‘फिगर अच्छा है, काफी मेंटेन कर रखा है’ कहना सेक्शुअल हैरेसमेंट, ऑफिस में महिलाओं को सेफ रखने के लिए POSH

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07, जुलाई 2023 | जयपुर-दिल्ली-मुंबई : पिछले दिनों मुंबई के सेशन कोर्ट ने रियल स्टेट कंपनी में काम करने वाले 2 कर्मचारियों को सेक्शुअल हैरेसमेंट के केस में जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऑफिस में किसी महिला कलीग से कहना कि ‘उसका फिगर अच्छा है और उसने खुद को काफी मेंटेन कर रखा है’, यह सेक्शुअल हैरेसमेंट के तहत आता है। कई बार लड़कियों को भी यह पता नहीं होता कि सेक्शुअल हैरेसमेंट यानी यौन उत्पीड़न किसे कहते हैं? क्या यह केवल छूने से होता है या बोले गए भद्दे शब्द या इशारे भी सेक्शुअल हैरेसमेंट के दायरे में आते हैं?

हाल ही में रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर 6 महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया और लंबे वक्त तक सड़कों पर प्रदर्शन भी किया। इस केस की जांच जारी है। इससे पहले, सेक्शुअल हैरेसमेंट के खिलाफ #Metoo कैंपेन भी जोर-शोर से चला। इसमें भी कई महिलाओं ने अपनी आपबीती बताई थी।

3 तरह से होता है सेक्शुअल हैरेसमेंट

यौन शोषण 3 तरह से हो सकता है।

  • शारीरिक यौन शोषण में छूना, गले लगना, किस करना और रास्ता रोकने जैसी हरकतें आती हैं।
  • मौखिक यौन शोषण में अश्लील बातें, अश्लील चुटकले, अश्लील कमेंट, धमकी देना, सेक्शुअल फेवर मांगना या कपड़ों और शरीर पर फब्ती कसना आता है।
  • सेक्शुअल हैरेसमेंट सांकेतिक भी होता है। जैसे- घूरना, अश्लील इशारे करना, गंदी आवाजें निकालना और अश्लील तस्वीरें फोन या कंप्यूटर पर दिखाना।

दफ्तर में 50% महिलाएं यौन शोषण की शिकार

यौन शोषण का मुद्दा हमेशा से उठता रहा है। लड़कियों को पड़ोस में, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में या फिर ऑफिस में घूरती नजरों, बेतुकी बातों या गलत तरीके से छूने का शिकार बनना पड़ता है। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में काम करने वाली लगभग 50 फीसदी महिलाएं कम से कम एक बार अपने करियर में यौन शोषण का शिकार होती हैं।

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ऑफिस में महिलाओं को सेफ रखने के लिए POSH

महिलाओं को दफ्तरों में सेक्शुअल हैरेसमेंट से सुरक्षित रखने के लिए ‘POSH Act 2013’ यानी ‘प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम सेक्शुअल हैरेसमेंट एट वर्कप्लेस’ बनाया गया है। अगर कोई ऑफिस में गलत हरकत करता है तो इसके तहत शिकायत की जा सकती है।

इस एक्ट के तहत 90 दिनों के अंदर शिकायत की जांच पूरी होना जरूरी है। इसके लिए ऑफिस में बनी इंटरनल कमेटी या फिर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऑफिस की इंटरनल कमेटी को 10 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट कंपनी को देनी होती है। दोषी पाए जाने पर कंपनी आरोपी को सजा देती है।

नौकरी छूटने के डर से महिलाएं नहीं आतीं आगे

HR कंसल्टेंट नेहा अरोड़ा के अनुसार हर ऑफिस में इंटरनल कंप्लेंट कमेटी बनानी जरूरी है। कंपनी को हर नए एम्लॉई को POSH पॉलिसी (Prevention of Sexual Harassment) बतानी होती है। इसके अलावा ह्यूमन रिसोर्सेज डिपार्टमेंट कंपनी के हर कर्मचारी को इसके बारे में ई-मेल करते हैं और क्या-क्या सेक्शुअल हैरेसमेंट के दायरे में आता है, इसकी शिकायत कैसे करनी है, इसका ऑनलाइन कोर्स करवाते हैं ताकि महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी इस बारे में जान सकें।

इसके लिए वर्कशॉप, सेमिनार और कोर्स हर साल करवाए जाते हैं जिसमें हर कर्मचारी का भाग लेना जरूरी है। इसके अलावा कंपनी के नोटिस बोर्ड पर इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। नेहा कहती हैं कि वह पिछले 10 साल से इस इंडस्ट्री में हैं, लेकिन उनके सामने कभी किसी महिला ने इस बारे में शिकायत नहीं की। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि महिला कर्मचारी कंप्लेंट करें तो भी बलि उनकी ही चढ़ती है।

अगर किसी महिला के साथ ऑफिस में गलत हरकत हो तो शिकायत करने पर उसके घरवाले ही उसे नौकरी नहीं करने देंगे। ऑफिस में यह बात खुलेगी तो सब उसके किरदार पर शक करेंगे। दोनों ही हालात में महिला को ही नौकरी छोड़नी पड़ेगी, क्योंकि ऐसे मामलों में देखा गया है कि पुरुष नौकरी से रिजाइन नहीं करते। ऐसे में महिलाओं को लगता है कि शिकायत करने का कोई फायदा नहीं है।

हर साल 5 से 20 शिकायतें होती हैं, 90% मामलों में गंभीरता से जांच

दिल्ली-NCR में HR डायरेक्टर वंदना सिन्हा कहती हैं कि अगर कोई कर्मचारी सेक्शुअल हैरेसमेंट का शिकार बने तो घटना के 90 दिनों के अंदर उन्हें अपने रिपोर्टिंग मैनेजर, HR या इंटरनल कंप्लेन कमेटी में लिखित शिकायत करनी चाहिए। वंदना सिन्हा कहती हैं कि बड़ी कंपनी में साल भर में सेक्शुअल हैरेसमेंट के 5 से 20 और छोटे ऑफिस में 1 से 3 मामले ही रिपोर्ट होते हैं। 90% मामलों पर गंभीरता से जांच करके उनका निपटारा किया जाता है।

इस दौरान पीड़ित की पहचान गोपनीय रखी जाती है। कमेटी आरोपी और पीड़ित दोनों से बात करती है और मामले की जांच होती है। जब जांच पूरी होती है तो मैनेजमेंट को रिपोर्ट सौंपी जाती है। अगर जांच में आरोपी दोषी पाया जाता है तो उसे वॉर्निंग दी जा सकती है, डिमोशन किया जा सकता है, 1 साल या उससे ज्यादा समय के लिए इन्क्रिमेंट तक रोका जा सकता है, सर्विस से सस्पेंड किया जा सकता है, दूसरी जगह ट्रांसफर किया जा सकता है या तुरंत नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है।

HDFC बैंक में सबसे ज्यादा 51 शिकायतें

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फाइनेंशियल ईयर 2022 में पिछले साल के मुकाबले सेक्शुअल हैरेमेंट के मामले बढ़े हैं। Complykaro.com के सर्वे के अनुसार HDFC बैंक में 2022 में सबसे ज्यादा सेक्शुअल हैरेमेंट की 51 शिकायतें आईं, जबकि 2021 में यह 47 थीं। ICICI बैंक में 2022 में 33 शिकायतें आईं, जबकि इससे पहले 46 मामले सामने आए थे। विप्रो में 43 तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 45 मामले सामने आए।

51% दफ्तरों में नहीं मिली इंटरनल कंप्लेंट कमेटी

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमन असोसिएशन (AIDWA) ने दक्षिण भारत के 100 से ज्यादा ऑफिस में इंटरनल कंप्लेंट कमेटी के बारे में जानकारी जुटाई। इसमें सर्वे में सामने आया कि 51% दफ्तरों में कमेटी का गठन ही नहीं हुआ। 30 ऑफिस के प्रबंधकों ने बताया कि उन्हें पता ही नहीं था कि इस तरह की कमेटी बनाना अनिवार्य है।

इस सर्वे में प्राइवेट हॉस्पिटल, ज्वेलरी शॉप, स्कूल, कॉलेज, शोरूम, बैंक, पोस्ट ऑफिस, पब्लिक लाइब्रेरी और यहां तक कि डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भी विखाशा गाइडलाइंस के तहत कोई कमेटी नहीं मिली। सर्वे में यह भी सामने आया कि केवल 27% दफ्तरों ने ही इस बारे में कर्मचारियों को जागरूक किया।

डिप्रेशन से घिरी, नौकरी ही छोड़ दी

दिल्ली में रहने वाली निष्ठा परमार (बदला हुआ नाम) एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्होंने 15 साल तक जॉब की। आखिरी बार वह जिस कंपनी में जॉब कर रही थीं, वहां उनका बॉस अक्सर उन्हें अचानक उन्हें छूने की कोशिश करता। कभी बालों की तारीफ करता तो कभी उनकी स्माइल की। बॉस का टच उन्हें डिस्टर्ब कर देता।

एक दिन ऑफिस की छुट्टी के समय मीटिंग के बहाने बॉस ने उन्हें मीटिंग रूम में बुलाया। निष्ठा को लगा मीटिंग में और लोग भी शामिल होंगे, लेकिन जब वह वहां गई उनके बॉस ने उनके साथ गलत हरकत की। इससे वह इतनी सहम गईं कि दोबारा ऑफिस ही नहीं गईं और अपने करियर को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

सेक्शुअल हैरेसमेंट से बिगड़ती मेंटल हेल्थ

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता ने बताया कि यौन शोषण लड़की के साथ हो या लड़के साथ, उसका असर इंसान के दिमाग पर जरूर पड़ता है। मेंटल हेल्थ बिगड़ेगी या नहीं, यह कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे- यौन शोषण कौन रहा है? कलीग या बॉस है, सीनियर या कोई और। पिछले वर्कप्लेस का क्या अनुभव रहा है? महिला की आर्थिक स्थिति कैसी है? क्या नौकरी करना उसकी मजबूरी है या वह आत्मनिर्भर है?

अगर सेक्शुअल हैरेसमेंट हावी होने लगे तो इंसान की मेंटल हेल्थ बिगड़ जाती है। सेक्शुअल हैरेसमेंट का शिकार व्यक्ति अकेलेपन, एंग्जाइटी और डिप्रेशन से घिर जाता है। उसे ऑफिस जाने में हिचकिचाहट होती है, डर लगता है, काम में मन भी नहीं लगता, करियर में आगे बढ़ने की इच्छा खत्म हो जाती है। पीड़ित खुद को कमरे में बंद कर लेता है या सोता रहता है।

03392b63 3700 4abd abdf4eba3efbc71b 1 300x176 फिगर अच्छा है, काफी मेंटेन कर रखा है कहना सेक्शुअल हैरेसमेंट, ऑफिस में महिलाओं को सेफ रखने के लिए POSHलड़की ने की शुरुआत, लड़के पर लगा दिया आरोप

डॉ. राजीव मेहता ने बताया कि कई बार लड़के गलत मामलों में भी फंस जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास एक लड़का काउंसिलिंग के लिए आया। उस पर सहकर्मी ने सेक्शुअल हैरेसमेंट का गलत आरोप लगाया जिससे वह शर्मिंदगी से भर गया। झूठे आरोप ने उसकी मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा असर डाला।

उसकी एक लड़की से दोस्ती थी। दोनों के बीच अच्छी बातचीत होती। एक दिन दोनों ने साथ बैठकर ड्रिंक किया। इस दौरान लड़की ने लड़के के प्राइवेट पार्ट को छुआ। इसके बाद लड़के ने लड़की को जब छूने की कोशिश की तो उसने उस पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगा दिया। जबकि शुरुआत लड़की की तरफ से हुई थी। इस घटना ने लड़के को बहुत तकलीफ पहुंचाई और उसे डिस्टर्ब कर दिया। जब मेल कलीग के साथ हैरेसमेंट हो तो उसके लिए इंसाफ पाने के क्या ऑप्शन हैं?

पुरुष अपने बॉस से या थाने में कर सकते हैं शिकायत

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट प्रसून कुमार कहते हैं कि भारतीय कानून में यौन उत्पीड़न को केवल महिलाओं से जोड़कर ही देखा जाता है। अगर कोई पुरुष वर्कप्लेस पर सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकायत करता है तो उनके लिए कोई इंटरनल कमेटी नहीं बनी है।

ऐसे में पुरुष अपने बॉस से जाकर शिकायत कर सकता है। अगर ऑफिस में उसकी बात नहीं सुनी जाए तो वह थाने में FIR करा सकता है। पुरुष अपनी शिकायत धारा 323 (जानबूझकर नुकसान पहुंचाने) के तहत, धारा 506 (धमकी देने पर) में और धारा 383 (काम के बदले किसी तरह का फेवर मांगने पर या हालातों का फायदा उठाने की कोशिश करने पर) दर्ज करा सकता है।

पुरुष बॉस करे युवक कर्मचारी का शोषण तो धारा 377

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रसून कुमार ने बताया कि अगर कोई पुरुष बॉस पुरुष कर्मचारी का शोषण करे तो पीड़ित युवक केवल सेक्शन 377 के तहत शिकायत कर सकता है। लेकिन अगर महिला किसी पुरुष के साथ ऐसा करे तो पुरुष की मदद के लिए ऐसा कानून नहीं है जिसके तहत वह शिकायत दर्ज करवा सके। पुरुष अपनी शिकायत ऑफिस की कमेटी के आगे रख सकता है। उसकी शिकायत पर कोई सुनवाई होगी या कोई विश्वास करेगा, यह बात अलग है।

अपोजिट जेंडर से तारीफ चाहते हैं इंसान 00 1 1 300x300 फिगर अच्छा है, काफी मेंटेन कर रखा है कहना सेक्शुअल हैरेसमेंट, ऑफिस में महिलाओं को सेफ रखने के लिए POSH

हर इंसान को तारीफ पसंद है। अगर लड़की की कोई लड़का तारीफ कर दे तो उसे अच्छा लगता है। घर और दफ्तर संभालने के बावजूद उन्हें पति और परिवार से तारीफ नहीं मिलती, जिससे उन्हें लगता है कि उन्हें सब नजरअंदाज करते हैं। वहीं, दफ्तर में पर्सनैलिटी और काम को लेकर जब उनको तारीफ और अटेंशन मिलती है तो उन्हें खुशी महसूस होती है।

साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजीव मेहता कहते हैं कि भारत की ढकी-छुपी सोसाइटी में अक्सर महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता है। उनके पति उनकी तरफ से लापरवाह होते हैं। ऐसे में वे ऑफिस में अटेंशन पाने की चाहत रखती हैं। वे पुरुष सहयोगियों के साथ हंसती-बोलती हैं।

लेकिन अगर कोई उन्हें हंसी-मजाक करते देख ले तो वह किसी गॉसिप की चपेट में आने से बचने और इमेज अच्छी बनाए रखने के लिए लड़कों को कसूरवार ठहरा देती हैं। ऐसे मामलों में अक्सर पुरुषों की मानसिक शांति प्रभावित होती है। डॉ. राजीव मेहता कहते हैं कि उन्होंने तकलीफ से गुजरते ऐसे कई मरीजों को देखा है।

सहकर्मी की अटेंशन पाने के लिए पहनते उनके मनपसंद कपड़े

ऑफिस में अटेंशन और तरक्की पाने के लिए भी लोग सीनियर्स और बॉस की पसंद के कपड़े पहनते हैं। एक नामी ऑफिस में काम करने वाली कर्मचारी ने बताया कि उनके बॉस सिर्फ मीटिंग के दौरान ऑफिस आते हैं। उनकी एक फीमेल कॉलीग बॉस के ऑफिस आने वाले दिन कट स्लीव ड्रेस पहनकर आती है, क्योंकि बॉस को लड़कियां कट स्लीव में अच्छी लगती हैं।

भारत में यौन शोषण का रूप

मार्था फरेल फाउंडेशन (Martha Farrell Foundation) ने भारत के दफ्तरों में यौन शोषण पर एक रिपोर्ट पेश की। इसके अनुसार-

  • 62% यौन उत्पीड़न अश्लील इशारों, सीटी बजाकर और 52% आपत्तिजनक मैसेज या फोटो भेजकर होता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार ऑफिस में सेक्शुअल हैरेसमेंट के मामलों में 29% शिकायतों का निपटारा नहीं होता।
  • 19% लड़कियां बदसलूकी को नजरअंदाज करती हैं, जबकि 15% महिलाएं इस बारे में अपने दोस्तों से अपनी समस्या शेयर करती हैं।

maxresdefault 76 300x169 फिगर अच्छा है, काफी मेंटेन कर रखा है कहना सेक्शुअल हैरेसमेंट, ऑफिस में महिलाओं को सेफ रखने के लिए POSHभारत में सेक्शुअल हैरेसमेंट को लेकर नहीं हैं जेंडल न्यूट्रल कानून

2014 में हुई PEW रिसर्च के अनुसार 18 से 24 साल की उम्र में 25% महिलाएं और 13% पुरुष ऑनलाइन सेक्शुअल हैरेसमेंट के शिकार होते हैं। कई लोगों को लगता है कि सेक्शुअल हैरेसमेंट केवल महिलाओं तक सीमित है जबकि पुरुष भी वर्कप्लेस में इसके शिकार बनते हैं। कई बार महिला बॉस पुरुष को इसका शिकार बनाती हैं।

लेकिन पुरुषों के लिए ऐसा कोई कानून नहीं बना है। एडवोकेट प्रसून कुमार बताते हैं कि भारत में शोषण के खिलाफ कानून जेंडर न्यूट्रल नहीं है। ये महिलाओं के लिए ही बने हैं जबकि दुनिया में यूके, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका समेत 77 देशों में जेंडल न्यूट्रल कानून हैं। वहां पुरुष सेक्शुअल हैरेसमेंट के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।

भारतीय समाज में लड़कियों को लड़कों से हमेशा कमजोर समझा गया है। वह बेचारी है, अबला है और बाहरी व्यक्ति के लिए ‘वस्तु’ है। ऑफिस में भी समाज की यह सोच हावी है इसलिए वह सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकार होती हैं और उसकी सुरक्षा के लिए कई कानून भी मौजूद हैं, लेकिन पुरुष को अपनी शिकायत दर्ज करने में मुश्किल होती है। अगर वे गलत हरकतों का शिकार हैं तो अपनी आवाज तक नहीं उठा सकते, क्योंकि उनकी शिकायतों की सुनवाई नहीं होती।

कामकाजी महिलाओं के लिए SHE बॉक्स

केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए सेक्शुअल हैरेसमेंट इलेक्ट्रॉनिक यानी SHE बॉक्स लॉन्च किया है, जिसमें महिलाएं अपनी आपबीती बता सकती हैं। इसके लिए http://shebox.nic.in पर लॉग-इन कर शिकायत रजिस्टर करनी होती है। इसी वेबसाइट पर शिकायत पर क्या कार्रवाई हो रही है, उसका स्टेटस भी देखा जा सकता है। इस वेबसाइट पर आने वाली शिकायतों से निपटने के लिए मंत्रालय के अंदर एक अलग यूनिट बनाई गई है।

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