बाबूलाल कटारा ने RPSC सदस्य बनने के लिए दी डेढ़ करोड़ की रिश्वत, ईडी को कई चौंकाने वाले तथ्य और सबूत मिले

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 16, जुलाई 2023 | जयपुर-सीकर-अजमेर : सूत्रों का कहना है कि आरपीएससी सदस्य बनने के लिए बाबूलाल कटारा ने डेढ़ करोड़ की रिश्वत दी। इसके सबूत ईडी को कटारा रिश्वत कांड की जाँच के दौरान मिले हैं। ऐसे ही चौंकाने वाले अनेक साक्ष्य और प्रमाण बाबूलाल कटारा के खिलाफ ईडी की पुख्ता जाँच में मिल रहे हैं।

उन्होंने आरपीएससी सदस्य बनने के लिए कुछ नेताओं, सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री आवास के अधिकारियों को डेढ़ करोड़ रुपए की रिश्वत दी। इस मामले के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। राजस्थान में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच कर रही ईडी टीम को प्राप्त हुए हैं।

राजस्थान में लगातार छापेमारी

दरअसल ईडी राजस्थान में लगातार छापेमारी कर रही है। इस दौरान ईडी के कई चौंकाने वाले तथ्य और सबूत मिले हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईडी को शिकायत मिली थी कि पेपर लीक मामले में आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा ने आयोग का सदस्य बनने के लिए डेट करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी। इस खबर को हिंदुस्तान अखबार ने प्रमुखता से छापा है जबकि राजस्थान का प्रमुख मीडिया सरकारी विज्ञापनों में मिली अकूत राशि के कारण इस प्रमुख खबर को गटक गया है।

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maxresdefault 2023 07 16T092329.735 300x169 बाबूलाल कटारा ने RPSC सदस्य बनने के लिए दी डेढ़ करोड़ की रिश्वत, ईडी को कई चौंकाने वाले तथ्य और सबूत मिले बता दें कि पेपर लीक मामले में कटारा को गिरफ्तार किया गया था जिसकी ईडी कर रही है जांच। बाबूलाल के खिलाफ शिकायत मिली थी कि उन्होंने कुछ नेताओं को इस मामले में सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल है कि आखिरकार इस सारे खेल के पीछे मास्टरमाइंड कौन है? क्या इसमें मुख्यमंत्री आवास पर तैनात अधिकारी और नियमित रूप से आवाजाही रखने वाले नेता शामिल हैं? या फिर यह खेल ऊपर तक पैर पसार चुका है।

क्या आरपीएससी के सदस्य बनने के लिए होता है रिश्वत का खेल

इनमें एक सवाल यह है कि आरपीएससी के सदस्य बनने के लिए बाबूलाल कटेरा ने किन नेताओं को रिश्वत दी थी? इस मामले में दूसरा सवाल यह भी उठता है कि क्या राजस्थान की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा आयोग का सदस्य बनने के लिए रिश्वत दी जाती है। क्योंकि आरपीएससी राजस्थान की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा एजेंसी और संवैधानिक संस्था है।

आम लोगों के मन में एक सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि अगर आरपीएससी का सदस्य बनने के लिए रिश्वत ली जा सकती है तो उस पर यह कैसे भरोसा किया जाये कि वह निष्पक्ष परीक्षा एजेंसी है और परीक्षा का आयोजन सर्वोच्य पारदर्शिता और संपूर्ण जवाबदेही से करती है।

कॉपी जाँच-कार्य को बीच में ही छोड़कर आये एक प्रोफ़ेसर 

इससे भी बड़ा सवाल यह है कि अगर आरपीएससी (RPSC) सदस्यों की नियुक्ति में पैसा और पॉवर नहीं चलती है तो अधिकांशत: योग्य लोगों को आयोग का सदस्य कैसे बना दिया जाता है। मतलब साफ है कि दल में काला नहीं दाल ही काली है। आरएएस-2018 मुख्य परीक्षा में आरपीएससी के परीक्षक रहे प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा का कहना है कि आरपीएससी धांधलियों का अड्डा बन चुकी है।

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उन्होंने मूकनायक मीडिया को बताया कि आरपीएससी की धांधलियों के कारण वे आरएएस-2018 मुख्य परीक्षा की केवल एक कॉपी जाँचकर (जाँच कार्य को बीच में ही छोड़कर) वापस आ गये थे और आरपीएससी के कई बार बुलाने पर भी फिर से आयोग कभी नहीं गये क्योंकि आयोग में अयोग्य परीक्षकों को बुलाकर होनहार अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय किया जाता है।

कटारा को क्यों दी गई थी जिम्मेदारी
अब होनहार अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों तथा आम लोगों को केवल ईडी पर भरोसा है जो मामले की जांच की जा रही है। ईडी इस मामले में कई जगह छापेमारी कर रही है ईडी इस दौरान यह भी जांच कर रही है कि अध्यक्ष बाबूलाल कटारा को सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा कराने की जिम्मेदारी थी। ईडी के साथ एसओजी की भी लगातार सक्रियता बनी हुई है। इस दौरान ईडी ने कई जगह पर छापेमारी की है।

ईडी को मामले से जुड़ी कई शिकायतें भी मिली है जिसके आधार पर टीम जांच कर रही है। इस मामले में ईडी के अलावा भी एक एजेंसी सक्रिय हो गई है। बता दें इस मामले में एक आरोपी सुरेश धाकड़ को पकड़ने के लिए एसओजी ने एक अलग टीम बना दी है। जानकारों का मानना है कि सुरेश धाकड़ की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

राजस्थान के पूर्व राज्य मंत्री गोपाल केसावत गिरफ्तार

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok gehlot) के पिछले कार्यकाल में राज्य घुमन्तु जाति कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे गोपाल केसावत (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त) सहित चार लोगों को एसीबी ने 18 लाख 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते एसीबी ने गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने एक परीक्षार्थी से अधीशाषी अधिकारी (EO) परीक्षा में पास कराने की एवज में लिए थे। आरोपियों ने परीक्षार्थी से कहा कि वे आरपीएससी से साठगांठ करके ओएमआर शीट सीट बदलवा देंगे और अधीशाषी अधिकारी पद के लिए सलेक्शन करवा देंगे। राज्य मंत्री रहे गोपाल केसावत के साथ एसीबी ने अनिल कुमार धरेन्द्र, ब्रह्मप्रकाश और रविन्द्र शर्मा को गिरफ्तार किया है।

दो दिन चली ट्रेप की कार्रवाई

एसीबी के आईजी सवाई सिंह गोदारा ने बताया कि ट्रेप की यह कार्रवाई दो दिन तक चली। पहले दिन 14 जुलाई को सीकर में की गई। सीकर में परिवादी से 18 लाख 50 हजार रुपए लेते हुए दो प्राइवेट व्यक्ति अनिल कुमार धरेन्द्र और ब्रह्मप्रकाश शर्मा को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई को गोपनीय रखा गया और 14 जुलाई की देर रात को सीकर में ही दिल्ली निवासी रविन्द्र शर्मा को 18 लाख 50 हजार रुपए में से अपने हिस्से के 7 लाख 50 हजार रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई को भी गोपनीय रखते हुए एसीबी की टीम ने शनिवार 15 जुलाई को जयपुर के कुम्भा मार्ग सांगानेर निवासी गोपाल केसावत को 18 लाख 50 हजार रुपए में से अपने हिस्से के 7 लाख 50 हजार रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया। चारों आरोपियों से एसीबी के अफसर पूछताछ कर रहे हैं।

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