आर या पार : राजेश पायलट की पुण्यतिथि11 जून को क्या करेंगे सचिन पायलट, राजस्थान के कई कांग्रेसी नेताओं की बोलती बंद

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07 जून 2023 | जयपुर-दिल्ली : प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा के ताजा बयान ने राजस्थान के कई कांग्रेसी नेताओं की बोलती बंद कर दी है। मंगलवार को जयपुर पहुंचने पर रंधावा ने कहा कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे विवाद को सुलझा लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि 90 फीसदी मसले सुलझ गए हैं, अब 10 परसेंट कोई मसला नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान के साथ हुई बैठक में गहलोत और पायलट दोनों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ने की बातों पर सहमति दे दी है। ऐसे में अब इनके बारे में चल रही अनबन की खबरों का कोई आधार नहीं है।

रंधावा के इस बयान से गहलोत और पायलट दोनों गुटों के नेताओं की बोलती बंद कर दी है। दरअसल, अभी सियासी गलियारों में यही चर्चा है कि 11 जून को सचिन पायलट बड़ा धमाका करने वाले हैं। 11 जून को ही उनके नई पार्टी का ऐलान करने की अटकलें भी लगाई जा रही है। ऐसे में रंधावा के बयान ने फिर से कांग्रेस के भीतर सचिन पायलट को अलग नहीं होने देने के प्रयासों की चर्चा शुरू कर दी है। चर्चा ये भी है कि रंधावा अभी पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच किसी तरह की गुटबाजी से बचने के लिए ही ये दांव खेल रहे हैं।

क्या पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट नई राजनीतिक पार्टी बना रहे हैं? राजस्थान ही नहीं पूरे देश की राजनीति में आज ये सबसे बड़ा सवाल है। दो दिन पहले कुछ न्यूज पोर्टल पर एक न्यूज चली- सचिन पायलट प्रगतिशील कांग्रेस नाम से बनाएंगे नई पार्टी, 11 जून को करेंगे घोषणा। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि क्या पायलट कांग्रेस से अलग होकर राजनीतिक की नई राह चुनने वाले हैं?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए मूकनायक मीडिया ने पूरे मामले से जुड़े हर पहलू का विश्लेषण किया। एक लाइन में इस सवाल का जवाब है- सचिन पायलट के लिए नई पार्टी बनाना नामुमकिन के करीब है।

आखिर इसके क्या कारण है? मूकनायक ने इस मामले में सभी तथ्यों का विश्लेषण किया है। 11 जून को सचिन के पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दिन वे कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। समझिए, पायलट का नई पार्टी बनाना क्यों है मुश्किल…

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मुश्किल 1 : अब तक आवेदन ही नहीं

राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (आईएएस) डॉ. प्रवीण कुमार गुप्ता ने बताया कि आवेदन कोई भी कर सकता है, लेकिन आम तौर पर आवेदन के बाद चुनाव आयोग 3 से 4 महीने का समय लेकर ही रजिस्ट्रेशन करता है। सचिन पायलट की बात करें तो अभी तक उन्होंने नई पार्टी के लिए आवेदन ही नहीं किया है।

मुश्किल 2 : कांग्रेस से देना होगा इस्तीफा

भाजपा से वर्तमान राज्यसभा सांसद और 2018 में दीनदयाल वाहिनी नामक पार्टी बना चुके घनश्याम तिवाड़ी का कहना है कि किसी भी नई राजनीतिक पार्टी के लिए चुनाव आयोग के पास आवेदन करने के लिए किसी भी संगठन के पास 100 सदस्य होना जरूरी है।

आवेदनकर्ताओं को नियमानुसार शपथ पत्र देना पड़ता है कि वे किसी भी अन्य राजनीतिक पार्टी के सदस्य नहीं हैं। सचिन पायलट या कोई और नेता हो, नई पार्टी के लिए तब तक आवेदन नहीं किया जा सकता है, जब तक कि वे किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य बने हुए हैं। सचिन पायलट की बात करें तो उन्होंने और उनके समर्थकों ने न अब तक कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और न ही ऐसी कोई घोषणा की है।

मुश्किल 3 : 4-12 महीने लगते हैं नई पार्टी बनने में

भाजपा से अलग होकर अपनी स्वयं की राजनीतिक पार्टी बनाकर राज्य स्तर पर मान्यता लेने वाले सांसद हनुमान बेनीवाल ने भास्कर को बताया राजनीतिक पार्टी बनाने की एक पूरी प्रक्रिया और नियम हैं। उसके तहत कोई भी व्यक्ति तब तक किसी नई पार्टी का सदस्य नहीं हो सकता जब तक वो किसी अन्य पार्टी में भी सदस्य बना हुआ हो।

मैं पहले जब भाजपा में था तो पूरी तरह से अलग होने के बाद ही रालोपा का गठन किया था। आवेदन के बाद संगठन का राजनीतिक दल के तौर पर रजिस्ट्रेशन होने में कम से कम 4-12 महीने का समय लग जाता है। जबकि…विधानसभा चुनाव में अब 6 महीने का ही वक्त बचा है।

11 जून को नई पार्टी की घोषणा करने की संभावना कम, क्योंकि…

20 जून तक सोनिया, राहुल और प्रियंका हैं विदेश में

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि 11 जून को सचिन पायलट अपने पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि के अ‌वसर पर दौसा में नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान करेंगे। दौसा में ही एक सड़क दुर्घटना में राजेश पायलट का देहांत हुआ था। वहीं उनकी एक आदमकद प्रतिमा भी लगी हुई है।

पायलट प्रत्येक वर्ष 11 जून को दौसा जाते हैं। इस बीच 19 जून को राहुल गांधी का जन्मदिन है और वे 20 जून तक लंदन में हैं। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी अमेरिका हैं। ऐसे में संभावना कम ही है कि तीनों के विदेश में होने के दौरान पायलट का इतना बड़ा व महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाएंगे।

पायलट समर्थक बोले- नई पार्टी की संभावना नहीं

भास्कर ने सचिन पायलट के समर्थकों से बात कर जानने की कोशिश की कि-क्या पायलट नई पार्टी बनाएंगे। इस सवाल के जवाब में पायलट के नजदीकी माने जाने वाले जयपुर क्षेत्र के एक विधायक और अजमेर से जयपुर के बीच निकाली गई जन संघर्ष यात्रा के प्रमुख आयोजकों में शामिल रहे दो नेताओं ने भी बताया कि नई पार्टी बनाने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।

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11 जून को राहुल, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी विदेश में रहेंगे, ऐसे में संभावना कम ही है कि इस दौरान पायलट कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाएंगे।

लेकिन अगर सचिन 11 जून को नई पार्टी की घोषणा करते हैं तो…

अगर सचिन पायलट 11 जून को यह घोषणा करते हैं कि वे नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे तो उन्हें कांग्रेस से इस्तीफा देना ही पड़ेगा। हालांकि राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस बात की गुंजाइश बहुत कम है, क्योंकि 11 जून को नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा करने से उस संभावित पार्टी पर एक जाति और क्षेत्र विशेष की पार्टी हो जाने का खतरा चस्पा हो जाएगा। ऐसे में पायलट 11 जून को तो नई पार्टी की घोषणा करने से बचेंगे।

अगर वे ऐसा करते हैं, तो फिर चुनावों तक (नवंबर-दिसंबर) उनके पास एक नई पार्टी के लिए आवेदन और रजिस्ट्रेशन करवाने का दबाव होगा। चुनाव आयोग आम तौर पर 3-4 महीने का समय तो किसी भी सूरत में लेगा ही किसी नई पार्टी को मान्यता देने के लिए।

ऐसे में पायलट के पास पार्टी के संगठन को खड़ा करना, कार्यकारिणी बनाना, प्रचार-प्रसार करने के लिए कोई समय अब बचा नहीं है। दूसरी संभावना है कि वे पहले से गठित किसी राजनीतिक पार्टी को अपना लें। वो कांग्रेस के अलावा भाजपा, आप या कोई भी और पार्टी हो सकती है, लेकिन उनके खुद के द्वारा राजनीतिक पार्टी बनाने की बात फिलहाल बेहद मुश्किल जान पड़ती है।

केंद्रीय चुनाव आयोग में नहीं कराई पार्टी रजिस्टर

सचिन पायलट ही नहीं पूरे राजस्थान में किसी ने पिछले एक साल में केंद्रीय चुनाव आयोग (दिल्ली) में नई पार्टी रजिस्टर्ड नहीं की है। पिछले 20 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब चुनावी साल में किसी राजनीतिक पार्टी का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। इससे पहले साल 2003, 2008, 2013 और 2018 में किसी ने किसी पार्टी का रजिस्ट्रेशन हुआ था, लेकिन इस बार 2023 के 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।

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कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर बैठक में मौजूद राहुल गांधी, सीएम अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल।

चुनाव आयोग के एजेंडे में कोई नई पार्टी शामिल नहीं

15 और 16 जून को केन्द्रीय चुनाव आयोग का 9 सदस्यीय दल जयपुर आएगा। आयोग के सदस्य मुख्य सचिव उषा शर्मा और पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा से मुलाकात करेंगे। आयोग सदस्य जयपुर में सभी जिलों के कलेक्टर व एसपी से भी वन-टू-वन बातचीत करेंगे। पूरे प्रदेश में चुनावों को लेकर जो तैयारियां निर्वाचन विभाग शुरू कर चुका है, उनके बारे में यह मीटिंग्स होंगी। इन मीटिंग्स के दौरान राजनीतिक दलों के सदस्यों से भी बातचीत संभव है। आयोग की मीटिंग्स के एजेंडे में भी किसी नई पार्टी का नाम शामिल तक नहीं है।

समझिए नई पार्टी बनाने के नियम

देश में कहीं पर भी कोई राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए व्यक्ति विशेष को केन्द्रीय चुनाव आयोग (दिल्ली) को आवेदन करना पड़ता है। आयोग ही किसी संगठन को राजनीतिक पार्टी के रूप में स्वीकृति देता है।

  • यह आवेदन 10,000 रुपए के डिमांड ड्राफ्ट के साथ आयोग के सचिव के नाम किया जाता है। उसके बाद आयोग पार्टी बनाने के राजनीतिक उद्देश्यों को भारतीय संविधान के अनुसार उचित मानता है तो विभिन्न तरह की जांच करवाने के बाद 3 से 4 महीने में उसका रजिस्ट्रेशन करता है।
  • आवेदन करने के लिए आवेदनकर्ता के अलावा संगठन में 100 लोग होने आवश्यक हैं। उन सभी के दस्तावेज जमा होते हैं।
  • इसके बाद संबंधित आवेदनकर्ता संगठन को राजनीतिक पार्टी घोषित करने से पहले मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों में आयोग की ओर से विज्ञापन दिए जाते हैं कि किसी को संबंधित संगठन के राजनीतिक पार्टी बनने, नामकरण या किसी अन्य बिन्दु पर कोई आपत्ति हो तो वो दर्ज करवा सके।
  • सभी तरह की आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद किसी संगठन को आयोग की ओर से राजनीतिक पार्टी की मान्यता दी जाती है।
  • राजनीतिक मान्यता तो किसी संगठन को चुनाव आयोग दे देता है, लेकिन राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना उस दल का चुनावों में प्रदर्शन पर तय करता है।
  • राजस्थान में 25 सांसद सीटों में से एक सीट जीतने या लोकसभा-विधानसभा के चुनावों में राज्य में डाले गए कुल वैध मतों का 8% हिस्सा प्राप्त करने पर राज्य स्तरीय मान्यता मिलती है।
  • किसी प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लग जाने के बाद नई पार्टी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है। राजस्थान में चुनाव नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित है। पिछले वर्ष 6 अक्टूबर-2018 को आचार संहिता लगी थी।
पिछले कुछ समय से कई मौकों पर सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर बोलते नजर आए। इसी से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे 11 जून को बड़ी घोषणा कर सकते हैं।
अब तक भाजपा-कांग्रेस के अलावा केवल रालोपा ही बन पाई राज्य स्तरीय पार्टी

राजस्थान की राजनीतिक तासीर कुछ ऐसी है कि अब तक यहां मुख्यत: भाजपा और कांग्रेस ही बतौर राजनीतिक पार्टी सफल हुई हैं। यहां की धरती से बनी राजनीतिक पार्टियों में भाजपा-कांग्रेस के अलावा केवल एक ही राजनीतिक पार्टी को सफलता मिली है। वो है राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) । रालोपा के वर्तमान में एक सांसद हनुमान बेनीवाल (नागौर) सहित तीन विधायक हैं। इस पार्टी की स्थापना 29 अक्टूबर-2018 में हुई थी।

राजस्थान में अलग पार्टी का माहौल नहीं

विगत चार दशक से राजनीतिक पत्रकारिता कर रहे हरिदेश जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ओम थानवी का कहना है कि राजस्थान में एक समय ऐसा था कि पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत और पूर्व केन्द्रीय रक्षा मंत्री जसवंत सिंह जैसे लीडर्स द्वारा भी अलग पार्टियां बनाने की बातें सामने आई थीं। हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं था। यहां जब भी भाजपा-कांग्रेस से अलग पार्टी बनाने के प्रयास हुए तो उन्हें ज्यादा सफलता मिली नहीं। ऐसे में सचिन पायलट संभवत: नई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे।

कांग्रेस का एक बड़ा वोट बैंक है, पायलट उसे छोड़ना क्यों चाहेंगे

देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक लेख और ब्लॉग लिखने वाले पत्रकार मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है। उसका अपना एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। अब तो पार्टी देश के चार राज्यों में सत्ता में भी है। क्या सचिन पायलट कांग्रेस छोड़ना चाहेंगे, क्योंकि यह वोट बैंक कांग्रेस से निकलकर उनके पीछे नई पार्टी में तो जाने से रहा। उनके साथी विधायक-कांग्रेस कार्यकर्ता भी नहीं चाहेंगे कि भाजपा जैसी ताकतवर पार्टी के खिलाफ उनके पास कांग्रेस की ब्रांड वैल्यू नहीं रहेगी तो क्या वे चुनाव जीत सकेंगे। ऐसे में लगता नहीं है कि पायलट अलग पार्टी बनाएंगे।

नई पार्टी तो बहुत बड़ा जोखिम है

राजनीतिक टिप्पणीकार प्रोफ़ेसर ओम महला का कहना है कि सचिन पायलट सीएम अशोक गहलोत के साथ बहुत उलझ चुके हैं। उनके पास बेहद मुश्किल राजनीतिक हालात हैं। फिर भी नई पार्टी बनाना तो ज्यादा बड़ा जोखिम है। बड़े पैमाने पर आर्थिक संसाधन जुटाना, समय-ऊर्जा खर्च करना और कांग्रेस के झंडे तले मिलने वाले वोटों को खोना ऐसे तर्क हैं कि लगता नहीं पायलट नई पार्टी बनाएंगे।

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रही खींचतान कैसे हल हुई? पायलट की मांगों का क्या हुआ? और सुलह का फॉर्मूला क्या रहा? मीडिया के इन सवालों का रंधावा ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि सुलह का फॉर्मूला पार्टी आलाकमान के साथ गहलोत और पायलट को पता है। इसे मीडिया में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। गहलोत और पायलट के कट्टर समर्थक सुलह का फॉर्मूला जानना चाहते हैं लेकिन यह फॉर्मूला किसी को नहीं बताया गया है। ऐसे में दोनों की गुट के नेताओं बैचेनी सी है।

नई पार्टी की अटकलों पर लगाया विराम

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सचिन पायलट की ओर से नई पार्टी बनाए जाने की खबरों को मीडिया की देन बताया है। उन्होंने कहा कि पायलट कांग्रेस के साथ हैं। पहले भी उनके मन में नई पार्टी बनाने का विचार नहीं था और संभवतया अब भी नहीं है। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट कांग्रेस के एसेट थे, हैं और आगे भी रहेंगे। रंधावा ने कहा कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव कांग्रेस पूरी एकजुटता से लड़ेगी। रंधावा के इन दावों ने गहलोत और पायलट खेमें में बैचेनी ला दी। यह रंधावा का कोई नया दांव तो नहीं है। खैर राजस्थान कांग्रेस का भविष्य क्या होगा, यह आगामी 4-5 दिन में साफ होने की संभावना है। दरअसल, राहुल गांधी 8 जून को विदेश दौरे से वापस लौट रहे हैं। 11 जून से पहले सचिन पायलट की राहुल गांधी से मुलाकात संभव है। इसी मुलाकात पर आगे की रणनीति तय होगी

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