मणिपुर हिंसा के 50 दिन, बीजेपी विधायक-मिनिस्टर के घर में आग लगाने की कोशिश, पीएम मोदी की चुप्पी से सब हैरान, कुकी-नगा और अन्य ट्राइबल्स विरोध में क्यों

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 18 जून 2023| जयपुर-इंफाल : मणिपुर में 3 मई से हिंसा शुरू हुई और करीब 50 दिन गुजर जाने के बावजूद ये थमने का नाम नहीं ले रही है। 16 जून यानी शुक्रवार की रात भी हिंसा की 5 घटनाएं हुईं। इंफाल पश्चिम के इरिंगबाम थाने पर हमला कर भीड़ ने हथियार लूटने की कोशिश की, हालांकि सुरक्षाबलों ने उन्हें खदेड़ दिया।

untitled design 2023 06 17t230743675 1687023555 मणिपुर हिंसा के 50 दिन, बीजेपी विधायक मिनिस्टर के घर में आग लगाने की कोशिश, पीएम मोदी की चुप्पी से सब हैरान, कुकी नगा और अन्य ट्राइबल्स विरोध में क्योंउधर BJP विधायक विश्वजीत के घर में आग लगाने की कोशिश हुई। एक अन्य घटना में खोंगमन और सिंजेमाई में भीड़ ने BJP ऑफिस पर हमला किया। इंफाल के पोरमपेट में भीड़ ने BJP की महिला अध्यक्ष शारदा देवी के घर में तोड़फोड़ की। इसके अलावा इंफाल के ही पैलेस कंपाउंड में आग लगाने की कोशिश की गई।

पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के मुताबिक, बिष्णुपुर जिले के क्वाकटा और चुराचांदपुर जिले के कंगवई इलाकों में भीड़ ने ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग की है। एक दिन पहले ही BJP सांसद और केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह के इंफाल स्थित घर में आग लगा दी गई थी।

राजकुमार रंजन सिंह ने कहा, ‘मैं हिंसा की घटनाओं से हैरान हूं। मणिपुर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।’ फोटो मणिपुर के इंफाल ईस्ट जिले की है, तारीख 16 जून 2023। यहां उपद्रवियों ने टायर और कंस्ट्रक्शन का सामान सड़क पर रखकर आग लगा दी।

बीते 20 दिन में मणिपुर के मंत्री-विधायकों के घर पर हमले की 4 घटनाएं हो चुकी हैं। 14 जून को इंफाल के लाम्फेल में उद्योग मंत्री नेमचा किपजेन के सरकारी बंगले में आग लगा दी गई। 8 जून को BJP विधायक सोराईसाम केबी के घर पर बम से हमला हुआ। इससे पहले 28 मई को कांग्रेस विधायक रंजीत सिंह पर भी हमला हुआ था।

मैतेई समुदाय को रिजर्वेशन देने के मसले पर शुरू हुई हिंसा अब मणिपुर के विभाजन की मांग तक पहुंच गई है। 3 मई को चुराचांदपुर जिले में हुई एक रैली के बाद ये हिंसा भड़की। अब तक 60 हजार लोगों को रेस्क्यू किया गया है।

करीब 110 लोगों की मौत हो चुकी है। मणिपुर का बिष्णुपुर जिला हिंसा से सबसे प्रभावित इलाकों में से एक है। हिंसा के विरोध में 17 जून, 2023 को लोगों ने मशाल जुलूस निकाला।

मूकनायक मीडिया के रिपोर्टर्स पहले 6 से 12 मई और फिर 2 से 6 जून के बीच मणिपुर के अलग-अलग इलाकों में रहे। हमने मैतेई बहुल इंफाल से लेकर कुकी बहुल चुराचांदपुर जाकर लोगों से बात की।

पढ़िए, मूकनायक मीडिया रिपोर्टर्स ने जो मणिपुर में देखा…. विशेष रिपोर्ट 

charua 1687023829 मणिपुर हिंसा के 50 दिन, बीजेपी विधायक मिनिस्टर के घर में आग लगाने की कोशिश, पीएम मोदी की चुप्पी से सब हैरान, कुकी नगा और अन्य ट्राइबल्स विरोध में क्योंसबसे पहले इंफाल की बात…
मणिपुर की राजधानी इंफाल का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘यम’ यानी सुंदर और ‘फाल’ यानी घर। इंफाल ऐसी घाटी है, जहां बहुत सुंदर घर हैं, लेकिन 6 मई को जब हम इंफाल पहुंचे, तो सड़कों पर सन्नाटा था। एयरपोर्ट से सिर्फ 200 मीटर दूर जली हुई गाड़ियों का ढेर नजर आया।

मैतेई दंगाइयों की भीड़ से बचने के लिए खुद मैतेई लोग ही घरों पर पोस्टर लगा रहे हैं। न जाने भीड़ किसका घर जला दे। घरों के बाहर ‘मैतेई हाउस’ और ‘मैतेई शॉप’ के पोस्टर चिपका दिए गए। इंफाल मैतेई बहुल है, कुकी समुदाय यहां अल्पसंख्यक है। इंफाल में चुन-चुनकर कुकी समुदाय के घरों को टारगेट किया जा रहा है। इंफाल में आयकर अधिकारी लेमिनथांग हाओकिप को घर से खींचकर उनकी हत्या कर दी गई।

इंफाल के सुपरमार्केट इलाके में रहने वाले विवेकानंद बताते हैं, ‘हिंसा की शुरुआत पहाड़ी इलाके से हुई। चुराचांदपुर में 3 मई को बवाल हुआ। इसके बाद फेसबुक, वॉट्सऐप पर वीडियो-फोटो आने लगे। हिंसा की तस्वीरें देखकर शहर में रहने वाले मैतेई भी भड़क गए।

उस दिन से शुरू हुई हिंसा 50 दिन बाद आज तक नहीं रुकी है। कुकी और मैतेई दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे के नेताओं तक को नहीं बख्श रहे हैं। चुराचांदपुर में एंट्री से पहले ही थोरबुंग गांव में जली गाड़ियां और घर दिखने लगते हैं। इसी इलाके में सबसे ज्यादा हिंसा हुई है।

चुराचांदपुर का इंटरनेशनल बॉर्डर…
अकेले चुराचांदपुर जिले से सरकार में 4-5 विधायक हैं। यहीं के थोरबुंग गांव से हिंसा शुरू हुई थी। यह इलाका अब पूरी तरह से कुकी-मिजो के कब्जे में है। दुकानों पर अंग्रेजी में लिखा गया है कि दिस पार्ट ऑफ इंडिया इज ट्राइबल लैंड (भारत का ये हिस्सा ट्राइबल लैंड है)।

इस जिले में सरकार के सामने मांग रखने के लिए कुकी-मिजो ने एक संगठन बनाया है, जिसका नाम है- इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF)। ये संगठन यहां तक कहने लगा है कि ये इलाका अब मणिपुर का हिस्सा ही नहीं।

मणिपुर में कुल 16 जिले हैं, सबसे ज्यादा हिंसा इंफाल, चुराचांदपुर और बिष्णुपुर में हुई है। बिष्णुपुर इंफाल से 26 किमी और चुराचांदपुर करीब 60 किमी दूर है। 8 मई की सुबह हम इंफाल से चुराचांदपुर के लिए निकले थे। सबसे बड़ी दिक्कत थी कि हमारा ड्राइवर मैतेई समुदाय से था। चुराचांदपुर किसी मैतेई के लिए फिलहाल दुनिया की सबसे असुरक्षित जगह है।bsff 1687023882 मणिपुर हिंसा के 50 दिन, बीजेपी विधायक मिनिस्टर के घर में आग लगाने की कोशिश, पीएम मोदी की चुप्पी से सब हैरान, कुकी नगा और अन्य ट्राइबल्स विरोध में क्यों

इंफाल से निकलकर करीब 26 किमी चले, तो सबसे पहले बिष्णुपुर पड़ा। यहीं से कुकी बहुल इलाका शुरू हुआ। इंफाल घाटी और पहाड़ों के बीच कई ऐसे गांव हैं, जिनमें मैतेई और कुकी दोनों समुदाय की आबादी रहती थी।

अब इंफाल के चारों तरफ मौजूद ये तराई का इलाका (फुटहिल) ही जंग का मैदान बना हुआ है। थोड़ा आगे बढ़े तो तुईबोंग के हाओलाई खोपी गांव में BSF कैंप के पास जवानों ने रोक लिया। उन्होंने बताया कि आगे जाना खतरे से खाली नहीं है। हमारे मैतेई ड्राइवर ने आगे जाने से इनकार कर दिया, वो गाड़ी मोड़कर वापस इंफाल चला गया।

तुईबोंग के हाओलाई खोपी गांव में बना BSF का कैंप, 3 मई को यहां दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। हिंसा की शुरुआत भी यहीं से हुई थी।

हम BSF कैंप से पैदल आगे चल दिए। कुछ ही देर में एक गाड़ी दिखी, जिस पर लिखा था ‘कुकी मीडिया’। एक लड़के ने पूछा ‘आर यू फ्रॉम मूकनायक मीडिया?’ ग्रेसी नाम की लड़की ने हमें अपनी कार में बैठाया और हम आगे बढ़ने लगे।

सिर्फ एक किमी आगे हथियारबंद लोग सड़क के किनारे बैठे दिखे। लकड़ियों, पत्थरों और टीन के टुकड़ों से रास्ता बंद किया हुआ था। तीन-चार लोग कंधे पर राइफल और गोलियां लटकाए थे। यहां गाड़ियों की चेकिंग होती है, जहां ये सुनिश्चित किया जाता है कि कोई मैतेई इससे आगे न जाए।

BSF चौकी से आगे अब ये एक इंटरनेशनल बॉर्डर जैसा है। कुकी इधर नहीं आ सकते और मैतेई उधर नहीं जा सकते। चुराचांदपुर सिटी में मैतेई समुदाय के 3-4 मोहल्ले हैं। शहर का सबसे बड़ा मैतेई मोहल्ला कुमुजांबा अब राख हो चुका है। यहां मैतेई समुदाय के 100 से ज्यादा घर थे, जिन्हें लूटने के बाद जला दिया गया।

umu 1687027506 मणिपुर हिंसा के 50 दिन, बीजेपी विधायक मिनिस्टर के घर में आग लगाने की कोशिश, पीएम मोदी की चुप्पी से सब हैरान, कुकी नगा और अन्य ट्राइबल्स विरोध में क्यों
चुराचांदपुर का कुमुजांबा मैतेई मोहल्ला, ये पॉश एरिया माना जाता है। यहां मैतेई समुदाय के घरों को लूटने के बाद आग लगा दी गई।

जले हुए घरों से कुछ ही दूर मैतेई समुदाय का एक मंदिर भी था। मंदिर की दीवार पर लिखा हुआ है ‘KILL MAITEI’। इस इलाके में अब कोई मैतेई परिवार नहीं बचा है। वे इंफाल में अपने रिश्तेदारों के पास भाग गए हैं।

कुकी-नगा और अन्य ट्राइबल्स विरोध में क्यों..
कुकी-नगा और अन्य जनजातियों का मानना है कि मैतेई का मणिपुर की राजनीति और दूसरे पावर सेंटर्स में दबदबा है। ये पढ़ने-लिखने के साथ संपत्ति के मामले में भी आगे हैं। अगर मैतेई को भी जनजाति यानी एसटी का दर्जा मिल गया, तो ट्राइबल्स हाशिए पर चले जाएंगे। सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी पहले से ही कम है।

एसटी का दर्जा मिलते ही मैतेई पहाड़ों पर जमीन खरीद सकेंगे, वे आर्थिक रूप से मजबूत हैं, ऐसे में वहां के संसाधनों पर उनका कब्जा हो जाएगा। ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर के मुताबिक, मैतेई समुदाय की भाषा संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल है।

इन्हें पहले ही अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति और इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन यानी EWS जैसे रिजर्वेशन का फायदा मिलता है। इन्हें ST समुदाय में शामिल करना सिर्फ पॉलिटिक्स है। हालांकि अब ये मांग मणिपुर के बंटवारे और अलग एडमिनिस्ट्रेशन तक पहुंच गई है।

मैतेई समुदाय क्या कह रहा…
मैतेई ट्राइब यूनियन की याचिका पर ही मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 19 अप्रैल को केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय की 10 साल पुरानी सिफारिश फिर से पेश करने के लिए कहा था। इस सिफारिश में मैतेई को ST का दर्जा देने की बात है। शेड्यूल ट्राइब डिमांड कमेटी ऑफ मणिपुर ने ये सिफारिश साल 2012 में की थी।

मैतेई ट्राइब यूनियन ने कोर्ट से कहा है कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ, उससे पहले इस समुदाय को ST का दर्जा मिला हुआ था। इसके अलावा पूर्वजों की जमीन, परंपरा, संस्कृति और भाषा की रक्षा के लिए ये दर्जा दिया जाना जरूरी है।

उनके पास सिर्फ इंफाल वैली में जमीन खरीदने का अधिकार है और ये पूरे मणिपुर का सिर्फ 10% हिस्सा है, ये अन्याय है। 50 दिन की हिंसा के बाद मैतेई भी अब NRC लागू करने और म्यांमार से आए कुकी को भगाने जैसी मांग कर रहे हैं।

CM एन. बीरेन सिंह का पहला दावा…
28 मई को मणिपुर के CM एन. बीरेन सिंह ने दावा किया था कि पुलिस ने अब तक 40 मिलिटेंट्स का एनकाउंटर किया है। ये मिलिटेंट कौन थे और कहां से आए, इसकी छानबीन के लिए भास्कर की टीम मौके पर पहुंची।

5 दिन में हमने इंफाल से लेकर चुराचांदपुर इलाके को खंगाला। मैतेई, कुकी कम्युनिटी के लोगों से बात की। पुलिस के अलावा उन अस्पतालों तक पहुंचे, जहां हिंसा में मारे गए लोगों की बॉडी लाई गई है, या जहां घायलों का ट्रीटमेंट चल रहा है। जिन लोगों के परिजन हिंसा में मारे गए, उनसे भी बात की।

मैतेई और कुकी कम्युनिटी के बीच दो थ्योरी…
कुकी: इनका मानना है कि स्टेट पुलिस मैतेई कम्युनिटी को सपोर्ट कर रही है, क्योंकि इंफाल में मैतेई का दबदबा है। CM से लेकर मंत्री तक सब मैतेई हैं। कुकी कम्युनिटी के DGP थे, उन्हें हिंसा के वक्त हटा दिया गया। इन्हें राज्य से ज्यादा केंद्र सरकार पर भरोसा है।

मैतेई: इनका मानना है कि आबादी में कम होने के बावजूद 90% जमीन पर कुकी लोगों का कब्जा है। कुकी का म्यांमार से सीधा कनेक्शन है। वहां से मिलिटेंट इनके सपोर्ट के लिए आते हैं। असम राइफल्स को अपने बाहरी ऑपरेशन में कुकी की जरूरत होती है। इसलिए वो कुकी को सपोर्ट कर रहे हैं। ये लोग ड्रग्स का धंधा करते हैं।

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