आदिवासियों की 92 हजार एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेची, मध्य प्रदेश के 3 IAS अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त में FIR, बीजेपी-कांग्रेस आदिवासी हितेषी नहीं – प्रोफ़ेसर मीणा

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 12, जुलाई 2023 | जयपुर-दिल्ली-भोपाल : मध्य प्रदेश में पिछले 20 सालों में आदिवासियों की 92 हजार एकड़ जमीन (31,638 हेक्टेयर) गैर आदिवासियों को बेची गई। इसकी जानकारी बुधवार को विधानसभा में सामने आई। इस जमीन की कीमत 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है। खास बात ये कि इनमें से कई जमीनें बेचने की अनुमति एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों ने दी। जबकि आदिवासियों की जमीन बेचने की अनुमति सिर्फ कलेक्टर के द्वारा दी जा सकती है।

आंकड़ों में हेराफेरी 

मध्यप्रदेश में आदिवासियों की जमीन बेचने के मामले में कांग्रेस शिवराज सरकार पर हमलावर है। अब कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों के बेचने के सवाल के जवाब में विधानसभा में सरकार ने आंकड़ों में हेराफेरी की है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने 2 विधायकों को अलग-अलग आंकड़े बताए हैं।

इंदौर संभाग में पिछले 15 सालों में 933.256 हेक्टेयर और उज्जैन संभाग में 1289.110 हेक्टेयर जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई। आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को 165 (1) में बेचे जाने के संबंध में दो सवालों में अलग-अलग जानकारी आई है। इसमें एक प्रश्न प्रताप ग्रेवाल का था, जिसमें 2004 से 2023 के बीच की इस तरह के मामलों की जानकारी मांगी गई थी।

विधानसभा में उठा आदिवासियों की जमीन बेचने का मामला

दूसरे सवाल में डॉ गोविंद सिंह ने साल 2010 से 2015 के बीच बेची गई जमीनों की जानकारी मांगी गई थी। हैरानी की बात यह कि 20 साल में प्रकरणों की संख्या कम आई, जबकि 5 साल की संख्या ज्यादा आ रही है। हाल ही में जबलपुर में 4 तत्कालीन एडीएम द्वारा आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति देने पर लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज किया है। पूर्व एडीएम रतलाम को नोटिस दिया है।

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मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 के तहत आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी को बेचने की अनुमति सिर्फ कलेक्टर ही दे सकते हैं। राजस्व विभाग के 1 दिसंबर 2022 को जारी आदेश के अनुसार यदि कोई आदिम जनजाति वर्ग का है, तो भूमि बेचने की अनु​मति सिर्फ कलेक्टर ही दे सकेंगे। अपर कलेक्टर के स्तर के अ​धिकारी इसकी अनुमति नहीं दे सकते।

मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति देने में जबलपुर में पोस्टेड रहे तीन आईएएस दीपक सिंह, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, बसंत कुर्रे पर भले ही लोकायुक्त में केस बन गया लेकिन पिछले 20 साल में आदिवासियों की 60 एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेच दी गई।

विधानसभा में पूछे प्रश्नों से हुआ खुलासा 

इस तथ्य की हकीकत को छिपाने के लिए विधानसभा में जो आंकड़े दिए गए हैं। वे अलग-अलग विधायकों को अलग-अलग दिए गए। इन विधायकों ने दोनों प्रश्नों में सरकार द्वारा दी गई जानकारियों को रखते हुए अब सवाल खड़े किए हैं। पेश है विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और कांग्रेस के एक अन्य विधायक प्रताप ग्रेवाल के लिखित प्रश्नों के जवाब पर आधारित यह रिपोर्ट।

पंद्रहवीं विधानसभा के अंतिम सत्र में आज कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासियों को बेचे जाने को लेकर लिखित प्रश्न किया था जिसका सरकार ने जवाब दिया तो ग्रेवाल गफलत में पड़ गए। कांग्रेस विधायक ने यह मामला नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की जानकारी में लिखित रूप से ला दिया है।

आँकड़ों में विरोधाभास पर कांग्रेस विधायक चौंके

ग्रेवाल का कहना है कि इसी जानकारी के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने भी फरवरी-मार्च 2018 में किया था और उसका जवाब दिसंबर 2022 को दिया गया। नेता प्रतिपक्ष को दिए गए जवाब में 2010-15 के पांच सालों में आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचे जाने के प्रकरणों की जिलेवार सूची दी गई।

ग्रेवाल का कहना है कि उनके आज के लिखित प्रश्न के जवाब में परिशिष्ट में 2004-05 से 2022-23 तक की जानकारी देना बताया गया। मगर नेता प्रतिपक्ष और उन्हें दिए गए आंकड़ों में काफी विरोधाभास है। ग्रेवाल कहते हैं कि आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने के आंकड़े पांच साल के ज्यादा हैं और 20 साल की जानकारी में यह संख्या कम है।

2018-2022 के बीच 657 प्रकरणों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी को बिकी। ग्रेवाल के लिखित प्रश्न के जवाब में 2018 से 2022 की अविध के जो आंकड़े बताए गए हैं, उसके मुताबिक प्रदेश के 657 मामलों में ऐसी जमीन गैर आदिवासियों को बेची गई। सबसे ज्यादा राजगढ़ में 273 तो उज्जैन में 165 व इंदौर में 112 आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने के मामले हुए हैं।

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नेता प्रतिपक्ष-ग्रेवाल के सवालों में आंकड़ों का ऐसा अंतर 
  1. शाजापुर में नेता प्रतिपक्ष को दिए गए जवाब में 27 मामले रहे तो ग्रेवाल को दी गई जानकारी के हिसाब से 11 प्रकरणों में गैर आदिवासियों को बिकी जमीन।
  2. आगर मालवा में डॉ. गोविंद सिंह को मिले जवाब में नौ प्रकरण थे तो कांग्रेस विधायक ग्रेवाल के आज के सवाल के जवाब में यह संख्या शून्य बताई गई।
  3. खंडवा में डॉ. सिंह को दी गई जानकारी में 86 प्रकरण बताए गए लेकिन ग्रेवाल को आज 16 ऐसे प्रकरण होने की जानकारी दी गई।
  4. बुरहानपुर में नेता प्रतिपक्ष को सरकार ने लिखित प्रश्न के जवाब में 63 प्रकरण बताए थे जिनकी संख्या ग्रेवाल को आज के सवाल के जवाब में 66 बताई गई।
  5. बैतूल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. सिंह को जवाब में 18 प्रकरण की जानकारी दी गई थी तो ग्रेवाल को सरकार ने यह संख्या मात्र छह दी है।
  6. सागर में नेता प्रतिपक्ष को गैर आदिवासियों को बेची गई जमीन के 246 प्रकरण बताए गए थे लेकिन ग्रेवाल की सूची में इनकी संख्या 104 दिखाई गई।
  7. जबलपुर में डॉ. गोविंद सिंह को सरकार की तरफ सवाल के जवाब में 716 मामलों में गैर आदिवासियों को जमीन बेचे जाने की जानकारी दी गई तो ग्रेवाल को लिखित प्रश्न के उत्तर में यह आंकड़ा 133 कर दी गई।
  8. सिवनी में नेता प्रतिपक्ष को गैर आदिवासियों को 526 जमीन के बेचे जाने के मामले बताए गए तो ग्रेवाल को दी गई सूची में इस जिले में 60 गैर आदिवासियों को जमीन बेचे जाने के मामले दिखाए गए हैं।
  9. बालाघाट में डॉ. गोविंद सिंह के लिखित प्रश्न के जवाब में 482 प्रकरणों के माध्यम से आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचना बताया गया और इसी जिले में ग्रेवाल की सूची में आदिवासियों की जमीन के 135 प्रकरण गैर आदिवासियों को बेचे जाने के दिखाए गए हैं।
  10. सिंगरौली में भी नेता प्रतिपक्ष और ग्रेवाल को लिखित प्रश्नों के जवाब में अलग-अलग आंकड़े बताए गए। डॉ. सिंह को 106 मामले बताए गए तो ग्रेवाल को जिले में 13 प्रकरणों में गैर आदिवासियों को आदिवासियों की जमीन बेचा जाना बताया गया।
जमीन बेचने के खेल में बीजेपी-कांग्रेस दोनों एक जैसी 

आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध, कलेक्टर भी इसकी अनुमति नहीं दे सकते – मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ। आज़ाद समाज पार्टी कांशीराम राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा का कहना है कि आदिवासियों की जमीन बेचने के खेल में बीजेपी-कांग्रेस दोनों एक जैसी हैं।  0.83541300 1597041996 tribals 1 300x199 आदिवासियों की 92 हजार एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेची, मध्य प्रदेश के 3 IAS अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त में FIR, बीजेपी कांग्रेस आदिवासी हितेषी नहीं   प्रोफ़ेसर मीणा

प्रोफ़ेसर मीणा ने मूकनायक मीडिया से कि कहा मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने 2019 में अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति देने संबंधी जो भ्रम और अफवाह फैलाने बात कही थी। पर वह सरासर गलत है।

राज्य शासन ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया था तो फिर आदिवासियों की जमीं क्यों बिकी है। प्रदेश में आज भी आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, जिसकी गारंटी संविधान आदिवासियों को देता है। आदिवासियों के सभी हितों का संरक्षण करने के लिए बीजेपी-कांग्रेस की सरकार कतई कटिबद्ध नहीं है।

वास्तविकता यह थी कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दे दी थी। इसका खामियाजा आदिवासी भुगत रहे हैं। मध्यप्रदेश में आदिवासियों की जमीन किसी गैर आदिवासी को बेचने की अनुमति नहीं हैं और न ही इस प्रावधान में कोई बदलाव किया गया है। यह सफ़ेद झूठ है जो बीजेपी-कांग्रेस वर्षों के कहती आयी है।

प्रदेश के अनुसूचित आदिवासी क्षेत्रों में भू-राजस्व की संहिता की धारा 165 के अनुसार किसी आदिवासी की जमीन किसी गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध है और जिले के कलेक्टर भी इसकी अनुमति नहीं दे सकते। मध्यप्रदेश सरकार आदिवासियों के समस्त हितों का संरक्षण करने के लिए कटिबद्ध है और ऐसा कोई कदम कभी नहीं उठायेगी, जो प्रदेश के आदिवासियों के हित में न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने जो सामान्य सा बदलाव किया है और जिसको लेकर भ्रम और अफवाह फैलायी जा रही है वह सिर्फ यह है कि अनुसूचित क्षेत्रों में गैर आदिवासी द्वारा गैर आदिवासी की जमीन खरीदने के बाद डायवर्सन के लिए जो समय-सीमा थी, उसे समाप्त किया गया है।

मध्य प्रदेश के 3 IAS अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त में FIR, आदिवासियों की जमीन में घोटाले का आरोप

जबलपुर में 2007 से 2012 के दौरान आदिवासियों की जमीन को लेकर एक फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीन गैर कानूनी तरीके से गैर आदिवासियों को बेची गई थी। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने मध्य प्रदेश के 3 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

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