RPSC अध्यक्ष तत्काल बर्खास्त हो, सीएमआर से तार जुड़े होने के कारण जाँच को प्रभावित कर सकते हैं – आसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर मीणा

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 19 जून 2023| जयपुर-अजमेर-भरतपुर : भरतपुर में प्रेस से वार्ता के दौरान आसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने राजस्थान में सेकंड ग्रेड टीचर पेपर लीक मामले में गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि RPSC के चेयरमैन के तार सीएमआर से जुड़े हैं इसलिए अपने पद पर रहते हुए जाँच को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसे में  मुख्यमंत्री गहलोत को आरपीएससी के चेयरमैन को तत्काल बर्खास्त कर उन्हें गिरफ्तार करवाना चाहिए ताकि पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके। इसके साथ ही सरकार पेपर लीक प्रकरण की जांच सीबीआई दे, जिससे राजस्थान के लाखों मेहनतकश युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।

449n 1 300x181 RPSC अध्यक्ष तत्काल बर्खास्त हो, सीएमआर से तार जुड़े होने के कारण जाँच को प्रभावित कर सकते हैं    आसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर मीणाप्रोफ़ेसर मीणा ने कहा कि राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य बाबू लाल कटारा द्वारा 60 दिवस पहले ही पेपर अपने घर पर ले जाना चेयरमैन की सह के बिना संभव नहीं है, क्योंकि RPSC के वर्णित नियमों के अनुसार पेपर सेटिंग्स, उनके रखरखाव और प्रिटिंग की जिम्मेदारी अध्यक्ष में देखरेख में होती है।

ऐसे में ED को राजस्थान लोक सेवा आयोग के चेयरमैन सहित संदेह के दायरे में आ रहे सभी लोगो की संपतियों की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा के सभी पेपर हो रद्द होने चाहिए। क्योंकि अब जांच में एक-एक करके पेपर आउट होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में यह कैसे सुनिश्चित होगा की दूसरे सभी ग्रुपों के विषयों के पेपर आउट नही हुए थे।

आसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत में अगर वास्तव में पेपर लीक करने वाले माफियाओं पर कानूनी शिकंजा कसने का मादा है तो उन्हें राजस्थान लोक सेवा आयोग के चेयरमैन को बर्खास्त करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गिरफ्तार करना चाहिए। क्योंकि जिस तरह आरपीएससी के काले कारनामों की एक-एक करके परत खुल रही है। उसकी असली सच्चाई आयोग के चेयरमैन की गिरफ्तारी से ही सामने आएगी।

आसपा प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी कहा कि राजस्थान में लगातार भर्ती परीक्षाओं के पेपर आउट होने से मेहनतकश युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। ऐसे में वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा और रीट जैसी परीक्षाओं के पेपर आउट प्रकरण की जांच राज्य सरकार को त्वरित सीबीआई को देनी चाहिए। मगर ऐसा लग रहा है की पेपर लीक मामलो के तार सीएमओ से जुड़े हुए होने के कारण गहलोत सीबीआई जांच की सिफारिश करने से कतरा रहे है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग जैसी संस्था का पूरा कार्य संदेह के घेरे में है। ऐसे में RAS2018, RAS2020, पुलिस सब इंस्पेक्टर एवं अन्य परीक्षाओं के संचालन में धांधलियों से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए राजस्थान लोक सेवा आयोग को भंग करने के लिए अपनाई जाने वाली संवैधानिक प्रक्रियाओं को तुरंत पूरा करके भंग करवाये और नए चेयरमैन सहित राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की फिर से नियुक्ति होनी चाहिए।

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