विधानसभा चुनाव 2023 में नोटा 13 सीटों पर विलेन बनकर उभरा, जीत-हार के अंतर से ज्यादा नोटा को वोट मिले

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 05 दिसंबर 2023 | जयपुर – दिल्ली : राजस्थान विधानसभा चुनाव – 2023 में नोटा इस बार 13 सीटों पर विलेन बनकर उभरा है। यहां पर जीत-हार के अंतर से ज्यादा नोटा को वोट मिले हैं। पिछली बार के मुकाबले एक दर्जन सीटों पर नोटा की वोटिंग ने जीत-हार के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।

चुनावी मैदान में प्रत्याशी कितनी ही मेहनत कर ले और कितने ही उसके जीत के दावे हों, लेकिन कई बार यह देखने में आया है कि प्रत्याशी की जीत के बीच नोटा एक बड़ा रोड़ा बनकर उभरा है। नोटा के वोट प्रतिशत के हिसाब से 2018 के मुकाबले इस बार नोटा पर वोटर ने जताया कम भरोसा।

Rajasthan Election 2023 : राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में इस बार भी 7 प्रत्याशियों की हार-जीत का अंतर एक हजार से कम वोट का रहा, लेकिन प्रदेश में नोटा पर डाले गए मतों का आंकड़ा 3.82 लाख से अधिक पहुंच गया। लगातार तीसरी बार नोटा का आंकड़ा घटा है, जबकि नोटा का प्रावधान जनता को प्रत्याशियों को नकारने का मौका देने के लिए दिया गया था। अब कहा जाने लगा है कि नोटा वोट डालने का मतलब है किसी प्रत्याशी को जीतने का अवसर देना। नोटा को 0.96 प्रतिशत वोट मिले हैं। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में नोटा वोट की संख्या 5 लाख 89 हजार के करीब थी, इसके अगले चुनाव में यह आंकड़ा 4 लाख 67 हजार 785 रह गया। वर्ष 2018 में कुल वोट का 1.33 प्रतिशत नोटा वोट थे, 15 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में नोटा वोट प्रत्याशियों की हार-जीत के अंतर से अधिक थे।

16 सीटों पर हार-जीत का अंतर 2000 से रहा कम

इस बार 16 सीटों पर हार-जीत का अंतर दो हजार से कम रहा है। कोटपूतली सीट पर 321 मतों से कांग्रेस के राजेन्द्रसिंह यादव को भाजपा के हंसराज पटेल ने हराया। कोटपूतली व कठूमर में हार-जीत का अंतर 500 वोट से भी कम रहा। जहाजपुर, नोहर, बायतू व हवामहल सीट पर हार-जीत का अंतर 500 से एक हजार के बीच रहा। भीनमाल, भादरा, नसीराबाद, बांसवाड़ा, घाटोल, आसींद, नगर, जायल, मावली व थानागाजी विधानसभा सीट पर हार-जीत का अंतर एक हजार से दो हजार के बीच रहा है। इनमें से 10 जगह भाजपा ने जीत हासिल की, वहीं छह जगह कांग्रेस विजयी रही।

क्या है नोटा

नोटा मतलब नन ऑफ द एबव। यानी इन में से कोई नहीं। वोटिंग के दौरान भी लोगों को इसका विकल्प मिलता है। यानी आपको अगर किसी सीट पर खड़े प्रत्याशियों में से कोई भी पसंद नहीं है तो आप नोटा का विकल्प चुन सकते हैं। ईवीएम में ही आपको नोटा का बटन मिलता है। पहली बार 2013 में नोटा का प्रयोग हुआ था। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर नोटा विकल्प का अपना प्रतीक है। एक मतपत्र जिसके पार एक काला क्रॉस है। सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, चुनाव आयोग ने वोटिंग पैनल पर अंतिम विकल्प के रूप में ईवीएम पर नोटा बटन जोड़ा।

इसलिए दोनों पार्टियों को मिले वोटों का अंतर रहा नोटा से ज्यादा

2018 में नोटा को 1.3% वोटर ने दिया नोटा को वोट

जिसके मुकाबले इस बार 0.96% वोट मिले नोटा को

जहां 2018 में बीजेपी, कांग्रेस में 0.54% था वोटों का अंतर और नोटा को वोट मिले थे 1.3% वोट

वहीं इसके ठीक उलट इस बार कांग्रेस से इस बार के वोट प्रतिशत से बीजेपी का 2.16% वोट शेयर ज्यादा और नोटा को मिले 0.96% वोट

कांग्रेस का 39.53% वोट शेयर तो बीजेपी का 41.69 रहा वोट प्रतिशत

2018 में कांग्रेस को 39.82 प्रतिशत तो  बीजेपी को हासिल हुए थे 39.28 प्रतिशत वोट

पिछली बार जहां कांग्रेस और बीजेपी में वोट प्रतिशत के अंतर से ज्यादा था नोटा का वोट प्रतिशत

वहीं इस बार  इस बार नोटा का वोट प्रतिशत कम और दोनों पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत का अंतर रहा ज्यादा

2018 में 11 सीटों पर तो इस बार 13 सीटों पर नोटा बना प्रत्याशियों के लिए विलेन

यानि 2018 में कम से कम 11 सीटें रहीं ऐसी

जहां जीत के अंतर से ज्यादा वोट मिले नोटा को

जबकि इस बार हैं ऐसी 13 सीटें जहां जीत के अंतर से ज्यादा वोट मिले नोटा को

नसीराबाद,कठूमर,बांसवाड़ा, बायतू,चौहटन, आसींद,जहाजपुर,कोटपुतली, हवामहल,भीनमाल, जायल, खींवसर, मावली हैं वे सीट

जहां नोटा ने हारने वाले प्रत्याशी से ज्यादा वोट लेकर किया विलेन का काम

इस बार कुल 382066 वोट मिले नोटा को

जिसमें EVM के 380105 और पोस्टल बैलट के हैं 1961 वोट

2013 ते चुनाव में 5 लाख 89 हजार 923 वोटर्स ने नोटा का बटन दबाया था

2018 में भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में 0.5 % का अंतर था

जिसके चलते भाजपा सत्ता से बाहर हो गई थी

इस बार नोटा का वोट प्रतिशत  हुआ कम

इस बार कुल 382066 वोट मिले नोटा को जिसमें EVM के 380105 और पोस्टल बैलट के हैं 1961 वोट

यानि कुल वोटिंग का 0.96% मिला नोटा को वोट

जो कि पिछली बार से करीब 0.34% है कम

झाड़ोल में नोटा को सबसे ज्यादा 6488 वोट मिले

राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में सबसे कम 426 वोट मिले नोटा को

तिजारा,परबतसर,शिव,सिवाना,रानीवाड़ा,चौरासी,घाटोल में पोस्टल बैलट से नोटा को मिले 1-1 वोट

कोटपूतली में नोटा को 930 वोट मिले और हार-जीत का अंतर 321 वोटों का रहा

बांसवाड़ा में 3528 वोट नोटा को मिले और हार-जीत का अंतर रहा 1400 वोटों का

कठूमर में नोटा को 738 वोट मिले जबकि हार-जीत का अंतर था 409 वोटों का

जहाजपुर में 2542 वोट नोटा को मिले और हार-जीत का अंतर रहा 580 मतों का

बायतू में नोटा को 2173 वोट मिले और हार-जीत का अंतर रहा 910 मतों का

चौहटन में 3901 वोटर ने नोटा का बटन दबाया और 1428 मतों से हारे कांग्रेस के पदमाराम

आसींद में 2029 वोटर्स ने नोटा का उपयोग किया और 1526 वोटों से हारे कांग्रेस प्रत्याशी

नसीराबाद में 1392 वोट मिले नोटा को और 1135 रहा हार-जीत का अंतर

हवामहल सीट में 1463 मत मिले नोटा को और हार-जीत का अंतर रहा 974 वोटों का

भीनमाल में 4084 मत मिले नोटा को और 1027 वोटों का अंतर रहा हार-जीत का

जायल में 2200 वोट मिले नोटा को और 1565 रहा हार-जीत का अंतर

खींवसर में 2130 वोट मिले नोटा को और 2059 रहा हार-जीत का अंतर

मावली में 2441 वोट मिले नोटा को और 1567 रहा हार-जीत का अंतर

नोटा ने कई बड़े-बड़े प्रत्याशियों को झटका दिया है और साथ ही पार्टियों को आत्ममंथन करने का मैंडेट भी दिया है जिससे जनता के सामने वे सही विकल्प दे सकें।

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