कांग्रेस-बीजेपी में दम है तो दलित-आदिवासियों के विकास पर वोट माँगे – प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, पूर्वी राजस्थान आसपा कांशीराम का मजबूत गढ़

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 29 जून 2023 | जयपुर-दिल्ली-भरतपुर : राजस्थानी बृज इन दिनों चर्चा में है। चर्चा के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण चंद्रशेखर आज़ाद का भरतपुर दौरा है। फरवरी में नैनवा बूंदी में अपनी पहली हेलीकॉप्टर उड़ान के बाद से ही पूर्वी राजस्थान में आसपा कांशीराम ने एक नई हुंकार भरी है। भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचरण हो रहा है।

%name कांग्रेस बीजेपी में दम है तो दलित आदिवासियों के विकास पर वोट माँगे   प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, पूर्वी राजस्थान आसपा कांशीराम का मजबूत गढ़गंगापुर सिटी में उमड़ी भीड़ ने बसपा को पस्त कर दिया है और आसपा के पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नई उमंग भर दी है। दूसरा कारण है कमल-कांग्रेस दोनों राजनीतिक पार्टियों का दलित-आदिवासियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया।

एक ओर जहां राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत दलित-आदिवासियों पर  कई बार हुए अन्याय-अत्याचार और उत्पीड़न पर उदासीन रहे हैं तो दूसरी ओर बीजेपी भी इन वर्गों के साथ कड़ी नहीं हो पायी। अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता पूर्वी राजस्थान के कई दौरे कर चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित-आदिवासियों पर हुए उत्पीडन की गूंज आने वाले चुनावों में भी सुनाई देगी। मेवाड़-मारवाड़ सहित पूर्वी राजस्थान में अगले विधानसभा चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

आसपा राजनीतिक पार्टियां इसकी तैयारी कर चुकी हैं। कमल-कांग्रेस दोनों ही अपराधियों की गिरफ्तारी और पीड़ितों की मदद में खाली हाथ है। इनकी उपेक्षा के कारण दलित-आदिवासी ध्रुवीकरण होना भी तय है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इसकी शुरुआत फ़रवरी में नैनवा में चंद्रशेखर के दौरे से हो चुकी है। माना जा रहा है कि आज़ाद की सभा में दलित-आदिवासी उत्पीड़न का मुद्दा एक बार फिर गूंज सकता है। उसकी बड़ी वजह सभा इन्हीं के आसपास ही होना है।

नैसर्गिक समीकरण दलित-आदिवासियों पर आसपा का फोकस

बीजेपी और कांग्रेस का आदिवासियों पर फोकस है। मेवाड़ की इन 31 सीटों में से 17 आदिवासी सीटें हैं। दोनों ही पार्टियां इन सीटों पर कब्जा करना चाहती हैं। यही वजह है कि 30 जून को अपनी सभा के दौरान अमित शाह उदयपुर में आदिवासी समाज से जुड़े एक बड़े वर्ग से भी मुलाकात कर सकते हैं।%name कांग्रेस बीजेपी में दम है तो दलित आदिवासियों के विकास पर वोट माँगे   प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, पूर्वी राजस्थान आसपा कांशीराम का मजबूत गढ़

इस दौरान आदिवासियों के अलग-अलग मसलों पर बात कर अमित शाह आदिवासी सीटों को साधने की कोशिश कर सकते हैं। साथ ही आदिवासी सीटों के लिए लोकसभा के हिसाब से भी प्लानिंग हो सकती है। उदयपुर और बांसवाड़ा-डूंगरपुर दोनों आदिवासी लोकसभा सीटें हैं।

पूर्वी राजस्थान आसपा कांशीराम का मजबूत गढ़

इधर चंद्रशेखर आज़ाद के भरतपुर दौरे को देखें तो पूर्वी राजस्थान आसपा कांशीराम का मजबूत गढ़ बन रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में बसपा बहुत कमजोर हो चुकी है। यहां चाहे विधानसभा सीटों की बात हो या फिर लोकसभा सीटों की, आसपा काफी मजबूत है। पूर्वी राजस्थान की नौ लोकसभा सीटों पर आसपा ने बहुत मेहनत की है।

वहीं अगर विधानसभा की बात करें तो इस क्षेत्र से जुड़े 13 जिलों की 49 सीटों में से 25 सीटों पर काबिज होने के लिए आसपा अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। वहीं सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी और बीजेपी दोनों ही पार्टियाँ घबराई हुई है। 02 जून को अपनी सभा के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद भरतपुर में जाट समाज से जुड़े एक बड़े वर्ग से भी मुलाकात कर सकते हैं।

राजस्थानी बृज में आसपा काे मजबूत करने की तैयारी

लोकसभा और विधानसभा को देखते हुए आसपा कांशीराम राजस्थानी बृज में खुद को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। दरअसल मूर्धन्य शिक्षाविद् और दलित-आदवासी युवाओं में कड़ी पकड़ रखने वाले कद्दावर नेता प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा को आसपा कांशीराम का प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद ऐसे में अब पार्टी को मजबूत करने पर आसपा का फोकस है।

आसपा दिखाएगी नए अंदाज 

इससे पहले भी राजस्थान के कोटा संभाग पर आसपा का फोकस रहा है, अब भरतपुर संभाग पर रहेगा। पिछले कुछ महीनों को देखें तो 2023 में सितम्बर में नैनवा (बूंदी), अप्रैल में गंगापुर सिटी (सवाई माधोपुर), अप्रैल में ही भादरा, मई में जोधपुर का दौरा चंद्रशेखर आज़ाद ने किया है।%name कांग्रेस बीजेपी में दम है तो दलित आदिवासियों के विकास पर वोट माँगे   प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, पूर्वी राजस्थान आसपा कांशीराम का मजबूत गढ़

वहीं अब आज़ाद भरतयपुर आ रहे हैं। आज़ाद के इस कार्यक्रम को आसपा राजस्थान में अपनी एकता के तौर पर प्रोजेक्ट करेगी। इस सभा में पूर्व राज्यपाल सतपाल मालिक नए अंदाज में दिख सकते हैं। वहीं प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा भी आगामी चुनाव को लेकर इस सभा से नया सियासी मैसेज दे सकते हैं।

इन मुद्दों पर आसपा की बीजेपी-कांग्रेस को घेरने की तैयारी

चंद्रशेखर आजाद भरतपुर में 02 जुलाई को नुमाइश ग्राउंड में होने वाली सभा में बीजेपी-कांग्रेस को कई मुद़्दों पर घेरेंगे। सभा में एक तरफ जहां सतपाल मालिक बीजेपी के 9 साल के शासन पर हल्ला बोलेंगे।

वहीं दूसरी ओर राजस्थान में स्टेट गवर्नमेंट के फेलियर्स बताएंगे। इनमें अपराध, महिलाओं के साथ दुराचार, किसानों की समस्याएं, पेपरलीक, बम ब्लास्ट में बरी हुए आरोपी और दलित-आदिवासी हत्याकांड जैसे मामले प्रमुख होंगे।

हिंदू-मुस्लिम कमल-कांग्रेस दोनों की संजीवनी है : प्रोफ़ेसर मीणा

आजाद समाज पार्टी के कद्दावर नेता और शिक्षाविद् प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम कमल-कांग्रेस दोनों की संजीवनी है। ये अभी से इसे भुनाने में लग गए हैं। कांग्रेस के राज में घटना हुई तो बीजेपी ने ठंडे बसते में डाल, अब चुनाव में दोनों इस पर वोट, माँगेंगे। हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद इनके लिए संजीवनी हैं।

प्रोफ़ेसर मीणा का कहना है कि कमल-कांग्रेस दलित-आदिवासियों के विकास के नाम पर वोट मांग ही नहीं सकते हैं। आसापा कांशीराम दलित-आदिवासियों की कायापलट के कम कर रही है।

इनसे हम डरेंगे नहीं, हमने पिछले चार-पांच साल से दलित-आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारऔर उत्पीड़न की आवाज़ उठाई है,  जनता में काम किया है। जनता फैसला करेगी कि स्टंटबाजी भला करेगी या कल्याणकारी योजनाएं।

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