मनुस्मृति और सावरकर के पोते की याचिका पर आधारित कोर्ट के फैसले, राहुल गाँधी ने न्याय की उम्मीद कैसे की, हिंदुत्ववादी जजों का मोह मनुस्मृति से नहीं छूट रहा है

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07, जुलाई 2023 | जयपुर-दिल्ली-अहमदाबाद : देश की न्याय-प्रणाली भटक रही है क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया अपराधी की जाति और अपराध सहने वालों की जाति के अनुसार फैसला सुनाने की गुस्ताखी कर रही है, जिसका सीधा सा फार्मूला है अपराध एक, सज़ा अनेक।  ऐसा ही गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मोदी सरनेम केस में राहुल गांधी की 2 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा- इस केस के अलावा राहुल के खिलाफ कम से कम 10 केस पेंडिंग हैं। ऐसे में सूरत कोर्ट के फैसले में दखल देने की जरूरत नहीं है।

comp 111681964946 1688708794 मनुस्मृति और सावरकर के पोते की याचिका पर आधारित कोर्ट के फैसले, राहुल गाँधी ने न्याय की उम्मीद कैसे की, हिंदुत्ववादी जजों का मोह मनुस्मृति से नहीं छूट रहा हैकांग्रेस ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद कहा कि हम अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। 23 मार्च 2023 को सूरत की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, इस फैसले के 27 मिनट बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके अगले दिन 24 मार्च को राहुल की सांसदी चली गई थी।

मनुस्मृति और सावरकर के पोते की याचिका पर आधारित कोर्ट के फैसले

मनुस्मृति की आत्मा और संविधान की आत्मा एक दूसरे के विपरीत है। संविधान के पारित होने के बावजूद हमारी बहुत-सी मान्यताएं मनुस्मृति के अनुरूप ही हैं। इसीलिए कार्यपालिका और न्यायपालिका के माध्यम से यह कोशिश की जाती है कि जब भी अन्यायपूर्ण परंपरा और संविधान के बीच टकराव होता है, तो संविधान के पक्ष में निर्णय लिया जाए। यह प्रक्रिया अब मंद पड़ गई है। इसने खतरे का एहसास दिला दिया है और संविधान की रक्षा करने की बात व्यापक पैमाने पर होने लगी है।

जस्टिस हेमन्त प्रच्छक ने कहा, ‘राहुल के खिलाफ कम से कम 10 क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। इस केस के अलावा उनके खिलाफ कुछ और केस फाइल किए गए हैं। एक तो वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। किसी भी हाल में सजा पर रोक नहीं लगाना अन्याय नहीं है। इस केस में सजा न्यायोचित और उचित है।

ऐसे ही एक अन्य मामले में सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने एक नाबालिग रेप पीड़ित को एबॉर्शन की परमीशन देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा, लड़कियों के लिए कम उम्र में शादी करना और 17 साल की उम्र से पहले बच्चे को जन्म देना सामान्य बात थी। इसका जिक्र मनुस्मृति में भी है।

कोर्ट ने आगे कहा, अपनी माँ या परदादी से पूछो। 14-15 साल की उम्र तक शादी हो जाती थी और लड़कियां 17 साल की होने से पहले अपने पहले बच्चे को जन्म देती थीं। और लड़कियां लड़कों से पहले मैच्योर हो जाती हैं। हालांकि आप पढ़ेंगे नहीं, लेकिन आपको एक बार मनुस्मृति पढ़नी चाहिए।

आज अंग्रेजों की कही हुई बात सच हो रही है कि ‘ब्राह्मणों में न्यायिक चरित्र नहीं होता है’ क्योंकि वे अब  अपने कई फैसलों में मनुस्मृति की प्रशंसा भी की है और राजस्थान उच्च न्यायालय में फुल कोर्ट मीटिंग के फैसले के विरुद्ध मनु की मूर्ति भी स्थापित की थी। हमारे संविधान और आधुनिक न्यायिक प्रणाली के मूल सिद्धांत- हरेक को सामान्य रूप से न्याय पाने का अधिकार- के लिए मनुस्मृति में कोई स्थान नहीं है।

जस्टिस समीर दवे ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि लड़की और भ्रूण दोनों स्वस्थ हैं तो वह एबॉर्शन कराने वाली याचिका की अनुमति नहीं दे सकते हैं। रेप विक्टिम 16 साल 11 महीने की है और उसके गर्भ में सात महीने का बच्चा है। लड़की के पिता ने एबाॉर्शन की परमीशन के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, क्योंकि 24 सप्ताह की प्रेग्नेंसी के बाद एबॉर्शन सिर्फ कोर्ट की परमीशन के बाद ही किया जा सकता है।

राहुल गांधी ऐसे आधार पर सजा पर रोक की मांग कर रहे हैं, जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। सूरत कोर्ट के फैसले में दखल की आवश्यकता नहीं है। याचिका खारिज की जाती है।’ तस्वीर 3 अप्रैल की है, जब राहुल गांधी ने सूरत की कोर्ट में सजा के खिलाफ याचिका लगाई थी। तब उनकी बहन प्रियंका भी उनके साथ मौजूद थीं।

आगे क्या: राहुल गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। अगर राहुल को इस केस में वहां राहत मिल जाती है तो उनकी सांसदी बहाल हो जाएगी और वे 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ पाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो वे 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

इस केस से जुड़े अपडेट्स
  • याचिकाकर्ता भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
  • भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि मानहानि करने के मामले में राहुल आदतन अपराधी हैं।
  • फैसला के बाद दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में नारेबाजी की। 3 बजे अभिषेक मनु सिंघवी की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
comp 1 46167954947216800013441680410888 1688662678 मनुस्मृति और सावरकर के पोते की याचिका पर आधारित कोर्ट के फैसले, राहुल गाँधी ने न्याय की उम्मीद कैसे की, हिंदुत्ववादी जजों का मोह मनुस्मृति से नहीं छूट रहा है राहुल ने 2019 में मोदी सरनेम को लेकर बयान दिया था… समझें पूरे मामले को

राहुल गांधी ने 2019 में कर्नाटक की सभा में मोदी सरनेम को लेकर बयान दिया था। कहा था- सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है। इसके बाद गुजरात के भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल के खिलाफ मानहानि का केस किया था।

राहुल को 2 साल की सजा हुई, तो सांसदी गई

राहुल की संसद सदस्यता 24 मार्च को दोपहर करीब 2.30 बजे रद्द कर दी गई। वह केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य थे। लोकसभा सचिवालय ने पत्र जारी कर इस बात की जानकारी दी थी। लोकसभा की वेबसाइट से भी राहुल का नाम हटा दिया गया है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2013 को अपने फैसले में कहा था कि कोई भी सांसद या विधायक निचली अदालत में दोषी करार दिए जाने की तारीख से ही संसद या विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित हो जायेगा।

कोर्ट ने लिली थॉमस बनाम भारत सरकार के केस में यह आदेश दिया था। इससे पहले कोर्ट का आखिरी फैसला आने तक विधायक या सांसद की सदस्यता खत्म नहीं करने का प्रावधान था। तस्वीर 23 मार्च की है, जब राहुल गांधी दो साल की सजा मिलने के बाद सूरत कोर्ट से बाहर निकले थे।

राहुल गांधी पर मानहानि के 4 और मुकदमे चल रहे हैं, जिन पर फैसला बाकी…
  • 2014 में राहुल गांधी ने संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाया था। एक संघ कार्यकर्ता ने राहुल पर IPC की धारा 499 और 500 के तहत मामला दर्ज कराया था। ये केस महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट में चल रहा है।
  • 2016 में राहुल गांधी के खिलाफ असम के गुवाहाटी में धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा था कि 16वीं सदी के असम के वैष्णव मठ बरपेटा सतरा में संघ सदस्यों ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया। इससे संघ की छवि को नुकसान पहुंचा है। ये मामला भी अभी कोर्ट में पेंडिंग है।
  • 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ झारखंड की राजधानी रांची में एक और केस दर्ज किया गया। ये केस रांची की सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चल रहा है। राहुल के खिलाफ IPC की धारा 499 और 500 के तहत 20 करोड़ रुपए मानहानि का केस दर्ज है। इसमें राहुल के उस बयान पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें उन्होंने ‘मोदी चोर है’ कहा था।
  • 2018 में ही राहुल गांधी पर महाराष्ट्र में एक और मानहानि का केस दर्ज हुआ। ये मामला मझगांव स्थित शिवड़ी कोर्ट में चल रहा है। IPC की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज है। केस संघ के कार्यकर्ता ने दायर किया था। राहुल पर आरोप है कि उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या को BJP और संघ की विचारधारा से जोड़ा।

जो बहस ज़रूरी है वह यह है कि कोर्ट के फैसलों में कौनसी नीतियों का पालन किया जा रहा हैउनका क्या प्रभाव है और क्या वे जैसा संविधान में उद्धृत किये गये डॉ अंबेडकर के विचारों से मेल खाते है या नहीं । भाजपाआरएसएस की विचारधाराओं को फॉलो करते जजों के खेमे बहुत मुश्किल से इन विचारों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर सकते क्योंकि उन्होंने आंतरिक रूप से दोनों संविधान और डॉ अंबेडकर के सामाजिक समानता और न्याय के दृष्टिकोण का विरोध किया।

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