीए सचिव/ आयुक्त एवं उपायुक्त को आपत्ति प्रस्तुत की गयी थी, उन आपत्तियों का क्या हुआ? यदि उनका निस्तारण कर दिया तो प्रार्थी को बुलाया क्यों नहीं गया? और यदि आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया था तो फिर उन आपत्तियों का निस्तारण किये बगैर ही प्रकरण राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन समिति में रखा गया है।
  • जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी जानबूझकर उक्त प्रकरण में आवेदकों को लाभ पहुँचाने में लगे हुएहैं। प्रार्थी को जनहित में संपूर्ण प्रकरण में नोटशीट की फोटो कॉपी दिलवाई जाये जिसका नियमानुसार में शुल्क देने को वचनबद्ध हैं।
  • प्रार्थीद्वारा उक्त भूमि पर जन्मजात शहीद भगत सिंह के नाम पर बजट घोषणा 2023 के तहत अस्पताल बनाने की मांग की गयी थी जिसके क्रम में राजस्थान सरकार की जन अभियोग निराकरण समिति द्वारा पत्रांक अशा.टिप. अ/ सीआरपीसी/2022/1825 दिनांक 15 दिसंबर 2022 को प्रेषित पत्र द्वारा प्रार्थी को बताया गया कि प्रार्थी का मूल पत्र जन अभियोग निराकरण समिति द्वारा प्रमुख शासन सचिव, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग, शासन सचिवालय को प्रेषित कर आवश्यक कार्यवाही बाबत निर्देशित किया गया है?
  • किंतुअद्यदिनांक तक उसके संबंध में हुई प्रगति के बारे में सूचित नहीं किया गया है। उक्त पत्र का क्या हुआ? वह कहाँ गया? उसे दबा दिया गया या गाय खा गयी? यह अलग से जांच का विषय हैकिंतु अद्यदिनांक तक उसके संबंध में हुई प्रगति के बारे में सूचित नहीं किया गया है। किंतु इससे यह साफ जाहिर है कि उक्त प्रकरण में नगर विकास एवं आवास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी जिम्मेदार अधिकारियों के साथ शामिल है।
  • साथ ही ज्वेल ऑफ़ इंडिया फ्लेट्स को वर्तमान जयपुरिया हॉस्पिटल में परिवर्तित किया जाये। जयपुरिया हॉस्पिटल का नाम महात्मा ज्योतिबा फुले के नाम पर किया जाये और जयपुरिया स्कूल को सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के नाम कर वहाँ पर बुजुर्ग महिलाओं के लिए अनाथालय और चिल्ड्रन्स होम खोलें तथा जयपुरिया क्रिकेट एकेडमी को शहीद भगत सिंह गार्डन्स में तब्दील करने की सरकार तत्काल कार्यवाही करें।

इस प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से जनहित में मुख्यमंत्री से आग्रह हैं कि जेडीए के अधिकारियों को मनमर्जी से रोका जाये और उक्त प्रकरण में नियमानुसार निर्णय लेते हुए कैपस्टन मीटर्स इंडिया लिमिटेड एवं जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड और पुष्पा जयपुरिया फाउंडेशन की लीज को तत्काल निरस्त कर माँग संख्या (7) के अनुरूप कार्रवाई करें तथा जेडीए, यूडीएच एवं अन्य आरोपियों की संलिप्तता को उजागर करने के लिए सीबीआई / ईडी में एफआईआर दर्ज करवाकर तटस्थ जाँच करवायी जाये।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This