मल्टी टास्किंग से याददाश्त होती है कमजोर, आभार जताने से मानसिक होती है सेहत बेहतर, तनाव दिमाग की कोशिकाओं को पहुंचाता है नुकसान

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 19 जून 2023 | जयपुर-दिल्ली-वाशिंगटन : अचानक से कोई नाम भूल जाना, फोन, चाबी, चश्मा या रोजमर्रा में उपयोग की जाने वाली चीजों को रखकर भूल जाना एक आम समस्या है। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह समस्या खतरनाक हो जाती है।

न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी इरविन मेडिकल सेंटर की न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट एलिस कैकापोला के मुताबिक, जब आप ऐसे काम भूलने लगें जिन्हें लंबे समय से करते आए हैं तो यह मस्तिष्क की समस्या से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

  • डिप्रेशन और एंग्जायटी : लगातार तनाव की स्थिति में शरीर ऐसे हार्मोन रिलीज करता है जो कोशिकाओं को नष्ट करता है। मस्तिष्क की सामंजस्य बैठाने की क्षमता प्रभावित होती है। नतीजा याददाश्त घटती है।
  • नींद की कमी : जर्नल स्लीप मेडिसिन के अध्ययन में पाया गया कि ऐसे लोग जिनकी नींद रात में लगातार टूटती है उनके अटेंशन, वर्किंग मेमोरी, और मस्तिष्क की कार्य प्रणाली में उल्लेखनीय कमी आती है।
  • सुनने से संबंधित समस्या : दरअसल कम सुनाई देने की स्थिति में मस्तिष्क को अधिकांश मेहनत बातों को सुनने और समझने के लिए करनी पड़ती है, जिससे याददाश्त प्रभावित होती है।
  • मल्टी टास्किंग : किसी भी काम के दौरान ध्यान और नियंत्रण से संबंधित मस्तिष्क के कई नेटवर्क काम करते हैं। मल्टी टास्किंग में ये नेटवर्क बाधित होते हैं, जिससे याददाश्त प्रभावित होती है।
  • कुछ दवाइयां : एंजाइटी, कोलेस्ट्रॉल, दर्द, ब्लड प्रेशर, नींद से संबंधित दवाएं और कुछ प्रकार का नशा मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स को ब्लॉक करते हैं। साथ ही मस्तिष्क की प्रोसेसिंग स्लो करते हैं।
  • भोजन में पोषण की कमी : शोध बताता है कि भोजन में पोषण की कमी से न्यूरॉन्स को क्षति पहुंचती है। हरी पत्तेदार सब्जियां, ग्रीन टी और टमाटर में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड्स मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाते हैं।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में नींद से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होती हैं। कैलिफोर्निया स्थित एसआरआई रिसर्च इंस्टीट्यूट में ह्यूमन स्लीप रिसर्च प्रोग्राम की डायरेक्टर फिओना बेकर के मुताबिक, महिलाओं में यह समस्या किशोरावस्था से शुरू होकर युवावस्था तक बनी रहती है।

dssdfdsfdcvgdf 1686795105 मल्टी टास्किंग से याददाश्त होती है कमजोर, आभार जताने से मानसिक होती है सेहत बेहतर, तनाव दिमाग की कोशिकाओं को पहुंचाता है नुकसानमाहवारी के समय हार्मोनल बदलाव हैं मुख्य कारण
दरअसल माहवारी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं में एंग्जाइटी और हल्का अवसाद होता है। इसके अलावा ऐंठन, पेट से जुड़ी समस्याएं भी होती हैं। ये सभी नींद को प्रभावित करती हैं।

वहीं गर्भावस्था के दौरान भी शारीरिक समस्याएं बढ़ती हैं जो नींद की नियमितता घटाती हैं। इसके बाद मीनोपॉज के दौरान भी लगभग 7 साल तक हार्मोनल बदलाव होते हैं। यह भी नींद प्रभावित करते हैं।

बिहेवियरल थेरेपी से भी नींद में मिलता है फायदा
नींद की समस्या से पीड़ित महिलाओं के लिए कॉन्ग्नीटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) कारगर है। इसमें मनोवैज्ञानिक व व्यवहारात्मक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

नकारात्मक विचारों को कम कर, योग एवं ध्यान, नींद के समय में बदलाव आदि से इस समस्या को दूर करते हैं। इसके अलावा हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी भी कारगर है। इसमें मेनोपॉज के दौरान कम होने वाले हार्मोन्स को सप्लीमेंट्स के माध्यम से पूरा किया जाता है।

हाल में हुई स्टडी में प्रतिभागियों को धन्यवाद पत्र लिखने, जिंदगी में होने वाली सकारात्मक चीजों की लिस्टिंग और उनका असर महसूस करने को कहा गया। नतीजे बताते हैं कि ऐसी गतिविधियों से मानसिक स्वास्थ्य लाभ तो मिला ही, अवसाद और चिंता में भी कमी आई। इसके अलावा आभार जताने से आत्म-सम्मान में बढ़ोतरी के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में संतुष्टि का स्तर बढ़ता है।

नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञानी सारा एल्गो कहतीं हैं- परिचितों, दोस्तों या जीवन साथी के प्रति आभार जताना रिश्ता मजबूत करता है, हमें जोड़ने में भी मदद करता है। शोध के मुताबिक, जो लोग आभार के प्रति झुकाव रखते हैं उनका ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता, हार्ट रेट भी सामान्य रहता है।

दुख कम नहीं होता पर हौंसला बढ़ता है
स्टेसी बैटन का बीता साल अच्छा नहीं रहा। कैंसर के चलते उन्होंने पति को खो दिया। पार्किंसन बीमारी के कारण पिता चल बसे। मां को भी कैंसर का पता चला। इन दिक्कतों उन्हें अपना 26 साल पुराना घर बेचना पड़ा। इसके बावजूद स्टेसी ने हौसला नहीं खोया। वो हर दिन कुछ अच्छे पल तलाश ही लेतीं, उन्हें पेपर पर नोट करतीं… जैसे आज नए पड़ोसी से मुलाकात या फिर मां के साथ लंबी सैर पर जाना या छोटी सी मदद पर किसी का शुक्रिया अदा करना… इन नोट्स को वो एक बड़े से जार में डाल देतीं।

बैटन कहती हैं कि इससे दुख तो कम नहीं हुआ लेकिन उससे लड़ने का हौसला बढ़ गया। मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट ए. एमंस के नेतृत्व में हुई एक स्टडी के नतीजे बताते हैं, किसी के प्रति आभार (ग्रैटिट्यूड) जताना आपको मनोवैज्ञानिक तौर पर मजबूत करता है।

आपसी संबंधों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है

  • कई अध्ययनों से भी यह साबित हुआ कि आभार जताने का दृष्टिकोण रखने से भावनात्मक सेहत के साथ-साथ आपसी संबंधों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • डॉ. एमंस कहते हैं- आभार सकारात्मक भावना है, जो तब पैदा होती है जब आप स्वीकारते हैं कि जिंदगी में अच्छाई है और भरोसा करते हैं कि इसे पाने में आपको किसी व्यक्ति या अदृश्य शक्ति ने मदद की। यानी कोई आपके प्रति दयालु होता है तो आप कृतज्ञता महसूस कर सकते हैं।
  • ग्रैटिट्यूड न केवल देने और लेने वाले की अच्छाई में सुधार करती है, बल्कि दूसरों के लिए भी मददगार है। देखने वालों को दोनों के प्रति ज्यादा गर्मजोशी व आत्मीयता महसूस हो सकती है।
  • ईस्टर्न वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर फिलिप वॉटकिंस कहते हैं- महसूस करना सिक्के का एक पहलू है। इस भावना का लाभ उठाने के लिए आभार जताना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
  • इंडियाना यूनिवर्सिटी में काउंसिलिंग साइकोलॉजी एक्सपर्ट जोएल वोंग कहते हैं- दिन में कम से एक बार किसी के प्रति आभार जताना चाहिए। स्थायी आदत बनाने के लिए इसे दिनचर्या से जोड़ने की कोशिश करें, जैसे सुबह कम्प्यूटर चालू करते वक्त सोचता हूं कि मैं किस चीज के लिए आभारी हूं। उन्होंने कहा- इसके लिए लंबी चिट्‌ठी की जरूरत नहीं है। छोटा ई-मेल या मैसेज भी कारगर है।
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