राजस्थान विवि सिंडिकेट का ऐतिहासिक निर्णय, शोध छात्र प्रतिनिधि का चुनाव रद्द, इंटरप्रिटेशन समिति पर भी कार्रवाई संभव, परिष्कार कॉलेज की पीएचडी रद्द

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 29 जून 2023 | जयपुर-दिल्ली : राजस्थान विश्वविद्यालय में (In Rajasthan University) सिंडीकेट बैठक के दौरान (During Syndicate Meeting) बुधवार को पुलिस (Police) ने छात्रों पर जमकर लाठीचार्ज (Fiercely Lathicharged Students) किया।

छात्र कुलपति को ज्ञापन देने पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनातनी हो गई। छात्र बैरिकेड्स कूदकर कुलपति सचिवालय की ओर दौड़े। पुलिस ने छात्रों को काबू करने के लिए चार बार लाठीचार्ज किया। विरोध में छात्र कुलपति सचिवालय पर धरना देकर बैठ गये। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने अब तक एक दर्जन से ज्यादा छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया है, वहीं आधा दर्जन छात्र नेताओं को लाठीचार्ज में गंभीर चोट आई है।

राजस्थान विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठक कुलपति प्रोफेसर राजीव जैन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में कार्यसूची में रखे गये सभी 44 बिंदुओं पर सिंडिकेट सदस्यों ने देर शाम तक व्यापक विचार विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिये गये। राज्य सरकार द्वारा नामित प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, विधायक अमीन कागजी व विधायक गोपाल मीणा सहित लगभग सभी सदस्यों के साथ कुलसचिव निलिमा तक्षक इस बैठक में उपस्थित रहे।

सिंडिकेट की बैठक में लिए गये निर्णय 

सिंडिकेट की इस बैठक में विश्वविद्यालय के सत्र 2023-24 के लिए लगभग 431 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृत किया गया। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि इस शैक्षणिक सत्र के लिए विश्वविद्यालय एवं संघटक कॉलेजों में किसी भी प्रकार की फीस वृद्धि नहीं की जायेगी।

प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने जोर देकर कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और गर्ल्स स्टूडेट्स की आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखकर फ़ीस बढ़ोतरी नहीं बढाई जा सकती है। हर साल फ़ीस बढ़ोतरी के रिवाज को बदलना होगा। हर साल साथ ही विश्वविद्यालय को राज्य सरकार से मिलने वाली ग्रांट इन एड में वृद्धि किए जाने के लिए राज्य सरकार से आग्रह किये जाने का भी निर्णय इस बैठक में किया गया।

विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश पूर्व परीक्षा के लिए रेगुलेशन 2022 को स्वीकृत करते हुए इन नियमों में 30 अंकों के साक्षात्कार का जो प्रावधान किया गया है। उसे दो भागों में विभाजित किया गया है। इस विभाजन के तहत साक्षात्कार के लिए 10 अंक निर्धारित होंगें जबकि 20 अंक शैक्षणिक योग्यता के आधार पर निर्धारित किये जायेंगें।

बैठक में प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने रखे प्रस्ताव के अनुसार विश्वविद्यालय सिंडिकेट की ओर से जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. लक्ष्मीनारायण हर्ष को राजस्थान विश्वविद्यालय कुलपति चयन के लिए गठित होने वाली खोजबीन समिति के लिए सिंडिकेट का सदस्य मनोनीत किया गया। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग जयपुर द्वारा विश्वविद्यालय कर्मचारियों के वेतन नियतन में अधिक भुगतान में वसूलनीय राशि में ब्याज को स्थगित करने के पूर्व में लिये गये निर्णय की सिंडिकेट ने पुष्टि की।

ओल्ड पेंशन स्कीम ( ओपीएस) की विसंगतियों के निराकरण के लिए पत्र भेजने का निर्णय 

राजस्थान विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मियों के लिये ओल्ड पेंशन स्कीम ( ओपीएस) की विसंगतियों के संबंध में कुलाधिपति एवं भारत सरकार को पत्र भेजे जाने के साथ ही राजस्थान  विश्वविद्यालय में वर्ष 2004 से पूर्व नियुक्त कार्मिकों को आरजीएचएस मेडिकल सुविधा अथवा विश्वविद्यालय द्वारा पोषित चिकित्सा पुनर्भरण सुविधा को वैकल्पिक रखे जाने का निर्णय बैठक में लिया गया।

राजस्थान विश्वविद्यालय के 32 अशैक्षणिक कर्मचारियों के प्रकरण में 35 बी के तहत अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजे जाने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। यूजीसी रेगुलेशन 2018 को यूजीसी एवं राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार अपनाये जाने के निर्णय के साथ ही इंटर से सीनियोरिटी का लाभ शिक्षकों को दिया गया। भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र विभाग के 12 शिक्षकों को स्थायी किये जाने के संबंध में अतिरिक्त महाधिवक्ता की राय के अनुसार सशर्त स्थायीकरण किये जाने का निर्णय बैठक में लिया गया।

पूर्व सिंडिकेट सदस्य प्रोफेसर राजेश सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर नौ सहायक निदेशक पुस्तकालय एवं सहायक निदेशक शारीरिक शिक्षा के पदों पर नियुक्त विश्वविद्यालय कर्मियों को स्थायी किये जाने का निर्णय भी इस बैठक में लिया गया।

शोधछात्र प्रतिनिधि का चुनाव रद्द

राजस्थान विश्वविद्यालय में नियमों के अनुसार सिर्फ़ रजिस्टर्ड विद्यार्थी ही चुनाव लड़ सकते हैं जबकि विश्विद्यालय के अधिकारियों ने नियमों की हो अवहेलना करते हुए आचार संहिता लागू होने के बाद नॉन रजिस्टर छात्रों को भी अनुमति दी थी, जो व्यक्ति चुनाव जीता था जिसका नाम राम स्वरूप ओला ला है वो चुनाव से 17 दिन बाद रजिस्टर्ड हुआ था, और एडमिशन भी फ़र्ज़ी दस्तावेज़ से लेने का आरोप है। इंटरप्रिटेशन समिति भी संशय के घेरे में है। राष्ट्रीय अनुसूचित जन जाति आयोग की जांच के बाद समिति के सदस्यों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

इस संदर्भ में कुलपति महोदय ने प्रोफ़ेसर्स श्यामलाल जेदिया जी की अध्यक्षता में कमेटी का भी गठन किया जिसको 15 दिन (8 जून 2023 तक) में अनुशंसा करनी थी परंतु कमेटी ने अभी तक कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। राजस्थान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार महोदय की जाँच रिपोर्ट एवं अनुशंसाओं को अतिशीघ्र क्रियान्वित किया जा सकता है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है।

सिंडिकेट बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न भवनों का नामकरण महापुरुषों के नाम से किये जाने के संबंध में सिंडिकेट सदस्यों की एक समिति भी इस बैठक में गठित की गयी। इस समिति में प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, प्रोफ़ेसर दिलीप सिंह और डॉ शब्बीर अहमद को रखा गया है।  कुलपति प्रोफेसर राजीव जैन ने आयोजित बैठक में सभी बिंदुओं पर सभी सिंडिकेट सदस्यों द्वारा सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक रूप से विचार किये जाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

विरोध दर्ज कराने पहुंचे छात्र संठनों के पदाधिकारी
लाठीचार्ज के बाद एनएसयूआई और एबीवीपी के पदाधिकारी विरोध दर्ज कराने पहुंचे। एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष अभिषेक चौधरी ने कुलपति सचिवालय पर ताला लगा दिया। वहीं, एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री ने छात्रों के साथ कुलपति सचिवालय पर प्रदर्शन कर लाठीचार्ज का विरोध किया।
राजस्थान विश्वविद्यालय में लंबे समय के बाद बुधवार को सिंडिकेट बैठक के दौरान कुलपति सचिवालय के बाहर पांच घंटे तक छात्रों ने प्रदर्शन किया। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। इस दौरान एनएसयूआई से छात्र नेता अभिषेक चौधरी, राहुल महला, महेश चौधरी और एबीवीपी से प्रांत मंत्री शौर्य जैमन, देव पलसानिया, मनु दाधीच मांगों को लेकर छात्रों के साथ कुलपति सचिवालय पहुंचे। पुलिस ने सचिवालय से पहले ही बैरिकेड्स लगाकर छात्रों को रोक दिया।

छात्र कुलपति को ज्ञापन देने पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनातनी हो गई। छात्र बैरिकेड्स कूदकर कुलपति सचिवालय की ओर दौड़े। पुलिस ने छात्रों को काबू करने के लिए चार बार लाठीचार्ज किया। विरोध में छात्र कुलपति सचिवालय पर धरना देकर बैठ गए। पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने।

इस पर पुुलिस ने छात्रों को घसीट कर वाहन में डाला। एबीवीपी के कार्यकर्ता पुलिस के वाहन के नीचे लेट गए तो पुलिस अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को लातें मार वाहन के नीचे से निकाला। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने छात्रों से गाली-गलौज भी की जिसका छात्रों ने विरोध किया। 16 छात्रों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

…तो नहीं होता लाठीचार्ज
डेढ़ साल बाद सिंडिकेट की बैठक हुई। छात्र नेता मांगों को लेकर कुलपति को ज्ञापन देना चाहते थे। अगर कुलपति बाहर आकर ज्ञापन लेते तो मामला शांत हो जाता। वहीं, सिंडिकेट की बैठक को लेकर ऐसा माहौल पैदा किया कि कैंपस में 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए। कुलपति सचिवालय की बैरिकेड्स से घेराबंदी कर दी गई। इससे कैंपस में अन्य छात्रों में भय का माहौल रहा। वहीं, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था जब फेल हो गई तो छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया गया।

ये हुए चोटिल

एनएसयूआई के राजेन्द्र गोरा, सचिन चौधरी, गजेन्द्र सिंह, एबीवीपी के शौर्य जैमन, रोहित मीणा, देव पलसानिया, भारतभूषण, संजय चेची सहित कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं।

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