आठ झूठों की नींव पर बनी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की फिल्म ‘अजमेर 92’, घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी, कई सच छुपाये

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 24, जुलाई 2023 | जयपुर-अजमेर-चंदेरी : कश्मीर फाइल्स और केरल स्टोरी के बाद अब जल्द ही बड़े स्क्रीन पर अजमेर फाइल्स दिखाई देगी। आज से 30 साल पहले ख्वाजा नगरी अजमेर में घटी एक घटना ने देश को दंग कर दिया था। जब 100 से भी ज्यादा लड़कियों की ना सिर्फ न्यूड फोटोज निकाली गई थीं, बल्कि उनके साथ हैवानीय भी की गई। जिसके बाद कई लड़कियों ने अपनी जान तक दे दी। इनमें देश के कई नामचीन रसूखदारों की बेटियां भी शामिल थी।आठ झूठों की नींव पर बनी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की फिल्म ‘अजमेर 92’, घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी, कई सच छुपाये

 साल था 1992, जब स्थानीय अखबार में छपी एक खबर ने लोगों के होश उड़ा दिए थे। वो जमाना भले ही सोशल मीडिया का नहीं था लेकिन खबर को आग की तरह फैलने में जरा सा भी वक्त नहीं लगा। दरअसल सोफ़िया में पढ़ने वाली लड़कियों की अश्लील फोटो खींच ( Nude Photos ) कर ब्लैकमेल किया गया। फिर फार्म हाउस पर बुलाकर लड़कियों का रेप ( Sex Scandal ) किया जाता रहा और इसकी भनक घरवालों तक को नहीं लगी। धीरे-धीरे करके इसकी लड़कियों की संख्या सौ से ऊपर चली गई। यह सभी लड़कियां प्रभावशाली घरों से आती थीं. लिहाजा मामला और गंभीर था। अजमेर के बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल में शुमार सोफिया स्कूल में देश के कई बड़े आईएएस-आईपीएस से लेकर नेताओं की बच्चियां पढ़ती थीं।

इस स्कैंडल में जिन लड़कियों की फोटोज खींची ( Nude Photos ) गईं, उनमें से कई लड़कियों ने आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। एक ही साथ  6-7 लड़कियों ने सुसाइड कर लिया। इस घटना में सबसे दर्दनाक बात यह रही कि इन लड़कियों के लिए ना समाज और ना ही घरवाले आगे आए. लेकिन मामले के खुलासे में यह एक कड़ी साबित हुई। 18 -19 साल की 100 से भी ज्यादा लड़कियों की न्यूड तस्वीरें ( Nude Photos ) निकाली गई, जो कि मैगजीन और अखबारों के पहले पन्ने तक कैसे पहुंच गईं।

देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल पर बनी फिल्म ‘अजमेर 92’ बीते शुक्रवार (21 जुलाई) को देशभर में रिलीज हो गई। अजमेर में वर्ष 1992 में हुए घिनौने सेक्स स्कैंडल का सच सामने लाने का दावा करने वाली इस फिल्म में दिखाए गए कई तथ्यों पर सवाल उठ रहे हैं।

जैसे…

  • जिस पत्रकार ने सबसे पहले इस सेक्स स्कैंडल का खुलासा किया था, फिल्म में उसी पत्रकार को रेप पीड़िताओं को ब्लैकमेल कर लाखों रुपए कमाने और लग्जरी लाइफ जीने वाला शख्स दिखाया गया है।
  • उस समय के एसपी की बेटी को सेक्स स्कैंडल की शिकार बताया गया है।
  • ब्लैकमेलिंग से परेशान 4 रेप पीड़िताएं एक साथ सुसाइड कर लेती हैं।
  • एक मंत्री के कहने पर पुलिस केस में एक हिंदू शख्स को महज इसलिए आरोपी बता देती है ताकि हिंदू मुस्लिम दंगे न भड़कें।
  • सेक्स स्कैंडल के आरोपी दरगाह के खादिम थे, लेकिन फिल्म में इसका जिक्र नहीं है।

फिल्म में कितना सच और कितना झूठ है…इस सवाल का जवाब जानने के लिए भास्कर ने फिल्म देखी और उस समय केस की जांच कर रहे अधिकारियों, पत्रकार के परिवार और केस से जुड़े कई लोगों से बात की। बातचीत में सामने आया कि फिल्म में 8 झूठ को सच बनाकर पेश किया गया है। वहीं कई सच हैं, जिन्हें छिपा लिया गया।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पोस्टर रिलीज होने के साथ ही फिल्म चर्चा में आ गई थी। दावा किया गया कि फिल्म के जरिए देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल का सच सामने लाया जाएगा।

1931079f 270d 4c75 965b 1b69da34f777 1690207719 आठ झूठों की नींव पर बनी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की फिल्म अजमेर 92, घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी, कई सच छुपाये

सबसे पहले फिल्म के 8 झूठ

पहला झूठ : जिसने सबसे पहले सेक्स स्कैंडल का खुलासा किया उसे ब्लैकमेलर बताया

फिल्म : फिल्म ​​​​’अजमेर 92′ में दिखाया गया है कि पत्रकार मोहन ‘तूफान’ नाम के एक स्थानीय सप्ताहिक अखबार का मालिक और संपादक है। आरोपी जिस लैब से लड़कियों के अश्लील फोटो के नेगेटिव से फोटो डेवलप करते हैं, मोहन उस लैब के टेक्नीशियन से दोस्ती कर लेता है। मोहन अश्लील फोटो के नेगेटिव ले लेता है। वह पहले स्कैंडल की शिकार लकड़ियों और फिर आरोपियों को ब्लैकमेल करता है।

सच : फिल्म में जिसे पत्रकार मोहन दिखाया गया है। उन पत्रकार का असली नाम मदन सिंह था। मदन सिंह अपना स्थानीय अखबार ‘लहरों की बरखा’ प्रकाशित करते थे और उसके संपादक भी थे। मदन सिंह ने ही सबसे पहले इस घिनौने सेक्स स्कैंडल का खुलासा किया था।

मदन सिंह ने अपने अखबार में सेक्स स्कैंडल से जुड़ी 76 खबरें प्रकाशित की थीं। पत्रकार मदन सिंह ने अपने अखबार ‘लहरों की बरखा’ में सबसे पहले इस सेक्स स्कैंडल को एक्सपोज किया। उन्होंने सेक्स स्कैंडल से जुड़ी 76 खबरें प्रकाशित की थीं।

दूसरा झूठ : पत्रकार पीड़ित लड़की को ब्लैकमेल कर 20 हजार की डिमांड करता है n62b main 1686235293976 600x338 1 300x169 आठ झूठों की नींव पर बनी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की फिल्म अजमेर 92, घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी, कई सच छुपाये 

फिल्म : मूवी में मोहन को एक ऐसा पत्रकार बताया है, जो सेक्स स्कैंडल से जुड़े लोगों को ब्लैकमेल कर पैसे कमाता है। लोगों को खबरों के जरिए ब्लैकमेल करके रईसों वाली जिंदगी जीता है। एक मारुति कार भी रखता है। दूसरे पत्रकारों को भी अपनी तरह पैसे कमाने के लिए उकसाता है।

एक सीन में पत्रकार एक पीड़ित लड़की को अखबार में फोटो छापने की धमकी देकर 20 हजार रुपए की डिमांड करता है। इसके बाद पत्रकार मामले में फंसे आरोपी और रईस लड़कों से भी केस में उनके नाम उजागर करने की धमकी देकर पैसे मांगता है।

सच: पत्रकार मदन सिंह को लेकर दो राय है। एक पक्ष के अनुसार वह ईमानदार शख्स थे, जिन्होंने केस का खुलासा किया और आरोपियों ने इसी कारण उनकी हत्या करवा दी। दूसरे पक्ष के अनुसार वह ब्लैकमेलर थे। इसी कारण उनकी हत्या हुई।

पत्रकार मदन सिंह के भतीजे किशोर सिंह बताते हैं कि इस केस के बारे में अजमेर में पुलिस-प्रशासन सहित कई अखबार वालों को भी पता था। किसी ने इसके खुलासे की हिम्मत नहीं की। मदन सिंह सच्चे पत्रकार थे। उन्होंने सबसे पहले मई 1991 में पहली खबर प्रकाशित की थी। आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। कई बार उन पर हमले का प्रयास किया। इसके बावजूद वे डरे नहीं और 76 खबरों की सीरीज प्रकाशित की थी। उन्होंने मुख्य आरोपियों के अलावा शहर के नामी लोग, नेता, बिजनेसमैन के नाम भी उजागर किए थे।

%name आठ झूठों की नींव पर बनी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की फिल्म अजमेर 92, घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी, कई सच छुपायेआरोपियों के दबाव में आकर मदन सिंह के पड़ोस में रहने वाली एक पीड़िता ने उनके खिलाफ ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज करवा दिया था। जब सीआईडी ने मदन सिंह के बैंक अकाउंट की जांच की तो महज 6 हजार रुपए खाते में मिले थे।

बाद में इस मामले में पीड़िता और मदन सिंह के बीच राजीनामा भी हो गया था। आरोपियों ने मदन सिंह को फंसाने और उनकी छवि खराब करने के लिए पीड़िता को डरा-धमका कर उनके खिलाफ यह मामला दर्ज करवाया था।

वहीं एक अन्य अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि पत्रकार मदन सिंह ने पीड़ित लड़कियों और आरोपियों को ब्लैकमेल कर पैसे मांगे थे। मदन सिंह के ब्लैकमेल करने की धमकियों से रसूख वाले लोग परेशान हो गए थे।

आए दिन मदन सिंह को जान से मारने की धमकी मिलती थी। मदन सिंह भी इस कदर डर गया था कि उसने अपने घर के बाहर एक तारबंदी करके, उसमें करंट प्रवाह कर रखा था ताकि कोई घर में आकर हमला नहीं कर सके।

तीसरा झूठ : मदन सिंह पर पत्रकार से मिलते समय हुआ हमला

फिल्म : मूवी में दिखाया गया है कि मोहन और ‘नवकिरण’ नाम के अखबार के जर्नलिस्ट माधव के बीच केस की खबरों को लेकर प्रतिस्पर्धा चलती है। दोनों के बीच कई बार झगड़े होते हैं। माधव को ईमानदार और मोहन को भ्रष्ट पत्रकार दिखाया गया है। फिल्म में मुख्य आरोपी इंडियन नेशनल पार्टी का अध्यक्ष फोन कर धमकाता है कि केस से जुड़ी खबरें छापना बंद कर दे नहीं तो अंजाम बुरा होगा।

मोहन आरोपियों की धमकी से परेशान होकर माधव को रात के समय एक जगह मिलने बुलाता है। जहां वह माधव को आरोपियों के नाम और पूरे केस की जानकारी देने वाला होता है। तभी एक वैन में आए बदमाश मोहन पर चाकू से हमला कर देते हैं। इसके बाद माधव गंभीर रूप से घायल मोहन को अस्पताल में भर्ती करवाते हैं। जहां कुछ दिन बाद बदमाश उन पर फिर से फायरिंग करके हत्या कर देते हैं।

सच: किशोर सिंह के अनुसार मदन सिंह 4 सितंबर 1992 को कलर प्रिंट में एमएलए और बिजनसमैन के खिलाफ एक खबर प्रकाशित करने वाले थे। इसकी भनक आरोपियों को लग गई थी। 3 सितंबर को मदन सिंह स्कूटर में पेट्रोल भरवाने घर से श्रीनगर रोड निकले थे। रास्ते में एम्बेसडर में सवार लोगों ने उन पर फायरिंग की। वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पास के एक नाले में छलांग लगाकर जान बचाई। इसके बाद उनके भतीजे विजय मौके पर पहुंचे और उन्हें जेएलएन अस्पताल लेकर गए।

किशोर सिंह ने बताया कि मदन सिंह पहले हमले में बच गए थे। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें जेएलएन अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 11 सितंबर को चार से पांच बदमाश चेहरे को कंबल से ढक कर अस्पताल आए। उस समय मदन सिंह बेड पर लेटे थे। पास में उनकी मां घीसी कंवर थी। बदमाशों ने मदन सिंह पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस पर मदन सिंह ने अपना हाथ आगे कर दिया। गोलियां उनकी हथेलियों को चीरती हुई उन्हें लगी। फिर एक बदमाश ने बंदूक उनके घुटने पर रखकर गोली चलाई।

बदमाश निकलने लगे तो मदन सिंह की मां ने एक बदमाश के पैर पकड़ कर रोकने का प्रयास किया तो बंदूक के बट से उनके हाथ पर मारकर बदमाश भाग गए। हमले में पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल, पूर्व पार्षद सवाई सिंह, नरेंद्र सिंह सहित अन्य खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। बाद में सभी जमानत पर रिहा हो गए थे। मदन सिंह की मौत के बाद की तस्वीर : पिता की पार्थिव देह के आगे खड़ा सबसे बड़ा बेटा धर्मप्रताप (8 साल) और छोटा बेटा सूर्यप्रताप (7 साल)।

चौथा झूठ : चार लड़कियां एक साथ छत से कूदकर सुसाइड करती हैंajmer rape scandal 1164170596616417103961689583729 1689824272 300x225 आठ झूठों की नींव पर बनी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की फिल्म अजमेर 92, घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी, कई सच छुपाये

फिल्म : ‘अजमेर 92′ में दिखाया गया है कि रेप पीड़ित चार लड़कियां एक ही कॉलेज में पढ़ती थीं। दोस्त थीं। रेप और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर सभी लड़कियां कॉलेज की छत पर जाती हैं। आरोपियों के चंगुल से निकलने के तरीके के बारे में बात करती हैं।

वे आपस में बात करती हैं कि घर वाले उन्हें चुप रहने के लिए कह रहे हैं। केस करने पर धमकियां मिलती हैं और केस वापस लेना पड़ता है। अब इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखने पर चारों लड़कियां एक साथ छत से कूदकर सुसाइड कर लेती हैं।

सच : जांच अधिकारी (तत्कालीन आईपीएस) हरिप्रसाद शर्मा ने बताया कि उस समय अलग-अलग कॉलेज और स्कूल की 6 लड़कियों ने सुसाइड किया था। ये सभी सुसाइड अलग-अलग समय हुए थे।

आधिकारिक रूप से एक भी सुसाइड पुलिस में दर्ज नहीं था, जिसमें रेप से पीड़ित लड़की के आरोपियों से परेशान होकर सुसाइड करने का मामला दर्ज हुआ हो। ऐसी एक भी घटना नहीं हुई थी, जिसमें 4 तो क्या 2 लड़कियों ने भी एक साथ सुसाइड किया हो।

पाँचवा झूठ : पत्रकार और एसपी की बेटी की लव स्टोरी

फिल्म : पत्रकार माधव की लव स्टोरी दिखाई गई है। माधव की गर्लफ्रेंड उस समय के एसपी की बेटी गीता होती है। माधव और गीता एक-दूसरे से प्यार करते हैं। गीता भी इस सेक्स स्कैंडल का शिकार हो जाती है। माधव को यह पता लगने के बाद वह पूरे मामले का खुलासा करता है।

सच: उस समय किसी भी पत्रकार की गर्लफ्रेंड के साथ रेप नहीं हुआ था। न ही कोई पत्रकार था, जिसकी एसपी की बेटी से दोस्ती हो। आरोपियों की वैन जो हर समय कॉलेज के बार खड़ी रहती थी। इसमें बैठाकर लड़कियों को फार्म हाउस लेकर जाते थे।

छठा झूठ : एसपी की बेटी के साथ रेप

फिल्म : अजमेर एसपी की बेटी गीता कॉलेज में पढ़ती है। उसकी अटेंडेंस शॉर्ट होती है तो वह अपनी एक सहेली को बताती है। उसकी सहेली उसे इंडियन नेशनल पार्टी के अध्यक्ष याकूब (मुख्य विलेन) के ऑफिस लेकर जाती है। जहां जाने पर पता लगता है कि अध्यक्ष फार्म हाउस पर है। सहेली गीता को ड्राइवर के साथ अकेले फार्म हाउस भेजती है। जहां उसके साथ याकूब और उसके साथी रेप करते हैं। इसके बाद गीता को भी अपनी एक सहेली को फार्म पर भेजने के लिए ब्लैकमेल करते हैं।

सच : अटेंडेंस शॉर्ट वाली घटना किसी और लड़की के साथ हुई थी। उस समय एसपी की लड़की के साथ कोई रेप नहीं हुआ था। फिल्म में एसपी की लड़की को रेप पीड़िता दिखाया गया है। मामले के जांच अधिकारी और तत्कालीन एसपी हरिप्रसाद शर्मा बताते हैं- ऐसी कोई घटना नहीं थी, जिसमें किसी भी पुलिस अधिकारी की लड़की के साथ रेप हुआ हो। फारुख चिश्ती का फार्म हाउस, जहां लड़कियों के साथ रेप किया जाता था।

सातवाँ झूठ : मंत्री के कहने पर हिंदू को आरोपी बनाते हैं ताकि दंगे न हो

फिल्म : मूवी के एक सीन में एक मंत्री पुलिस अधिकारियों को कहते हैं कि केस में पुरुषोत्तम नाम के शख्स को भी आरोपी बनाओ। क्योंकि केस में सभी मुस्लिम आरोपी हैं तो एक हिंदू को भी आरोपी बनाओ ताकि मुख्य आरोपी याकूब शहर में हिंदू-मुस्लिम के दंगे नहीं करवा पाए। इसके बाद पुरुषोत्तम के खिलाफ केस दर्ज होता है, उसे सजा भी होती है। बाद में उसकी एक्सीडेंट में मौत हो जाती है। एक दूसरे सीन में मंत्री कहता है- अच्छा हुआ हमने पुरुषोत्तम को आरोपी बनाया, इससे हिंदू-मुस्लिम के दंगे होने से बच गए।

सच : रिटायर्ड आईपीएस हरिप्रसाद शर्मा ने बताया कि केस पुरुषोत्तम उर्फ बबली (लैब डेवलपर) की केस में भूमिका होने के कारण उसे आरोपी बनाया गया था। हिंदू-मुस्लिम दंगे या धर्म के आधार पर उसे आरोपी नहीं बनाया था। आरोपी को अपने जुर्म के लिए सजा भी मिली थी।

आठवां झूठ : 1992 में अजमेर में सिटी बस

फिल्म : फिल्म के एक सीन में लड़कियां सिटी बस में बैठकर कॉलेज जाती हैं।

सच : अजमेर शहर में वर्ष 1992 में सिटी बस चलती ही नहीं थी। उस समय ज्यादातर तांगे चलते थे। तांगों पर बैठकर ही लड़कियां कॉलेज जाती थीं। अजमेर शहर में सिटी बस तो कई साल बाद आई थी।

वो सच जो फिल्म में छिपाए…

पहला सच : अजमेर दरगाह का कनेक्शन

केस में तीन मुख्य आरोपी फारुख चिश्ती, अनवर चिश्ती और नफीस चिश्ती थे। ये तीनों अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम भी थे। इसी रसूख के कारण सालों तक इनके खिलाफ किसी ने आवाज नहीं उठाई, न ही पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई कर पाई। फिल्म में विवाद से बचने के लिए कहीं पर भी न तो अजमेर शरीफ दरगाह दिखाई गई है और न ही तीनों आरोपियों के अजमेर दरगाह के खादिम होने का जिक्र किया गया है।

दूसरा सच : पार्टी का नाम नहीं दिया

फिल्म में मुख्य आरोपी फारुख चिश्ती को इंडियन नेशनल पार्टी का अध्यक्ष बताया है, जबकि वह कांग्रेस यूथ पार्टी का अध्यक्ष था। वहीं अनवर चिश्ती और नफीस चिश्ती यूथ कांग्रेस के सचिव व सेक्रेटरी थे। आरोपियों की राजनीतिक रसूख होने के कारण ही सालों तक वे पुलिस से बचते रहे और 250 लड़कियों को अपना शिकार बनाया। विवाद से बचने के लिए राजनीतिक पार्टी का नाम फिल्म में बदल दिया गया। हालांकि फिल्म के एक सीन में आरोपियों के केंद्र में अपनी सरकार होने का जिक्र किया गया है।

तीसरा सच : घटना अजमेर की और शूटिंग हुई एमपी के चंदेरी में

मूवी अजमेर के 1992 में सेक्स स्कैंडल पर बनी है। मूवी का नाम भी अजमेर के इस केस पर रखा गया, लेकिन पूरी फिल्म मध्यप्रदेश के चंदेरी में शूट हुई है। फिल्म में सिर्फ अजमेर के किले और आउटर पार्ट को दिखाया गया है। फिल्म के निर्देशक पुष्पेंद्र सिंह के अनुसार मैंने अपनी फिल्म की शूटिंग अजमेर से शुरू की। वहां मैंने कुछ दिन शूट भी किया था। शुरुआत में तो लोग ऐसा कहते थे कि यहां ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है।

फिर कुछ लोगों को लगा कि यह अजमेर कांड पर बन रही है तो डिस्कशन शुरू हुआ कि आप इसमें किसी को भी हीरो नहीं बनाओगे यानी किसी भी व्यक्ति का महिमा मंडन नहीं करोगे। सिर्फ सच्चाई दिखाओगे। फिर कुछ दिनों में ही वहां के कुछ लोगों को परेशानी होने लग गई और हमें शूटिंग में दिक्कतें आने लगीं। हमें प्रशासन ने भी कोई सहयोग नहीं दिया, परमिशन तक नहीं दी। प्रशासन साथ देता तो इसे यहीं शूट करता।

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