मिचौंग साइक्लोन : कितनी तबाही लायेगा, आंध्र-तमिलनाडु के अलावा राजस्थान – गुजरात और एमपी आदि राज्यों में कैसा रहेगा इसका असर

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 05 दिसंबर 2023 | जयपुर – दिल्ली – चैन्नई  : बंगाल की खाड़ी में उठा शक्तिशाली चक्रवात मिचौंग मंगलवार यानी आज आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तट से टकरायेगा। भारी बारिश के साथ 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना हैं। 5 दिसंबर की शाम तक ये रफ्तार बरकरार रहने का अनुमान है। 250 ट्रेनें और 70 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं।

क्या है ये साइक्लोन मिचौंग, कितनी तबाही लायेगा, आंध्र-तमिलनाडु के अलावा  राजस्थान, गुजरात और एमपी आदि राज्यों में  कैसा रहेगा इसका असर ; मूकनायक मीडिया की रिपोर्मेंट  : 10 जरूरी बातें… ​​​​​​

1. चक्रवात मिचौंग कहां से उठा और कहां टकराएगा, इसका नाम कैसे पड़ा?

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साभार : भास्कर

चक्रवात मिचौंग 1 दिसंबर को बंगाल की खाड़ी में उठा था। धीरे-धीरे भारत की तरफ बढ़ने लगा। तट पर टकराने से एक दिन पहले ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पुडुचेरी में तेज हवाएं चलने लगीं। बंगाल की खाड़ी से चलने वाली ये हवाएं करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ीं।

मौसम विभाग का अनुमान है कि साइक्लोन मिचौंग मंगलवार दोपहर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय इलाकों से टकराएगा। सबसे पहले चक्रवात नेल्लोर और मछलीपट्टनम के बीच तटीय इलाकों से टकराएगा। 5 दिसंबर की सुबह से शाम तक इसका असर कई राज्यों में दिखेगा।

इस चक्रवात का असर 7 दिसंबर तक रहने की संभावना है। हालांकि, बिपरजॉय का असर 10 दिनों तक रहा था, जबकि मिचौंग का असर सिर्फ 2 दिनों तक रहेगा। दक्षिण भारत के राज्यों से होकर गुजरने वाले इस चक्रवात को ‘मिचौंग’ नाम म्यांमार ने दिया था। मिचौंग नाम चक्रवात के दृढ़ता और लचीलेपन को दर्शाता है। ये 2023 में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला चौथा चक्रवाती तूफान है।

2. चक्रवात मिचौंग के रास्ते में पड़ने वाले इलाकों में कितनी तबाही मच सकती है?
5- 6 दिसंबर को ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पुडुचेरी के कई जिले चक्रवात की चपेट में आए हैं। यहां 5 और 6 दिसंबर को हैवी रेनफॉल हो सकता है। 5 दिसंबर को ये चक्रवात आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से टकराने के बाद दूसरे राज्यों जैसे ओडिशा और पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा। जिस समय ये चक्रवात भारतीय राज्यों के तट से टकराएगा, उस समय से 110 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। शाम 6 बजे तक इस चक्रवात की रफ्तार घटकर 50 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है।

सोमवार सुबह से ही भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण चेन्नई के कनाथूर में एक नवनिर्मित दीवार गिरने से दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया। बारिश के कारण तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई शहरों में गंभीर जलजमाव हो गया है। ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने बताया कि भारी बारिश के कारण 14 सबवे बंद कर दिए गए हैं और कम से कम छह स्थानों पर पेड़ गिरने से नुकसान हुआ है

5 दिसंबर को मिचौंग के टकराने के बाद चलने वाली हवाओं और बारिश से तटीय जिलों को ये नुकसान होने की आशंका है…

  • छप्पर-झोपड़ी वाले ज्यादातर घर तबाह हो जाएंगे। कच्चे घरों को काफी नुकसान होगा। पक्के मकानों को भी कुछ नुकसान हो सकता है।
  • बिजली के खंभे और कम्युनिकेशन टावर्स झुक सकते हैं या उखड़ सकते हैं।
  • कच्ची और पक्की सड़कें डैमेज हो जाएंगीं। रेलवे परिवहन, बिजली के तारों और सिग्ननलिंग सिस्टम में बाधा आ सकती है। 4 दिसंबर शाम तक 250 ट्रेनें और 70 फ्लाइट कैंसिल कर दी गई थीं।
  • खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान होगा। फलदार पेड़ झड़ सकते हैं। किनारों से बंधी छोटी नावें भी बह सकती हैं।
  • खारे पानी की वजह से विजिबिलिटी बुरी तरह प्रभावित होगी।

3. जिन इलाकों को मिचौंग हिट करेगा, वहां तैयारियां कैसी हैं?

  • मिचौंग से निपटने के लिए तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में SDRF और NDRF की टीमें तैनात की गई हैं। अकेले चेन्नई में NDRF की 9 और SDRF की 14 टीम मुस्तैद हैं। तमिलनाडु के मुख्य सचिव शिव दास मीना ने कहा कि राज्य के उत्तरी भागों में चार जिले चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और चेंगलपेट चक्रवात से प्रभावित होने की संभावना है।
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मिचौंग की वजह से दक्षिणी भारत के मांडवी शहर में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
  • तमिलनाडु आपदा बचाव दल की 14 टीमों में कुल 350 जवान शामिल हैं। इनमें NDRF की नौ टीमों में 225 जवान शामिल हैं। राज्य में 1,500 बिजली कर्मचारियों को अलर्ट पर रखा गया है। 3,00,000 से अधिक बिजली के खंभों का स्टॉक भी जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने के लिए रखा गया है।
  • तमिलनाडु के मुख्य सचिव शिव दास मीना ने कहा कि राज्य के उत्तरी भागों में चार जिले चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और चेंगलपेट चक्रवात से प्रभावित होने की आशंका है।
  • किसी भी हादसे से निपटने के लिए दूसरे जिलों से भी अधिकारियों को यहां बुलाया गया है। इन राज्यों के 2.50 करोड़ लोगों को प्रशासनिक अधिकारियों ने अलग-अलग माध्यम से अलर्ट किया है। इतना ही नहीं, बारिश की वजह से जलभराव वाले 150 से ज्यादा स्थानों की पहचान कर वहां पंप लगाए गए हैं और अधिकारियों की तैनाती की गई है।
  • ओडिशा के 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। कई जिलों में हल्की बारिश हो रही है। इन जिलों में 2.75 से 4.55 इंच तक बारिश हो सकती है। CM नवीन पटनायक ने तटीय इलाकों के अफसरों को अलर्ट पर रखा है। ईस्ट कॉस्ट रेलवे ने बारिश और हवा की संभावना को देखते हुए 60 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

4. इसके रूट में न पड़ने वाले अन्य राज्यों में क्या इम्पैक्ट देखने को मिल सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चक्रवात मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पुडुचेरी को प्रभावित करेगा। इससे जुड़े आसपास के इलाकों में तेज हवाएं और बारिश हो सकती हैं।

बाकी देश पर इसका कोई खास असर नहीं होगा। IMD राजस्थान के मौसम वैज्ञानिक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक मिचौंग का ज्यादातर असर पूर्वी भारत या तटीय राज्यों में देखने को मिलेगा।

राजस्थान और इसके आसपास के इलाके इसके रूट में नहीं है, उन पर इसका कोई ज्यादा असर नहीं होगा। गुजरात के भरूच से लगे जिलों में सोमवार से ही बारिश जारी है और मंगलवार को भी यहां बारिश हो सकती है। ​​​​​​बिहार, झारखंड के अलावा मध्य भारत के ज्यादातर इलाकों में कोहरे व धुंध पड़ने की संभावना है।

5. क्या देश में मिचौंग की वजह से सर्दी पर कोई असर पड़ सकता है?

मौसम वैज्ञानिक राधेश्याम के मुताबिक चक्रवात के बाद आमतौर पर बारिश होती है। इस बारिश की वजह से कुछ राज्यों में पारा गिर सकता है। राजस्थान और इसके आसपास इलाके में अभी तक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की हवाएं बह रही थीं। अब नॉर्मल हवाएं बहेंगी। इससे थोड़ा पारा गिर सकता है, लेकिन इसका कोई ज्यादा असर यहां नहीं पड़ेगा। मौसम विभाग के मुताबिक बाकी राज्यों में भी बारिश की वजह से पारा गिर सकता है।

6. चक्रवात क्या होते हैं और ये बनते कैसे हैं?

साइक्लोन शब्द ग्रीक भाषा के साइक्लोस (Cyclos) से लिया गया है, जिसका अर्थ है सांप की कुंडलियां। इसे ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में ट्रॉपिकल साइक्लोन समुद्र में कुंडली मारे सांपों की तरह दिखाई देते हैं।

चक्रवात एक गोलाकार तूफान (सर्कुलर स्टॉर्म) होते हैं, जो गर्म समुद्र के ऊपर बनते हैं। जब ये चक्रवात जमीन पर पहुंचते हैं, तो अपने साथ भारी बारिश और तेज हवाएं लेकर आते हैं। ये हवाएं उनके रास्ते में आने वाले पेड़ों, गाड़ियों और कई बार तो घरों को भी तबाह कर सकती हैं।

साइक्लोन बनने का प्रोसेस कुछ इस तरह है…

चक्रवात समुद्र के गर्म पानी के ऊपर बनते हैं। समुद्र का तापमान बढ़ने पर उसके ऊपर मौजूद हवा गर्म और नम होने की वजह से ऊपर उठती है। इससे उस हवा का एरिया खाली हो जाता है और नीचे की तरफ हवा का प्रेशर यानी वायु दाब कम हो जाता है।

इस खाली जगह को भरने के लिए आसपास की ठंडी हवा वहां पहुंचती है। इसके बाद ये नई हवा भी गर्म और नम होकर ऊपर उठती है। इसका एक साइकिल शुरू हो जाता है, जिससे बादल बनने लगते हैं। पानी के भाप में बदलने से और भी बादल बनने लगते हैं। इससे एक स्टॉर्म साइकिल या तूफान चक्र बन जाता है, जो धरती के घूमने के साथ ही घूमते रहते हैं।

स्टॉर्म सिस्टम के तेजी से घूमने की वजह से उसके सेंटर में एक आई बनता है। तूफान के आई को उसका सबसे शांत इलाका माना जाता है, जहां एयर प्रेशर सबसे कम होता है। ये स्टॉर्म सिस्टम हवा की स्पीड 62 किमी/घंटे होने तक ट्रॉपिकल स्टॉर्म कहलाते हैं। हवा की रफ्तार 120 किमी/घंटे पहुंचने पर ये स्टॉर्म साइक्लोन बन जाते हैं।

साइक्लोन आमतौर पर ठंडे इलाकों में नहीं बनते हैं, क्योंकि इन्हें बनने के लिए गर्म समुद्री पानी की जरूरत होती है। लगभग हर तरह के साइक्लोन बनने के लिए समुद्र के पानी के सरफेस का तापमान 25-26 डिग्री के आसपास होना जरूरी होता है।

इसीलिए साइक्लोन को ट्रॉपिकल साइक्लोन भी कहा जाता है। ट्रॉपिकल इलाके आमतौर पर गर्म होते हैं, जहां साल भर औसत तापमान 18 डिग्री से कम नहीं रहता। साइक्लोन के सेंटर में उसका आई होता है, जो सबसे शांत इलाका होता है। इसके बाद साइक्लोन वॉल या आईवॉल होती है, जो सबसे घातक होती है।

7. चक्रवात, टाइफून, हरिकेन और टॉरनेडो में क्या अंतर है?

स्ट्रॉर्म या तूफान वातावरण में एक तरह का डिस्टर्बेंस होता है, जो तेज हवाओं के जरिए सामने आता है और उसके साथ बारिश, बर्फ या ओले पड़ते हैं। जब ये धरती पर होते हैं तो आम तूफान कहलाते हैं, लेकिन समुद्र से उठने वाले स्टॉर्म को साइक्लोन कहते हैं। साइक्लोन आम स्टॉर्म से ज्यादा तीव्र और खतरनाक होते हैं।

साइक्लोन, हरिकेन और टाइफून तीनों एक ही चीज होते हैं और इन्हें ट्रॉपिकल साइक्लोन भी कहा जाता है। दुनिया भर में साइक्लोन को अलग-अलग नामों से बुलाया जाता है।

जैसे- उत्तरी अमेरिका और कैरेबियन आइलैंड में बनने वाले साइक्लोन को हरिकेन, फिलीपींस, जापान और चीन में आने वाले साइक्लोन को टाइफून और ऑस्ट्रेलिया और हिंद महासागर यानी भारत के आसपास आने वाले तूफान को साइक्लोन कहा जाता है।

समुद्रों के लिहाज से देखें तो अटलांटिक और उत्तर पश्चिम महासागरों में बनने वाले साइक्लोन हरिकेन कहलाते हैं। उत्तर पश्चिम प्रशांत महासागर में बनने वाले साइक्लोन टाइफून कहलाते हैं। वहीं दक्षिण प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में उठने वाले तूफान साइक्लोन कहलाते हैं। इसी वजह से भारत के आसपास के इलाकों में आने वाले समुद्री तूफान साइक्लोन कहलाते हैं।

वहीं टॉरनेडो भी भयानक तूफान होते हैं, लेकिन ये साइक्लोन नहीं होते हैं क्योंकि ये समुद्र के बजाय ज्यादातर धरती पर ही बनते हैं। टॉरनेडो सबसे ज्यादा अमेरिका में आते हैं।

8. कोई चक्रवात खतरनाक है या हल्का, ये कैसे तय होता है?

समुद्र में लगभग साल भर साइक्लोन बनते हैं, लेकिन ये सभी खतरनाक नहीं होते हैं। इनमें से जो साइक्लोन धरती की ओर बढ़ते हैं वही खतरनाक होते हैं। साइक्लोन को स्पीड के हिसाब से 5 कैटेगरी में बांट सकते हैं…

साइक्लोनिक स्टॉर्म: इसमें हवा की अधिकतम स्पीड 62 से 88 किमी/घंटे होती है। ये साइक्लोन का सबसे कम घातक रूप है।

सीवियर साइक्लोन: इस साइक्लोन में हवा की अधिकतम स्पीड 89 से 120 किमी/घंटे तक होती है। ये समुद्र में मौजूद नावों या जहाजों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

वेरी सीवियर साइक्लोन: 118 से 165 किमी/घंटे की रफ्तार तक की हवाओं वाले साइक्लोन सेवेर कहलाते हैं। ये साइक्लोन जमीन की ओर बढ़ने पर जान-माल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

एक्स्ट्रीमली सीवियर साइक्लोन: ये बेहद घातक होते हैं, इनमें हवाओं की स्पीड 166-220 किमी/घंटे होती है।

सुपर साइक्लोन: इसमें हवा की स्पीड 220 किमी/घंटे से ज्यादा होती है, जो कई बार 300-400 किमी/घंटे से भी ज्यादा हो सकती है। ये रास्ते में आने वाले पेड़ों, गाड़ियों और यहां तक बिल्डिंगों को भी तबाह कर सकते हैं।

9. औसतन कितने दिन तक चलते हैं साइक्लोन, समय के साथ धीमे क्यों पड़ जाते हैं?

जमीन पर पहुंचने के कुछ घंटों या दिनों बाद साइक्लोन आमतौर पर कमजोर पड़ने लगते हैं, क्योंकि उन्हें गर्म समुद्री पानी से मिलने वाली एनर्जी और नमी मिलना बंद हो जाती है। हालांकि तब भी कई बार साइक्लोन जमीन में काफी दूर तक सफर तय करते हैं और अपने साथ तेज बारिश और हवा लाते हैं, जिससे भारी तबाही होती है। साइक्लोन वैसे तो कई दिनों या हफ्तों तक जारी रह सकता है, लेकिन बड़े जमीनी इलाके या ठंडे समुद्र के ऊपर से गुजरने के साथ ही ये धीमे पड़ने लगते हैं और खत्म हो जाते हैं। बिपरजॉय साइक्लोन के 10 दिनों तक रहने की संभावना है। वहीं जमीन से टकराने के अगले ही दिन से कमजोर पड़ जाएगा।

10. चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं, मिचौंग का मतलब क्या है?

18वीं सदी तक साइक्लोन के नाम कैथोलिक संतों के नाम पर रखे जाते थे। 19वीं सदी में साइक्लोन के नाम महिलाओं के नाम पर रखे जाने लगे। 1979 से इन्हें पुरुष नाम भी देने का चलन शुरू हुआ। मिचौंग तूफान नाम म्यांमार ने दिया है।। इसका मतलब ताकत और लचीलापन होता है। मिचोंग साइक्लोन साल 2023 में बंगाल की खाड़ी का चौथा और हिंद महासागर में बनने वाला छठा तूफान है।

  • 2000 से विश्व मौसम संगठन यानी WMO और यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमिशन फॉर द एशिया पैसिफिक यानी ESCAP ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के तूफानों के नामकरण का मेथड शुरू किया।
  • वर्तमान में साइक्लोन के नाम रखने का काम दुनिया भर में मौजूद छह विशेष मौसम केंद्र यानी रीजनल स्पेशलाइज्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर्स यानी RSMCS और पांच चक्रवाती चेतावनी केंद्र यानी ट्रॉपिकल साइक्लोन वॉर्निंग सेंटर्स यानी TCWCS करते हैं।
  • RSMSC और TCWCS चक्रवात और तूफानों को लेकर अलर्ट जारी करने और नामकरण में भूमिका निभाते हैं।
  • भारतीय मौसम विभाग यानी IMD भी RSMCS के छह सदस्यों में शामिल है, जो चक्रवात और आंधी को लेकर एडवाइजरी जारी करता है।
  • IMD हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर इलाके में आने वाले साइक्लोन के नाम रखने और इस इलाके के 13 अन्य देशों को अलर्ट करने का काम करता है।
  • हिंद महासागर के इलाकों में आने वाले साइक्लोन के नाम रखने के फॉर्मूले पर 2004 में सहमति बनी थी। पहले इसमें आठ देश-भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे, 2018 में इसमें ईरान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और यमन भी शामिल हुए, जिन्हें मिलाकर इनकी संख्या 13 हो गई।
  • साइक्लोन के नाम इसलिए रखे जाते हैं, ताकि उनकी पहचान करना आसान हो। हर साल साइक्लोन के नाम अल्फाबेटकली क्रम में यानी A से Z तक तय होते हैं। एक नाम का दोबारा इस्तेमाल कम से कम 6 साल बाद ही हो सकता है।
  • साइक्लोन का नाम कौन सा देश रखेगा, इसका फैसला उस देश नाम से अल्फाबेटकली तय होता है। आने वाले साइक्लोन का नाम सितरंग थाईलैंड ने दिया है।
  • हिंद महासागर इलाके में आने वाले साइक्लोन के हुदहुद, तितली, फेथाई, फानी, वायु और अम्फान जैसे नाम दिए जा चुके हैं।
  • हर साइक्लोन का नाम नहीं रखा जाता है। केवल 65 किमी/घंटे की रफ्तार से ज्यादा वाले साइक्लोन का नाम रखना जरूरी होता है।
  • भारत में सबसे तेज साइक्लोन 1970 में आया भोला साइक्लोन था। ये भारत ही नहीं दुनिया का सबसे घातक साइक्लोन था। इसने भारत के पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 3-5 लाख लोगों की मौत हुई थी।
  • दुनिया का सबसे लंबा हरिकेन या साइक्लोन 1979 में उत्तर-पश्चिम प्रशांत महासागर में बना था। इसका डायमीटर 2200 किलोमीटर था, जो कि अमेरिका के साइज का लगभग आधा है।
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