जानिए कैसे होती है वोटों की गिनती, 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 36 केंद्रों पर मतगणना के लिए 1121 एआरओ की ड्यूटी, VVPAT से भी होता है मिलान

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 01 दिसंबर 2023 | जयपुर – दिल्ली : राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए अब वोटों की गिनती की तैयारी शुरू हो गई है। 3 दिसंबर को रविवार के दिन वोटों की गिनती होगी। गुरुवार को एग्जिट पोल की लुका-छिपी के बीच वोटों की गिनती की तैयारी तेज हो चली है।

प्रदेश की 199 विधानसभा सीटों के लिए 36 मतगणना केंद्रों पर 1121 एआरओ की ड्यूटी लगाई गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी  प्रवीण गुप्ता ने कहा कि राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 की मतगणना के लिए मतगणना केन्द्रों पर माकूल व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने बताया कि 3 दिसम्बर को सुबह 8 बजे से सभी केंद्रों पर पोस्टल बैलेट और 8.30 बजे से ईवीएम के माध्यम से मतगणना आरंभ हो जायेगी।

निर्वाचन अधिकारी ने आगे बताया कि 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सभी 36 केंद्रों पर मतगणना के लिए 1121 एआरओ की ड्यूटी लगाई गई है। जयपुर, जोधपुर एवं नागौर में दो-दो केंद्रों पर और शेष 30 निर्वाचन जिलों में एक-एक केंद्र पर वोटों की गिनती की जायेगी। 59.113 300x169 जानिए कैसे होती है वोटों की गिनती, 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 36 केंद्रों पर मतगणना के लिए 1121 एआरओ की ड्यूटी, VVPAT से भी होता है मिलान

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 51890 मतदान केन्द्रों पर ईवीएम में प्राप्त मतों की गणना के लिए मतगणना केन्द्रों पर 2524 टेबल लगाई गई है। इनमें कुल 4245 राउंड में मतों की गिनती का कार्य पूरा होगा। शिव विधानसभा क्षेत्र के लिए मतगणना सर्वाधिक 41 राउंड तक चलेगी, जबकि अजमेर दक्षिण के लिए मतगणना 14 राउंड में ही पूरी हो जायेगी।

उन्होंने बताया कि मतगणना स्थल और उसके आस-पास के क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात किए गए हैं। मतगणना प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा इंतजामों के अंतर्गत केन्द्रीय पुलिस बल और आरएएसी की व्यापक तैनाती की जाएगी। उन्होंने बताया कि मतगणना स्थल पर प्रवेश के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा की व्यवस्था की गई है ताकि मतगणना स्थल पर किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं आये।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि केन्द्रीय पुलिस बलों की 40 कम्पनियां ईवीएम की सुरक्षा के लिए और आरएसी की 36 कम्पनियां मतगणना केन्द्रों पर तैनात रहेंगी। आरएएसी की 99 कम्पनियां विभिन्न जिलों में कानून-व्यवस्था के मद्देनजर तैनात की जायेंगी।

इन चुनावों में कुल 4 लाख 36 हजार 664 मतदाताओं ने पोस्टल बैलट का उपयोग किया है, जिसमें से 80 वर्ष से अधिक उम्र के 49 हजार 365, दिव्यांग श्रेणी के 11 हजार 656 एवं आवश्यक सेवाओं के 4 हजार 427 तथा मतदान प्रक्रिया में जुटे 3 लाख 71 हजार 166 मतदाता शामिल है।

गुप्ता ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि आयोग के निर्देशों की पालना करते हुए परिणाम बिना किसी त्रुटि एवं देरी के समय रहते घोषित किए जायें। उन्होंने कहा कि मतगणना में पूर्ण निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई जा चुकी ‘मैंडेटरी वैरीफिकेशन‘ पद्धति को भी लागू किया जायेगा। इसमें संपूर्ण मतगणना के बाद प्रत्येक विधानसभा के मतदान केंद्रों से लॉटरी से 5-5 वीवीपैट का चयन कर उसकी पर्चियों की गणना कर, ईवीएम से प्राप्त मतों से मिलान किया जायेगा।

आखिर में कैसे होती है वोटों की गिनती?

  • काउंटिंग सेंटर में 14 टेबल होते हैं. इसके अलावा एक-एक टेबल रिटर्निंग ऑफिसर और ऑब्जर्वर के लिए भी होता है। काउंटिंग सेंटर में उम्मीदवार या उनके एजेंट को मौजूद रहने की इजाजत रहती है।
  • वोटों की गिनती अलग-अलग राउंड्स में होती है। गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती है। सबसे पहले पोस्टल बैलेट गिने जाते हैं. आधे घंटे बाद EVM के वोटों की गिनती शुरू होती है।
  • EVM के वोटों की गिनती अलग-अलग राउंड्स में होती है। हर राउंड में 14 EVM के वोट गिने जाते हैं। हर राउंड के बाद एजेंट से फॉर्म 17-C हस्ताक्षर करवाया जाता है और फिर RO को दे दिया जाता है।
  • काउंटिंग हॉल में एक ब्लैकबोर्ड भी होता है, जिसमें हर राउंड के बाद हर प्रत्याशी को कितने वोट मिले, ये लिखा जाता है. फिर लाउडस्पीकर से घोषणा की जाती है। इसे ही रूझान कहा जाता है।
  • काउंटिंग हॉल के अंदर मोबाइल फोन ले जाना मना होता है। अंदर मीडिया वालों को भी आने की इजाजत नहीं होती सिर्फ ऑफिशियल कैमरा से ही वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। दूसरे कैमरे से रिकॉर्डिंग नहीं की जा सकती।

अब VVPAT से भी होता है मिलान  download 3 300x210 जानिए कैसे होती है वोटों की गिनती, 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 36 केंद्रों पर मतगणना के लिए 1121 एआरओ की ड्यूटी, VVPAT से भी होता है मिलान

  • वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के मकसद से VVPAT को लाया गया था। ये एक तरह की मशीन रहती है जो EVM से कनेक्ट होती है। वोट डालने के बाद एक पर्ची निकलती है जिस पर कैंडिडेट का नाम और चुनाव चिन्ह होता है। ये पर्ची 7 सेकंड तक दिखाई देती है और फिर गिर जाती है।
  • सुप्रीम कोर्ट में विपक्षी दलों ने अर्जी दी कि हर निर्वाचन क्षेत्र में 50% EVM और VVPAT के वोटों को मैच किया जाये। लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि ऐसा किया तो कम से कम 5 दिन लग जायेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हर निर्वाचन क्षेत्र में 5 EVM और VVPAT में डले वोटों को मैच करने का आदेश दिया।

गिनती की प्रक्रिया क्या है?

मतगणना का कार्य आरओ द्वारा नियुक्त गणना पर्यवेक्षकों द्वारा किया जाता है। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मतगणना कर्मचारियों की नियुक्ति तीन चरणों वाली रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है। काउंटिंग हॉल में उम्मीदवार अपने काउंटिंग एजेंट और चुनाव एजेंटों के साथ भी मौजूद हैं.

वोटों की गिनती इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट (ईटीपीबी) और पोस्टल बैलेट (पीबी) से शुरू होती है। इन वोटों की गिनती आरओ की सीधी निगरानी में की जाती है। ईवीएम की गिनती पीबी की गिनती शुरू होने के 30 मिनट बाद शुरू हो सकती है, भले ही सभी पीबी की गिनती नहीं की गई हो। प्रत्येक दौर की गिनती के अंत में, 14 ईवीएम से परिणाम घोषित किए जाते हैं।

वीवीपैट पर्चियों की गिनती की प्रक्रिया क्या है?

ईसीआई वीवीपैट मिलान के लिए संसदीय क्षेत्र के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए यादृच्छिक रूप से एक ईवीएम का चयन करने की प्रक्रिया निर्धारित करता है।  वीवीपैट पेपर पर्चियों का सत्यापन मतगणना हॉल में एक सुरक्षित वीवीपैट काउंटिंग बूथ के अंदर किया जाता है, जहां केवल अधिकृत कर्मियों की पहुंच होती है। ईवीएम वोटों की गिनती पूरी करने के बाद हॉल में किसी भी काउंटिंग टेबल को वीवीपैट काउंटिंग बूथ में बदला जा सकता है। संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में आम तौर पर पांच से दस विधानसभा क्षेत्र होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए यादृच्छिक रूप से चुने गए पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान संबंधित ईवीएम में दिखाए गए परिणाम से किया जाएगा। इसका तात्पर्य यह है कि प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के लिए लगभग 25-50 मशीनों के लिए वीवीपीएटी पेपर पर्चियों का मिलान करने की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया के लिए आरओ/एआरओ के व्यक्तिगत पर्यवेक्षण की आवश्यकता होती है। ईसीआई ने फैसला किया है कि पांच वीवीपैट की गिनती क्रमिक रूप से की जाएगी। वीवीपैट मिलान प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरओ निर्वाचन क्षेत्र के लिए अंतिम परिणाम घोषित कर सकता है।

यदि वीवीपैट गिनती और ईवीएम परिणामों के बीच विसंगति होती है तो क्या होगा?

ऐसे मामले में, मुद्रित पेपर पर्चियों की गिनती को अंतिम माना जाता है। ईसीआई ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पांच वीवीपैट में से एक की गिनती में विसंगति होने पर क्या आगे कोई कार्रवाई होगी (जैसे कि एक निर्वाचन क्षेत्र या विधानसभा क्षेत्र में सभी वीवीपैट की गिनती)।

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