‘पत्नी चिल्लाती रही…बाघ मेरे पति को घसीट ले गया, टाइगर क्यों बन रहे है आदमखोर, पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं होती

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 15 जून 2023 | जयपुर-दिल्ली :“शाम का वक्त था। मैं अपने पति के साथ जानवरों के लिए चारा काटने खेत गई थी। हम काम निपटाकर घर वापस जाने ही वाले थे कि अचानक झाड़ियों से एक बाघ दौड़ता हुआ आया और मेरे पति पर कूद पड़ा। मैं जोर से चिल्लाई, डंडा लेकर दौड़ी। लेकिन तब तक बाघ गर्दन पकड़कर उन्हें जंगल की तरफ घसीटता हुआ ले गया।”

“मेरी आवाज सुनकर आस-पास काम कर रहे लोग जंगल की तरफ दौड़े। देर रात तक मेरे पति को खोजा गया, लेकिन वह नहीं मिले। मेरी आंखों के सामने वह आदमखोर मेरे पति को घसीटकर ले गया। मैं कुछ नहीं कर पाई। घर में बिन ब्याही 3 बेटियां हैं, जवान लड़का है। उनके जाने के बाद पता नहीं हमारा क्या होगा। काश उस दिन वह मेरे साथ खेत में गए ही न होते।”

ये शब्द लखीमपुर खीरी जिले के मंझरा पूरब कस्बे की रहने वाली राजकुमारी के हैं। 8 जून को बाघ के हमले से उनके पति शिवकुमार की मौत हो गई। यहां पिछले 2 साल में 50 से ज्यादा बार बाघों ने लोगों पर हमला किया। इस दौरान 10 लोगों की मौत हुई। जो बच गए उनमें किसी का पैर गया तो किसी के हाथ। कस्बे में ऐसे कई लोग हैं, जिनके शरीर पर बाघ के पंजों के निशान आज भी मौजूद हैं। ये वह लोग हैं जिन पर 2023 में बाघ ने हमला किया।

”एक महीने पहले साथ फोटो खिंचाई, यही आखिरी तस्वीर बन गई”

लखीमपुर खीरी से 49 किलोमीटर दूर नेपाल बॉर्डर पर बसा है मंझरा पूरब कस्बा। यहां 1040 मकान और करीब 7000 की आबादी रहती है। ये इलाका दुधवा टाइगर रिजर्व की कतर्निया, बेलरायां और धोरहरा रेंज से घिरा हुआ है। यहां दूर-दूर तक घने जंगल फैले हैं, जिनसे निकल कर आए दिन बाघ लोगों पर हमला करते हैं। इन्हीं जंगलों से होते हुए हमारी टीम मंझरा पूरब पहुंची।

हम सबसे पहले राजकुमारी के घर पहुंचे, जिन्होंने इसी 8 जून को बाघ के हमले में अपने पति शिवकुमार को खो दिया था। फूस के बने घर में चारपाई पर लेटी राजकुमारी की तबीयत लगातार खराब होती जा रही है। पति की मौत के बाद उनकी 3 बेटियां उन्हें संभाल रही हैं। सबका रो-रोकर बुरा हाल है। हमने बाघ के हमले में मारे गए शिवकुमार के बारे में पूछा तो उनकी बेटी शिवानी अंदर से फोटो एलबम ले आई। घर की पुरानी तस्वीरें दिखाने लगी।

शिवकुमार और राजकुमारी की साथ में एक तस्वीर आते ही शिवानी भावुक हो गईं। उसने बताया, “मम्मी-पापा ने यह फोटो एक महीने पहले खिंचवाई थी। एक रिश्तेदार के यहां शादी थी, जहां जाने के लिए नए कपड़े खरीदे थे। यही पापा की आखिरी फोटो थी। अब सिर्फ उनकी यादें ही रह गई हैं।”

हमने राजकुमारी से भी बात की। उन्होंने बताया कि जिस दिन बाघ ने शिवकुमार की जान ली। उन्हें खोजते-खोजते रात बीत गई, लेकिन वह नहीं मिले। अगले दिन सुबह लोगों ने फिर से खोजना शुरू किया तो उनकी लाश नहर के पास पड़ी मिली। गुस्साए लोगों ने सड़क पर ही शिवकुमार का शव रखकर रास्ता जाम कर दिया। लोगों का प्रदर्शन देख दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारी और पुलिस वाले आए। प्रशासन ने राजकुमारी को आवास, वन विभाग में बेटे को नौकरी और लड़कियों की शादी में मदद करने का आश्वासन दिया है।

रात-बिरात तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल जाने में भी डर लगता है
कस्बे में थोड़ा अंदर जाने पर गन्ने के खेत में गुड़ाई करते हुए हमें रामगोपाल मिले। उन्होंने बताया कि जनवरी, 2022 से लेकर अब तक मझरा पूरब में 10 से ज्यादा लोगों को बाघ मार चुके हैं। यहां 30% ऐसे लोग हैं, जिनके शरीर पर बाघ के हमले के निशान हैं।

रामगोपाल भी बाघ के हमले का शिकार हो चुके हैं। पिछले साल की ही बात है जब बाघ ने उनके दोस्त को बीच रास्ते मार डाला था। उस दिन के बारे में रामगोपाल बताते हैं, “मई 2022 की घटना थी। मैं और मेरा दोस्त कमलेश जंगल से फूस लाने गए थे। मैं बैलगाड़ी पर था और कमलेश मेरे पीछे-पीछे साइकिल से आ रहा था। तभी अचानक बाघ ने कमलेश पर हमला कर दिया। मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही बाघ ने अपने जबड़े से कमलेश की गर्दन काटी और उसे मार डाला। उस दिन के बारे में सोचता हूं तो माथा चकरा जाता है।”

“यहां रात में बाघ खुलेआम टहलते रहते हैं। अक्सर ही उनकी गुर्राहट सुनाई देती है। इतनी दहशत है कि शाम 6 बजते ही लोग घरों में कैद हो जाते थे। महिलाएं दिन में भी बच्चों को स्कूल नहीं भेजती। ऐसा माहौल हो गया है कि अगर रात में कोई बीमार पड़ जाए, तो लोग उसे अस्पताल ले जाने से घबराते हैं।”

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