महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न वैश्विक समस्या, स्पोर्ट्स कैंप-होटल में कोच तो कभी फिजिकल ट्रेनर उठाते फायदा, आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नाममात्र

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 19 जून 2023| जयपुर-दिल्ली-वाशिंगटन : आज से दो साल पहले ही सात लड़कियों ने एथलेटिक्स कोच पी नागराजन पर सेक्शुअल अब्यूज के आरोप लगाए थे। उनमें से एक लड़की 13 साल की थी, जिसने आरोप लगाया था कि खिलाड़ियों की फिजियोथेरेपी करने वाले नागराजन ने पहले उसे जबरन लिटा दिया और धमकी दी कि अगर विरोध किया तो वह उसे और उसकी फैमिली को मार डालेगा।

वहीं, एक और नेशनल जूनियर रिकॉर्ड होल्डर रही एथलीट ने बताया कि कोच पी. नागराजन उसे पर्सनल कोचिंग के लिए बुलाते थे और जब कोई नहीं होता तो मसाज के बहाने उसे गलत तरीके से छूते। इन आरोपों के बाद नागराजन ने नींद की दवाएं खाकर खुदकुशी की कोशिश की, मगर वह बच गया और बाद में पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार हुआ।

image 7 300x201 महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न वैश्विक समस्या, स्पोर्ट्स कैंप होटल में कोच तो कभी फिजिकल ट्रेनर उठाते फायदा, आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नाममात्र बीते साल ही स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने चीफ साइक्लिंग कोच आरके शर्मा को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जब उस पर एक महिला साइक्लिस्ट ने स्लोवेनिया में एक ट्रेनिंग ट्रिप के दौरान गलत बर्ताव करने का आरोप लगाया। लड़की का कहना था कि शर्मा ने उसे जबरन अपने होटल रूम में बुलाकर गलत हरकत की।

हाल ही में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर एक नाबालिग समेत 7 महिला पहलवानों ने यौन शोषण के आरोप लगाए। मामले में दो एफआईआर हैं। पहली एफआईआर 17 साल की नाबालिग की पॉक्सो एक्ट के तहत है और दूसरी 6 वयस्क महिला रेसलर्स ने दर्ज कराई हैं।

ये सारी शिकायतें 2012 से 2022 के बीच की हैं। इनमें से कई घटनाएं विदेशी टूर्नामेंट्स के दौरान घटी हैं। इस बीच, बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली 6 महिला पहलवानों में से 4 ने दिल्ली पुलिस को ऑडियो और विजुअल सबूत दिए हैं।

पुलिस को 2 महिला रेसलर, एक इंटरनेशनल रेफरी और स्टेट लेवल कोच ने पहलवानों के समर्थन में गवाही दी है। उसको आधार बनाकर पुलिस ने 15 जून को चार्जशीट पेश कर दी। हालांकि नाबालिग मामले में बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है।

रुचिका गिरहोत्रा केस: 14 साल की टेनिस प्लेयर ने छेड़खानी पर की खुदकुशी

विनेश फोगाट ने कहा है कि एक बार वह शोषण से तंग आकर सुसाइड करने तक का सोचने लगी थीं। उनकी यह बात 30 साल पहले घटे देश भर में चर्चित रुचिका गिरहोत्रा केस की याद दिलाती है। 12 अगस्त 1990 की बात है, जब 14 साल की टेनिस एथलीट रुचिका गिरहोत्रा का हरियाणा में तत्कालीन आईपीएस अफसर और ‘हरियाणा लॉन टेनिस’ के प्रेसिडेंट एसपीएस राठौड़ ने पंचकूला स्थित अपने ऑफिस में यौन उत्पीड़न किया।

जब रुचिका के परिवार वालों ने राठौड़ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई तो राठौड़ ने रुचिका के भाई और पिता को टॉर्चर करना शुरू कर दिया। भाई को 2 महीने तक पुलिस कैद में रखकर मारा-पीटा गया। आखिरकार, राठौड़ की यातनाओं से तंग आकर रुचिका ने 29 दिसंबर 1993 को जहर खाकर अपनी जान दे दी। उसकी मौत के बाद भी राठौड़ के प्रमोशन होते रहे। वह हरियाणा का डीजीपी भी बना। उसे दोषी करार देने में एक दशक से ज्यादा का समय लगा और सजा भी बस 18 महीने की ही हुई।

मंत्री के खिलाफ महिला कोच ने यौन शोषण के आरोप लगाए

पांच महीने पहले ही हरियाणा सरकार में मंत्री रहे संदीप सिंह पर सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाने वाली जूनियर महिला कोच का मामला अभी कोर्ट में है। संदीप सिंह के खिलाफ पंचकूला स्टेडियम में तैनात जूनियर महिला कोच ने 30 दिसंबर 2022 को यौन उत्पीड़न किए जाने के मामले में चंडीगढ़ पुलिस में केस दर्ज कराया था। इसके बाद संदीप सिंह को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

केरल में लड़कियों ने की थी खुदकुशी की कोशिश

2015 में केरल के भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) सेंटर में महिलाओं के यौन शोषण की घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया। यहां 4 महिला खिलाड़ियों ने आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसमें से एक की मौत हो गई थी। उनका आरोप था कि वहां उनका शारीरिक शोषण हो रहा है और बर्दाश्त से बाहर होने पर उन सभी ने जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की।

वहीं, 26 अप्रैल 2021 को केरल की बास्केटबॉल प्लेयर लिथारा ने आत्महत्या कर ली थी। उसने अपने कोच के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद से वो उसका यौन उत्पीड़न करने लगा। जिसके चलते खिलाड़ी ने अपनी जान दे दी थी।

स्कूलों में भी पीटी टीचर, फिजिकल ट्रेनर कर रहे गंदी हरकत

ऐसी शिकायतें सिर्फ स्टेट या नेशनल लेवल के खेलों तक ही सीमित नहीं हैं। स्कूल में भी स्टूडेंट्स को पीटी टीचर या पीटी इंस्ट्रक्टर द्वारा किए यौन शोषण या मारपीट का शिकार होना पड़ता है। बीते अप्रैल को ही मुंबई के कांदीवली इलाके से एक खबर आई, जहां एक पीटी टीचर ने एक्सरसाइज कराने के दौरान 16 साल की लड़की से छेड़छाड़ और गलत हरकत की। शिकायत के बाद पीटी टीचर को गिरफ्तार कर लिया गया।

ऐसी ही कुछ और घटनाओं पर एक नजर डाल लेते हैं-

30 अक्टूबर, 2018-पुणे पुलिस ने एक इंटरनेशनल स्कूल के पीटी टीचर को गिरफ्तार किया था, जिस पर 4 लड़कों ने आरोप लगाए थे कि वो उनका कई महीने से यौन शोषण कर रहा था। 1 दिसंबर, 2017-कोलकाता के एक नामी स्कूल में एक फिजिकल ट्रेनिंग असिस्टेंट ने 4 साल की बच्ची का स्कूल टॉयलेट में यौन शोषण किया था।

9 मार्च, 2016-गोवा पुलिस ने एक स्कूल के पीटी टीचर को बच्ची का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 5 अगस्त, 2014-बेंगलूरु के एक सरकारी स्कूल में फिजिकल ट्रेनर को 8 साल की बच्ची के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

बच्चों की ट्रेनिंग स्पोर्ट्स स्पिरिट के साथ कराते हैं: विक्रम सोनकर

अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वालीं शिवानी पवार और अर्जुन अवॉर्डी दिव्या काकरान जैसी एथलीट्स के इंटरनेशनल कोच विक्रम कुमार सोनकर रेसलर्स के यौन उत्पीड़न के खिलाफ मौजूदा प्रदर्शन को लेकर परेशान हैं।

विक्रम कहते हैं कि पुरानी दिल्ली में स्थित मेरे गुरु ‘प्रेमनाथ अखाड़े’ में लड़का-लड़की दोनों आते हैं। यहां हम कुश्ती के दांव सिखाते हैं। बाकी चीजों से दूर ही रहने को कहते हैं। हमारा अखाड़ा साई ने एडॉप्ट किया है। हमें साई की तरफ से ही महिला कोच भी मिली थी, मगर अभी नहीं है।

विक्रम कहते हैं कि मैं सिर्फ अपने सेंटर के बारे में बता सकता हूं। दूसरे कोचिंग सेंटर में क्या होता है, इसकी मुझे जानकारी नहीं। एक कोच जब अपने कोचिंग सेंटर में आने वाले एथलीट की ट्रेनिंग कराता है तो वह उस समय खेल के प्रति उसका जुनून ही देखता है।

विक्रम सोनकर कहते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान बच्चों को छूना तो पड़ेगा, मगर हम उस समय प्लेयर को अपने बच्चे की तरह ट्रीट करते हैं। हम लोग कई बार लेडीज कोच भी रखते हैं। लड़कियों को कोई ऐसी प्रॉब्लम होती है तो वो उनके साथ शेयर कर लेती हैं। साई ने कई कोचिंग सेंटर में महिला कोच की नियुक्ति की है।

भारत में 10 साल में यौन शोषण के 45 मामले, कार्रवाई न के बराबर%name महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न वैश्विक समस्या, स्पोर्ट्स कैंप होटल में कोच तो कभी फिजिकल ट्रेनर उठाते फायदा, आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नाममात्र

भारत में 2020 में एक आरटीआई से खुलासा हुआ कि 2009 से लेकर 2019 तक भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में यौन उत्पीड़न के 45 मामले सामने आए। वहीं, केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा संसद में दी गई एक जानकारी के अनुसार, 2018 से लेकर 2019 तक साई को 17 यौन शोषण की शिकायतें मिलीं। 2018 में 7 महिला खिलाड़ियों ने शिकायत की तो वहीं 6 शिकायतें 2019 में आई थीं।

हैरान करने वाली बात यह है कि 45 मामलों में से 29 शिकायत कोचों के खिलाफ है। महिला सशक्तिकरण पर एक संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला खिलाड़ियों के साथ हुए यौन शोषण की यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई बार कोचों के खिलाफ मामले दर्ज ही नहीं होते हैं।

साल 2022 में मिली 30 शिकायतें, 2 अज्ञात

राज्यसभा में दी गई एक जानकारी के अनुसार, जुलाई 2022 में कहा गया था कि भारतीय खेल प्राधिकरण में कोचों और कर्मचारियों के खिलाफ महिला खिलाड़ियों के साथ यौन उत्पीड़न की 30 शिकायतें मिली थीं, इनमें से 2 गुमनाम शिकायतें थीं।

शिकायतों पर नहीं लिया जाता गंभीर एक्शन

यौन शोषण के मामले ज्यादातर जिमनास्टिक, एथलेटिक्स, कुश्ती, भारोत्तोलन और मुक्केबाजी जैसे खेलों में सामने आते हैं। ज्यादातर आरोपियों को तबादलों और वेतन या पेंशन में कटौती जैसी मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाता है। वहीं कई मामलों में बरसों तक जांच चलने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला।

देश और दुनिया में पहले भी कोच, स्टाफ और कई सीनियर्स द्वारा यौन उत्पीड़न की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लैरी नासर केस ने अमेरिका समेत पूरी दुनिया में खेलों में होते सेक्शुअल अब्यूज की सच्चाई को सबके सामने रखा।

खेलों में 500 लड़कियों और महिलाओं का यौन शोषण करने वाला डॉक्टर

अमेरिका में जिम्नास्टिक्स से जुड़े एक डॉक्टर लैरी नासर ने अमेरिकी जिम्नास्टिक्स में 500 से ज्यादा लड़कियों और महिलाओं का यौन शोषण किया था। जिम्नास्टिक्स के दौरान जब किसी लड़की को चोट लगती या कोई प्रैक्टिस के दौरान बीमार पड़ती तो लैरी नासर उसका इलाज करता और इसी का फायदा उठाकर वह उन लड़कियों का याैन शोषण भी करता।

वह 1996 में एक एथलेटिक ट्रेनर के रूप में यूएस जिम्नास्टिक राष्ट्रीय टीम के मेडिकल स्टाफ में शामिल हुआ। तकरीबन 19 साल बाद उसने जब अपने पद से इस्तीफा दिया तो एक के बाद एक लड़कियों ने लैरी पर यौन शोषण के आरोप लगाए।

पहली बार 2016 में लैरी तब सुर्खियों में आया, जब एक न्यूज पेपर ने उसके खिलाफ रिपोर्ट छापी। लैरी पर दो जिमनास्टों ने यौन शोषण के आरोप लगाते हुए उसे घटिया करार दिया। इनमें से एक ने कहा कि लैरी ने 15 साल की उम्र में उसका यौन शोषण किया।

करीब 150 लड़कियों के यौन शोषण के आरोपों के बाद लैरी के खिलाफ सुनवाई हुई और उसे अलग-अलग मामलों में कई साल की जेल हुई। हालांकि माना यह जाता है कि लैरी ने 500 से ज्यादा लड़कियों और महिलाओं का यौन शोषण किया था। लैरी की आखिरी सुनवाई में जज ने कहा, ‘तुम जेल में ही सड़कर मरोगे।’

लैरी की हरकतों का पर्दाफाश करने और उसे उम्र भर के लिए जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने वाली पहली महिला रचेल डेन्होलैंडर भी भारत में चल रहे रेसलर्स विवाद पर नजर रखे हुए हैं। रचेल का लैरी नासर ने तब यौन शोषण किया था, जब वह 16 साल की थीं।

‘वॉट इज अ गर्ल वर्थ’ किताब लिखने वाली 38 साल की रचेल कहती हैं कि मेडल लाने से ज्यादा जरूरी है एथलीटों की सुरक्षा। यही चीज उन्हें मेडल जीतने के लिए प्रोत्साहित भी करेगी। रचेल डेन्होलैंडर को टाइम मैगजीन ने 2018 में दुनिया की 100 प्रभावशाली हस्तियों में शुमार किया था।

एक सरकारी कमीशन ने खेलों में गंदी मानसिकता को किया उजागर तो मचा हंगामा

नीदरलैंड सरकार ने 2017 में खेलों में बढ़ते यौन शोषण के मामलों को लेकर चिंता जताते हुए एक राजनीतिक आयोग का गठन किया, ताकि 1970 से 2017 के बीच स्पोर्ट्स के हर हिस्से में यौन उत्पीड़न के मुद्दे की गहराई से जांच की जा सके।

12 दिसंबर, 2017 को डच आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसके नतीजे दुनिया के किसी भी माता-पिता को टेंशन में डाल सकते हैं। इसमें कहा गया कि स्पोर्ट्स में करियर बनाने वाले हर 8 बच्चों में से एक का यौन उत्पीड़न उनके ट्रेनर्स या टीम मेट्स द्वारा किया जाता है। इसमें गाली-गलौज से लेकर हमला करने और रेप करने तक की घटनाएं शामिल हैं।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दुनिया में हंगामा मचा तो डच सरकार के खेल संगठनों और डच ओलिंपिक कमेटी ने कई तरह के बचाव अभियान चलाए, ताकि स्थानीय स्पोर्ट्स क्लबों को बच्चों के यौन शोषण के बारे में जागरूक बनाया जा सके।

जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने भी %name महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न वैश्विक समस्या, स्पोर्ट्स कैंप होटल में कोच तो कभी फिजिकल ट्रेनर उठाते फायदा, आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नाममात्रगंभीर कदम उठाए। मैक्रोथिंक इंस्टीट्यूट में छपी ‘द साइलेंट टॉपिक ऑफ सेक्शुअल चाइल्ड अब्यूज इन स्पोर्ट्स’ नाम की स्टडी में कहा गया है- जहां लड़कों के साथ सबसे ज्यादा मारपीट और दुर्व्यवहार की शिकायतें देखी गईं, वहीं लड़कियों ने सबसे ज्यादा यौन हिंसा झेली।

4000 लोगों पर हुए सर्वे में यह पाया गया कि इसमें से तकरीबन 4 फीसदी लोग ऐसे थे, जिन्होंने बचपन में स्पोर्ट्स में करियर बनाने के दौरान फिजिकल, सेक्शुअल और साइकोलॉजिकल वाॅयलेंस यानी तीनों झेली। इन्हें पॉली-विक्टिम्स कहा जाता है।

मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ बच्चों का होता है शारीरिक उत्पीड़न

सेक्शुअल अब्यूज के कई मामलों की वजह से कोच-एथलीट रिलेशनशिप खराब हालात में देखी गई। अमेरिका में 2022 में एक फुटबॉल कोच के खिलाफ हैशटैग ‘कोच डोंट टच मी मूवमेंट’ भी चला। यूरोपीय यूनियन की मदद से कराई गई एक स्टडी के मुताबिक, स्पोर्ट्स में ज्यादातर बच्चों को साइकोलॉजिकल और फिजिकल अब्यूज का सामना करना पड़ता है। लड़कों से बदसलूकी ज्यादा होती है।

छह यूरोपीय देशों में 10 हजार से ज्यादा बच्चों पर कराई गई इस स्टडी में कहा गया है कि स्पोर्ट्स में जितने भी नाबालिगों का उत्पीड़न हुआ, उनमें 56 फीसदी बच्चों के साथ साइकोलॉजिकल अब्यूज हुआ, वहीं, 44 फीसदी ने फिजिकल अब्यूज झेला। इसमें यौन हिंसा भी शामिल है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ज्यादातर स्पोर्ट्स संस्थाएं सेक्शुअल वॉयलेंस के खिलाफ नीतियां बनाने में फेल रही हैं। स्टडी की अगुआई करने वाले एजहिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइक हार्टिल कहते हैं- यह बेहद अजीब बात है कि लड़कियों से ज्यादा लड़कों के साथ सेक्शुअल वॉयलेंस की घटनाएं आए दिन बढ़ रही हैं।

कोच और स्पोर्ट्स स्टाफ में ज्यादातर पुरुष होना बड़ी वजह

स्टडी में यह भी कहा गया कि ज्यादातर देशों में कोचिंग स्टाफ पुरुष होते हैं। बेल्जियम और नीदरलैंड्स में तो करीब 70 फीसदी कोचिंग स्टाफ पुरुष थे, जिस वजह से स्पोर्ट्स में प्लेयर्स महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के संपर्क में ज्यादा आते हैं।

हालांकि जहां महिला कोच भले ही कम संख्या में हों, मगर साइकोलॉजिकल वॉयलेंस में वो भी आगे ही रही हैं। यानी बच्चों को इमोशनली टॉर्चर करना, डराना-धमकाना जैसी चीजें शामिल हैं। यह मामला इतना गंभीर हो चुका है कि दिसंबर, 2001 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों के खिलाफ होने वाली हर तरह की हिंसा को लेकर देशों से कड़े कदम उठाने की बात कही गई।

अमेरिका में लाना पड़ा चाइल्ड एथलीट बिल ऑफ राइट्स

अमेरिका में ‘इंडिपेंडेंट इन्क्वायरी इन टू चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज’ नाम से एक रिपोर्ट 2020 में प्रकाशित हुई। ‘ट्रुथ प्रोजेक्ट’ के तहत इस जांच रिपोर्ट में सेक्शुअल अब्यूज के 3,939 सर्वाइवर्स से बात की गई। इसमें हिस्सा लेने वाले करीब 91 फीसदी खिलाड़ी बच्चों ने माना कि उनके साथ कोच या स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन के स्टाफ और वॉलंटियर ने सेक्शुअल अब्यूज किया था। अमेरिका में यह समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि वहां पर चाइल्ड एथलीट बिल ऑफ राइट्स लाना पड़ा, जो भारत समेत कई और देशों के लिए नजीर बन सकता है। इस बिल में SAFE पर बहुत जोर दिया गया है।436682 300x198 महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न वैश्विक समस्या, स्पोर्ट्स कैंप होटल में कोच तो कभी फिजिकल ट्रेनर उठाते फायदा, आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नाममात्र

महिला कोच तो होती हैं, मगर परिवार होने की वजह से कैंपों में जाने से बचती हैं

गैर सरकारी संगठन समाधान अभियान की प्रमुख अर्चना अग्निहोत्री कहती हैं कि छोटी लड़कियाें को अक्सर प्रैक्टिस या टूर्नामेंट के लिए कई-कई दिनों तक बाहर रहना पड़ता है। कैंपों में उनके साथ अक्सर महिला कोच की भी व्यवस्था होती है, मगर हकीकत यह है कि ज्यादातर महिला कोच या स्टाफ परिवार वाले होते हैं और बाहरी कैंपों या दूर-दराज इलाकों में जाने से बचते हैं।

कई ने करियर और परिवार के सम्मान की खातिर साधी चुप्पीमहिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न वैश्विक समस्या, स्पोर्ट्स कैंप-होटल में कोच तो कभी फिजिकल ट्रेनर उठाते फायदा, आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नाममात्र

यही वजह है कि महिला खिलाड़ी अक्सर गंदी नीयत वाले पुरुष कोच या प्रशासनिक व्यक्ति का बुरा व्यवहार झेलती है। यहां ऐसे लोग ताकत का दुरुपयोग कर संबंध बनाने की फिराक में रहते हैं। अर्चना अग्निहोत्री बताती हैं कि अक्सर कई लड़कियां या महिला खिलाड़ी अपने साथ होने वाले यौन दुर्व्यवहार के बावजूद भी अपने करियर और परिवार के सम्मान की खातिर चुप्पी साध लेती हैं।

यूनिसेफ के अनुसार, स्पोर्ट्स में एथलीट्स के खिलाफ कई तरह से होती है हिंसा

  • टीम सिलेक्शन या सुविधाओं के नाम पर सेक्स की डिमांड
  • प्रैक्टिस के दौरान चोट पहुंचाना या यौन शोषण
  • बॉडी शेप को लेकर अपमानित करना और मानसिक उत्पीड़न
  • छोटे एथलीट पर बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दबाव बनाना
  • प्रदर्शन में सुधार के लिए पिटाई या दूसरी सख्त सजाएं देना
  • डोपिंग या प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाएं देना
  • खानपान सही न देना, जिससे खिलाड़ी को ईटिंग डिसऑर्डर, एनोरेक्सिया या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो

खेलों की दुनिया में शोषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कनाडा सरकार ने बाकायदा इनकी कैटेगरी बनाई है।

  1. फिजिकल अब्यूज-इस दुर्व्यवहार में हमला करना, जबरन मारपीट, चोट पहुंचाना, गला दबाने जैसी हरकतें शामिल हैं।
  2. सेक्शुअल अब्यूज-बिना सहमति के जबरन यौन उत्पीड़न, खिलाड़ी को छूना या उसे बांहों में भरना, जबरन किस करना।
  3. मानसिक उत्पीड़न-इसमें धमकाने, डांटने, आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने और खिलाड़ी में खुद पर संदेह पैदा करना।
  4. फाइनेंशियल अब्यूज-इसमें खिलाड़ी से वसूली करना, खेल के बजट में धांधली करना जैसी बातें शामिल हैं।

माता-पिता क्यों अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में भेजना चाहते हैं

यूएस प्रेसिडेंट काउंसिल ऑन स्पोर्ट्स, फिटनेस एंड न्यूट्रीशन साइंस बोर्ड के मुताबिक, 73 फीसदी पेरेंट्स मानते हैं कि खेलों में हिस्सा लेने से उनके बच्चों की मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सेहत बेहतर होगी। वहीं, 88 फीसदी पेरेंट्स का मानना है कि स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने से उनके बच्चे की फिजिकल हेल्थ अच्छी होगी।

किसी भी माता-पिता के लिए यह पता लगाना बेहद मुश्किल होता है कि उनके बच्चे के साथ अब्यूज हो रहा है क्योंकि ज्यादातर बच्चे डर, झिझक और शर्मिंदगी की वजह से कुछ नहीं कह पाते। फिर भी कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनसे ये जाना जा सकता है कि बच्चा मुश्किल में है।

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