विधानसभा चुनाव : राजस्थान भड़काऊ भाषण देने के मामलों में देश में यूपी के बाद दूसरा राज्य, फेक न्यूज को लेकर 6 मुकदमे, बवाल ज्यादा, एक्शन कम

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 09 दिसंबर 2023 | जयपुर – दिल्ली : भड़काऊ भाषण देने के मामलों में राजस्थान देश में दूसरा राज्य बन गया है। प्रदेश में 2016 में हेट स्पीच के महज 22 केस दर्ज हुए थे। अब ये संख्या 8 गुना बढ़कर 192 हो गई है, जो देशभर में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा है।

चुनावी मौकों पर राजनेताओं के भड़काऊ बयानों ने इन मामलों में आग में घी डालने का काम किया है। वहीं धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले भी प्रदेश में तेजी से बढ़े हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट सामने आने के बाद पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट में….

2 42 1 1701956655 विधानसभा चुनाव : राजस्थान भड़काऊ भाषण देने के मामलों में देश में यूपी के बाद दूसरा राज्य, फेक न्यूज को लेकर 6 मुकदमे, बवाल ज्यादा, एक्शन कमनेताओं के भड़काऊ भाषणों ने बढ़ाए मामले
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में साल 2022 में हेट स्पीच से जुड़े 1523 केस दर्ज किए गए। सबसे अधिक 217 केस उत्तर प्रदेश और इसके बाद 192 केस राजस्थान में दर्ज हुए। जबकि साल 2021 में प्रदेश में 83 मामले ही दर्ज किए गए थे।

अधिकांश मामलों में पुलिस ने भड़काऊ भाषण या बयान, सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से फैलाई गई फर्जी खबरें और पोस्ट के आधार पर केस दर्ज किए हैं। हम आपको बता दें कि ऐसे बयान जिससे समाज की शांति भंग हो सकती है, उन केस को धारा 153ए, 153बी, 295ए और 505 के तहत दर्ज किया जाता है।

जब चुनाव, तब बढ़े हेट स्पीच के मामले
डेटा एनालिसिस करने पर यह भी पता चला है कि जब-जब चुनाव हुए तब-तब हेट स्पीच के मामले तेजी से बढ़े। राजस्थान के संदर्भ में देखें तो 2018 में विधानसभा चुनाव थे, तब उस साल 87 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से ज्यादा थे।

चुनाव समाप्त होते ही अगले साल मामलों की संख्या महज 63 रह गई थी। एनसीआरबी की रिपोर्ट आने के बाद हमने हेट स्पीच से जुड़े वो बयान निकाले जिनको लेकर प्रदेश में बवाल हुआ और थानों में मुकदमे दर्ज कराए गए…

मुख्यमंत्री को ‘राजनीति का रावण’ कहा, केंद्रीय मंत्री पर केस
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ भी इसी साल अप्रैल में चित्तौड़गढ़ में हेट स्पीच का मुकदमा दर्ज हुआ था। जन आक्रोश रैली में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का ‘रावण’ कहने पर कांग्रेस नेता सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने चित्तौड़गढ़ में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

मंत्री शेखावत ने चित्तौड़गढ़ में एक रैली में कहा था, ‘इस राजनीतिक रावण को खत्म करके, राजस्थान में ‘राम राज्य’ स्थापित करना है।’ चित्तौड़गढ़ के सदर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143, 153-ए, 295-ए, 500, 504, 505 और 511 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

बाबा रामदेव पर भी दर्ज हुआ था मुकदमा
बाड़मेर में हिंदू नेताओं की सभा में योग गुरु बाबा रामदेव ने मुस्लिम और ईसाई समुदाय को लेकर विवादित बयान दिया था। स्थानीय निवासी पथाई खान की रिपोर्ट पर चौहटन पुलिस थाने में फरवरी 2023 में धारा 153ए के तहत केस दर्ज किया गया। इस सभा में बाबा रामदेव ने कहा था, ‘किसी मुसलमान से पूछो कि आपका धर्म क्या कहता है, वे कहेंगे, ‘पांच बार नमाज पढ़ो और फिर जो मन में आए वो करो।’ उन्हें लगता है कि इस्लाम का मतलब नमाज है। उन्होंने कहा कि वे यह नहीं कह रहे कि इस्लाम या कुरान यही सिखाता है, लेकिन फिर भी इसका पालन किया जा रहा है। इसी तरह उन्होंने ईसाई धर्म को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘चर्च में जाओ, चाहे दिन में भी ईसा मसीह के सामने मोमबत्ती जलाओ…और सारे पाप नष्ट।’

पूर्व भाजपा विधायक पर लिंचिंग की घटना स्वीकारने पर केस 2 4 1 1701956666 विधानसभा चुनाव : राजस्थान भड़काऊ भाषण देने के मामलों में देश में यूपी के बाद दूसरा राज्य, फेक न्यूज को लेकर 6 मुकदमे, बवाल ज्यादा, एक्शन कम
अलवर के रामगढ़ से पूर्व भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा पर भी मॉब लिंचिंग की बात स्वीकार करने का वीडियो वायरल होने के बाद अगस्त 2022 में केस दर्ज किया गया था।

उन पर धारा 153ए के तहत अलवर के गोविंदगढ़ पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार यह वीडियो 45 साल के चिरंजीलाल सैनी के परिवार से आहूजा की मुलाकात का था।

चिरंजीलाल की ट्रैक्टर चोरी के संदेह में मेव समुदाय के लोगों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। वीडियो में आहूजा कहते नजर आ रहे हैं, ‘अब तक हमने पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या की है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब उन्होंने किसी को पीट-पीटकर मारा है। मैंने कार्यकर्ताओं को खुली छूट दे रखी है।’

मौलाना ने कहा- आंखें नोच लेंगे
नुपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद राजस्थान के बूंदी में एक मौलाना ने विवादित बयान दिया था। मौलाना ने कहा था कि पैगंबर के खिलाफ बोलेगा आंखें नोच लेंगे। अगर उंगली उठाई तो उंगली तोड़ देंगे, हाथ उठाया तो हाथ तोड़ देंगे। बूंदी पुलिस ने मौलाना नदीम समेत 4 लोगों के खिलाफ IPC की धारा 153A, 153B और 295 A के तहत मामला दर्ज किया था।

तेलंगाना के विधायक ने राजस्थान में आकर दिए भड़काऊ बयान
मई 2023 में तेलंगाना के गोशामहल से विधायक टी.राजा सिंह के विरूद्ध भड़काऊ भाषण देने के मामले में राजस्थान की कोटा पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

विधायक राजा ने कुन्हाड़ी सर्किल पर सभा में भाषण देते हुए मुस्लिम समाज, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के खिलाफ अभद्र भाषा में टिप्पणी की थी। इस मामले की जांच सीआईडी-सीबी को सौंपी गई थी।

धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामलों में राजस्थान 9वां राज्य
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में धार्मिक भावनाएं (आईपीसी की धारा 295) आहत करने के 1872 केस दर्ज किए गए। राजस्थान में भी ये मामले तेजी से बढ़े हैं। साल 2022 में 45 केस दर्ज हुए। जबकि 2021 में 31 मामले दर्ज किए गए।

195 170x300 विधानसभा चुनाव : राजस्थान भड़काऊ भाषण देने के मामलों में देश में यूपी के बाद दूसरा राज्य, फेक न्यूज को लेकर 6 मुकदमे, बवाल ज्यादा, एक्शन कमपिछले साल की तुलना में इस साल करीब 30 प्रतिशत अधिक केस दर्ज हुए। हालांकि 2017 की तुलना में ऐसे मामलों की संख्या में कमी आई है। 2022 में धार्मिक भावनाएं आहत करने के सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र (355), मध्यप्रदेश (308), कर्नाटक (219) और उत्तर प्रदेश (220) में दर्ज हुए। राजस्थान इन मामलों में 9वें स्थान पर रहा।

फेक न्यूज को लेकर 6 मुकदमे
आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 में राजस्थान में ‘विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने’ की घटनाओं में लगभग ढाई गुना वृद्धि देखी गई। फेक न्यूज, अफवाह फैलाने को लेकर प्रदेश में 6 केस दर्ज किए गए।

एक राहत- देशद्रोह का एक भी मुकदमा नहीं
प्रदेश में आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह) को लेकर कोई केस दर्ज नहीं किया गया, जबकि 2021 में एक और 2020 में चार मामले दर्ज हुए थे।

बवाल ज्यादा, एक्शन कम
भड़काऊ भाषण या बयानबाजी को लेकर बवाल अधिक होता है, लेकिन इस पर एक्शन कम होता है। यानी ऐसे बहुत कम मामलों में ही सजा हो सकी है। यही कारण है कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले भी इसी कारण बढ़ रहे हैं। 2022 में धारा 295 के तहत प्रदेश में ऐसे 45 मामले दर्ज किए गए। वहीं 2021 में इनकी संख्या 31 थी।

नेताओं पर हुई कार्रवाई तो लगे दुरुपयोग के आरोप
आईपीसी की धारा 153-ए के दुरुपयोग के भी समय- समय पर आरोप लगते रहे हैं। विपक्षी दलों के नेताओं पर जब भी इस धारा के तहत केस दर्ज हुए सत्ताधारी दल पर दुरुपयोग के आरोप लगे और कहा गया कि लोकतंत्र खतरे में है।

पीएम नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी के आरोप में कांग्रेस मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा की गिरफ्तारी पर भी कांग्रेस ने बीजेपी की आलोचना की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को फौरी राहत देते हुए अंतरिम जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे।

क्या है धारा 153ए और 295ए
भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए धर्म, जन्म स्थान, भाषा और जाति आदि के आधार पर दो समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बिगाड़ने के मामलों में लगाई जाती है। इसके तहत दोषी को 3 साल का कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। वहीं धारा 295ए के तहत किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत करने पर इसके तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें भी 3 साल कैद, जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुसार 7 साल से कम की सजा के अपराध के लिए पुलिस जांच किए बिना आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। आरोपी को सजा दिलाने के लिए यह साबित करना होगा कि उसकी मंशा अराजकता पैदा करने या हिंसा के लिए उकसाना था।

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