आजाद समाज पार्टी कांशीराम राजस्थान की ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ संकल्प यात्रा’ प्रेस कांफ्रेंस आज, प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा प्रेस को संबोधित करेंगे

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 17 सितंबर 2023 | जयपुर : आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) – भीम आर्मी  राजस्थान द्वारा संविधान बचाओ, देश बचाओ संकल्प यात्रा के संबंध में यूथ हॉस्टल, जयपुर में दिनांकः 18 सितंबर 2023 को अपराह्न  03.00 बजे एक प्रेस-कांफ्रेंस आयोजित की जा रही है। प्रेस कांफ्रेंस को आज़ाद समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा, श्री सत्यपाल चौधरी, प्रदेश प्रभारी और भीम आर्मी के प्रदेश प्रभारी श्री अनिल धेनवाल संबोधित करेंगे

प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने प्रेस के निमंत्रण में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएएसी-पीएम) के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय द्वारा एक अख़बार में नए संविधान की मांग करते हुए लेख लिखना मात्र संयोग नहीं है बल्कि इसके पीछे एक साजिश है जो आरएसएस-बीजेपी की सुप्त मनोदशाओं को अभिव्यक्त करती है। दुर्भाग्यवश और दुर्भावनापूर्ण मंशा से भारत के वर्तमान संविधान को उन्होंने औपनिवेशिक विरासत बताया है जो कि संविधान-सभा के गणमान्य सदस्यों और प्रारूप-समिति के अध्यक्ष डॉ भीम राव अंबेडकर का घोर अपमान है। देबरॉय की मंदबुद्धि की पराकाष्ठा देखिए कि उन्हें संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, न्याय, स्वतंत्रता और समानता जैसे लोकतांत्रिक शब्दों से उन्हें और उनके आकाओं को नफ़रत है, जो कि संविधान की मूल आत्मा है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी बीजेपी सांसद अनंत हेगड़े ने सीधे-सीधे कहा था कि बीजेपी “संविधान बदलने” के लिए सत्ता में आयी है और “निकट भविष्य” में ऐसा किया जायेगा। सुब्रमणियम स्वामी और खुद मोहन भागवत भी ऐसे बयान देते रहे हैं क्योंकि आरएसएस आरंभ से संविधान के लागू होने और तिरंगे को राष्ट्र ध्वज बनाने के खिलाफ है।

संघ प्रमुख भागवत ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि संविधान के बहुत सारे हिस्से विदेशी सोच पर आधारित हैं और ज़रूरत है कि आज़ादी के 70 साल के बाद इस पर ग़ौर किया जाये। गौरतलब है कि यह सब पीएम की मर्जी से हो रहा है, अन्यथा कोई बाबासाहब के संविधान की जगह नया संविधान बनाने की वकालत कर रहा है, और पीएम चुप्पी साधे रहे, यह भला कैसे संभव है? यहाँ तक कि खुद पीएम और पीएमओ किसी ने भी इसका खंडन नहीं किया।

प्रोफ़ेसर मीणा ने यह भी कहा कि%name आजाद समाज पार्टी कांशीराम राजस्थान की संविधान बचाओ, देश बचाओ संकल्प यात्रा प्रेस कांफ्रेंस आज, प्रदेशाध्यक्ष प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा प्रेस को संबोधित करेंगे यह पहली बार नहीं हुआ है, जब इस तरह के मुद्दे पर लिखा या बोला गया है। आरएसएस-बीजेपी बार-बार इसीलिए करते हैं क्योंकि वे दलित-आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को उनका वाज़िब हक़ देने के विरोधी हैं। इसीलिए  समय-समय पर कई बार उनका असली चेहरा उजागर हुआ है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। सदियों से प्रताड़ित, हाशिए पर पड़े गरीबों के लिए प्रदत्त आरक्षण खत्म करने और संविधान को बदलने की साजिश भी बेनकाब होती रही है। दरअसल, आरएसएस-संघी राष्ट्रीयता का बुर्का पहने आतंकवादी है, भला इन्हें संविधान में आस्था कैसे हो सकती है। इसी मंशा से गोलवलकर ने ‘बंच ऑफ़ थॉट  में एक देश, एक राज्य, एक विधान मण्डल, एक कार्य पालिका पर जोर दिया।

इतना ही नहीं मुंजे की कही हुई कहावत है कि ‘जातीय-शत्रुता की सृजना के खून में ऊँगली नहीं डुबोई उसे संघी नहीं कहा जा सकता है।’ आरएसएस ने अपने अंग्रेजी पत्र आर्गेनाइजर में 14 अगस्त 1947 के अंक में लिखा “वे लोग जो किस्मत के दाव से सत्ता तक पहुंचे हैं वे भले ही हमारे हाथों में तिरंगे को थमा दें, लेकिन हिंदुओं द्वारा न इसे कभी सम्मानित किया जा सकेगा न अपनाया जा सकेगा। तीन का आँकड़ा अपने आप में अशुभ है और एक ऐसा झंडा जिसमें तीन रंग हों बेहद खराब मनोवैज्ञानिक असर डालेगा और देश के लिए नुकसानदेय होगा।”

वो एक नया संविधान चाहते हैं जो उनके फ़ायदे के लिए काम करे वो एक नया विचार चाहते हैं ताकि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाये। उन्हें नए स्वतंत्रता सेनानी चाहिए क्योंकि अभी उनके पास कोई नहीं है, वो भारत में नफ़रत का एक नया आइडिया चाहते हैं। वो एक नया अनैतिक लोकतंत्र चाहते हैं। संविधान की बुनियादी संरचना के साथ खिलवाड़ देश बर्दाश्त नहीं करेगा। संविधान में बदलाव संघ परिवार के एजेंडे में है। इन साजिशों से सावधान रहना होगा।

संविधान बदलने की इतनी बड़ी साजिश के बावजूद कोई भी राजनीतिक दल खुलकर इसका विरोध नहीं कर रहे हैं। लगता है अधिकांश राजनीतिक दल गाहे-बगाहे संविधान बदलने की साजिशों में शामिल हैं। पर, भीम आर्मी के संस्थापक और आजाद समाज पार्टी कांशीराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस साजिश को बेनकाब करने के देश भर में ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ संकल्प यात्रा’ निकालेंगे।

इसीलिए पहले चरण की इस यात्रा का आगाज़ उत्तर प्रदेश से होगा और फिर यह संकल्प यात्रा मध्य प्रदेश तथा राजस्थान पहुँचेगी। राजस्थान में यात्रा दस दिन तक चलेगी और 25 जिलों में जायेगी।

संविधान में आस्था रखने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थाओं से अपील है कि ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ संकल्प यात्रा’ से जुड़े और यात्रा को सफल बनायें ताकि संविधान बदलने की साजिशें रचने वाले लोगों को मुंहतोड़ जवाब मिल सके और कोई भी संविधान की तरफ आँख उठाकर देखने से पहले सौ बार सोचें।

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